दोनों नेताओं ने प्रगति की समीक्षा की और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के भविष्य पर चर्चा की
दोनों नेताओं पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेषकर आतंकवाद, हिंसा और नागरिक जीवन की हानि पर चिंता व्यक्त की
दोनों नेता क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने क्राउन प्रिंस और सऊदी अरब के प्रधानमंत्री महामहिम मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद के साथ टेलीफोन पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने सितंबर 2023 में क्राउन प्रिंस की भारत की राजकीय यात्रा के बाद द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी में प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने भविष्य की द्विपक्षीय साझेदारी के एजेंडे पर भी चर्चा की।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने आतंकवाद, हिंसा और नागरिक जीवन के नुकसान पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के दीर्घकालिक और सैद्धांतिक रुख को दोहराया और युद्धग्रस्त लोगों को मानवीय सहायता जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेता क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। उन्होंने समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने एक्सपो 2030 और फीफा फुटबॉल विश्व कप 2034 के मेजबान के रूप में चुने जाने पर सऊदी अरब को बधाई दी।

दोनों नेता एक दूसरे के संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।