प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि टी20 क्रिकेट विश्व कप जीतकर भारतीय टीम ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, संयम और आत्मविश्वास का संगम ही जीवन में सफलता का मूलमंत्र है। उन्होंने कहा कि यह जीत यह भी दर्शाती है कि सही दिशा में कड़ी मेहनत से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“अभीप्सां स्वात्मनो रक्षाऽविरतं सुस्थिरं तया। यत्नमातिष्ठ धैर्येण ततः सिद्धिर्भवेद् ध्रुवम्।।”

इसका अर्थ है कि जीवन में उन्नति चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को दृढ़ता और लगन से प्रयास करना चाहिए। धैर्यपूर्वक किया गया सतत् परिश्रम निश्चित रूप से सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:

“T20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर टीम इंडिया ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, संयम और आत्मविश्वास का संगम ही जीवन में सफलता का मूलमंत्र है। यह जीत हमें यह भी बताती है कि सही दिशा में कठिन परिश्रम से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
अभीप्सां स्वात्मनो रक्षाऽविरतं सुस्थिरं तया।

यत्नमातिष्ठ धैर्येण ततः सिद्धिर्भवेद् ध्रुवम् ।।”

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प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए ज्ञान के महत्व और उसकी परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डाला
September 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए बताया कि ज्ञान समाज के साथ सद्भाव में रहने की कला सिखाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बुद्धि और समृद्धि प्रदान करता है, हृदय को आनंद से भर देता है और व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाता है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्।
उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥”

यह सुभाषितम बताता है कि विद्या मनुष्य को लोक-व्यवहार की समझ देती है, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करती है, उसके मन को आह्लादित करती है तथा महत्व को बढ़ाती है। इसलिए विद्या सुशासन की सेवा से समान हृदय को प्रिय और जीवन को उन्नत बनाने वाली है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्।
उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥”