प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री महामहिम बोरिस जॉनसन के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।

दोनों नेताओं ने इस वर्ष की शुरुआत में अपने आभासी शिखर सम्मेलन के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और आभासी शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए रोडमैप 2030 के तहत उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने संवर्धित व्यापार साझेदारी की प्रगति की भी समीक्षा की और दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश से जुड़े संबंधों में तेजी से विस्तार की संभावना पर सहमति व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने नवंबर 2021 की शुरुआत में ग्लासगो में होने वाली यूएनएफसीसीसी सीओपी-26 बैठक के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से संबंधित कार्रवाई के प्रति भारत की वचनबद्धता से अवगत कराया, जोकि नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से संबंधित इसके महत्वाकांक्षी लक्ष्य तथा हाल ही में घोषित राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन में स्पष्ट है।

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय विकास, विशेष रूप से अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में भी विचारों का आदान-प्रदान किया। इस संदर्भ में, वे उग्रवाद एवं आतंकवाद के साथ-साथ मानवाधिकारों और महिलाओं तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर एक साझा अंतर्राष्‍ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने की जरूरत पर सहमत हुए।    

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प्रधानमंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि राष्ट्र की गरिमा और सम्मान की रक्षा में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य से प्रत्येक नागरिक गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि भारत माता के लिए सब कुछ बलिदान करने का उनका जज्बा सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

"स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकंपितुमर्हसि |

धर्म्याधि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियौ न विद्यते ||"

इस श्लोक में यह बताया गया है कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति सजग हो जाता है, तो उसके मन में किसी भी प्रकार की झिझक या भय नहीं होना चाहिए, क्योंकि न्याय की वेदी पर धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए किया गया संघर्ष एक योद्धा के लिए आत्म-कल्याण का सबसे उत्कृष्ट और गौरवशाली मार्ग है।