योग का अर्थ ही है - ‘समत्वम् योग उच्यते’ अर्थात, अनुकूलता-प्रतिकूलता, सफलता-विफलता, सुख-संकट, हर परिस्थिति में समान रहने, अडिग रहने का नाम ही योग है: प्रधानमंत्री मोदी
एक सजग नागरिक के रूप में हम परिवार और समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे, हम प्रयास करेंगे कि Yoga at home and Yoga with family को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ, हम ज़रूर सफल होंगे, हम ज़रूर विजयी होंगे: पीएम मोदी
आप प्राणायाम को अपने daily अभ्यास में जरूर शामिल करिए, और अनुलोम-विलोम के साथ ही दूसरी प्राणायाम techniques को भी सीखिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एकजुटता का दिन है। यह वैश्विक भाईचारे का दिन है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के कारण इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मंच के माध्यम से मनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग अपने पूरे परिवार के साथ अपने घरों में योग का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग हम लोगों को एक साथ लाया है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर से “माई लाइफ - माय योगा” वीडियो ब्लॉगिंग प्रतियोगिता में लोगों की भारी भागीदारी योग की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम सबको बड़े आयोजन से दूर रहना चाहिए और पूरे परिवार के साथ घर पर ही योग का अभ्यास करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की इस वर्ष की थीम 'घर पर योग और परिवार के साथ योग' है। पीएम ने कहा कि योग पारिवारिक बंधन को मजबूत करता है क्योंकि परिवार में बच्चे, युवा, बुजुर्ग योग का अभ्यास करने के लिए एक साथ आते हैं और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। योग भावनात्मक स्थायित्व को भी बढ़ावा देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। हमें अपने दैनिक जीवन में प्राणायाम को अवश्य शामिल करना चाहिए। प्राणायाम योग या श्वास संबंधी व्यायाम हमारे श्वसन तंत्र को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में यह अधिक प्रासंगिक है क्योंकि शरीर का श्वसन तंत्र ही है जो कोविड-19 वायरस से काफी बुरी तरह प्रभावित होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि योग एकता की शक्ति के रूप में उभरा है। यह मानवीय संबंधों को प्रगाढ़ करता है क्योंकि यह किसी से कोई भेदभाव नहीं करता है। यह जाति, रंग, लिंग, विश्वास और राष्ट्र से परे होता है। कोई भी योग को अपना सकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने स्वास्थ्य और भरोसे के तार ठीक कर सकते हैं तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया स्वस्थ और खुशहाल मानवता की सफलता का गवाह बनेगी। ऐसा करने में योग निश्चित रूप से हमारी मदद कर सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जागरूक नागरिक के रूप में हम एक परिवार और एक समाज के रूप में एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। हम ‘घर पर योग और परिवार के साथ योग’ को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि हम निश्चित रूप से सफल होंगे, हम निश्चित रूप से जीतेंगे।

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