प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता जी की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री ने उन्हें एक ऐसे करिश्माई नेता और उत्कृष्ट प्रशासक के रूप में याद किया जिन्होंने लोगों के दिलों में अमिट स्थान बनाया है।

श्री मोदी ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में जे. जयललिता के परिवर्तनकारी कार्यकाल का उल्लेख किया है और बताया है कि उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर दृढ़ ध्यान केंद्रित करते हुए उत्कृष्ट कल्याणकारी शासन का प्रबल समर्थन किया।

प्रधानमंत्री ने उनके साथ हुई मुलाकातों को प्रसन्नतापूर्वक याद किया। श्री मोदी ने इस महीने के 'मन की बात' कार्यक्रम में उनके जीवन और कार्यों के बारे में अपने विशिष्ट विचार भी साझा किए।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा है:

जयललिता जी की जयंती पर उन्हें स्मरण कर रहा हूं। उन्होंने एक करिश्माई नेता और उत्कृष्ट प्रशासक के रूप में अनगिनत लोगों के दिलों और दिमागों में अपना स्थान बनाया है। उनका जीवन अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से परिपूर्ण था। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर विशेष ध्यान देते हुए कल्याणकारी शासन का नेतृत्व किया। वे करुणामयी और निर्णायक दोनों थीं। मुझे उनके साथ हुई मुलाकातों को स्मरण करके बहुत प्रसन्नता होती है।

इस महीने के #MannKiBaat कार्यक्रम में मैंने उनके बारे में यही कहा था।"

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम साझा किया, नवाचार में प्रतिभा और कड़े परिश्रम के तालमेल पर प्रकाश डाला
February 24, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज संस्कृत में सुभाषितम साझा किया है जिसमें इस बात पर बल दिया गया है कि नवाचार में सफलता प्रतिभा और निरंतर प्रयास दोनों के परिणामस्वरूप मिलती है।

प्रधानमंत्री ने इस कालातीत ज्ञान का भी उल्लेख किया है कि समुचित परिणाम प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्ति अपनी क्षमता के साथ कार्य भी करे। प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया संदेश इस प्रकार है:

यथाकेन न हस्तेन घाट सम्प्रपद्यते।

तथोग्यमपरित्यक्तं न फलं कर्मण: स्मृतम्।।

"जिस प्रकार एक हाथ से ताली नहीं बज सकती, उसी प्रकार नवाचार में सफलता बिना प्रयास के संभव नहीं है। प्रतिभा तभी फल देती है जब कड़े परिश्रम के साथ निरंतर प्रयास भी किया जाए।"

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा;

यथाकेन न हस्तेन घाट सम्प्रपद्यते।

तथोद्यमपरित्यक्तं न फलं कर्मणः स्मृतम्॥