प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर विचार व्यक्त किया है कि असीम ज्ञान साझा किए जाने या विस्तारित होने पर भी अपनी पूर्णता को बरकरार रखते हुए अप्रभावित रहता है।
श्री मोदी ने कहा कि मौजूदा ज्ञान से सीखना और नए परिणाम उत्पन्न करना अनंत नई संभावनाओं और नवाचारों को जन्म देता है, जबकि मूल बुद्धिमत्ता वही रहती है।
प्रधानमंत्री ने ईशा उपनिषद के शाश्वत ज्ञान का आह्वान करते हुए पवित्र संस्कृत श्लोक का उद्धरण दिया:
“पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥”
पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
— Narendra Modi (@narendramodi) February 20, 2026
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ pic.twitter.com/JqueNbycVb


