“नवनियुक्त शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे”
“वर्तमान सरकार पाठ्यक्रम में पुस्तकों को क्षेत्रीय भाषाओं में लाने पर बल दे रही है”
“सकारात्मक सोच, सही नियत और पूरी ईमानदारी के साथ जब निर्णय लिए जाते हैं तो संपूर्ण वातावरण सकारात्मक हो जाता है”
“सिस्टम से लीकेज रुकने के परिणामस्वरूप सरकार गरीब कल्याण पर खर्च बढ़ाने में सक्षम हुई”
“पीएम विश्वकर्मा योजना विश्वकर्माओं के पारंपरिक कौशल को 21वीं सदी की आवश्यकता के अनुरूप अपनाने के लिए बनाई गई है”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो लिंक के माध्यम से मध्य प्रदेश रोजगार मेला को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने रोजगार मेला को संबोधित करते हुए कहा कि आज नियुक्ति पत्र पाने वाले लोग इस ऐतिहासिक काल में अध्यापन के महत्वपूर्ण दायित्व से जुड़ रहे हैं। लालकिले के प्राचीर से अपने संबोधन में देश के विकास में राष्ट्रीय चरित्र की महत्वपूर्ण पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी लोग भारत की आने वाली पीढ़ी को ढालने, उन्हें आधुनिक बनाने और नई दिशा देने का दायित्व संभालेंगे। उन्होंने रोजगार मेला के दौरान आज मध्य प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में नियुक्त साढ़े पांच हजार से अधिक शिक्षकों को अपनी शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में लगभग पचास हजार शिक्षक नियुक्त किये गये हैं। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार को बधाई दी।

यह देखते हुए कि नवनियुक्त शिक्षक राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिसका विकसित भारत के संकल्प को प्राप्त करने में बड़ा योगदान होगा, प्रधानमंत्री ने बल देते हुए कहा कि इसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ भविष्य की टेक्नोलोजी को एक समान महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में एक नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है जबकि मातृ भाषा में शिक्षा के संबंध में प्रगति हुई है। अंग्रेजी नहीं जानने वाले विद्यार्थियों को मातृ भाषा में शिक्षा नहीं देने के कारण हुए घोर अन्याय को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार सिलेबस में अब क्षेत्रीय भाषाओं में पुस्तकों पर बल दे रही है जो देश की शिक्षा प्रणाली में बड़े परिवर्तन का आधार होगी।

प्रधानमंत्री ने अमृतकाल के पहले वर्ष में मिली दो सकारात्मक खबरों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब सकारात्मक सोच, सही नियत और पूरी ईमानदारी के साथ निर्णय किया जाता है तो संपूर्ण वातावरण सकारात्मकता से भर जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे पहले नीति आयोग की रिपोर्ट में यह बात आई कि भारत में पिछले 5 वर्षों के अंदर 13.5 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से ऊपर आ गये हैं। दूसरा प्रधानमंत्री ने इस वर्ष दाखिल किये गये इनकम टैक्स रिटर्न की संख्या के संबंध में एक अन्य रिपोर्ट पर प्रकाश डाला, जो पिछले नौ वर्षों में लोगों की औसत आय में वृद्धि का भारी संकेत देती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आईटीआर डाटा के अनुसार 2014 में औसत आय 4 लाख रुपये थी और यह 2023 में बढ़कर 13 लाख रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि निम्न आय वर्ग से उच्च आय वर्ग में जाने वाले लोगों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने बल देकर कहा कि यह आंकड़े रोजगार के बढ़ते अवसरों वृद्धि और उत्साह के साथ-साथ देश के प्रत्येक क्षेत्र की मजबूती का आश्वासन देते हैं।

प्रधानमंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न के नये आंकड़ों की चर्चा करते हुए कहा कि यह देश के नागरिकों का सरकार में निरंतर बढ़ता विश्वास है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे बड़ी संख्या में लोग ईमानदारी से अपना टैक्स देने के लिए आगे आ रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उनके टैक्स का एक-एक पैसा देश के विकास के लिए खर्च किया जा रहा है और उन्हें दिखता है कि जो अर्थव्यवस्था 2014 में दसवें स्थान पर थी, वह अब पांचवें स्थान पर आ गई है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश के नागरिक 2014 के पहले के समय को भूल नहीं सकते जब स्कैम और भ्रष्टाचार का बोलबाला था, जहां गरीबों के अधिकारों को उन तक पहुंचने से पहले लूट लिया जाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज गरीब के अधिकार का सारा पैसा सीधे उसके खाते में जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रणाली से चोरी रोके जाने के परिणामस्वरूप सरकार गरीब के कल्याण पर खर्च बढ़ाने में सक्षम हुई है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर निवेश से देश के प्रत्येक कोने में रोजगार सृजन हुआ है। उन्होंने कॉमन सर्विस सेंटर का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद से गांवों में 5 लाख नये कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किये गये हैं और ऐसा प्रत्येक केंद्र आज अनेक लोगों को रोजगार दे रहा है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ गरीबों और गांवों का कल्याण और रोजगार के अवसरों का सृजन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में दूरगामी नीतियों और निर्णयों के साथ काम किया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से अपने संबोधन में पीएम विश्वकर्मा योजना की घोषणा की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह योजना इस विजन का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वकर्माओं द्वारा पारंपरिक कौशल को अपनाने के लिए बनाई गई है। श्री मोदी ने बताया कि इस योजना पर लगभग 13 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे और इससे 18 विभिन्न प्रकार के कौशलों से जुड़े लोग लाभांवित होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह योजना समाज के उस वर्ग को लाभ देगी जिनके महत्व की चर्चा तो होती थी लेकिन उनकी स्थिति में सुधार के लिए कभी भी ठोस प्रयास नहीं किये गये। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण के साथ-साथ आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए लाभार्थियों को वाउचर भी दिये जाएंगे। प्रधानमंत्री ने कहा “पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से युवा अपना कौशल बढ़ाने के और अधिक अवसर प्राप्त करेंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो आज शिक्षक बन रहे हैं वे कठिन परिश्रम के बल पर यहां पहुंचे हैं। उन्होंने उनसे सीखने की प्रक्रिया जारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने सरकार द्वारा बनाये गये ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म-IGoT कर्मयोगी की चर्चा की और नवनियुक्त शिक्षकों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया।

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।