प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के कार्यों की श्रृंखला का किया विमोचन
हमें दीनदयाल जी के बारे में जो सबसे पहली चीज याद है वो उनकी सादगी है: प्रधानमंत्री
बेहद कम समय में, एक पार्टी ने 'विपक्ष' से 'विकल्प' तक का सफर तय किया और यह दीनदयाल जी द्वारा रखे गए नींव की वजह से था: प्रधानमंत्री
संगठन युक्त राजनीतिक पार्टियां दीनदयाल जी के योगदान की देन हैं: प्रधानमंत्री
दीनदयाल जी ने 'कार्यकर्ता निर्माण' को प्रोत्साहन दिया। उनसे प्रेरित कार्यकर्ता पार्टी केंद्रित रहे हैं और पार्टी राष्ट्र केंद्रित: प्रधानमंत्री
पंडित दीनदयाल जी के विचारों के मूल में गरीब, ग्राम, किसान, दलित और हाशिए पर रखे लोग थे: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के कार्यों की श्रृंखला का विमोचन किया। कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय को याद करते हुए कहा कहा कि उनके बारे में जो बात सबसे पहले याद आती है वो उनकी सादगी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'बेहद कम समय में एक पार्टी ने विपक्ष से विकल्प तक का सफर तय किया और यह दीनदयाल जी द्वारा रखे गए नींव के कारण है। संगठन आधारित राजनीतिक पार्टियां दीनदयाल जी के योगदान की ही देन हैं। यही जनसंघ और भाजपा की पहचान थी।'

श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय के प्रयासों को डॉ. लोहिया ने भी पहचाना जिसका परिणाम था कि जनता को सन् 1967 में कांग्रेस का एक विकल्प मिला। उन्होंने आगे कहा कि दीनदयाल जी ने 'कार्यकर्ता निर्माण' को बढ़ावा दिया और उनसे प्रभावित कार्यकर्ता पार्टी केंद्रित थे और पार्टी राष्ट्र केंद्रित। प्रधानमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी के विचारों के मूल में गरीब, ग्राम, किसान, दलित और हाशिए पर रखे लोग थे

कार्यों की श्रृंखला के लोकार्पण अवसर पर श्री भैय्याजी जोशी, बीजेपी अध्यक्ष श्री अमित शाह, कई योगदानकर्ता, पार्टी के नेता और मंत्री कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे।

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September 09, 2026
इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज रेल मंत्रालय की कुल 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली 3 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:

  1. खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन
  2. कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन
  3. बिलासपुर (उसलापुर) – पेंड्रा रोड तीसरी लाइन

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की प्रचालनगत दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। इन बहु-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन सुव्यवस्थित होगा और भीड़भाड़ में कमी आएगी। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं। इनका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्‍टीमॉडल-कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के 14 जिलों को कवर करने वाली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी आबादी लगभग 56 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के पास स्थित प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल, रतनपुर महामाया मंदिर आदि शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक रूट हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 27 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्‍स लागत को कम करने में रेलवे सहायक होगा। साथ ही, इससे तेल आयात (लगभग 12 करोड़ लीटर) में कमी आएगी और कार्बनडाईऑक्‍साइड उत्सर्जन (लगभग 62 करोड़ किलोग्राम) घटेगा, जो 2.48 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।