"नई ऊर्जा, प्रेरणा और संकल्पों के आलोक में एक नया अध्याय आरंभ हो रहा है"
'आज संपूर्ण विश्‍व की दृष्टि भारत पर है। भारत के प्रति विश्‍व का दृष्टिकोण बदल गया है’
"इतने सारे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से देश में विकास के लिए एक नया वातावरण बनेगा"
"ये अमृत रेलवे स्टेशन अपनी विरासत पर गौरवान्वित होने और हर नागरिक में गर्व की भावना उत्‍पन्‍न करने के प्रतीक होंगे"
"हमारा बल भारतीय रेल को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर है"
"अब यह हमारा उत्‍तरदायित्‍व है कि हम रेलवे को एक बेहतर पहचान और आधुनिक भविष्य से जोड़ें"
"नए भारत में, विकास युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है, और युवा देश के विकास को नए पंख दे रहे हैं"
'अगस्त क्रांति, कृतज्ञता और कर्तव्य का महीना है। ऐसे कई ऐतिहासिक अवसर, जिन्‍होंने भारत के इतिहास को नई दिशा दी, अगस्त में घटित हुए’
"हमारा स्वतंत्रता दिवस हमारे तिरंगे और हमारे राष्ट्र की प्रगति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का समय है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी हमें हर घर पर तिरंगा फहराना है"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए देश भर के 508 रेलवे स्‍टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। 24,470 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित ये 508 स्टेशन 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश में 55, राजस्थान में 55, बिहार में 49, महाराष्ट्र में 44, पश्चिम बंगाल में 37, मध्य प्रदेश में 34, असम में 32, ओडिशा में 25, पंजाब में 22, गुजरात में 21, तेलंगाना में 21, झारखंड में 20, आंध्र प्रदेश में 18, तमिल नाडु में 18, हरियाणा में 15 और कर्नाटक में 13 स्टेशन शामिल हैं।

उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नया भारत, जो विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वह अमृत काल के उदय पर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘‘नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नए संकल्प हैं’’ और यह भारतीय रेल के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 1300 प्रमुख रेलवे स्टेशनों को अब आधुनिकता के साथ 'अमृत भारत स्टेशन' के रूप में पुनर्विकसित किया जाएगा और उन्हें नया जीवन मिलेगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि 1300 रेलवे स्टेशनों में से आज लगभग 25,000 करोड़ रुपये की लागत से 508 अमृत भारत स्टेशनों की आधारशिला रखी जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुनर्विकास परियोजना रेलवे के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक बड़ा अभियान होगा। यह देखते हुए कि देश के सभी राज्य इससे लाभान्वित होंगे, प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत से 55 अमृत स्टेशन, मध्य प्रदेश में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से 34 स्टेशन, महाराष्ट्र में 1,500 करोड़ रुपये की लागत से 44 स्टेशन और तमिल नाडु, कर्नाटक और केरल सहित अन्य राज्यों के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने रेल मंत्रालय की प्रशंसा की और इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए नागरिकों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने विश्‍व में भारत के बढ़ते कद और भारत में बढ़ती वैश्विक रुचि को रेखांकित किया। उन्होंने इसके लिए दो प्रमुख कारकों को श्रेय दिया। पहला, भारत के लोगों द्वारा एक स्थिर पूर्ण बहुमत वाली सरकार का चुनाव और दूसरा, सरकार ने महत्वाकांक्षी निर्णय लिए तथा लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप उनके विकास के लिए निरंतर कार्य किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय रेल भी इसका प्रतीक है। उन्होंने अपनी बातों को स्पष्ट करने के लिए रेल सेक्‍टर के विस्तार के तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में देश में बिछाई गई पटरियों की लंबाई दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन, पोलैंड, ब्रिटेन और स्वीडन में संयुक्त रेलवे नेटवर्क से अधिक है। भारतीय रेलवे में विस्तार परिप्रेक्ष्य को सामने रखते हुए, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केवल पिछले एक वर्ष में ही भारत ने दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त रेलवे नेटवर्क की तुलना में अधिक रेलवे ट्रैक बिछाए। उन्होंने कहा कि आज सरकार रेल यात्रा को सुगम बनाने के साथ-साथ सुखद बनाने के लिए भी काम कर रही है। उन्होंने कहा, "हमारा प्रयास रेलगाड़ी से स्टेशन तक सर्वोत्तम संभव अनुभव प्रदान करना है। उन्होंने प्लेटफार्मों पर बैठने की बेहतर जगह, उन्नत प्रतीक्षालयों और हजारों स्टेशनों पर नि:शुल्‍क वाईफाई का उल्लेख किया।

भारतीय रेल में हुए व्यापक विकास को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री लाल किले से इन उपलब्धियों के बारे में चर्चा करना पसंद करेगा। हालांकि, प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस कार्यक्रम के भव्य आयोजन के कारण वह आज ही रेलवे की उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने रेलवे के दर्जे को देश की जीवन रेखा बताते हुए कहा कि इसके साथ ही शहरों की पहचान उन रेलवे स्टेशनों से भी जुड़ी है जो समय व्‍यतीत होने के साथ शहरों की केंद्रस्‍थली बन गए हैं। इससे स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप प्रदान करना अनिवार्य हो गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इतने सारे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से देश में विकास के लिए एक नया वातावरण बनेगा क्योंकि वे आगंतुकों के बीच एक अच्छी प्रथम छाप छोड़ेंगे। अपग्रेड किए गए स्टेशनों से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' योजना कारीगरों की मदद करेगी और जिले की ब्रांडिंग में सहायता करेगी।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश ने आजादी का अमृत काल में अपनी विरासत पर गर्व करने का भी संकल्प लिया है। श्री मोदी ने कहा कि ये अमृत रेलवे स्‍टेशन अपनी विरासत पर गर्व करने और प्रत्‍येक नागरिक में गौरव की भावना भरने के प्रतीक होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत स्‍टेशन भारत की सांस्‍कृतिक और स्‍थानीय विरासत की झलक प्रस्‍तुत करेंगे। प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि जयपुर रेलवे स्टेशनों पर राजस्थान के हवा महल और आमेर किले की झलक देखने को मिलेगी, जम्मू-कश्मीर का जम्मू तवी रेलवे स्टेशन प्रसिद्ध रघुनाथ मंदिर से प्रेरित होगा और नगालैंड का दीमापुर स्टेशन क्षेत्र की 16 विभिन्न जनजातियों की स्थानीय वास्तुकला को प्रदर्शित करेगा। उन्‍होंने कहा कि प्रत्‍येक रेलवे स्‍टेशन प्राचीन विरासत के साथ-साथ देश की आधुनिक आकांक्षाओं का प्रतीक होगा। प्रधानमंत्री ने 'भारत गौरव यात्रा रेलगाडि़यों' को सुदृढ़ बनाने का उल्लेख किया जो ऐतिहासिक प्रासंगिकता के स्थानों और तीर्थस्थलों को जोड़ती है।

देश के आर्थिक विकास को गति देने में रेलवे की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रेलवे में रिकॉर्ड निवेश हुआ है। इस वर्ष रेलवे को 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट मिला, जो 2014 की तुलना में पांच गुना अधिक है। उन्‍होंने कहा कि आज समग्र दृष्टिकोण के साथ रेलवे के पूर्ण विकास के लिए काम किया जा रहा है। पिछले 9 वर्षों में लोकोमोटिव उत्पादन में 9 गुना की वृद्धि हुई है। आज 13 गुना अधिक एचएलबी कोचों का निर्माण किया जा रहा है।

पूर्वोत्‍तर में रेल विस्‍तार के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि लाइनों के दोहरीकरण, गेज परिवर्तन, विद्युतीकरण और नए मार्गों पर तेजी से काम चल रहा है। श्री मोदी ने कहा कि शीघ्र ही पूर्वोत्‍तर के सभी राज्‍यों की राजधानियां रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएंगी। उन्होंने बताया कि नगालैंड को 100 वर्ष बाद अपना दूसरा स्टेशन मिला है। उन्होंने कहा, "क्षेत्र में नई रेलवे लाइनों की कमीशनिंग में तीन गुना वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 9 वर्षों में 2200 किलोमीटर से अधिक समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया गया है, जिससे मालगाडि़यों के यात्रा समय में कमी आई है। अब दिल्ली एनसीआर से पश्चिमी पत्तनों पर 24 घंटे में माल पहुंच जाता है, जिसमें पहले 72 घंटे लगते थे। अन्य मार्गों पर भी समय में 40 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है, जिससे उद्यमियों, उद्योगपतियों और किसानों को अत्‍यधिक लाभ हो रहा है।

रेलवे पुलों की कमी के कारण आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले 6000 से भी कम रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज थे, लेकिन आज यह संख्या 10,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बड़ी लाइनों पर मानव रहित लेवल क्रॉसिंग की संख्या अब शून्य हो गई है। यात्रियों की सुविधा के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्यांगों की आवश्‍यकताओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारा जोर भारतीय रेल को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर है।" उन्होंने बताया कि 100 प्रतिशत रेल लाइन विद्युतीकरण बहुत जल्द हासिल कर लिया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप भारत में सभी रेलगाडि़यां केवल बिजली से चलेंगी। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि सौर पैनलों से बिजली पैदा करने वाले स्टेशनों की संख्या पिछले 9 वर्षों में 1200 से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का लक्ष्‍य निकट भविष्‍य में प्रत्‍येक रेलवे स्‍टेशन से हरित ऊर्जा का उत्‍पादन करना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लगभग 70,000 कोचों में एलईडी लाइटें लगाई गई हैं और 2014 की तुलना में ट्रेनों में जैव-शौचालयों की संख्या में 28 गुना वृद्धि हुई है। श्री मोदी ने रेखांकित किया कि सभी अमृत स्टेशन हरित भवनों के मानकों को पूरा करने के लिए बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘2030 तक, भारत एक ऐसा देश होगा जिसका रेलवे नेटवर्क शुद्ध शून्य उत्सर्जन पर चलेगा।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारतीय रेल ने दशकों तक हमें अपने प्रियजनों से जोड़ने का काम किया है, इसने देश को जोड़ने का काम किया है। अब यह हमारा उत्तरदायित्‍व है कि हम रेल को एक बेहतर पहचान और आधुनिक भविष्य से जोड़ें।’ उन्होंने नए संसद भवन, कर्तव्य पथ, युद्ध स्मारक और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी परियोजनाओं का विरोध किए जाने पर खेद व्‍यक्‍त किया। उन्होंने कहा, ‘नकारात्मक राजनीति से दूर, हमने देश के विकास के कार्य को एक मिशन के रूप में लिया है और वोट बैंक तथा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।’

यह रेखांकित करते हुए कि रेलवे ने अकेले 1.5 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है, प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे पर लाखों करोड़ रुपये का निवेश करके रोजगार भी पैदा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में केंद्र सरकार भी रोजगार मेले के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नौकरी देने का अभियान चला रही है। उन्‍होंने कहा, ‘‘यह एक बदलते भारत की तस्वीर है, जहां विकास युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है और युवा देश के विकास को नए पंख दे रहे हैं।’’

प्रधानमंत्री ने इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए इस कार्यक्रम में कई स्वतंत्रता सेनानियों और कई पद्म पुरस्कार विजेताओं की उपस्थिति का उल्‍लेख किया। प्रत्येक भारतीय के लिए अगस्त महीने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्रांति, कृतज्ञता और कर्तव्य का महीना है और कई ऐतिहासिक अवसरों से परिपूर्ण है जिसने भारत के इतिहास को एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उल्लेख किया जो 7 अगस्त को मनाया जाता है और स्वदेशी आंदोलन को समर्पित है। श्री मोदी ने कहा, ‘‘7 अगस्त की यह तिथि हर भारतीय के लिए वोकल फॉर लोकल होने के संकल्प को दोहराने का दिन है। उन्होंने गणेश चतुर्थी के पवित्र त्योहार का भी उल्लेख किया और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से गणेश चतुर्थी मनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी मूर्तियों को आजमाने का सुझाव दिया। उन्होंने स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और छोटे उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को खरीदने का भी सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने 9 अगस्त की चर्चा करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक तिथि थी, जब भारत छोड़ो आंदोलन आरंभ हुआ और इससे स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष में नई ऊर्जा उत्‍पन्‍न हुई। इससे प्रेरित, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरा देश हर बुराई, भ्रष्टाचार, वंशवाद और तुष्टिकरण के लिए भारत छोड़ो आंदोलन कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने आगामी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख किया और कहा कि हम उन अनगिनत लोगों का स्‍मरण करते हैं जिन्होंने विभाजन की भारी कीमत चुकाई। उन्‍होंने उन लोगों के योगदान को स्वीकार किया जिन्‍होंने इस बड़े आघात के बाद खुद को संभाला और अब देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें अपनी एकता को अक्षुण्ण रखने की जिम्मेदारी देता है। श्री मोदी ने कहा, ‘हमारा स्‍वतंत्रता दिवस, हमारे तिरंगे और हमारे राष्‍ट्र की प्रगति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का समय है। पिछले वर्ष की भांति इस बार भी हमें हर घर पर तिरंगा फहराना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर और फ्लैग मार्च में लोगों के उत्साह का उल्लेख किया और सभी से इस अभियान में जुड़ने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार ने इस धारणा को बदल दिया है कि नागरिकों द्वारा चुकाए गए कर को भ्रष्टाचार में बर्बाद कर दिया जाता है और आज लोग महसूस करते हैं कि उनके पैसे का उपयोग राष्ट्र निर्माण में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती सुविधाओं और जीवन यापन में सुगमता के कारण करों का भुगतान करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने उस समय का उल्‍लेख किया जब देश में दो लाख रुपये की आय पर कर लगता था जबकि आज सात लाख रुपये तक की आय पर आज कर नहीं लगता। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके बावजूद देश में एकत्र आयकर की राशि बढ़ रही है, और यह स्पष्ट संदेश जा रहा है कि देश में मध्यम वर्ग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस साल आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जो सरकार में विश्वास बढ़ने और देश में हो रहे नवोन्‍मेषण को दर्शाता है। आज लोग देख रहे हैं कि किस प्रकार देश में रेलवे का कायाकल्प हो रहा है, मेट्रो का विस्तार हो रहा है। उन्होंने नए एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के विकास का उल्लेख किया और कहा कि इस तरह के बदलाव करदाताओं के पैसे से विकसित होने वाले नए भारत की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इन 508 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण भी इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अमृत भारत स्टेशन भारतीय रेल के इस बदलाव को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।’

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री अक्सर अत्याधुनिक सार्वजनिक परिवहन के प्रावधान पर जोर देते रहे हैं। यह देखते हुए कि रेलवे देश भर के लोगों के लिए परिवहन का पसंदीदा साधन है, उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के महत्व पर बल दिया है। इस दृष्टिकोण के आधार पर, देश भर में 1309 स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की गई थी।

इस योजना के भाग के रूप में, प्रधानमंत्री ने 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी है। इन स्टेशनों का पुनर्विकास 24,470 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जाएगा। शहर के दोनों किनारों के उचित एकीकरण के साथ इन स्टेशनों को 'सिटी सेंटर' के रूप में विकसित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण रेलवे स्टेशन के आसपास केंद्रित शहर के समग्र शहरी विकास की समग्र दृष्टि से प्रेरित है।

इनमें उत्तर प्रदेश में 55, राजस्थान में 55, बिहार में 49, महाराष्ट्र में 44, पश्चिम बंगाल में 37, मध्य प्रदेश में 34, असम में 32, ओडिशा में 25, पंजाब में 22, गुजरात में 21, तेलंगाना में 21, झारखंड में 20, आंध्र प्रदेश में 18, तमिल नाडु में 18, हरियाणा में 15 और कर्नाटक में 13 स्‍टेशन शामिल हैं।

यह पुनर्विकास बेहतर तरह से डिजाइन किए गए ट्रैफिक सर्कुलेशन, इंटर-मोडल एकीकरण और यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए दिशा-निर्देश सुनिश्चित करने के साथ-साथ आधुनिक यात्री सुविधाएं प्रदान करेगा। स्टेशन भवनों के डिजाइन स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला से प्रेरित होंगे।

 

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“When Modi guarantees to make India the world’s third largest economic superpower, the goal is health for all and prosperity for all”

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

मंच पर उपस्थित गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी मनसुख मांडविया, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और संसद में मेरे साथी सी आर पाटिल, मंच पर विराजमान अन्य सभी वरिष्ठ महानुभाव, और राजकोट के मेरे भाइयों और बहनों, नमस्कार।

आज के इस कार्यक्रम से देश के अनेक राज्यों से बहुत बड़ी संख्या में अन्य लोग भी जुड़े हैं। कई राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय गवर्नर श्री, विधायकगण, सांसदगण, केंद्र के मंत्रीगण, ये सब इस कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हमारे साथ जुड़े हैं। मैं उन सभी का भी हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

एक समय था, जब देश के सारे प्रमुख कार्यक्रम दिल्ली में ही होकर रह जाते थे। मैंने भारत सरकार को दिल्ली से बाहर निकालकर देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है और आज राजकोट पहुंच गए। आज का ये कार्यक्रम भी इसी बात का गवाह है। आज इस एक कार्यक्रम से देश के अनेकों शहरों में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास होना, एक नई परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। कुछ दिन पहले ही मैं जम्मू कश्मीर में था। वहां से मैंने IIT भिलाई, IIT तिरुपति, ट्रिपल आईटी DM कुरनूल, IIM बोध गया, IIM जम्मू, IIM विशाखापट्टनम और IIS कानपुर के कैंपस का एक साथ जम्‍मू से लोकार्पण किया था। और अब आज यहां राजकोट से- एम्स राजकोट, एम्स रायबरेली, एम्स मंगलगिरी, एम्स भटिंडा, एम्स कल्याणी का लोकार्पण हुआ है। पांच एम्स, विकसित होता भारत, ऐसे ही तेज गति से काम कर रहा है, काम पूरे कर रहा है।

साथियों,

आज मैं राजकोट आया हूं, तो बहुत कुछ पुराना भी याद आ रहा है। मेरे जीवन का कल एक विशेष दिन था। मेरी चुनावी यात्रा की शुरुआत में राजकोट की बड़ी भूमिका है। 22 साल पहले 24 फरवरी को ही राजकोट ने मुझे पहली बार आशीर्वाद दिया था, अपना MLA चुना था। और आज 25 फरवरी के दिन मैंने पहली बार राजकोट के विधायक के तौर पर गांधीनगर विधानसभा में शपथ ली थी, जिंदगी में पहली बार। आपने तब मुझे अपने प्यार, अपने विश्वास का कर्जदार बना दिया था। लेकिन आज 22 साल बाद मैं राजकोट के एक-एक परिजन को गर्व के साथ कह सकता हूं कि मैंने आपके भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश की है।

आज पूरा देश इतना प्यार दे रहा है, इतने आशीर्वाद दे रहा है, तो इसके यश का हकदार ये राजकोट भी है। आज जब पूरा देश, तीसरी बार-NDA सरकार को आशीर्वाद दे रहा है, आज जब पूरा देश, अबकी बार-400 पार का विश्वास, 400 पार का विश्वास कर रहा है। तब मैं पुन: राजकोट के एक-एक परिजन को सिर झुकाकर नमन करता हूं। मैं देख रहा हूं, पीढ़ियां बदल गई हैं, लेकिन मोदी के लिए स्नेह हर आयु सीमा से परे है। ये जो आपका कर्ज है, इसको मैं ब्याज के साथ, विकास करके चुकाने का प्रयास करता हूं।

साथियों,

मैं आप सबकी भी क्षमा चाहता हूं, और सभी अलग-अलग राज्यों में माननीय मुख्यमंत्री और वहां के जो नागरिक बैठे हैं, मैं उन सबसे भी क्षमा मांगता हूं क्योंकि मुझे आज आने में थोड़ा विलंब हो गया, आपको इंतजार करना पड़ा। लेकिन इसके पीछे कारण ये था कि आज मैं द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करके, उन्हें प्रणाम करके राजकोट आया हूं। द्वारका को बेट द्वारका से जोड़ने वाले सुदर्शन सेतु का लोकार्पण भी मैंने किया है। द्वारका की इस सेवा के साथ-साथ ही आज मुझे एक अद्भुत आध्यात्मिक साधना का लाभ भी मिला है। प्राचीन द्वारका, जिसके बारे में कहते हैं कि उसे खुद भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था, आज वो समुद्र में डूब गई है, आज मेरा सौभाग्य था कि मैं समुद्र के भीतर जाकर बहुत गहराई में चला गया और भीतर जाकर मुझे उस समुद्र में डूब चुकी श्रीकृष्‍ण वाली द्वारका, उसके दर्शन करने का और जो अवशेष हैं, उसे स्पर्श करके जीवन को धन्य बनाने का, पूजन करने का, वहां कुछ पल प्रभु श्रीकृष्ण का स्मरण करने का मुझे सौभाग्य मिला। मेरे मन में लंबे अर्से से ये इच्छा थी कि भगवान कृष्ण की बसाई उस द्वारका भले ही पानी के भीतर रही हो, कभी न कभी जाऊंगा, मत्था टेकुंगा और वो सौभाग्य आज मुझे मिला। प्राचीन ग्रंथों में द्वारका के बारे में पढ़ना, पुरातत्वविदों की खोजों को जानना, ये हमें आश्चर्य से भर देता है। आज समंदर के भीतर जाकर मैंने उसी दृश्य को अपनी आंखों से देखा, उस पवित्र भूमि को स्पर्श किया। मैंने पूजन के साथ ही वहां मोर पंख को भी अर्पित किया। उस अनुभव ने मुझे कितना भाव विभोर किया है, ये शब्दों में बताना मेरे लिए मुश्किल है। समंदर के गहरे पानी में मैं यही सोच रहा था कि हमारे भारत का वैभव, उसके विकास का स्तर कितना ऊंचा रहा है। मैं समुद्र से जब बाहर निकला, तो भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद के साथ-साथ मैं द्वारका की प्रेरणा भी अपने साथ लेकर लाया हूं। विकास और विरासत के मेरे संकल्पों को आज एक नई ताकत मिली है, नई ऊर्जा मिली है, विकसित भारत के मेरे लक्ष्य से आज दैवीय विश्वास उसके साथ जुड़ गया है।

साथियों,

आज भी यहां 48 हज़ार करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स आपको, पूरे देश को मिले हैं। आज न्यू मुंद्रा-पानीपत पाइपलाइन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है। इससे गुजरात से कच्चा तेल सीधे हरियाणा की रिफाइनरी तक पाइप से पहुंचेगा। आज राजकोट सहित पूरे सौराष्ट्र को रोड, उसके bridges, रेल लाइन के दोहरीकरण, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अनेक सुविधाएं भी मिली हैं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद, अब एम्स भी राजकोट को समर्पित है और इसके लिए राजकोट को, पूरे सौराष्‍ट्र को, पूरे गुजरात को बहुत-बहुत बधाई! और देश में जिन-जिन स्‍थानों पर आज ये एम्स समर्पित हो रहा है, वहां के भी सब नागरिक भाई-बहनों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

साथियों,

आज का दिन सिर्फ राजकोट और गुजरात के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए भी ऐतिहासिक है। दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था का हेल्थ सेक्टर कैसा होना चाहिए? विकसित भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर कैसा होगा? इसकी एक झलक आज हम राजकोट में देख रहे हैं। आज़ादी के 50 सालों तक देश में सिर्फ एक एम्स था और भी दिल्ली में। आज़ादी के 7 दशकें में सिर्फ 7 एम्स को मंजूरी दी गई, लेकिन वो भी कभी पूरे नहीं बन पाए। और आज देखिए, बीते सिर्फ 10 दिन में, 10 दिन के भीतर-भीतर, 7 नए एम्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसलिए ही मैं कहता हूं कि जो 6-7 दशकों में नहीं हुआ, उससे कई गुना तेजी से हम देश का विकास करके, देश की जनता के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। आज 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 200 से अधिक हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इनमें मेडिकल कॉलेज हैं, बड़े अस्पतालों के सैटेलाइट सेंटर हैं, गंभीर बीमारियों के लिए इलाज से जुड़े बड़े अस्पताल हैं।

साथियों,

आज देश कह रहा है, मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी। मोदी की गारंटी पर ये अटूट भरोसा क्यों है, इसका जवाब भी एम्स में मिलेगा। मैंने राजकोट को गुजरात के पहले एम्स की गारंटी दी थी। 3 साल पहले शिलान्यास किया और आज लोकार्पण किया- आपके सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने पंजाब को अपने एम्स की गारंटी दी थी, भटिंडा एम्स का शिलान्यास भी मैंने किया था और आज लोकार्पण भी मैं ही कर रहा हूं- आपके सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने यूपी के रायबरेली को एम्स की गारंटी दी थी। कांग्रेस के शाही परिवार ने रायबरेली में सिर्फ राजनीति की, काम मोदी ने किया। मैंने रायबरेली एम्स का 5 साल पहले शिलान्यास किया और आज लोकार्पण किया। आपके इस सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने पश्चिम बंगाल को पहले एम्स की गारंटी दी थी, आज कल्याणी एम्स का लोकार्पण भी हुआ-आपके सेवक ने गारंटी पूरी कर दी। मैंने आंध्र प्रदेश को पहले एम्स की गारंटी दी थी, आज मंगलगिरी एम्स का लोकार्पण हुआ- आपके सेवक ने वो गारंटी भी पूरी कर दी। मैंने हरियाणा के रेवाड़ी को एम्स की गारंटी दी थी, कुछ दिन पहले ही, 16 फरवरी को उसकी आधारशिला रखी गई है। यानि आपके सेवक ने ये गारंटी भी पूरी की। बीते 10 वर्षों में हमारी सरकार ने 10 नए एम्स देश के अलग-अलग राज्यों में स्वीकृत किए हैं। कभी राज्यों के लोग केंद्र सरकार से एम्स की मांग करते-करते थक जाते थे। आज एक के बाद एक देश में एम्स जैसे आधुनिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। तभी तो देश कहता है- जहां दूसरों से उम्मीद खत्म हो जाती है, मोदी की गारंटी वहीं से शुरू हो जाती है।

साथियों,

भारत ने कोरोना को कैसे हराया, इसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में होती है। हम ये इसलिए कर पाए, क्योंकि बीते 10 वर्षों में भारत का हेल्थ केयर सिस्टम पूरी तरह से बदल गया है। बीते दशक में एम्स, मेडिकल कॉलेज और क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर के नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। हमने छोटी-छोटी बीमारियों के लिए गांव-गांव में डेढ़ लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए हैं, डेढ़ लाख से ज्यादा। 10 साल पहले देश में करीब-करीब 380-390 मेडिकल कॉलेज थे, आज 706 मेडिकल कॉलेज हैं। 10 साल पहले MBBS की सीटें लगभग 50 हज़ार थीं, आज 1 लाख से अधिक हैं। 10 साल पहले मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट सीटें करीब 30 हज़ार थीं, आज 70 हज़ार से अधिक हैं। आने वाले कुछ वर्षों में भारत में जितने युवा डॉक्टर बनने जा रहे हैं, उतने आजादी के बाद 70 साल में भी नहीं बने। आज देश में 64 हज़ार करोड़ रुपए का आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन चल रहा है। आज भी यहां अनेक मेडिकल कॉलेज, टीबी के इलाज से जुड़े अस्पताल और रिसर्च सेंटर, PGI के सैटेलाइट सेंटर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। आज ESIC के दर्जनों अस्पताल भी राज्यों को मिले हैं।

साथियों,

हमारी सरकार की प्राथमिकता, बीमारी से बचाव और बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाने की भी है। हमने पोषण पर बल दिया है, योग-आयुष और स्वच्छता पर बल दिया है, ताकि बीमारी से बचाव हो। हमने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति और आधुनिक चिकित्सा, दोनों को बढ़ावा दिया है। आज ही महाराष्ट्र और हरियाणा में योग और नेचुरोपैथी से जुड़े दो बड़े अस्पताल और रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन हुआ है। यहां गुजरात में ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ा WHO का वैश्विक सेंटर भी बन रहा है।

साथियों,

हमारी सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि गरीब हो या मध्यम वर्ग, उसको बेहतर इलाज भी मिले और उसकी बचत भी हो। आयुष्मान भारत योजना की वजह से गरीबों के एक लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं। जन औषधि केंद्रों में 80 परसेंट डिस्काउंट पर दवा मिलने से गरीबों और मध्यम वर्ग के 30 हजार करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं। यानि सरकार ने जीवन तो बचाया, इतना बोझ भी गरीब और मिडिल क्लास पर पड़ने से बचाया है। उज्ज्वला योजना से भी गरीब परिवारों को 70 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की बचत हो चुकी है। हमारी सरकार ने जो डेटा सस्ता किया है, उसकी वजह से हर मोबाइल इस्तेमाल करने वाले के करीब-करीब 4 हजार रुपए हर महीने बच रहे हैं। टैक्स से जुड़े जो रिफॉर्म्स हुए हैं, उसके कारण भी टैक्सपेयर्स को लगभग ढाई लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है।

साथियों,

अब हमारी सरकार एक और ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे आने वाले वर्षों में अनेक परिवारों की बचत और बढ़ेगी। हम बिजली का बिल ज़ीरो करने में जुटे हैं और बिजली से परिवारों को कमाई का भी इंतजाम कर रहे हैं। पीएम सूर्य घर- मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से हम देश के लोगों की बचत भी कराएंगे और कमाई भी कराएंगे। इस योजना से जुड़ने वाले लोगों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी और बाकी बिजली सरकार खरीदेगी, आपको पैसे देगी।

साथियों,

एक तरफ हम हर परिवार को सौर ऊर्जा का उत्पादक बना रहे हैं, तो वहीं सूर्य और पवन ऊर्जा के बड़े प्लांट भी लगा रहे हैं। आज ही कच्छ में दो बड़े सोलर प्रोजेक्ट और एक विंड एनर्जी प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है। इससे रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में गुजरात की क्षमता का और विस्तार होगा।

साथियों,

हमारा राजकोट, उद्यमियों का, श्रमिकों, कारीगरों का शहर है। ये वो साथी हैं जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से अनेक साथी हैं, जिन्हें पहली बार मोदी ने पूछा है, मोदी ने पूजा है। हमारे विश्वकर्मा साथियों के लिए देश के इतिहास में पहली बार एक राष्ट्रव्यापी योजना बनी है। 13 हज़ार करोड़ रुपए की पीएम विश्वकर्मा योजना से अभी तक लाखों लोग जुड़ चुके हैं। इसके तहत उन्हें अपने हुनर को निखारने और अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। इस योजना की मदद से गुजरात में 20 हजार से ज्यादा लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। इनमें से प्रत्येक विश्वकर्मा लाभार्थी को 15 हजार रुपए तक की मदद भी मिल चुकी है।

साथियों,

आप तो जानते हैं कि हमारे राजकोट में, हमारे यहाँ सोनार का काम कितना बड़ा काम है। इस विश्वकर्मा योजना का लाभ इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी मिला है।

साथियों,

हमारे लाखों रेहड़ी-ठेले वाले साथियों के लिए पहली बार पीएम स्वनिधि योजना बनी है। अभी तक इस योजना के तहत लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए की मदद इन साथियों को दी जा चुकी है। यहां गुजरात में भी रेहड़ी-पटरी-ठेले वाले भाइयों को करीब 800 करोड़ रुपए की मदद मिली है। आप कल्पना कर सकते हैं कि जिन रेहड़ी-पटरी वालों को पहले दुत्कार दिया जाता था, उन्हें भाजपा किस तरह सम्मानित कर रही है। यहां राजकोट में भी पीएम स्वनिधि योजना के तहत 30 हजार से ज्यादा लोन दिए गए हैं।

साथियों,

जब हमारे ये साथी सशक्त होते हैं, तो विकसित भारत का मिशन सशक्त होता है। जब मोदी भारत को तीसरे नंबर की आर्थिक महाशक्ति बनाने की गारंटी देता है, तो उसका लक्ष्य ही, सबका आरोग्य और सबकी समृद्धि है। आज जो ये प्रोजेक्ट देश को मिले हैं, ये हमारे इस संकल्प को पूरा करेंगे, इसी कामना के साथ आपने जो भव्‍य स्‍वागत किया, एयरपोर्ट से यहां तक आने में पूरे रास्ते पर और यहां भी बीच में आकर के आप के दर्शन करने का अवसर मिला। पुराने कई साथियों के चेहरे आज बहुत सालों के बाद देखे हैं, सबको नमस्ते किया, प्रणाम किया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं बीजेपी के राजकोट के साथियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं। इतना बड़ा भव्य कार्यक्रम करने के लिए और फिर एक बार इन सारे विकास कामों के लिए और विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हम सब मिलजुल करके आगे बढ़ें। आप सबको बहुत-बहुत बधाई। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के भाषण का कुछ अंश कहीं-कहीं पर गुजराती भाषा में भी है, जिसका यहाँ भावानुवाद किया गया है।