प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा निशानियों की 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश में वापसी की सराहना करते हुए इसे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक गौरवपूर्ण और खुशी का क्षण बताया।

‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना को प्रतिबिंबित करते हुए एक वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध के उपदेशों के प्रति भारत की अपार श्रद्धा तथा अपनी आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया।

एक्स पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा:

“हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक खुशी का दिन!

भगवान बुद्ध की पवित्र पिपरहवा निशानियां 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद स्वदेश वापस आ गई हैं, यह जानकर हर भारतीय को गर्व होगा। ये पवित्र निशानियां भगवान बुद्ध और उनकी महान शिक्षाओं के साथ भारत के घनिष्ठ संबंध को दर्शाती हैं। यह हमारी गौरवशाली संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। #विकास भी विरासत भी”

"यह स्मरणीय है कि पिपरहवा निशानियां 1898 में खोजी गई थीं, किंतु औपनिवेशिक काल के दौरान इन्हें भारत से बाहर ले जाया गया था। जब इस वर्ष की शुरुआत में ये एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी में दिखाई दीं, तो हमने यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया कि ये स्वदेश वापस आ जाएं। मैं इस प्रयास में शामिल सभी लोगों की सराहना करता हूं।"

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श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से की फोन पर चर्चा
March 24, 2026
दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर डालने वाली रुकावटों के बारे में चर्चा की
दोनों नेताओं ने समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व को दोहराया
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग को मज़बूत बनाने और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य वाली विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की
प्रधानमंत्री ने साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को आज श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री अनुरा कुमारा दिसानायका का फ़ोन आया।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के बदलते हालात के बारे में चर्चा की, जिसमें वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर डालने वाली रुकावटों पर विशेष जोर दिया गया।

दोनों नेताओं ने पूरी दुनिया के हित में समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व को दोहराया।

दोनों नेताओं ने भारत-श्रीलंका ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य वाली विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति और महासागर विज़न के अनुरूप साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी।

दोनों नेताओं ने संपर्क में बने रहने पर सहमति व्यक्त की।