प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर का दौरा किया और पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए खुलने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन की 75वीं वर्षगांठ पर वहां पहुंचकर अपने दिव्य अनुभव का वर्णन किया। श्री मोदी ने कहा कि मंदिर के मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों की अपार ऊर्जा और उत्साह देखकर वे अभिभूत और भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि आज वे उस क्षण को फिर से जी रहे हैं जो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के दौरान अनुभव किया होगा। उन्होंने कहा कि सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण चारों ओर एक अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सोमनाथ के हर कोने में भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। पुनर्निर्मित मंदिर के खुलने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अगिनत लोगों के एकत्रित होने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह ऐतिहासिक दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में मील का पत्थर है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर कई पोस्ट की एक श्रृंखला में लिखा:

"जय सोमनाथ! यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं, क्योंकि हम पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए खुलने के 75 वर्ष पूरे होने का समारोह मना रहे हैं।"

"पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पावनधाम सोमनाथ आकर दिव्य अनुभूति हुई है। इस अवसर पर मंदिर मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों के जोश और प्रचंड उत्साह को देखकर मन अभिभूत और भावविभोर है! मैं आज यहां उस क्षण को जी रहा हूं, जिसका अनुभव भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर किया होगा। सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण हर तरफ अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है।" 

सोमनाथ में हर कोने में भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए खुलने के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अनगिनत लोग एकत्रित हुए हैं। वह दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में मील का पत्थर था।

 

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम के जरिए समर्पण और दृढ़ संकल्प का दिया संदेश
July 17, 2026
Prime Minister expresses happiness on the launch of India's first hydrogen train

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत का एक नैतिक, व्यावहारिक और प्रेरक श्लोक- सुभाषितम साझा किया है, जिसमें प्रत्येक लक्ष्य की प्राप्ति में समर्पण और दृढ़ प्रयास के महत्व पर जोर दिया गया है।

"प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति।

सर्वारम्भेण तत् कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।।"

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का स्वप्न साकार हो गया है, जो स्वच्छ, हरित और भविष्य उपयोगी परिवहन प्रणाली निर्मित करने के राष्ट्र के प्रयासों में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया:

आज भारत को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार होने जा रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं।

"प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति।

सर्वारम्भेण तत् कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।।"