गया जी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत प्राचीन और बेहद समृद्ध है: प्रधानमंत्री
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा रणनीति में एक नई लकीर खींच दी है: प्रधानमंत्री
बिहार का तीव्र विकास केंद्र में एनडीए सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता है: प्रधानमंत्री
हर घुसपैठिये को बिना किसी अपवाद के देश से बाहर निकाला जाएगा : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बिहार के गया में 12,000 करोड़ रुपये की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने ज्ञान और मोक्ष की पावन नगरी गया जी को नमन किया और विष्णुपद मंदिर की गौरवशाली भूमि से सभी का अभिवादन किया। श्री मोदी ने कहा कि गया जी की भूमि आध्यात्मिकता और शांति की धरती है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ये वो पवित्र धरती है, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। श्री मोदी ने कहा, ‘’गया जी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत प्राचीन और बेहद समृद्ध है।" यह देखते हुए कि इस क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि इस शहर को केवल "गया" नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक "गया जी" कहा जाए, प्रधानमंत्री ने इस भावना का सम्मान करने के लिए बिहार सरकार को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि केंद्र और बिहार में उनकी सरकारें लगातार गया जी के तीव्र विकास के लिए काम कर रही हैं।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि आज, गया जी की पवित्र धरती से, एक ही दिन में 12,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है, श्री मोदी ने कहा कि ये परियोजनाएं ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और शहरी विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों में फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि ये पहल बिहार की औद्योगिक क्षमता को मज़बूत करेंगी और युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा करेंगी तथा इन परिवर्तनकारी परियोजनाओं के लिए बिहार के लोगों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए आज एक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके साथ बिहार के लोगों को अब कैंसर के इलाज के लिए एक अतिरिक्त सुविधा मिल गई है।

इस बात पर जोर देते हुए कि गरीबों के जीवन से कठिनाइयों को दूर करना और महिलाओं के जीवन को आसान बनाना एक लोक सेवक के रूप में उन्हें सबसे अधिक संतुष्टि देता है, प्रधानमंत्री ने दोहराया कि गरीबों को पक्के घर प्रदान करना उनकी प्रमुख प्रतिबद्धताओं में से एक है। उन्होंने घोषणा की कि जब तक हर ज़रूरतमंद व्यक्ति को पक्का घर नहीं मिल जाता, तब तक वो आराम नहीं करेंगे। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसी संकल्प का पालन करते हुए, पिछले 11 वर्षों में, देश भर में गरीबों के लिए 4 करोड़ पक्के घर बनाए गए हैं। यह देखते हुए कि अकेले बिहार में 38 लाख से अधिक घर बनाए गए हैं और गया ज़िले में 2 लाख से अधिक परिवारों को अपने पक्के घर मिले हैं, श्री मोदी ने बल देकर कहा कि ये सिर्फ़ घर नहीं हैं, बल्कि गरीबों के लिए गरिमा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ये घर बिजली, पानी, शौचालय और गैस कनेक्शन से लैस हैं—यह सुनिश्चित करते हुए कि गरीब परिवार भी सुविधा, सुरक्षा और गरिमा के साथ रहें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल को जारी रखते हुए, बिहार के मगध क्षेत्र में 16,000 से अधिक परिवारों को अब उनके पक्के घर मिल गए हैं। उन्होंने कहा कि इस साल इन घरों में दिवाली और छठ पूजा का उत्सव और भी जीवंत होगा। उन सभी लाभार्थी परिवारों को बधाई देते हुए, जिन्हें उनके घर मिले हैं, श्री मोदी ने उन लोगों को आश्वासन दिया कि जो अभी भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ की प्रतीक्षा कर रहे कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक हर गरीब नागरिक को पक्का घर नहीं मिल जाता।

“बिहार चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की भूमि है। जब भी भारत को अपने दुश्मनों से चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, बिहार राष्ट्र के लिए एक ढाल बनकर खड़ा रहा है”, श्री मोदी ने बल देकर कहा कि बिहार की धरती पर लिया गया कोई भी संकल्प कभी अधूरा नहीं रहता। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए, जहां निर्दोष नागरिकों को उनका धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी गई थी, प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि यह बिहार की धरती से ही था कि उन्होंने आतंकवाद को खत्म करने की कसम खाई थी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज दुनिया बिहार की धरती पर लिए गए उस संकल्प को पूरा होते हुए देख रही है। श्री मोदी ने राष्ट्र को याद दिलाया कि जब पाकिस्तान ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा था, तब भारत हवा में तिनके की तरह उन मिसाइलों को हवा में ही रोककर निष्क्रिय कर रहा था। उन्होंने बल देकर कहा कि पाकिस्तान की एक भी मिसाइल भारत को नुकसान नहीं पहुंचा पाई।

"ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा रणनीति में एक नई लकीर खींची है", श्री मोदी ने कहा कि अब भारत में आतंकवादी भेजने या हमलों को अंजाम देने के बाद कोई भी नहीं बच सकता है। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवादी पाताल में भी छिप जाएं, तब भी भारत की मिसाइलें उन्हें वहीं दफन कर देंगी।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "बिहार का तीव्र विकास केंद्र में एनडीए सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता है।" उन्होंने कहा कि बिहार अब व्यापक विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि हाल के वर्षों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान निकाला गया है और प्रगति के नए रास्ते बनाए गए हैं। "लालटेन शासन" के दौरान की विकट परिस्थितियों को याद करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि उस अवधि के दौरान यह क्षेत्र लाल आतंक की चपेट में था और माओवादी गतिविधियों के कारण सूर्यास्त के बाद आवाजाही बेहद मुश्किल थी। उन्होंने कहा कि गया जी जैसे शहर लालटेन शासन में अंधेरे में डूबे रहे। प्रधानमंत्री ने बताया कि हज़ारों गांवों में बिजली के खंभे जैसी बुनियादी ढांचे की भी कमी थीं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लालटेन युग के दौरान शासन करने वालों ने बिहार के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया था। उन्होंने आगे ज़ोर देकर कहा कि न तो शिक्षा थी और न ही रोज़गार तथा इन परिस्थितियों के कारण बिहारियों की कई पीढ़ियों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष और उसके सहयोगी बिहार के लोगों को केवल एक वोट बैंक के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो ग़रीबों के सुख-दुख की चिंता है, न ही उनके मान-सम्मान की। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि एक पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बार मंच से सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि बिहार के लोगों को उनके राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। ऐसे नेताओं द्वारा बिहार के लोगों के प्रति गहरी नफ़रत और तिरस्कार की कड़ी आलोचना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि ऐसा दुर्व्यवहार देखने के बावजूद विपक्षी पार्टी का नेतृत्व गहरी नींद में सोया रहा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वर्तमान बिहार सरकार विपक्षी गठबंधनों के विभाजनकारी अभियान का जवाब दे रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे कि बिहार के बेटे-बेटियों को राज्य के भीतर ही रोज़गार मिले। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि अब पूरे बिहार में बड़ी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, श्री मोदी ने बताया कि बिहार का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र गया जी ज़िले के डोभी में स्थापित किया जा रहा है और गया जी में एक प्रौद्योगिकी केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने आज बक्सर थर्मल पावर प्लांट के उद्घाटन का भी उल्लेख किया। यह याद करते हुए कि कुछ महीने पहले ही उन्होंने औरंगाबाद में नबीनगर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शिलान्यास किया था, श्री मोदी ने आगे कहा कि भागलपुर के पीरपैंती में एक नया थर्मल पावर प्लांट बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये विद्युत संयंत्र बिहार में बिजली की आपूर्ति को काफी बढ़ाएंगे। यह स्वीकार करते हुए कि विद्युत उत्पादन बढ़ने से घरों में बिजली की उपलब्धता सुधार होता है और उद्योगों के लिए अधिक आपूर्ति होती है, श्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा के बुनियादी ढांचे में यह विस्तार नए रोज़गार के अवसर भी पैदा करेगा।

यह कहते कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार के युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरी प्रदान करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है, श्री मोदी ने कहा कि यह श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व के कारण ही राज्य में शिक्षक भर्ती पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित की गई है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि बिहार में अधिकतम युवा नौकरी के लिए पलायन किए बिना राज्य के भीतर ही रोज़गार प्राप्‍त करें। इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि केंद्र सरकार की एक नई पहल इस लक्ष्य का काफी समर्थन करेंगी, प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत जब कोई युवा निजी क्षेत्र में अपनी पहली नौकरी शुरू करेगा, तो केंद्र सरकार उसे सीधे 15,000 रूपए प्रदान करेगी। उन्होंने आगे कहा कि युवाओं को रोज़गार देने वाली निजी कंपनियों को भी वित्तीय सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि यह योजना से बिहार के युवाओं को बहुत लाभ पहुंचाएगी।

विपक्षी दलों और उनकी सरकारों की आलोचना करते हुए कि उन्होंने कभी भी सार्वजनिक धन को महत्व नहीं दिया, श्री मोदी ने कहा कि उनके लिए सार्वजनिक धन केवल अपनी तिजोरियां भरने का एक साधन था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि विपक्ष के शासन में परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहीं। किसी योजना में जितनी देर होती थी, वे उससे उतना ही ज़्यादा पैसा कमाते थे। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि इस दोषपूर्ण मानसिकता को अब उनकी सरकार ने बदल दिया है। उन्होंने बल देकर कहा कि शिलान्यास करने के बाद काम को यथासंभव जल्दी पूरा करने के प्रयास किए जाते है। आज के कार्यक्रम को इसी दृष्टिकोण का एक उदाहरण बताते हुए, श्री मोदी ने याद दिलाया कि उन्होंने औंटा-सिमरिया खंड की आधारशिला रखी थी और अब वे स्वयं इसका उद्घाटन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पुल न केवल सड़कों को जोड़ेगा, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार को भी जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारी वाहनों, जिन्हें पहले गांधी सेतु के रास्ते 150 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था, अब उनके पास एक सीधा मार्ग होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह व्यापार को गति देगा, उद्योगों को मज़बूत करेगा और तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को आसान बना देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के तहत शुरू की गई विकास परियोजनाएं पूरी होंगी – यह एक निश्चितता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य में उनकी सरकारें बिहार में रेलवे के विकास को आगे बढ़ाने के लिए तेज़ी से काम कर रही हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत गया जी रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को हवाई अड्डे जैसी सुविधाएं प्रदान की जा सकें। श्री मोदी ने कहा कि गया अब राजधानी, जन शताब्दी और मेड इन इंडिया वंदे भारत ट्रेनों तक पहुंच वाला शहर है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि गया जी से सासाराम, प्रयागराज और कानपुर के माध्यम से दिल्ली तक सीधी रेल कनेक्टिविटी बिहार के युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल शुरू करने में सक्षम बनाने वाले राष्ट्र के आशीर्वाद और अटूट विश्वास के लिए आभार व्यक्त करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि इन वर्षों में उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग ​​नहीं लगा है। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद छह-साढ़े छह दशकों तक शासन करने वाली विपक्षी सरकारों के पास भ्रष्टाचार के मामलों की एक लंबी सूची है और विपक्षी दलों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार बिहार में हर बच्चे को पता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए किसी को भी कार्रवाई के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान कानून का हवाला दिया, जिसके तहत एक कनिष्ठ सरकारी कर्मचारी को भी 48 घंटे तक हिरासत में रहने पर स्वतः निलंबित कर दिया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि यह कैसे संभव है कि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहते हुए भी सत्ता के विशेषाधिकारों का आनंद ले सकता है। उन्होंने हाल के उदाहरणों का हवाला दिया, जहां फाइलों पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे और आधिकारिक आदेश सीधे जेल से जारी किए जा रहे थे। श्री मोदी ने कहा कि अगर राजनेताओं का यही रवैया रहा, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई प्रभावी ढंग से कैसे लड़ी जा सकती है।

इस बात पर बल देते हुए कि भारतीय संविधान प्रत्येक जनप्रतिनिधि से ईमानदारी और पारदर्शिता की अपेक्षा करता है, प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि संविधान की गरिमा को भंग नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार एक कड़ा भ्रष्टाचार विरोधी कानून ला रही है, जो देश के प्रधानमंत्री पर भी लागू होगा। उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के दायरे में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को भी लाया जाएगा। इसे और स्पष्ट करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद, गिरफ्तार होने वाले किसी भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को 30 दिनों के भीतर ज़मानत लेनी होगी। अगर ज़मानत नहीं मिलती है, तो उन्हें 31वें दिन अपना पद छोड़ना होगा। उन्होंने पुष्टि की कि सरकार इस तरह के एक कड़े कानून को बनाने के इरादे से आगे बढ़ रही है।

इस कानून का विरोध करने वाले विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि उनका गुस्सा डर से उपजा है—जिन लोगों ने गलत काम किए हैं, वे भले ही उन्हें दूसरों से छिपाएँ, लेकिन वे खुद अपने कृत्यों से वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के कुछ नेता ज़मानत पर बाहर हैं, जबकि अन्य घोटालों से जुड़ी कानूनी कार्यवाही में फंसे हुए हैं और इन लोगों को डर है कि अगर वे जेल गए, तो उनके राजनीतिक सपने चकनाचूर हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वे प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजेंद्र बाबू और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जैसे नेताओं ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि सत्ता के भूखे लोग जेल में रहते हुए भी भ्रष्टाचार करेंगे और पद पर बने रहेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नए कानून के तहत भ्रष्ट व्यक्ति न केवल जेल जाएँगे, बल्कि अपनी सत्ता भी खो देंगे। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का संकल्प करोड़ों नागरिकों की एक सामूहिक प्रतिबद्धता है—और इस संकल्प को पूरा किया जाएगा।"

यह उल्‍लेख करते हुए कि उन्‍होंने लाल किले से एक गहरी चिंता व्‍यक्‍त की थी – जो बिहार को भी प्रभावित करती है, श्री मोदी ने कहा कि देश में घुसपैठियों की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि बिहार के सीमावर्ती ज़िलों की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल तेज़ी से बदल रही है और पुष्टि की कि उनकी सरकार ने राष्‍ट्र के भविष्‍य का फैसला घुसपैठियों को नहीं करने देने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि घुसपैठियों को बिहार के युवाओं से रोज़गार के अवसर छीनने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बल देकर कहा कि देश के नागरिकों के लिए बनी सुविधाओं को घुसपैठिए द्वारा लूटने नहीं दिया जाएगा। इस खतरे से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने एक डेमोग्राफी मिशन शुरू करने की घोषणा की, जो बहुत जल्द काम करना शुरू कर देगा। उन्होंने बल देकर कहा कि हर घुसपैठिए को देश से बाहर निकाला जाएगा और बिहार के लोगों से आग्रह किया कि वे देश के भीतर उन लोगों से खिलाफ सतर्क रहे, जो घुसपैठियों का समर्थन करते हैं। श्री मोदी ने बिहारियों को उनके अधिकारों से वंचित करने और उन्हें घुसपैठियों के हवाले करने की कोशिश करने के लिए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए ये दल किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री ने बिहार के लोगों से अत्यंत सतर्क रहने का आह्वान किया।

बिहार को विपक्षी दलों के हानिकारक इरादों से बचाने पर ज़ोर देते हुए श्री मोदी ने बल देकर कहा कि यह बिहार के लिए एक बहुत ही निर्णायक समय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बिहार के युवाओं के सपने पूरे होंगे और बिहार के लोगों की आकांक्षाओं को नई उड़ान दी जानी होगी। इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि केंद्र सरकार इस उद्देश्‍य के लिए श्री नीतीश कुमार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है, प्रधानमंत्री अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि बिहार में विकास की गति बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य में उनकी सरकारें निरंतर कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज की विकास परियोजनाएं इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल, श्री आरिफ मोहम्मद खान, बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, श्री जीतन राम मांजी, श्री गिरिराज सिंह, श्री चिराग पासवान, श्री नित्यानंद राय, श्री राम नाथ ठाकुर, डॉ. राज भूषण चौधरी, श्री सतीश चंद्र दुबे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

संपर्क में सुधार के लिए अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर 8.15 किलोमीटर लंबे औंटा-सिमरिया पुल परियोजना का उद्घाटन किया, जिसमें गंगा नदी पर 1.86 किलोमीटर लंबा 6 लेन वाला पुल भी शामिल है। इस पुल का निर्माण 1,870 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हुआ है। यह पटना के मोकामा और बेगूसराय के बीच सीधा संपर्क प्रदान करेगा।

यह पुल पुराने, जर्जर रेल-सह-सड़क पुल "राजेंद्र सेतु" के समानांतर बनाया गया है, जो बहुत खराब स्थिति में है, जिससे भारी वाहनों को अपना रास्ता बदलना पड़ता है। यह नया पुल उत्तर बिहार (बेगूसराय, सुपौल, मधुबनी, पूर्णिया, अररिया आदि) और दक्षिण बिहार (शेखपुरा, नवादा, लखीसराय आदि) के बीच आवागमन करने वाले भारी वाहनों के लिए 100 किलोमीटर से अधिक की अतिरिक्त यात्रा दूरी को कम करेगा। इससे क्षेत्र के अन्य हिस्सों में वाहनों को रास्ता बदलने के कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या को भी कम करने में मदद मिलेगी।

इससे आस-पास के क्षेत्रों, विशेषकर उत्तर बिहार के क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो आवश्यक कच्चे माल की प्राप्ति के लिए दक्षिण बिहार और झारखंड पर निर्भर हैं। इससे प्रसिद्ध तीर्थस्थल सिमरिया धाम, जो प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय श्री रामधारी सिंह दिनकर का जन्‍म स्‍थान भी है, तक बेहतर संपर्क सुविधा भी उपलब्ध होगी।

प्रधानमंत्री ने लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के बख्तियारपुर से मोकामा तक चार लेन वाले खंड का भी उद्घाटन किया, जिससे भीड़भाड़ कम होगी, यात्रा का समय कम होगा और यात्री एवं माल ढुलाई में वृद्धि होगी। इसके अलावा, बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-120 के बिक्रमगंज-दावथ-नवानगर-डुमरांव खंड के पक्के किनारों वाले दो लेन के सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे स्थानीय आबादी के लिए नए आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।

बिहार में बिजली क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करते हुए, प्रधानमंत्री लगभग 6,880 करोड़ रुपये की लागत वाले बक्सर थर्मल पावर प्लांट (660x1 मेगावाट) का उद्घाटन करेंगे। इससे बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा और इस क्षेत्र की बढ़ती बिजली की मांग को पूरा किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को एक बड़ा बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने मुजफ्फरपुर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया। इस केंद्र में उन्नत ऑन्कोलॉजी ओपीडी, आईपीडी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक प्रयोगशाला, ब्लड बैंक और 24 बिस्तरों वाला आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई) तथा एचडीयू (उच्च निर्भरता इकाई) शामिल हैं। यह अत्याधुनिक सुविधा बिहार और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को उन्नत और किफायती कैंसर देखभाल प्रदान करेगी, जिससे उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के महानगरों की यात्रा करने की आवश्यकता कम हो जाएगी।

स्वच्छ भारत के अपने विजन को आगे बढ़ाते हुए और गंगा नदी की अविरल एवं निर्मल धारा को सुनिश्चित करते हुए प्रधानमंत्री ने मुंगेर में नमामि गंगे के अंतर्गत 520 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवरेज नेटवर्क का उद्घाटन किया। इससे गंगा में प्रदूषण को कम करने और क्षेत्र में स्वच्छता सुविधाओं में सुधार करने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने लगभग 1,260 करोड़ रुपये की लागत वाली शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एक श्रृंखला का भी शिलान्यास किया। इनमें औरंगाबाद के दाउदनगर और जहानाबाद में एसटीपी और सीवरेज नेटवर्क; लखीसराय के बरहिया और जमुई में एसटीपी और इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन कार्य शामिल हैं। अमृत 2.0 के अंतर्गत प्रधानमंत्री औरंगाबाद, बोधगया और जहानाबाद में जलापूर्ति परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। ये परियोजनाएं स्वच्छ पेयजल, आधुनिक सीवरेज प्रणाली और बेहतर स्वच्छता प्रदान करेंगी, जिससे इस क्षेत्र में स्वास्थ्य मानकों और जीवन स्तर में सुधार होगा।

क्षेत्र में रेल संपर्क को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने दो ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। गया और दिल्ली के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस, जो आधुनिक सुविधाओं, आराम और सुरक्षा के साथ यात्री सुविधा में सुधार करेगी। वैशाली और कोडरमा के बीच बौद्ध सर्किट ट्रेन, जो क्षेत्र के प्रमुख बौद्ध स्थलों के बीच पर्यटन और धार्मिक यात्रा को बढ़ावा देगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 12,000 ग्रामीण लाभार्थियों और प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत 4,260 लाभार्थियों का गृह प्रवेश समारोह प्रधानमंत्री द्वारा कुछ लाभार्थियों को प्रतीकात्मक रूप से चाबियां सौंपने के साथ हुआ। इससे हजारों परिवारों का अपना घर होने का सपना पूरा हुआ।

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प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की शक्ति को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
March 06, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, said that the people of India, through their firm resolve, make even the most difficult tasks possible. He noted that with tireless effort in the right direction, they achieve even the biggest goals.

The Prime Minister shared a Sanskrit Subhashitam-

“यद् दूरं यद् दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्। तत् सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्॥”

The Subhashitam conveys that no matter how far, difficult, or out of reach a goal may seem, it can be achieved through firm determination and continuous hard work. Determination and patience are the forces that turn the impossible into possible.

The Prime Minister wrote on X;

“भारत के लोग अपने दृढ़ निश्चय से किसी भी कार्य को संभव बना देते हैं। सही दिशा में अपनी अथक मेहनत से वे बड़े से बड़े लक्ष्य को भी हासिल कर दिखाते हैं।

यद् दूरं यद् दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम्।

तत् सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम्॥”