ग्रैंड फिनाले में 75 केन्द्रों पर 15,000 से अधिक छात्र भाग लेंगे
इस फिनाले में 2900 से अधिक स्कूलों और 2200 उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्र 53 केन्द्रीय मंत्रालयों द्वारा सामने रखी गई 476 समस्याओं का समाधान ढूढेंगे
स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन ने युवाओं के बीच उत्पाद संबंधी नवाचार, समस्या-समाधान और लीक से हटकर सोचने की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 25 अगस्त को रात आठ बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2022 के ग्रैंड फिनाले को संबोधित करेंगे।

प्रधानमंत्री का निरंतर देश में, खासकर युवाओं में नवाचार की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास रहा है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर, स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (एसआईएच) की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी। एसआईएच छात्रों को समाज, संगठनों और सरकार की गंभीर समस्याओं को हल करने के लिए एक मंच प्रदान करने की एक देशव्यापी पहल है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के बीच उत्पाद संबंधी नवाचार, समस्या-समाधान और लीक से हटकर सोचने की संस्कृति विकसित करना है।

एसआईएच की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एसआईएच के लिए पंजीकृत टीमों की संख्या पहले संस्करण में लगभग 7500 से चार गुना बढ़कर वर्तमान में चल रहे पांचवें संस्करण में लगभग 29,600 हो गई है। इस वर्ष एसआईएच 2022 के ग्रैंड फिनाले में भाग लेने के लिए 15,000 से अधिक छात्र एवं संरक्षक 75 नोडल केन्द्रों पर पहुंच रहे हैं। इस फिनाले में 2900 से अधिक स्कूलों और 2200 उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्र 53 केन्द्रीय मंत्रालयों द्वारा सामने रखी गई 476 समस्याओं का समाधान ढूढेंगे। इनमें मंदिर में उत्कीर्ण शिलालेखों एवं देवनागरी लिपि में उनके अनुवादों के ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ओसीआर), जल्द खराब होने वाले खाद्य पदार्थों की शीत आपूर्ति श्रृंखला में आईओटी-आधारित जोखिम निगरानी प्रणाली, किसी इलाके के उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले 3डी मॉडल, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सड़कों की स्थिति आदि से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।

इस वर्ष, स्कूली छात्रों में नवाचार की संस्कृति का निर्माण करने और स्कूल के स्तर पर समस्या-समाधान का दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से एक प्रयोग के तौर पर स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन-जूनियर की शुरुआत भी की गई है।

 

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प्रधानमंत्री ने पावन पृथ्‍वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित करने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
March 10, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत में रचित सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें पावन पृथ्‍वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित किया गया है।

“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।

यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।

सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”

सुभाषितम् का अर्थ है कि पृथ्वी, जो महासागरों के रूप में जल से परिपूर्ण है और बाहरी रूप से जल से घिरी है, जिसे विद्वानों ने अपने ज्ञान से जाना है और जिसका हृदय विशाल आकाश में शाश्वत सत्य से ओत-प्रोत है - वह पृथ्वी एक महान राष्ट्र के रूप में हमारी ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखे।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर अपनी पोस्‍ट में लिखा;

“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।

यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।

सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”