प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को सार्थक राष्ट्रपति कार्यकाल रहने की शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का पदभार ग्रहण करना भारत के लिए विशेष रूप से गरीबों, हाशिए पर पड़े एवं दबे-कुचले लोगों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अपने पदभार ग्रहण संबोधन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भारत की उपलब्धियों पर विशेष जोर दिया और एक ऐसे समय में आगे की राह के लिए एक भविष्यवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जब भारत ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया:

‘पूरे देश ने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को भारत की राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेते हुए बड़े गर्व के साथ देखा। उनका पदभार ग्रहण करना भारत के लिए विशेष रूप से गरीबों, हाशिए पर पड़े एवं दबे-कुचले लोगों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। मैं उनका राष्ट्रपति कार्यकाल सार्थक रहने की शुभकामनाएं देता हूं।’

‘राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में आशा और करुणा का संदेश दिया। उन्‍होंने भारत की उपलब्धियों पर विशेष जोर दिया और एक ऐसे समय में आगे की राह के लिए एक भविष्यवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जब भारत ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है।’

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प्रधानमंत्री 15 जनवरी को राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों की 28वीं कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे
January 14, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 15 जनवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे संसद भवन परिसर, नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सभा को संबोधित भी करेंगे।

इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला करेंगे और इसमें विश्व के विभिन्न हिस्सों से 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 लोकसभा अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग लेंगे।

यह सम्मेलन समकालीन संसदीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार-विमर्श करेगा, जिसमें मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों को बनाए रखने में लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसदीय कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, संसद सदस्यों पर सोशल मीडिया का प्रभाव, संसद की सार्वजनिक समझ को बढ़ाने के लिए अभिनव कार्यनीतियां और मतदान से परे नागरिक भागीदारी आदि शामिल हैं।