बड़े से बड़ा लक्ष्य हो, कठिनतम चुनौती हो, भारत की जनता की सामूहिक शक्ति, हर चुनौती का समाधान देती है : पीएम मोदी
दो दशक पहले के विनाशकारी भूकंप के बाद कच्छ के बारे में कहा जाता था कि वो कभी उठ नहीं पाएगा, आज कच्छ देश के तेजी से विकसित होते जिलों में से एक है: पीएम
छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के साथ-साथ उनके शासन और प्रबंधन कौशल से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है: पीएम मोदी
भारत ने 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया है: पीएम मोदी
टीबी रोग को जड़ से खत्म करने के लिए निक्षय मित्रों ने बीड़ा उठाया है: पीएम मोदी
बारामूला, नई श्वेत क्रांति का प्रतीक बन रहा है। बारामूला का डेयरी उद्योग इस बात का प्रमाण है कि हमारे देश का हर हिस्सा संभावनाओं से भरा है: पीएम मोदी
कई ऐसे खेल और प्रतियोगिताएं हैं, जहां आज पहली बार भारत अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है: पीएम मोदी
भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों को सर्वोपरि मानते हैं, हम अपने संविधान को सर्वोच्च मानते हैं: पीएम मोदी
हम 25 जून को कभी नहीं भूल सकते। आज ही के दिन हमारे देश पर इमरजेंसी थोपी गई थी: पीएम मोदी
लाखों लोगों ने पूरी ताकत से आपातकाल का विरोध किया। लोकतंत्र के समर्थकों को उस दौरान बहुत प्रताड़ित किया गया: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार, ‘मन की बात’ में एक बार फिर आप सब का स्वागत है | ऐसे तो ‘मन की बात’ हर महीने के आखिरी रविवार को होता है, लेकिन, इस बार एक सप्ताह पहले ही हो रहा है | आप सब जानते ही हैं, अगले हफ्ते मैं अमेरिका में रहूँगा और वहाँ बहुत सारी भाग-दौड़ भी रहेगी और इसलिए मैंने सोचा, वहाँ जाने से पहले आपसे बात कर लूँ, और इससे बढ़िया क्या होगा? जनता-जनार्दन का आशीर्वाद, आपकी प्रेरणा, मेरी ऊर्जा भी बढ़ती रहेगी |


साथियो, बहुत से लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री के तौर पर मैंने ये अच्छा काम किया, वो बड़ा काम किया | ‘मन की बात’ के कितने ही श्रोता, अपनी चिट्ठियों में बहुत सारी प्रशंसा करते हैं | कोई कहता है ये किया, कोई कहता है वो किया, ये अच्छा किया, ये ज्यादा अच्छा किया, ये बढ़िया किया, लेकिन, मैं, जब भारत के सामान्य मानवी के प्रयास, उनकी मेहनत, उनकी इच्छाशक्ति को देखता हूँ, तो खुद अपने आप, अभिभूत हो जाता हूँ | बड़े से बड़ा लक्ष्य हो, कठिन-से-कठिन चुनौती हो, भारत के लोगों का सामूहिक बल, सामूहिक शक्ति, हर चुनौती का हल निकाल देता है | अभी हमने दो-तीन दिन पहले देखा, कि, देश के पश्चिमी छोर पर कितना बड़ा Cyclone आया | तेज चलने वाली हवाएँ, तेज बारिश | Cyclone Biparjoy (बिपरजॉय) ने कच्छ में कितना कुछ तहस-नहस कर दिया, लेकिन, कच्छ के लोगों ने जिस हिम्मत और तैयारी के साथ इतने खतरनाक Cyclone का मुक़ाबला किया, वो भी उतना ही अभूतपूर्व है | दो दिन बाद ही कच्छ के लोग, अपना नया वर्ष, यानि आषाढ़ी बीज भी मनाने जा रहे हैं | ये भी संयोग है कि आषाढ़ी बीज, कच्छ में वर्षा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है | मैं, इतने साल कच्छ आता-जाता रहा हूँ, वहाँ के लोगों की सेवा करने का मुझे सौभाग्य भी मिला है और इसके लिए कच्छ के लोगों का हौंसला और उनकी जिजीविषा के बारे मैं अच्छी तरह जानता हूँ | दो दशक पहले के विनाशकारी भूकंप के बाद जिस कच्छ के बारे में कहा जाता था कि वो कभी उठ नहीं पाएगा, आज, वही जिला, देश के तेजी से विकसित होते जिलों में से एक है | मुझे विश्वास है, Cyclone बिपरजॉय ने जो तबाही मचाई है, उससे भी कच्छ के लोग बहुत तेजी से उभर जाएंगे |


साथियो, प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का ज़ोर नहीं होता, लेकिन, बीते वर्षों में भारत ने आपदा प्रबंधन की जो ताकत विकसित की है, वो आज एक उदाहरण बन रही है | प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला करने का एक बड़ा तरीका है – प्रकृति का संरक्षण | आजकल, Monsoon के समय में तो, इस दिशा में, हमारी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है | इसीलिए ही आज देश, ‘Catch the Rain’ जैसे अभियानों के जरिए सामूहिक प्रयास कर रहा है| पिछले महीने ‘मन की बात’ में ही हमने जल संरक्षण से जुड़े Start-Ups की चर्चा की थी | इस बार भी मुझे चिट्ठी लिखकर कई ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है जो पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए जी-जान से लगे हैं | ऐसे ही एक साथी हैं - यूपी के बांदा जिले के तुलसीराम यादव जी | तुलसीराम यादव जी लुकतरा ग्राम पंचायत के प्रधान हैं | आप भी जानते हैं कि बांदा और बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी को लेकर कितनी कठिनाईयाँ रही हैं | इस चुनौती से पार पाने के लिए तुलसीराम जी ने गाँव के लोगों को साथ लेकर इलाके में 40 से ज्यादा तालाब बनवाए हैं | तुलसीराम जी ने अपनी मुहिम का आधार बनाया है – खेत का पानी खेत में, गाँव का पानी गाँव में | आज उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि उनके गाँव में भू-जल स्तर सुधर रहा है | ऐसे ही यू.पी. के हापुड़ जिले में लोगों ने मिलकर के एक विलुप्त नदी को पुनर्जीवित किया है | यहाँ काफी समय पहले नीम नाम की एक नदी हुआ करती थी | समय के साथ वो लुप्त हो गई, लेकिन, स्थानीय स्मृतियाँ और जन-कथाओं में उसे हमेशा याद किया जाता रहा | आखिरकार, लोगों ने अपनी इस प्राकृतिक धरोहर को फिर से सजीव करने की ठानी | लोगों के सामूहिक प्रयास से अब ‘नीम नदी’ फिर से जीवंत होने लगी है | नदी के उद्गम स्थल को अमृत सरोवर के तौर भी विकसित किया जा रहा है |


साथियो, ये नदी, नहर, सरोवर, ये केवल जल-स्त्रोत ही नहीं होते हैं, बल्कि इनसे, जीवन के रंग और भावनाएं भी जुड़ी होती हैं | ऐसा ही एक दृश्य अभी कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र में देखने को मिला | ये इलाका ज्यादातर सूखे की चपेट में रहता है | पांच दशक के इंतजार के बाद यहाँ Nilwande Dam (निलवंडे डैम) की Canal का काम अब पूरा हो रहा है | कुछ दिन पहले Testing के दौरान Canal में पानी छोड़ा गया था | इस दौरान जो तस्वीरें आयी, वो वाकई भावुक करने वाली थी | गांव के लोग ऐसे झूम रहे थे, जैसे होली-दिवाली का त्योहार हो |


साथियो, जब प्रबंधन की बात हो रही है, तो मैं, आज, छत्रपति शिवाजी महाराज को भी याद करूंगा | छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता के साथ ही उनकी Governance और उनके प्रबंध कौशल से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है | विशेषकर, जल-प्रबंधन और नौसेना को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज ने जो कार्य किए, वो आज भी भारतीय इतिहास का गौरव बढ़ाते हैं | उनके बनाए जलदुर्ग, इतनी शताब्दियों बाद भी समंदर के बीच में आज भी शान से खड़े हैं | इस महीने की शुरुआत में ही छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्ष पूरे हुए हैं | इस अवसर को एक बड़े पर्व के रूप में मनाया जा रहा है | इस दौरान महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में इससे जुड़े भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया | मुझे याद है, कई वर्ष पहले 2014 में, मुझे, रायगढ़ जाने, उस पवित्र भूमि को नमन करने का सौभाग्य मिला था | यह हम सबका कर्तव्य है कि इस अवसर पर हम छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रबंध कौशल को जानें, उनसे सीखें | इससे हमारे भीतर, हमारी विरासत पर गर्व का बोध भी जगेगा, और भविष्य के लिए कर्तव्यों की प्रेरणा भी मिलेगी |


मेरे प्यारे देशवासियो, आपने रामायण की उस नन्हीं गिलहरी के बारे में जरुर सुना होगा, जो, रामसेतु बनाने में मदद करने के लिए आगे आई थी | कहने का मतलब ये, कि जब नीयत साफ हो, प्रयासों में ईमानदारी हो, तो फिर कोई भी लक्ष्य, कठिन नहीं रहता | भारत भी, आज, इसी नेक नीयत से, एक बहुत बड़ी चुनौती का मुकाबला कर रहा है | ये चुनौती है – टी.बी. की, जिसे क्षय रोग भी कहा जाता है | भारत ने संकल्प किया है 2025 तक, टी.बी. मुक्त भारत, बनाने का - लक्ष्य बहुत बड़ा ज़रूर है | एक समय था, जब, टी.बी. का पता चलने के बाद परिवार के लोग ही दूर हो जाते थे, लेकिन ये आज का समय है, जब टी.बी. के मरीज को परिवार का सदस्य बनाकर उनकी मदद की जा रही है | इस क्षय रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए, निक्षय मित्रों ने, मोर्चा संभाल लिया है | देश में बहुत बड़ी संख्या में विभिन्न सामाजिक संस्थाएं निक्षय मित्र बनी हैं | गाँव-देहात में, पंचायतों में, हजारों लोगों ने खुद आगे आकर टी.बी. मरीजों को गोद लिया है | कितने ही बच्चे हैं, जो, टीबी मरीजों की मदद के लिए आगे आए हैं | ये जन-भागीदारी ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है | इसी भागीदारी की वजह से आज देश में 10 लाख से ज्यादा टी.बी. मरीजों को गोद लिया जा चुका है और ये पुण्य का काम किया है, क़रीब-क़रीब 85 हजार निक्षय मित्रों ने | मुझे खुशी है कि, देश के कई सरपंचों ने, ग्राम प्रधानों ने भी, ये बीड़ा उठा लिया है कि वो, अपने गांव में टी.बी. को समाप्त करके ही रहेंगे |


नैनीताल के एक गांव के निक्षय मित्र श्रीमान दीकर सिंह मेवाड़ी जी ने टी.बी.के छह मरीजों को गोद लिया है | ऐसे ही किन्नौर की एक ग्राम पंचायत के प्रधान निक्षय मित्र श्रीमान ज्ञान सिंह जी भी अपने ब्लॉक में टी.बी. मरीजों को हर जरुरी सहायता उपलब्ध कराने में जुटे हैं | भारत को टी.बी. मुक्त बनाने की मुहिम में हमारे बच्चे और युवा साथी भी पीछे नहीं हैं | हिमाचल प्रदेश के ऊना की 7 साल की बेटी नलिनी सिंह का कमाल देखिए | बिटिया नलिनी, अपनी Pocket money से, टी.बी. मरीजों की मदद कर रही है | आप जानते हैं कि बच्चों को गुल्लक से कितना प्यार होता है, लेकिन, MP के कटनी जिले की 13 साल की मीनाक्षी और पश्चिम बंगाल के Diamond Harbour के 11 साल के बश्वर मुखर्जी, दोनों ही कुछ अलग ही बच्चे हैं | इन दोनों बच्चो ने अपने गुल्लक के पैसे भी टी.बी. मुक्त भारत के अभियान में लगा दिए हैं | ये सभी उदाहरण भावुकता से भरे होने के साथ ही, बहुत प्रेरक भी हैं | कम उम्र में बड़ी सोच रखने वाले इन सभी बच्चों की, मैं हृदय से प्रशंसा करता हूं |

मेरे प्यारे देशवासियो, हम भारतवासियों का स्वभाव होता है कि हम हमेशा नए विचारों के स्वागत के लिए तैयार रहते हैं | हम अपनी चीज़ों से प्रेम करते हैं और नई चीज़ों को आत्मसात भी करते हैं | इसी का एक उदाहरण है – जापान की तकनीक मियावाकी, अगर किसी जगह की मिट्टी उपजाऊ नहीं रही हो, तो मियावाकी तकनीक, उस क्षेत्र को, फिर से हरा-भरा करने का बहुत अच्छा तरीका होती है | मियावाकी जंगल तेजी से फैलते हैं और दो-तीन दशक में जैव विविधता का केंद्र बन जाते हैं | अब इसका प्रसार बहुत तेजी से भारत के भी अलग-अलग हिस्सों में हो रहा है | हमारे यहाँ केरला के एक teacher श्रीमान राफी रामनाथ जी ने इस तकनीक से एक इलाके की तस्वीर ही बदल दी | दरअसल, रामनाथ जी अपने students को, प्रकृति और पर्यावरण के बारे में गहराई से समझाना चाहते थे |

इसके लिए उन्होंने एक हर्बल गार्डन ही बना डाला | उनका ये गार्डन अब एक Biodiversity Zone बन चुका है | उनकी इस कामयाबी ने उन्हें और भी प्रेरणा दी | इसके बाद राफी जी ने मियावाकी तकनीक से एक mini forest, यानि छोटा जंगल और इसे नाम दिया – ‘विद्यावनम्’ | अब इतना खूबसूरत नाम तो एक शिक्षक ही रख सकता है – ‘विद्यावनम्’ | रामनाथ जी के इस ‘विद्यावनम्’ में छोटी सी जगह में 115 varieties के 450 से अधिक पेड़ लगाए गए | उनके students भी इनके रखरखाव में उनका हाथ बटाते हैं | इस खूबसूरत जगह को देखने के लिए आसपास के स्कूली बच्चे, आम नागरिक - काफी भीड़ उमड़ती है | मियावाकी जंगलों को किसी भी जगह, यहाँ तक कि शहरों में भी आसानी से उगाया जा सकता है | कुछ समय पहले ही मैंने गुजरात में केवड़िया, एकता नगर में, मियावाकी forest का उद्घाटन किया था | कच्छ में भी 2001 के भूकंप में मारे गए लोगों की याद में मियावाकी पद्धति से स्मृति वन बनाया गया है | कच्छ जैसी जगह पर इसका सफल होना ये बताता है कि मुश्किल से मुश्किल प्राकृतिक परिवेश में भी ये तकनीक कितनी प्रभावी है | इसी तरह, अंबाजी और पावागढ़ में भी मियावाकी method से पौधे लगाए गए हैं | मुझे पता चला है कि लखनऊ के अलीगंज में भी एक मियावाकी उद्यान तैयार किया जा रहा है | पिछले चार साल में मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में ऐसे 60 से ज्यादा जंगलों पर काम किया गया है | अब तो ये technique पूरी दुनिया में पसंद की जा रही है | Singapore, Paris, Australia, Malaysia जैसे कितने ही देशों में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है | मैं देशवासियों से, खासकर, शहरों में रहने वाले लोगों से, आग्रह करूंगा कि वे मियावाकी पद्धति के बारे में जरुर जानने का प्रयास करें | इसके जरिए आप अपनी धरती और प्रकृति को हरा-भरा और स्वच्छ बनाने में अमूल्य योगदान दे सकते हैं |


मेरे प्यारे देशवासियो, आजकल हमारे देश में जम्मू-कश्मीर की खूब चर्चा होती है | कभी बढ़ते पर्यटन के कारण, तो कभी G-20 के शानदार आयोजनों के कारण | कुछ समय पहले मैंने ‘मन की बात’ में आपको बताया था कि कैसे कश्मीर के ‘नादरू’ देश के बाहर भी पसंद किए जा रहे हैं | अब जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के लोगों ने एक कमाल कर दिखाया है | बारामूला में खेती-बाड़ी तो काफी समय से होती है, लेकिन यहाँ, दूध की कमी रहती थी | बारामूला के लोगों ने इस चुनौती को एक अवसर के रूप में लिया | यहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने डेयरी का काम शुरू किया | इस काम में सबसे आगे यहाँ की महिलाएं आईं, जैसे कि एक बहन हैं – इशरत नबी | इशरत, एक graduate है और इन्होंने ‘Mir Sisters Dairy Farm (मीर सिस्टर्स डेयरी फार्म)’ शुरू किया है | उनके डेयरी फार्म से हर दिन करीब डेढ़-सौ लीटर दूध की बिक्री हो रही है | ऐसे ही सोपोर के एक साथी हैं - वसीम अनायत | वसीम के पास दो दर्जन से ज्यादा पशु हैं और वो हर दिन दो-सौ लीटर से ज्यादा दूध बेचते हैं | एक और युवा आबिद हुसैन भी डेयरी का काम कर रहें हैं | इनका काम भी खूब आगे बढ़ रहा है | ऐसे लोगों की मेहनत की वजह से ही आज बारामूला में हर रोज साढ़े 5 लाख लीटर दूध उत्पादन हो रहा है | पूरा बारामूला, एक नयी श्वेत क्रांति की पहचान बन रहा है | पिछले ढाई-तीन वर्षों में यहाँ 500 से ज्यादा dairy units लगी हैं | बारामूला की dairy industry इस बात की गवाह है कि हमारे देश का हर हिस्सा कितनी संभावनाओं से भरा हुआ है | किसी क्षेत्र के लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति कोई भी लक्ष्य प्राप्त करके दिखा सकती है |


मेरे प्यारे देशवासियो, इसी महीने खेल जगत से भारत के लिए कई बड़ी खुशखबरी आई हैं | भारत की टीम ने पहली बार Women’s Junior Asia Cup जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाई है | इसी महीने हमारी Men’s Hockey Team ने भी Junior Asia Cup जीता है | इसके साथ ही हम इस tournament के इतिहास में सबसे अधिक जीत दर्ज करने वाले टीम भी बन गए हैं | Junior Shooting World Cup उसमें भी हमारी junior team ने भी कमाल कर दिया | भारतीय टीम ने इस tournament में पहला स्थान हासिल किया है | इस tournament में कुल जितने gold medals थे, उसमें से 20% अकेले भारत के खाते में आए हैं | इसी जून में Asian Under Twenty Athletics Championship भी हुई | इसमें, भारत, पदक तालिका में, 45 देशों में, top तीन में रहा|


साथियो, पहले एक समय होता था जब हमें अन्तर्राष्ट्रीय आयोजनों के बारे में पता तो चलता था, लेकिन, उनमें अक्सर भारत का कहीं कोई नाम नहीं होता था | लेकिन, आज, मैं, केवल पिछले कुछ सप्ताह की सफलताओं का ज़िक्र कर रहा हूँ, तो भी list इतनी लंबी हो जाती है | यही हमारे युवाओं की असली ताकत है | ऐसे कितने ही खेल और प्रतियोगिताएं हैं, जहाँ आज भारत, पहली बार, अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रहा है | जैसे कि long jump में श्रीशंकर मुरली ने Paris Diamond League जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में देश को bronze दिलाया है | ये इस प्रतियोगिता में भारत का पहला मेडल है | ऐसे ही एक सफलता हमारी Under Seventeen Women Wrestling Team ने किर्गिस्तान में भी दर्ज की है | मैं देश के इन सभी athletes, उनके parents और coaches, सबको उनके प्रयासों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ |


साथियो, international आयोजनों में देश की इस सफलता के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत होती है | आज, देश के अलग-अलग राज्यों में एक नए उत्साह के साथ खेलों के आयोजन होते हैं | इनसे खिलाड़ियों को खेलने, जीतने और हार से सीखने का मौका मिलता है | जैसे, अभी उत्तर प्रदेश में Khelo India University Games का आयोजन हुआ | इसमें युवाओं में खूब उत्साह और जोश देखने को मिला | इन खेलों में हमारे युवाओं ने ग्यारह record तोड़े हैं | इन खेलों में Punjab University , अमृतसर की Guru Nanak Dev University और कर्नाटका की Jain University, medal tally में पहले तीन स्थानों पर रही है |


साथियो, ऐसे tournaments का एक बड़ा पहलू यह भी होता है कि इनसे युवा खिलाड़ियों की कई inspiring stories भी सामने आती हैं| Khelo India University Games में Rowing स्पर्धा में असम की Cotton University के अन्यतम राजकुमार ऐसे पहले दिव्यांग खिलाड़ी बने, जिन्होंने इसमें हिस्सा लिया | Barkatullah University की निधि पवैया घुटने में गंभीर चोट के बावजूद Shot-put में Gold Medal जीतने में कामयाब रही | Savitribai Phule Pune University के शुभम भंडारे को ankle injury के चलते, पिछले साल बेंगलुरु में निराशा हाथ लगी थी, लेकिन इस बार वे Steeplechase के Gold Medallist बने हैं | Burdwan University की सरस्वती कुंडू अपनी कबड्डी टीम की Captain हैं | वे कई मुश्किलों को पार कर यहाँ तक पहुँची हैं | बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले बहुत सारे Athletes को, TOPS Scheme से भी बहुत मदद मिल रही है | हमारे खिलाड़ी जितना खेलेंगे, उतना ही खिलेंगे |


मेरे प्यारे देशवासियो, 21 जून भी अब आ ही गई है | इस बार भी, विश्व के कोने-कोने में लोग अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं | इस वर्ष योग दिवस की theme है – Yoga For Vasudhaiva Kutumbakam यानि ‘एक विश्व-एक परिवार’ के रूप में सबके कल्याण के लिए योग | यह योग की उस भावना को व्यक्त करता है, जो सबको जोड़ने वाली और साथ लेकर चलने वाली है | हर बार की तरह, इस बार भी देश के कोने-कोने में, योग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे |


साथियो, इस बार मुझे New York के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, UN में होने वाले योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेगा | मैं, देख रहा हूँ, कि Social Media पर भी, योग दिवस को लेकर गजब का उत्साह दिख रहा है |


साथियो, मेरा आप सभी से आग्रह है कि आप, योग को अपने जीवन में जरुर अपनाएं, इसे, अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं | अगर अब भी आप योग से नहीं जुड़े हैं तो आने वाली 21 जून, इस संकल्प के लिए बहुत बेहतरीन मौका है | योग में तो वैसे भी ज्यादा तामझाम की जरुरत ही नहीं होती है | देखिये, जब आप योग से जुड़ेंगे तो आपके जीवन में कितना बड़ा परिवर्तन आएगा |


मेरे प्यारे देशवासियो, परसों यानि 20 जून को ऐतिहासिक रथयात्रा का दिन है | रथयात्रा की पूरी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान है | देश के अलग-अलग राज्यों में बहुत धूमधाम से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है | ओडिशा के पुरी में होने वाली रथयात्रा तो अपने आपमें अद्भुत होती है | जब मैं गुजरात में था, तो मुझे, अहमदाबाद में होने वाली विशाल रथयात्रा में शामिल होने का अवसर मिलता था | इन रथयात्राओं में जिस तरह देश भर के, हर समाज, हर वर्ग के लोग उमड़ते हैं वो अपने आपमें बहुत अनुकरणीय है | ये आस्था के साथ ही ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भी प्रतिबिम्ब होती है | इस पावन-पुनीत अवसर पर आप सभी को मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं | मेरी कामना है, भगवान जगन्नाथ सभी देशवासियों को अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें |
साथियो, भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े उत्सव की चर्चा करते हुए, मैं, देश के राजभवनों में हुए दिलचस्प आयोजनों का भी जरुर उल्लेख करूँगा | अब देश में राजभवनों की पहचान, सामाजिक और विकास कार्यों से होने लगी है | आज, हमारे राजभवन, टी.बी. मुक्त भारत अभियान के, प्राकृतिक खेती से जुड़े अभियान के, ध्वजवाहक बन रहे हैं | बीते समय में गुजरात हो, गोवा हो, तेलंगाना हो, महाराष्ट्र हो, सिक्किम हो, इनके स्थापना दिवस को, अलग-अलग राजभवनों ने जिस उत्साह के साथ celebrate किया, वह अपने आप में एक मिसाल है | यह एक बेहतरीन पहल है जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाती है |


साथियो, भारत लोकतंत्र की जननी है, Mother of Democracy है | हम, अपने लोकतांत्रिक आदर्शों को सर्वोपरि मानते हैं, अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं, इसलिए, हम 25 जून को भी कभी भुला नहीं सकते | यह वही दिन है जब हमारे देश पर emergency थोपी गई थी | यह भारत के इतिहास का काला दौर था | लाखों लोगों ने emergency का पूरी ताकत से विरोध किया था | लोकतंत्र के समर्थकों पर उस दौरान इतना अत्याचार किया गया, इतनी यातनाएं दी गईं कि आज भी, मन, सिहर उठता है | इन अत्याचारों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा दी गई सजाओं पर बहुत सी पुस्तकें लिखी गई हैं | मुझे भी ‘संघर्ष में गुजरात’ नाम से एक किताब लिखने का उस समय मौका मिला था | कुछ दिनों पहले ही emergency पर लिखी एक और किताब मेरे सामने आई जिसका शीर्षक है – Torture of Political Prisoners in India. Emergency के दौरान छपी इस पुस्तक में वर्णन किया गया है, कि कैसे, उस समय की सरकार, लोकतंत्र के रखवालों से क्रूरतम व्यवहार कर रही थी | इस किताब में ढ़ेर सारी case studies हैं, बहुत सारे चित्र हैं | मैं चाहूँगा कि, आज, जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो, देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों का भी जरुर अवलोकन करें | इससे आज की युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में और ज्यादा आसानी होगी |


मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ रंग-बिरंगे मोतियों से सजी एक सुंदर माला है जिसका हर मोती अपने आपमें अनूठा और अनमोल है | इस कार्यक्रम का हर episode बहुत ही जीवंत होता है | हमें, सामूहिकता की भावना के साथ-साथ समाज के प्रति कर्तव्य-भाव और सेवा-भाव से भरता है | यहां उन विषयों पर खुलकर चर्चा होती है, जिनके बारे में, हमें, आमतौर पर कम ही पढ़ने–सुनने को मिलता है | हम अक्सर देखते हैं कि ‘मन की बात’ में किसी विषय का जिक्र होने के बाद कैसे अनेकों देशवासियों को नई प्रेरणा मिली | हाल ही में मुझे देश की प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना आनंदा शंकर जयंत का एक पत्र मिला | अपने पत्र में उन्होंने ‘मन की बात’ के उस episode के बारे में लिखा है, जिसमें हमने story telling के बारे में चर्चा की थी | उस कार्यक्रम में हमने इस field से जुड़े लोगों की प्रतिभा को acknowledge किया था | ‘मन की बात’ के उस कार्यक्रम से प्रेरित होकर आनंदा शंकर जयंत ने ‘कुट्टी कहानी’ तैयार की है | यह बच्चों के लिए अलग-अलग भाषाओं की कहानियों का एक बेहतरीन संग्रह है | यह प्रयास इसलिए भी बहुत अच्छा है, क्योंकि इससे हमारे बच्चों का अपनी संस्कृति से लगाव और गहरा होता है | उन्होंने इन कहानियों के कुछ interesting videos अपने YouTube channel पर भी upload किए हैं | मैंने, आनंदा शंकर जयंत के इस प्रयास की विशेषतौर पर इसलिए चर्चा की, क्योंकि ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा कि कैसे देशवासियों के अच्छे काम, दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं | इससे सीखकर वे भी अपने हुनर से देश और समाज के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश करते हैं | यही तो हम भारतवासियों का वो collective power है, जो देश की प्रगति में नई शक्ति भर रही है |


मेरे प्यारे देशवासियो, इस बार ‘मन की बात’ में मेरे साथ इतना ही | अगली बार, नए विषयों के साथ, आपसे, फिर मुलाकात होगी | बारिश का समय है, इसलिए, अपने स्वास्थ्य का खूब ध्यान रखिये | संतुलित खाईये और स्वस्थ रहिये | हाँ! योगा जरुर कीजिये | अब कई स्कूलों में गर्मी की छुट्टियाँ भी खत्म होने को है | मैं बच्चों से भी कहूंगा कि homework last दिन के लिए pending ना रखें | काम खत्म करिए और निश्चिंत रहिए | बहुत- बहुत धन्यवाद |

 

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भारत-इटली संयुक्त घोषणा
May 20, 2026

इटली गणराज्य की मंत्रिपरिषद की अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा और 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी की भारत यात्रा के बाद हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को नई गति प्रदान की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया।

राजनीतिक संवाद

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की शानदार प्रगति का स्वागत किया और बहुपक्षीय आयोजनों के इतर बैठकों समेत नेताओं की वार्षिक बैठकें आयोजित करने के साथ-साथ नियमित मंत्रिस्तरीय और संस्थागत-स्तरीय बैठकें करने पर सहमति जताई।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने नवंबर 2024 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अपनी बैठक में दोनों नेताओं द्वारा अपनाई गई 'संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029' के विभिन्न स्तंभों में हासिल की गई ठोस प्रगति की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की समीक्षा और विशेष रणनीतिक साझेदारी को रणनीतिक दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र (मैकेनिज्म) स्थापित करने पर सहमति जताई।

आर्थिक सहयोग और निवेश

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक और औद्योगिक सहयोग की बढ़ती गतिशीलता पर संतोष व्यक्त किया, जिसके तहत पिछले वर्ष से अब तक तीन उच्च स्तरीय व्यापार मंच (बिजनेस फोरम) आयोजित किए जा चुके हैं। भारत के तीव्र एवं सतत आर्थिक विकास से पैदा होने वाले अवसरों और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ताओं के सफल समापन के आधार पर, दोनों पक्षों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने के साझा लक्ष्य की फिर से पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश में हुई वृद्धि का स्वागत किया और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए उद्योगों को औद्योगिक और तकनीकी साझेदारियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विशेष रूप से वस्त्र, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों (क्लीन टेक), सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण कच्चे माल, इस्पात, बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे में अधिक निवेश की संभावनाओं का स्वागत किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने उद्योगों को दोनों देशों में लागू नीतिगत प्रोत्साहनों और योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जो व्यापारिक संबंधों और उत्पादन सुविधाओं को बढ़ाने का प्रयास करती हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने शेयर बाजारों, निवेश कोषों, वेंचर कैपिटल, बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई।

उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं के मजबूत एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए लघु एवं मध्यम उद्योगों के बीच औद्योगिक साझेदारी को सुगम बनाने पर सहमत व्यक्त की। दोनों नेताओं ने आने वाले महीनों में आपसी हित के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय मिशनों को प्रोत्साहित किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'क्रिटिकल मिनरल्स' यानि महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सतत विकास और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं पर विशेष ध्यान देते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने चक्रीय अर्थव्यवस्था की पहलों के एक अभिन्न अंग के रूप में, ई-कचरे और खनन अवशेषों जैसे असामान्य स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कृषि और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में संबंधित मंत्रालयों और संस्थानों के बीच सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

कनेक्टिविटी

दोनों प्रधानमंत्रियों ने 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) पर सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसे वैश्विक व्यापार, संपर्क और समृद्धि को नया स्वरूप देने वाली परिवर्तनकारी पहल बताया। परियोजना पर प्रारंभिक चर्चाओं की सराहना करते हुए दोनों नेताओं ने 2026 में आयोजित होने वाली पहली आईएमईसी मंत्रीस्तरीय बैठक में ठोस कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने नौवहन और बंदरगाहों पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और अपने संबंधित मंत्रालयों/विभागों को जल्द से जल्द इस समझौता ज्ञापन को लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने का निर्देश दिया।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

दोनों प्रधानमंत्रियों ने पुनः पुष्टि की कि नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत-इटली साझेदारी के प्रमुख प्रेरक हैं।

उन्होंने भारत में स्थित “INNOVIT India” नामक नवाचार केंद्र की स्थापना की घोषणा की जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना, स्टार्टअप कार्यक्रमों, बाजार पहुंच, संयुक्त अनुसंधान, विश्वविद्यालय सहयोग और प्रतिभा गतिशीलता को बढ़ावा देना है। यह फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, कृषि तकनीक, ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगा। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 में दिल्ली में आयोजित भारतीय और इतालवी विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान केंद्रों के बीच उद्घाटन 'विज्ञान और नवाचार संवाद' का स्वागत किया और इस वर्ष के अंत में इटली में इसके अगले संस्करण के आयोजन की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने एक खुले, स्वतंत्र, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण आईसीटी वातावरण के महत्व पर जोर दिया, जो नवाचार और आर्थिक विकास के लिए एक सक्षम कारक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 19 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' में इटली की रचनात्मक भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने मानव-केंद्रित, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। वे तीसरे देशों सहित इस क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया।

2025–2027 वैज्ञानिक सहयोग कार्यकारी कार्यक्रम के आधार पर दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा क्वांटम प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और सतत ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्रों में शोधकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने का समर्थन किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन के जारी क्रियान्वयन और अनुसंधान परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए संयुक्त प्रस्ताव आमंत्रण शुरू किए जाने का भी स्वागत किया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारतीय शिक्षा जगत और ट्राएस्टे स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स' (आईसीटीपी) के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग को स्वीकार किया और भारतीय वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इटली के ट्राइएस्टे स्थित एलेट्रा सिंक्रोट्रोन केंद्र के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह भारतीय शोधकर्ताओं के लिए एलेट्रा की सिंक्रोट्रोन रेडिएशन सुविधा तक पहुंच से संबंधित गतिविधियों के समर्थन हेतु किया गया है।

अंतरिक्ष

इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (एएसआई) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच चल रहे सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों नेताओं ने पृथ्वी अवलोकन (अर्थ ऑब्जर्वेशन), हेलियोफिज़िक्स और अंतरिक्ष अन्वेषण पर साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई जिसमें केंद्रित विषयगत जुड़ाव शामिल है। साथ ही अंतरिक्ष तक पहुंच और अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के संरक्षण पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी। उन्होंने अपने संबंधित अंतरिक्ष उद्योग प्रतिनिधिमंडलों की हालिया पारस्परिक यात्राओं पर संतोष जताया और तीसरे देशों में भी विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और संयुक्त पहलों के माध्यम से वाणिज्यिक सहयोग को बढ़ावा देने की उम्मीद जताई।

रक्षा

दोनों प्रधानमंत्रियों ने मंत्रिस्तरीय आदान-प्रदान, सेनाओं के बीच संबंधों, बंदरगाह दौरों सहित रक्षा सहयोग मजबूत होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया, जो तकनीकी सहयोग, सह-उत्पादन और सह-विकास परियोजनाओं के लिए साझेदारी को बढ़ावा देगा। इनमें हेलीकॉप्टर, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, समुद्री हथियार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने औद्योगिक मजबूती के माध्यम से महत्वपूर्ण अवसंरचना और उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।

दोनों पक्ष संयुक्त रक्षा समिति और सैन्य सहयोग समूह के काम के पूरक के रूप में एक वार्षिक उच्च स्तरीय सैन्य संरचित संवाद स्थापित करने की व्यवहार्यता की जांच करने और संयुक्त अभ्यास तथा अंतर-बल पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग, समन्वय और समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने के उद्देश्य से समुद्री सुरक्षा संवाद शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

सुरक्षा

दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और आतंकवादियों, आतंकवादी समूहों और उनके सहयोगियों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध व्यवस्था में सूचीबद्ध लोग शामिल हैं, के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने सभी देशों से वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के दिशानिर्देशों के अनुरूप, आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने, आतंकवादी नेटवर्क को रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए काम जारी रखने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने के लिए भारत और इटली के बीच स्थायी टास्क फोर्स की पहली बैठक तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की आगामी बैठक का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने इटली की 'गार्डिया डी फिनान्ज़ा' और भारत के 'प्रवर्तन निदेशालय' (ईडी) के बीच एक समझौता ज्ञापन के संपन्न होने का स्वागत किया और वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान और पारस्परिक संरक्षण पर समझौते तथा पुलिस सहयोग को मजबूत करने पर समझौते के शीघ्र संपन्न होने की उम्मीद जताई। उन्होंने प्रत्यर्पण संधि और पारस्परिक कानूनी सहायता संधि समेत अन्य समझौतों पर चल रही चर्चाओं का भी स्वागत किया।

प्रवासन और गतिशीलता

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से एसटीईएम क्षेत्रों में छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल कामगारों की आवाजाही बढ़ाने तथा श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई। इसमें भारत से इटली जाने वाली नर्सों की आवाजाही को सुगम बनाने संबंधी विशेष संयुक्त आशय घोषणा भी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने संबंधित एजेंसियों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर जारी चर्चाओं का स्वागत किया।

उन्होंने "आईसीआई- इटली कॉल्स इंडिया: ए यूनिवर्सिटी-एंटरप्राइज टैलेंट ब्रिज" पहल की शुरुआत का स्वागत किया, जिसका उद्देश्य इतालवी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की प्रतिभा को मार्गदर्शन, उपयुक्त अवसरों से जोड़ने और इतालवी उद्यमों में योग्य एकीकरण के ठोस रास्ते उपलब्ध कराकर बढ़ावा देना है।

उन्होंने सुरक्षित और कानूनी प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए अनियमित प्रवासन, श्रम शोषण और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए सहयोग को मजबूत करने की संभावना पर भी चर्चा की।

संस्कृति और शैक्षिक आदान-प्रदान

दोनों नेताओं ने संस्कृति को द्विपक्षीय संवाद के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया और लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने 2026 में वेनिस कला बिएनले (वेनिस आर्ट बिएनले) में भारतीय राष्ट्रीय पवेलियन की सराहना की। दोनों नेताओं ने 2027 को “भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने की मंशा व्यक्त की। इसके तहत विभिन्न पहलों का व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और भारत तथा इटली के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर एक बड़े प्रदर्शनी आयोजन का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसे दोनों देशों के संस्कृति मंत्रालय संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।

दोनों नेताओं ने संस्थाओं, विशेषज्ञों और रचनात्मक उद्योगों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने के लिए एक इटली-भारत सांस्कृतिक मंच के संगठन को प्रोत्साहित किया। दोनों नेताओं ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारतीय और इतालवी स्थलों के बीच ट्विनिंग कार्यक्रम (ट्विनिंग प्रोग्राम) की शुरुआत की सराहना की, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करना है।

दोनों नेता दोनों देशों के बीच फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग को और विकसित करने पर सहमत हुए, जो उनके उद्योगों की ताकत और नवीन क्षमताओं तथा द्विपक्षीय सह-उत्पादन समझौते द्वारा प्रदान किए गए कानूनी ढांचे पर आधारित है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च शिक्षा में सहयोग को मजबूत करने की अपनी मंशा दोहराई और उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान पर भारत-इटली रोडमैप को अपनाने का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के विश्वविद्यालयों और उत्कृष्ट संस्थानों को भारत की नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया।

भारत-यूरोपीय संघ संबंध

नेताओं ने 27 जनवरी 2026 को भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में सहमति व्यक्त किए गए नए संयुक्त भारत-यूरोपीय संघ व्यापक रणनीतिक एजेंडे और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन का स्वागत किया। यह समझौता बाजार पहुंच बढ़ाने, व्यापार बाधाओं को कम करने और विविधीकृत मूल्य श्रृंखलाओं तथा नए बाजार अवसरों के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा और मजबूती को सुदृढ़ कर संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

उन्होंने व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आर्थिक सुरक्षा में सहयोग के प्रमुख मंच के रूप में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद को मजबूत करने के समर्थन की पुनर्पुष्टि की। नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी का स्वागत किया और गतिशीलता सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की, जिसमें व्यापक गतिशीलता ढांचे पर समझौता ज्ञापन भी शामिल है।

बहुपक्षीय सहयोग

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रतिनिधिक और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए उसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों नेताओं ने बहुपक्षवाद की रक्षा करने और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र और जी20 सहित अन्य वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।

अफ्रीका को दोनों देशों द्वारा दी जाने वाली रणनीतिक प्राथमिकता को स्वीकार करते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अफ्रीका में भारत की विकास साझेदारी और इटली की 'मैट्टेई योजना' के अनुरूप डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई), कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कनेक्टिविटी तथा बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय पहलों में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

नेताओं ने यूएनसीएलओएस सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप, एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुनपुष्टि की। उन्होंने भारत-प्रशांत महासागर पहल के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग स्तंभ में अपनी निरंतर साझेदारी की उम्मीद जताई।

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति और उसके क्षेत्र तथा विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने 8 अप्रैल 2026 को घोषित युद्धविराम का स्वागत किया और पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक आपूर्ति के सामान्य प्रवाह को फिर से शुरू करने का भी आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर चिंता व्यक्त की, जो लगातार अत्यधिक मानवीय पीड़ा और नकारात्मक वैश्विक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप संवाद और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति जताई।

निष्कर्ष

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।