प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें ज्ञान की मूलभूत जड़ों तथा दैनिक अनुशासन की रक्षा के निर्णायक महत्व पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है:

विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।

तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥

“एक बुद्धिमान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है। उस ज्ञान स्‍वरूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना है। वेद उसकी शाखाएँ हैं और सत्कर्म उसके पत्ते हैं। अतः जड़ की सावधानीपूर्वक रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यदि जड़ नष्ट हो गई तो न शाखाएँ रहेंगी और न ही पत्ते।”

एक्स पर प्रधानमंत्री ने लिखा;

विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।

तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥

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प्रस्थान वक्तव्य: प्रधानमंत्री का इजराइल का राजकीय दौरा
February 25, 2026

अपने प्रिय मित्र प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आमंत्रण पर, मैं 25-26 फरवरी 2026 के लिए इज़राइल के राजकीय दौरे पर जा रहा हूँ।

भारत और इज़राइल के बीच एक सुदृढ़ एवं बहुआयामी सामरिक साझेदारी है, जिसमें हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति और गतिशीलता देखी गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार एवं निवेश और दोनों देशों के लोगों के परस्‍पर संबंधों सहित, विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ होने वाली अपनी चर्चाओं की मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ। हम आपसी हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

इस यात्रा के दौरान मैं इज़राइल के राष्ट्रपति महामहिम श्री इसाक हर्ज़ोग से भी भेंट करूँगा। मुझे इज़राइली संसद ‘केनेस्सेट’ को संबोधित करने वाला प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री बनने का भी सम्मान प्राप्त होगा। यह अवसर हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले सुदृढ़ संसदीय और लोकतांत्रिक संबंधों को एक श्रद्धांजलि होगा।

मैं भारतीय प्रवासी समुदाय के उन सदस्यों के साथ संवाद करने की भी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा हूँ, जो लंबे समय से भारत-इज़राइल की विशेष मित्रता को सुदृढ़ करते रहे हैं।

मुझे विश्वास है कि मेरा यह राजकीय दौरा दोनों देशों के बीच स्थायी संबंधों को और सुदृढ़ करेगा, सामरिक साझेदारी के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करेगा तथा एक सुदृढ़, नवोन्मेषी और समृद्ध भविष्य के लिए हमारी साझा दृष्टि को आगे बढ़ाएगा।