मैं गौरवशाली लोकतंत्र और मित्र राष्ट्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों के समक्ष मौजूद होकर बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ: प्रधानमंत्री
लोकतंत्र भारत के लिए जीवन शैली है: प्रधानमंत्री
भारत तथा त्रिनिदाद और टोबैगो के रिश्‍ते सदियों पुराने संबंधों की बुनियाद पर आधारित हैं: प्रधानमंत्री
हम आधुनिक भारत के निर्माण के लिए महिलाओं को सशक्‍त बना रहे हैं: प्रधानमंत्री
हम अपने विकास को दूसरों के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखते हैं; और, ग्‍लोबल साउथ हमेशा हमारी प्राथमिकता रहेगी: प्रधानमंत्री
ग्‍लोबल साउथ उन्‍नति कर रहा है; वे नई और न्‍यायपूर्ण विश्व व्यवस्था देखना चाहते हैं: प्रधानमंत्री
महासागर ग्‍लोबल साउथ के लिए भारत का मार्गदर्शक दृष्टिकोण है: प्रधानमंत्री

महामहिम प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर जी,

सीनेट के माननीय अध्यक्ष श्री वेड मार्क,

माननीय अध्यक्ष श्री जगदेव सिंह,

माननीय मंत्रीगण,

संसद के सम्मानित सदस्य,

नमस्कार!

सुप्रभात!

 

एक गौरवशाली लोकतंत्र और मित्र राष्ट्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों, मैं आप सभी के समक्ष खड़े होकर बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ।

मैं भारत के 1.4 बिलियन लोगों की ओर से शुभकामनाएँ लेकर आया हूँ। मैं घाना के लोगों की ओर से भी हार्दिक शुभकामनाएँ लेकर आया हूँ, जिस देश की मैंने यहाँ आने से ठीक पहले यात्रा की थी।

मैं आभारी हूँ कि मैं इस प्रतिष्ठित रेड हाउस में आपसे बात करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री हूँ। यह ऐतिहासिक इमारत, स्वतंत्रता और सम्मान के लिए त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों के संघर्ष और बलिदान का साक्षी रहा है। पिछले छह दशकों में, यह मजबूती से खड़ा रहा है, क्योंकि आपने एक न्यायसंगत, समावेशी और समृद्ध लोकतंत्र का निर्माण किया है।

मित्रों,

इस महान राष्ट्र के लोगों ने दो उल्लेखनीय महिला राजनेताओं को चुना है - राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री। वे गर्व से खुद को भारतीय प्रवासियों की बेटियाँ कहती हैं। उन्हें अपनी भारतीय विरासत पर गर्व है। भारत में, हम उनके नेतृत्व, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा करते हैं। वे हमारे देशों के बीच आपसी संबंधों की जीवंत प्रतीक हैं, जो साझा जड़ों और साझा सपनों पर निर्मित हुए हैं।

सम्मानित सदस्यगण,

हमारे दोनों राष्ट्र, औपनिवेशिक शासन की छाया से उठकर अपनी गाथाएँ लिखने के लिए उभरकर सामने आये - साहस हमारी स्याही थी और लोकतंत्र हमारी लेखनी थी।

आज, हमारे दोनों राष्ट्र आधुनिक दुनिया में गौरवशाली लोकतंत्र और शक्ति के स्तंभ के रूप में मौजूद हैं। कुछ महीने पहले, आपने चुनावों में भाग लेकर लोकतंत्र का उत्सव मनाया। मैं इस देश के लोगों को उनकी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता - शांति, स्थिरता और समृद्धि - के लिए बधाई देता हूँ। मैं इस प्रतिष्ठित सदन के नवनिर्वाचित सदस्यों को भी बधाई देता हूँ।

मैं प्रधानमंत्री कमला जी को एक बार फिर सरकार बनाने के लिए विशेष तौर पर बधाई देता हूँ। मैं उनकी निरंतर सफलता की कामना करता हूं, क्योंकि वे इस महान राष्ट्र को सतत विकास और समृद्धि की ओर ले जा रही हैं।

मित्रों,

जब मैं अध्यक्ष की कुर्सी पर अंकित सुनहरे शब्दों को देखता हूँ:

"भारत के लोगों की ओर से त्रिनिदाद और टोबैगो के लोगों के लिए",

मुझे गहरी भावना की अनुभूति होती है। वह कुर्सी सिर्फ फर्नीचर का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि हमारे दोनों देशों के बीच मित्रता और विश्वास का शक्तिशाली प्रतीक है। ये शब्द उस बंधन को व्यक्त करते हैं, जो एक लोकतंत्र दूसरे लोकतंत्र के लिए महसूस करता है।

आप सभी जानते हैं…

भारतीयों के लिए लोकतंत्र, सिर्फ एक राजनीतिक मॉडल भर नहीं है।

हमारे लिए, ये जीवन जीने का तरीका है…

हमारी हज़ारों वर्षों की महान विरासत है।

इस संसद में भी कई साथी ऐसे हैं...जिनके पूर्वज बिहार से हैं...

वो बिहार, जो महाजनपदों, यानि प्राचीन गणतंत्रों की भूमि है।

भारत में लोकतंत्र सिर्फ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं है। हमारे लिए यह जीवन जीने का तरीका है।' आपकी संसद में कुछ ऐसे सदस्य भी हैं, जिनके पूर्वज भारत के बिहार राज्य से थे, जो वैशाली जैसे केन्द्रों के लिए प्रसिद्ध है।

दोस्तों,

हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों में एक स्वाभाविक गर्मजोशी है। मुझे अवश्य कहना चाहिए कि भारतीय वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के सबसे जोशीले प्रशंसकों में से हैं! हम पूरे दिल से उनका उत्साहवर्धन करते हैं, सिवाय इसके कि जब वे भारत के खिलाफ खेल रहे हों।

हमारे दोनों देशों के बीच संबंध सदियों पुराने बंधनों की नींव पर बने हैं। 180 साल पहले, भारतीय एक लंबी और कठिन यात्रा के बाद पहली बार इस भूमि पर पहुंचे थे। समुद्र के पार, भारतीय धुनें कैरेबियाई लय के साथ खूबसूरती से घुलमिल गई थीं।

यहां भोजपुरी ने क्रियोल के साथ सामंजस्य स्थापित किया।

दाल पूरी, डबल्स के साथ मिल गयी!

और, तबला ने स्टील पैन का साथ दिया!

आज, भारतीय मूल के लोग लाल, काले और सफेद झंडे के गौरवशाली वाहक हैं!

राजनीति से लेकर कविता तक, क्रिकेट से लेकर वाणिज्य तक, कैलिप्सो से लेकर चटनी तक, वे हर क्षेत्र में योगदान देते हैं। वे उस जीवंत विविधता के अभिन्न अंग हैं, जिसका आप सभी सम्मान करते हैं। साथ मिलकर, आपने एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया है, जो अपने आदर्श वाक्य, "हम साथ मिलकर आकांक्षा करते हैं, हम इसे साथ मिलकर हासिल करते हैं" पर आगे बढ़ता है।

मित्रों,

आज महामहिम राष्ट्रपति महोदया ने मुझे इस देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया। मैंने इसे 1.4 बिलियन भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया।

अब, मैं अपार कृतज्ञता के साथ इसे हमारे दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता और पैतृक संबंधों को समर्पित करता हूँ।

मित्रों,

मुझे इस सदन में इतनी सारी महिला सदस्यों को देखकर बहुत खुशी हो रही है। महिलाओं के प्रति सम्मान भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित है। हमारे महत्वपूर्ण पवित्र ग्रंथों में से एक, स्कंद-पुराण में कहा गया है:

दशपुत्र समा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन् |

यत् फलं लभते मर्त्यः तत् लभ्यं कन्या एकया ||

इसका अर्थ है, एक बेटी 10 बेटों के बराबर खुशी लाती है। हम आधुनिक भारत के निर्माण के लिए महिलाओं के हाथ मजबूत कर रहे हैं।

अंतरिक्ष से लेकर खेल तक, स्टार्टअप से लेकर विज्ञान तक, शिक्षा से लेकर उद्यम तक, विमानन से लेकर सशस्त्र बलों तक, वे विभिन्न क्षेत्रों में भारत को एक नए भविष्य की ओर ले जाने का नेतृत्व कर रही हैं। आपकी तरह, हमारे पास एक महिला है, जो साधारण जीवन से ऊपर उठकर हमारी राष्ट्रपति बनीं।

दो साल पहले भारतीय संसद ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। हमने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्णय लिया। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आने वाली पीढ़ियों में अधिक से अधिक महिलाएं देश की नियति और दिशा तय करेंगी।

भारत में जमीनी स्तर पर भी महिलाएँ अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। लगभग 15 लाख निर्वाचित महिलाएँ स्थानीय शासन संस्थाओं को शक्ति प्रदान करती हैं। हम महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के युग में हैं। यह भी उन महत्वपूर्ण विषयों में से एक था, जिसे हमने जी20 की अध्यक्षता के दौरान आगे बढ़ाया।

हम भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का एक नया मॉडल विकसित कर रहे हैं। अपनी जी20 अध्यक्षता के दौरान भी इस मॉडल की सफलता को हमने पूरी दुनिया के सामने रखा था।

सम्मानित सदस्यगण,

आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। उद्यम का हर क्षेत्र, हर भौगोलिक क्षेत्र और हर समाज इस विकास गाथा का हिस्सा है।

भारत का विकास समावेशी और जन-केंद्रित है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की एक हाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की सामाजिक सुरक्षा और कल्याण छत्रछाया में 950 मिलियन लोग शामिल हैं। यह लगभग 1 बिलियन लोग हैं, जो दुनिया के अधिकांश देशों की आबादी की तुलना में अधिक है!

ऐसी समावेशी वृद्धि के लिए हमारा दृष्टिकोण हमारे देश तक ही सीमित नहीं है। हम अपने विकास को दूसरों के प्रति जिम्मेदारी के रूप में भी देखते हैं। और, हमारी प्राथमिकता हमेशा ‘वैश्विक दक्षिण’ रहेगी।

इसी भावना के साथ, हम त्रिनिदाद और टोबैगो के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ कर रहे हैं। हमारा व्यापार बढ़ता रहेगा। हम अपने व्यवसायों को इस देश में और अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। हमारी विकास साझेदारी का विस्तार होगा। प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और कौशल विकास मानव विकास को अपने केंद्र में रखेंगे। स्वास्थ्य हमारी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और रहेगा।

कई भारतीय डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवा कर्मी यहाँ विशिष्टता के साथ सेवा कर रहे हैं। हमें खुशी है कि आपने भारतीय चिकित्सा मानकों को मान्यता देने का फैसला किया है। इससे सभी को उच्च गुणवत्ता वाली, सस्ती दवाइयाँ मिल सकेंगी।

हम यूपीआई डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने के आपके निर्णय का भी स्वागत करते हैं। यह एक बड़ा कदम है। यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है।

इस प्लेटफ़ॉर्म की मदद से, भारत दुनिया में वास्तविक समय पर सबसे ज़्यादा डिजिटल भुगतान करने वाला देश बन गया है। आज भारत में आम बेचने वालों के पास भी क्यूआर कोड हैं। यदि आप उन्हें नकद में भुगतान करने की कोशिश करेंगे, तो वे आपसे यूपीआई का इस्तेमाल करने के लिए कहेंगे, क्योंकि उनके पास फुटकर पैसे नहीं हैं!

हम अन्य डिजिटल नवाचारों पर भी सहयोग करने के इच्छुक हैं। जैसे-जैसे भारत वैश्विक दक्षिण में विकास और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एआई उपकरण विकसित करेगा, त्रिनिदाद और टोबैगो हमारे लिए एक प्राथमिकता वाला देश होगा।

हम कृषि, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण में अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे। भारत की मशीनरी आपके कृषि उद्योग को सहायता प्रदान करेगी। और, क्योंकि विकास सम्मान के बारे में है, इसलिए हम यहाँ दिव्यांग नागरिकों के लिए एक कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन करेंगे।

हमारे लिए, आपके साथ हमारे सहयोग की कोई सीमा नहीं है। हम हमेशा आपकी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं से निर्देश प्राप्त करेंगे।

मित्रों,

हमारे देशों के बीच तालमेल बहुत आशाजनक है। कैरीबियाई क्षेत्र के एक प्रमुख देश और लैटिन अमेरिका के लिए एक सेतु के रूप में, त्रिनिदाद और टोबैगो में बहुत संभावनाएं हैं। मुझे यकीन है कि हमारे संबंध हमें व्यापक क्षेत्र के साथ एक मजबूत संबंध बनाने में मदद करेंगे।

दूसरे भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन की गति पर आगे बढ़ते हुए, हम उन पहलों पर सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो व्यापार और निवेश को बढ़ाते हों, अवसंरचना और गतिशीलता का निर्माण करते हों, सामुदायिक विकास परियोजनाओं को लागू करते हों और सबसे बढ़कर, बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और कौशल विकास का समर्थन करते हों।

मित्रों,

मैं हमारी साझेदारी को एक बड़े वैश्विक परिदृश्य में भी देखता हूं। दुनिया में बदलाव का पैमाना और गति अभूतपूर्व है। राजनीति और सत्ता की प्रकृति में मौलिक बदलाव हो रहे हैं। मुक्त व्यापार दबाव में है। वैश्विक विभाजन, विवाद और असमानताएं बढ़ रही हैं।

दुनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों का सामना कर रही है। आतंकवाद एक गंभीर खतरा बना हुआ है। अतीत के औपनिवेशिक शासन भले ही खत्म हो गए हों, लेकिन उनकी छाया नए रूपों में अभी भी है।

अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा में नई चुनौतियां हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) नए अवसरों के साथ-साथ नये जोखिम भी पैदा कर रही है। पुरानी संस्थाएं शांति और प्रगति प्रदान करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

साथ ही, वैश्विक दक्षिण उभर रहा है। वे एक नई और निष्पक्ष विश्व व्यवस्था देखना चाहते हैं। जब संयुक्त राष्ट्र 75 साल का हुआ, तो विकासशील दुनिया में बड़ी उम्मीद जगी थी। एक उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित सुधार साकार होंगे, उनकी आवाज आखिरकार सुनी जाएगी। लेकिन वह उम्मीद निराशा में बदल गई है। विकासशील दुनिया की आवाज हाशिये पर है। भारत ने हमेशा इस अंतर को पाटने की कोशिश की है।

भारत के लिए, महासागर (एमएएचएएसएजीएआर) - क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति, वैश्विक दक्षिण के लिए मार्गदर्शक विज़न है। जब भी हमें अवसर मिला, हमने वैश्विक दक्षिण को आवाज़ दी है।

अपनी जी-20 अध्यक्षता के दौरान, हमने वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को वैश्विक निर्णय लेने के केंद्र में लाया। महामारी के दौरान, अपने 1.4 बिलियन लोगों की देखभाल करते हुए, भारत ने 150 से अधिक देशों को टीके और दवाइयाँ प्रदान कीं। आपदा के समय, हमने सहायता, राहत और एकजुटता के साथ तेज़ी से जवाबी प्रतिक्रिया दी है। हमारी विकास साझेदारी मांग-संचालित, सम्मानजनक और बिना किसी शर्त के है।

सम्मानित सदस्यगण,

अब समय आ गया है कि हम साथ मिलकर काम करें, ताकि वैश्विक दक्षिण को सही जगह पर उसका उचित स्थान मिले। जलवायु न्याय सुनिश्चित करने के लिए, ताकि बोझ उन लोगों पर न पड़े, जिन्होंने जलवायु संकट में सबसे कम योगदान दिया है। हम इस प्रयास में त्रिनिदाद और टोबैगो को एक महत्वपूर्ण भागीदार मानते हैं।

मित्रों,

हमारे दोनों देश आकार और भूगोल में भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हम अपने मूल्यों में गहराई से जुड़े हुए हैं। हम गरिमामयी लोकतंत्र हैं। हम संवाद, संप्रभुता, बहुपक्षवाद और मानवीय सम्मान में विश्वास करते हैं। संघर्ष के इस समय में, हमें इन मूल्यों के प्रति सच्ची भावना बनाए रखनी चाहिए।

आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। इसी रेड हाउस ने खुद आतंक की विभीषिका और निर्दोष लोगों को जान गवांते देखा है। हमें आतंकवाद को किसी भी तरह की शरण या स्थान न देने के लिए एकजुट होना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारे साथ खड़े होने के लिए, हम इस देश के लोगों और सरकार को धन्यवाद देते हैं।

मित्रों,

हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया, बलिदान दिया और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन के सपने देखे। भारत तथा त्रिनिदाद और टोबैगो दोनों ने उस भविष्य की यात्रा पर एक लंबा सफर तय किया है, जिसके बारे में हमने अपने लोगों से वादा किया था। लेकिन हमें अभी भी बहुत कुछ करना है – स्वयं भी और साथ मिलकर भी।

संसद के सदस्यों के रूप में, आप सभी की उस भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका है। अयोध्या से अरिमा तक, गंगा के घाटों से पारिया की खाड़ी तक, हमारे संबंध और भी प्रगाढ़ हों और हमारे सपने और भी ऊंचे हों।

इस विचार के साथ, मैं आपको एक बार फिर से इस सम्मान के लिए धन्यवाद देता हूं। जैसा कि आप यहां शालीनता और गर्व के साथ कहते हैं - "उचित सम्मान।"

धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Indian economy, banks well positioned to tackle West Asia crisis, trade risks: RBI Governor Malhotra

Media Coverage

Indian economy, banks well positioned to tackle West Asia crisis, trade risks: RBI Governor Malhotra
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफी भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक अनमोल धरोहर बनेगी: पीएम मोदी
August 12, 2026
Today, we have the opportunity to release the autobiography of Shri Ram Nath Kovind ji; I am happy to be a part of this program: PM
His journey reflects a life dedicated to public service and the progress of our nation:PM
My prolonged acquaintance with Kovind Ji and his special affection and warmth towards me have been my greatest assets: PM
महात्मा गांधी, बाबासाहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने एक ऐसे नए भारत का सपना देखा था जहाँ सबसे गरीब और सबसे वंचित लोग भी शिखर तक पहुँच सकें: पीएम मोदी
कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने न केवल खुद का जीवन बदला है, बल्कि भारत के लिए अपने सपने और विजन को साकार करने में भी अहम भूमिका निभाई है: पीएम मोदी


हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ कोविंद जी, लोकसभा के अध्यक्ष आदरणीय ओम बिरला जी, श्रीमती सविता कोविंद जी, सभाग्रह में सभी वरिष्ठ जन बैठे हैं, सबका उल्लेख नहीं कर पाऊंगा, लेकिन मेरे लिए बहुत आनंद है कि एक पारिवारिक कार्यक्रम लग रहा है।

भाइयों-बहनों,

आज हमें श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। कोविंद जी से मेरा बहुत लंबा परिचय रहा है, उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और इस सबके साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह, उनकी आत्मीयता, ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है। मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफ़ी अपने आप में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी। कोविंद जी की जीवन यात्रा, समाज और राष्ट्र के लिए उनका योगदान, ऐसा कितना कुछ है जिसके बारे में मैं विस्तार से बात कर सकता हूं, लेकिन बुक रिलीज़ में केवल ‘कर्टन रेज़र’ ही होना चाहिए। आप सब किताब का पूरा लाभ पढ़कर ही लें, तो ही ज्यादा अच्छा है।

साथियों,

कोविंद जी की जीवन यात्रा को आप उनके शब्दों में जानें, उनकी लेखनी को, उनके अनुभवों को देश की नई पीढ़ी पढ़े, इससे हर किसी को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। मैं रामनाथ कोविंद जी को इस आत्मकथा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी इस पुस्तक को बहुत ही सटीक नाम दिया है- “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” कहने का भाव ये कि जीवन और जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली जीत, भारत के गणतंत्र की है, भारत के लोकतंत्र की है।

साथियों,

हम सब अक्सर अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है, लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं और जीवन की मुश्किलों के लिए, कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन, जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हों, तब व्यक्ति समाज की कमियाँ निकालने में समय नहीं गँवाता, वो उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है, वो अपनी सफलता में समाज को बराबर का भागीदार मानता है। कोविंद जी की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं। आप उनका जीवन देखिए, एक बेहद सामान्य परिवार में, कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ। कोविंद जी ने अभी भी कुछ वर्णन किया और अपनी किताब में भी लिखा है, कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी माँ अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं। आखिर, एक सामान्य परिवार में, माँ के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में, आग में फंसकर उनकी माता जी की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं, छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना, माँ को इस तरह खो देना, ये कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही। उसके बावजूद भी, आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।

साथियों,

उनके जीवन का एक ऐसा दर्दनाक ये घटनाक्रम था, कोई भी इससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों ने मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की। इससे उन्होंने समाज की एकता और सौहार्द की ताकत को समझा। इस घटना के बाद कोविंद जी के जीवन में उनके पिता की भूमिका और बड़ी हो गई और जिस तरह से उन्होंने अपने परिवार को संभाला, बच्चों को संस्कार दिये, इसीलिए, कोविंद जी अपने पिता को अपना हीरो मानते हैं।

साथियों,

बचपन के इन संघर्षों के बीच, कोविंद जी ने शिक्षा को, अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, उन्होंने संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। और, एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना भी तब लोगों ने नहीं की थी। वो भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने।

साथियों,

इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व, उनकी सादगी ऐसे ही कायम रही। मुझे याद है प्रधानमंत्री के तौर पर मैं राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने जाता था। प्रोटोकॉल के हिसाब से जो बातें नहीं हो सकती हैं, वो बातें वो करते थे। वो प्रधानमंत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के दरवाजे तक आते थे। मैं शुरू में उनको प्रार्थना करता रहता था, प्लीज आप ऐसा मत कीजिए, लेकिन उन्होंने जीवन के आखिर तक अपनी उस विनम्रता को कभी छोड़ा नहीं। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने वहाँ अपने गुरुओं के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। गाँव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गाँव के सामान्य लोगों का धन्यवाद किया। पूरे देश ने वो भावुक दृश्य देखा था। उनके इस आचरण ने दुनिया के सामने भारत के संस्कारों की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है।

साथियों,

गुलामी के सैकड़ों साल में हमारे देश ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत कुछ खोया था। हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रबाई फुले, ऐसी कितनी ही महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुँचने का अवसर मिल सके। कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से केवल खुद का जीवन ही बदला, इतना नहीं है, उन्होंने सदियों के उस स्वप्न को, उस विज़न को भी साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। और इस दिशा में हम सबके प्रयास अभी भी जारी हैं। हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।

साथियों,

ऐसे युवाशक्ति के निर्माण के लिए जो प्रेरणा चाहिए, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी उसका अहम स्रोत बन सकती है।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी जीवनी में मोरारजी भाई देसाई के साथ अनुभवों के बारे में भी इसमें विस्तार से बताया है। कोविंद जी के भीतर देशसेवा की जो भावना थी, मोरारजी भाई के साथ काम करके उन्हें जो सीखने को मिला, जो रास्ता मिला। कोविंद जी ने राजनीति और समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया। वो अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे। सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में उनका कार्यकाल गवाह है। राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूप में भी हमें उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा दिखाई देती रही। यहाँ तक कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ One Nation, One Election जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। देश को जगा रहे हैं। ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मैं मानता हूँ, कोविंद जी की इस कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुये ऑटोबायोग्राफ़ी के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। कोविंद जी ने ये काम हम सबके लिए किया है, क्योंकि उनके जीवन में ऐसा कितना कुछ है, जिसमें गरीब वंचित तबके से आए तमाम लोग अपने जीवन की परछाई देख सकते हैं। कैसे एक साधारण परिवार मुश्किल हालातों में भी जीवन की शुचिता और ईमानदारी से समझौता नहीं करता, कैसे वही आदर्श आगे चलकर हमारे जीवन का आधार बनते हैं, हमारे कठिन समय के मूल्य किस तरह जीवनभर हमें रोशनी देते हैं, कैसे इस पवित्रता से हमें राष्ट्र सेवा की शक्ति मिलती है। अलग-अलग पदों का दायित्व निभाते हुए, कोविंद जी ने समाज को निरंतर इसकी प्रेरणा दी है।

साथियों,

मुझे विश्वास है, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी, इसमें उनके जीवन की ही नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की भी अहम स्मृतियाँ सुरक्षित होंगी। मैं एक बार फिर उन्हें उनकी आत्मकथा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। और मैं खास करके युवा पीढ़ी से आग्रह करूंगा, रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं। इस शॉर्टकट के युग में भी एक बात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद कर के जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते। तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट। और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है, तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसका भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। ऑटोबायोग्राफी उस कालखंड की इतिहास की घटनाओं को अलग तरीके से समझने का अवसर देती है। इतिहास से काफी निकट होता है वो कालखंड बायोग्राफी का और इसलिए मैं जरूर चाहूंगा कि कोविंद जी की जो मेहनत है, वो आने वाली पीढ़ियों को काम आए, युवा पीढ़ी को विशेष रूप से काम आए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।