प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर भारत के गौरवशाली समुद्री इतिहास का स्मरण किया है। भारत के आर्थिक विकास में समुद्री सेक्टर के महत्त्व का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में भारत सरकार ने बंदरगाह-केंद्रित विकास पर ध्यान दिया है, जो आर्थिक विकास तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिये बहुत जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत सरकार समुद्री इको-सिस्टम और विविधता को सुनिश्चित करने के लिये समुचित देखभाल कर रही है।

आबद्ध ट्वीटों में प्रधानमंत्री ने कहा हैः

“आज, राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर हम अपने गौरवशाली समुद्री इतिहास को याद कर रहे हैं तथा भारत की आर्थिक वृद्धि में समुद्री सेक्टर के महत्त्व को रेखांकित कर रहे हैं। पिछले आठ वर्षों में समुद्री सेक्टर ने नई ऊचाइयां छुई हैं तथा कारोबार और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ाने में योगदान किया है।”

“पिछले आठ वर्षों से भारत सरकार बंदरगाह-केंद्रित विकास पर ध्यान दे रही है, जिसमें बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाना और मौजूदा प्रणालियों को और कारगर बनाना शामिल है। नये बाजारों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिये जलमार्गों का उपयोग किया जा रहा है।”

“एक तरफ हम आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिये समुद्री सेक्टर की क्षमता का उपयोग कर रहे हैं, साथ ही भारत के गौरव समुद्री इको-सिस्टम और विविधता को सुनिश्चित करने के लिये समुचित देखरेख की जा रही है, ताकि वे सुरक्षित रहें।”

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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा भावना के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निःस्वार्थ सेवा के गुण और दूसरों के कल्याण के लिए बिना किसी अपेक्षा के कार्य करने के महान आदर्श को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

"किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥"

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया:

किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥