'जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जी की इस भव्य विशाल मूर्ति के जरिए भारत मानवीय ऊर्जा और प्रेरणाओं को मूर्त रूप दे रहा है'
'जब हम रामानुजाचार्य जी को देखते हैं, तो हमें अहसास होता है कि प्रगतिशीलता और प्राचीनता में कोई विरोध नहीं है'
'ये जरूरी नहीं है कि सुधार के लिए अपनी जड़ों से दूर जाना पड़े। बल्कि जरूरी ये है कि हम अपनी असली जड़ों से जुड़ें, अपनी वास्तविक शक्ति से परिचित हों'
'रामानुजाचार्य जी के संदेश को लेकर आज देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ अपने नए भविष्य की नींव रख रहा है'
'भारत के स्वाधीनता संग्राम में समानता, मानवता और आध्यात्म की ऊर्जा लगी थी, जो भारत को संतों से मिली थी' 'आज देश में एक ओर सरदार साहब की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एकता की शपथ दोहरा रही है तो रामानुजाचार्य जी की स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी समानता का संदेश दे रही है। एक राष्ट्र के रूप में यह भारत की विशेषता है'
'तेलुगु संस्कृति ने भारत की विविधता को सशक्त किया है'
'तेलुगु फिल्म उद्योग तेलुगु संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहा है'


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज हैदराबाद में 'स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी' राष्ट्र को समर्पित की। 216 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी 11वीं सदी के भक्ति संत श्री रामानुजाचार्य की स्मृति में स्थापित की गई है, जिन्होंने धार्मिक निष्ठा, जाति और पंथ सहित जीवन के सभी क्षेत्रों में समानता के विचार को बढ़ावा दिया था। इस अवसर पर तेलंगाना की राज्यपाल श्रीमती तमिलिसाई सौंदरराजन, केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी भी उपस्थित थे।

समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं और ऐसे पवित्र अवसर पर प्रतिमा स्थापित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य जी की इस भव्य विशाल मूर्ति के जरिए भारत मानवीय ऊर्जा और प्रेरणाओं को मूर्त रूप दे रहा है। रामानुजाचार्य जी की ये प्रतिमा उनके ज्ञान, वैराग्य और आदर्शों की प्रतीक है।'

प्रधानमंत्री 'विश्वकसेन इष्टि यज्ञ' की 'पूर्णाहुति' में भी शामिल हुए। यह संकल्पों और लक्ष्यों की पूर्ति का यज्ञ होता है। प्रधानमंत्री ने इस यज्ञ के 'संकल्प' को देश के 'अमृत' संकल्पों की सिद्धि के लिए समर्पित किया और इस यज्ञ का फल 130 करोड़ देशवासियों के सपनों के लिए अर्पित किया।

प्रधानमंत्री ने भारत के मनीषियों की परंपरा का जिक्र किया, जिन्होंने ज्ञान को खंडन, स्वीकृति-अस्वीकृति से ऊपर उठकर देखा है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमारे यहां अद्वैत भी है, द्वैत भी है। और, इन द्वैत-अद्वैत को समाहित करते हुए श्रीरामानुजाचार्य जी का विशिष्टा-द्वैत भी है।' उन्होंने कहा कि एक ओर रामानुजाचार्य जी के भाष्यों में ज्ञान की पराकाष्ठा है, तो दूसरी ओर वह भक्तिमार्ग के जनक भी हैं। एक ओर वह समृद्ध सन्यास परंपरा के संत भी हैं, और दूसरी ओर गीता भाष्य में कर्म के महत्व को भी प्रस्तुत करते हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'आज दुनिया में, जब सामाजिक सुधारों की बात होती है, प्रगतिशीलता की बात होती है, तो माना जाता है कि सुधार जड़ों से दूर जाकर होगा। लेकिन, जब हम रामानुजाचार्य जी को देखते हैं, तो हमें अहसास होता है कि प्रगतिशीलता और प्राचीनता में कोई विरोध नहीं है। ये जरूरी नहीं है कि सुधार के लिए अपनी जड़ों से दूर जाना पड़े बल्कि जरूरी ये है कि हम अपनी असली जड़ों से जुड़ें, अपनी वास्तविक शक्ति से परिचित हों।'

प्रधानमंत्री ने मौजूदा पहलों और हमारे संतों के ज्ञान के बीच की कड़ी के बारे में विस्तार से बताया। श्री रामानुजाचार्य ने देश को सामाजिक सुधारों की वास्तविक अवधारणा से परिचित कराया और दलितों व पिछड़ों के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि आज श्री रामानुजाचार्य जी की विशाल मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी’ के रूप में हमें समानता का संदेश दे रही है। इसी संदेश को लेकर आज देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ के मंत्र के साथ अपने नए भविष्य की नींव रख रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज भारत बिना भेदभाव के सभी के विकास और सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। जिन्हें सदियों तक प्रताड़ित किया गया वे पूरी गरिमा के साथ देश के विकास में भागीदार बन सकें, इसके लिए आज का बदलता भारत एकजुट प्रयास कर रहा है। पक्के घर, उज्ज्वला मुफ्त कनेक्शन, 5 लाख तक मुफ्त उपचार सुविधा या मुफ्त बिजली कनेक्शन, जनधन बैंक खाते, स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं ने दलितों, पिछड़ों और वंचित तबके को मजबूत किया है।

प्रधानमंत्री ने श्री रामानुजाचार्य को भारत की एकता और अखंडता की एक प्रदीप्त प्रेरणा बताया। उनका जन्म दक्षिण में हुआ लेकिन उनका प्रभाव दक्षिण से उत्तर और पूरब से पश्चिम तक पूरे भारत पर है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का स्वाधीनता संग्राम केवल अपनी सत्ता और अधिकारों की लड़ाई भर नहीं था। इस लड़ाई में एक तरफ 'औपिनिवेशिक मानसिकता' थी तो दूसरी तरफ 'जियो और जीने दो' का विचार था। एक तरफ नस्लीय श्रेष्ठता और भौतिकवाद का उन्माद था तो दूसरी तरफ मानवता और आध्यात्म में आस्था थी। इस लड़ाई में भारत विजयी हुआ, भारत की परंपरा विजयी हुई। उन्होंने कहा कि भारत के स्वाधीनता संग्राम में समानता, मानवता और आध्यात्म की वह ऊर्जा भी लगी थी जो भारत को संतों से मिली थी।

सरदार पटेल के हैदराबाद कनेक्शन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'अगर सरदार साहब की 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' देश में एकता की शपथ दोहरा रही है, तो रामानुजाचार्य जी की 'स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी' समानता का संदेश दे रही है। यह एक राष्ट्र के रूप में भारत की विशेषता है।'

प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि कैसे तेलुगु संस्कृति ने भारत की विविधता को सशक्त किया है। उन्होंने कहा कि तेलुगु संस्कृति का विस्तार सदियों पुराना है, अनेक महान राजा और रानी इसके ध्वजवाहक रहे हैं। सातवाहन हो, काकातिया हो या विजयनगर साम्राज्य, सभी ने तेलुगु संस्कृति की पताका को बुलंद किया है। पिछले साल तेलंगाना में स्थित 13वीं शताब्दी के काकातिया रूद्रेश्वर -रामाप्पा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। विश्व पर्यटन संगठन ने पोचमपल्ली को भारत के सबसे बेहतरीन पर्यटन गांव का दर्जा दिया है।

प्रधानमंत्री ने तेलुगु फिल्म उद्योग के गौरवशाली योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तेलुगु भाषी क्षेत्रों में ही नहीं, पूरे विश्व में इसकी चर्चा है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'इसकी रचनात्मकता सिल्वर स्क्रीन से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म तक छाई हुई है। भारत के बाहर भी खूब प्रशंसा हो रही है। तेलुगु भाषी लोगों का अपनी कला और संस्कृति के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणा है।'

यह प्रतिमा 'पंचधातु' (पंचलोह) से बनी है जिसमें सोना, चांदी, तांबा, पीतल और जस्ता शामिल है और यह दुनिया में बैठी अवस्था में सबसे ऊंची धातु की प्रतिमाओं में से एक है। यह 54 फीट ऊंचे आधार भवन पर स्थापित है, जिसका नाम 'भद्र वेदी' है। इस परिसर में एक वैदिक डिजिटल पुस्तकालय और अनुसंधान केंद्र, प्राचीन भारतीय ग्रंथ, एक थिएटर, एक शैक्षिक दीर्घा है, जो श्री रामानुजाचार्य जी के कार्यों की जानकारी देते हैं। प्रतिमा की परिकल्पना श्री रामानुजाचार्य आश्रम के श्री चिन्ना जीयर स्वामी ने की थी।

 

कार्यक्रम के दौरान श्री रामानुजाचार्य की जीवन यात्रा और शिक्षाओं पर थ्रीडी प्रजेंटेशन मैपिंग का प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री ने स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी के चारों ओर बने 108 दिव्य देशम (नक्काशीदार मंदिर) की परिक्रमा भी की।

श्री रामानुजाचार्य ने राष्ट्रीयता, लिंग, नस्ल, जाति या पंथ की परवाह किए बिना हर इंसान को समान मानने की भावना के साथ लोगों के उत्थान के लिए अथक प्रयास किया था। स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी का उद्घाटन श्री रामानुजाचार्य की वर्तमान में चल रही 1000वीं जयंती समारोह के तहत 12 दिवसीय श्री रामानुज सहस्राब्दि समारोह का हिस्सा है।

 

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भारत - जर्मनी जॉइंट स्टेटमेंट
January 12, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी गणराज्य के संघीय चांसलर श्री फ्रेडरिक मर्ज़ ने 12-13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा की। चांसलर के साथ 23 प्रमुख जर्मन सीईओ और उद्योगपतियों सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था।

चांसलर श्री मर्ज़ की भारत की यह पहली आधिकारिक यात्रा थी और संघीय चांसलर के रूप में एशिया की यह उनकी पहली यात्रा थी, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत को जर्मनी द्वारा दिए जाने वाले उच्च प्राथमिकता को दर्शाती है। यह दौरा 25 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में आयोजित सफल 7वें भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के बाद हुआ है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। 2025 में भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं और 2026 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों नेताओं ने सरकार, व्यापार, नागरिक समाज और शिक्षा जगत में द्विपक्षीय सहयोग में आई नई गति की सराहना की, जिसने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अहमदाबाद में चांसलर श्री मर्ज़ का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रसिद्ध पतंग महोत्सव में भाग लिया। दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी सीईओ फोरम को भी संबोधित किया। चांसलर श्री मर्ज़ भारत और जर्मनी के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग पर केंद्रित कार्यक्रमों के लिए बेंगलुरु का भी दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और चांसलर श्री मर्ज़ ने 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। उन्होंने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता और सामरिक साझेदारी के आधारभूत पारस्परिक सम्मान की पुष्टि की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की।


रक्षा एवं सुरक्षा


दोनों नेताओं ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित उच्च रक्षा समिति की बैठक के परिणामों का स्वागत किया, जिसमें संस्थागत सेवा स्टाफ वार्ता और सेना प्रमुखों के दौरों सहित द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। नेताओं ने संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और वरिष्ठ अधिकारियों के आदान-प्रदान के माध्यम से सैन्य सहयोग को गहरा करने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता का समर्थन किया और दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों द्वारा नियमित रूप से एक-दूसरे के बंदरगाहों पर आने-जाने पर संतोष व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच न्यू ट्रैक 1.5 विदेश नीति एवं सुरक्षा संवाद की स्थापना का स्वागत किया।


प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नौसेना अभ्यास मिलान और फरवरी 2026 में होने वाले 9वें हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के प्रमुख सम्मेलन, सितंबर 2026 में होने वाले वायु युद्ध अभ्यास तरंग शक्ति में जर्मनी की भागीदारी की मंशा का स्वागत किया। साथ ही, उन्होंने इंफोर्मेशन फ्यूजन सेंटर -हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) में संपर्क अधिकारी की तैनाती के जर्मनी के निर्णय की भी सराहना की। दोनों पक्षों ने यूरोड्रोन एमएएलई यूएवी कार्यक्रम के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और संयुक्त शस्त्र सहयोग संगठन (ओसीसीएआर) के बीच जारी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। इस कार्यक्रम से भारत को उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी में सहयोग करने और उसका लाभ उठाने में मदद मिलेगी, जिससे यूरोप के साथ उसके रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत होंगे।

दोनों नेताओं ने दीर्घकालिक उद्योग-स्तरीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करने हेतु संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस रोडमैप में प्रौद्योगिकी साझेदारी, रक्षा प्लेटफार्मों और उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन शामिल हैं। भारत ने रक्षा उपकरणों के शीघ्र निर्यात मंजूरी में सहायता के लिए जर्मनी के प्रयासों का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने बर्लिन और नई दिल्ली में आयोजित रक्षा गोलमेज सम्मेलनों/सम्मेलनों के माध्यम से भारतीय और जर्मन रक्षा व्यवसायों के बीच बढ़ते सहयोग की सराहना की और इस क्षेत्र में नियमित आदान-प्रदान का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने पनडुब्बियों, हेलीकॉप्टरों के लिए बाधा निवारण प्रणाली और मानवरहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) में निरंतर सहयोग की प्रशंसा की और साझा लक्ष्यों तथा शक्ति की पूरकता, अर्थात् भारत से कुशल कार्यबल और प्रतिस्पर्धी लागत तथा जर्मनी से उच्च प्रौद्योगिकी और निवेश के आधार पर गहन संबंध बनाकर रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने की
उम्मीद जताई।

प्रशिक्षण और आदान-प्रदान के संदर्भ में सहयोग के संदर्भ में, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के संस्थानों के बीच शांतिरक्षा प्रशिक्षण पर समझौता ज्ञापन (एमओयू), सशस्त्र बलों के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते और रक्षा रक्षा विभाग (डीआरडीओ) तथा संघीय रक्षा उपकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवाकालीन सहायता कार्यालय (बीएएएनबीडब्ल्यू) के बीच नई रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान पर प्रगति का स्वागत किया।


दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित चरमवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवाद से व्यापक और सतत तरीके से निपटने के लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू एवं कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों सहित अन्य संगठनों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को खत्म करने के साथ-साथ आतंकवादी नेटवर्क और वित्तपोषण को बाधित करने की दिशा में काम जारी रखने का भी आह्वान किया। नेताओं ने पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के अनुसमर्थन का स्वागत किया और आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह के तहत हुई प्रगति पर ध्यान दिया।

व्यापार और अर्थव्यवस्था:


दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में निरंतर वृद्धि का स्वागत किया और कहा कि द्विपक्षीय व्यापार 2024 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया और यह सकारात्मक रुझान 2025 में भी जारी रहा। भारत-जर्मनी के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, जो यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार का 25 प्रतिशत से अधिक है। दोनों नेताओं ने भारत और जर्मनी के बीच मजबूत द्विपक्षीय निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण में ऐसे निवेशों के सकारात्मक प्रभावों पर ध्यान दिया। उन्होंने लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप्स, डिजिटलीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार-संचालित उद्यमों सहित अप्रयुक्त आर्थिक क्षमता को पूरी तरह से साकार करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश करने/व्यवसाय का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया ताकि वे भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, व्यापार-अनुकूल वातावरण, विशाल उच्च-कुशल कार्यबल और परिचालन को बढ़ाने के अपार अवसरों का लाभ उठा सकें। चांसलर श्री मर्ज़ ने भारतीय कंपनियों द्वारा निवेश के लिए जर्मनी को एक आकर्षक स्थान के रूप में अनुशंसित किया।


प्रधानमंत्री श्री मोदी और चांसलर श्री मर्ज़ ने आगामी यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन के एक प्रमुख परिणाम के रूप में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के समापन के प्रति अपने समर्थन को दोहराया, जिससे व्यापार प्रवाह सुगम होगा और जर्मन-भारतीय आर्थिक संबंधों को और गति मिलेगी।

दोनों नेताओं ने जर्मन-भारतीय सीईओ फोरम के माध्यम से द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जिससे भारत में जर्मन व्यवसायों और जर्मनी में भारतीय व्यवसायों की दीर्घकालिक उपस्थिति के समर्थन से व्यापार और उद्योग सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा।


प्रधानमंत्री श्री मोदी और चांसलर श्री मर्ज़ ने सीईओ फोरम के आयोजन का स्वागत किया और प्रौद्योगिकी, ऑटोमोटिव, रक्षा, जहाज निर्माण, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, रसायन, जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक उपकरण इंजीनियरिंग और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अधिक व्यावसायिक सहयोग और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दोनों पक्षों के प्रमुख सीईओ और उद्योगपतियों के साथ बातचीत की।


प्रौद्योगिकी, नवाचार, विज्ञान और अनुसंधान


दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटलीकरण, दूरसंचार, स्वास्थ्य और जैव अर्थव्यवस्था सहित महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की प्रगति का स्वागत किया जो नवाचार और प्रौद्योगिकी साझेदारी रोडमैप को मजबूत करता है।


उन्होंने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पार्टनरशिप पर एक नई संयुक्त घोषणा के माध्यम से सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में संस्थागत संवाद स्थापित करने के लिए दोनों पक्षों की मजबूत इच्छा का स्वागत किया। उन्होंने भारतीय और जर्मन सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के बीच संस्थागत अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पिछले वर्ष मार्च में जर्मन प्रौद्योगिकी उद्यम इन्फिनियन द्वारा गिफ्ट सिटी में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के उद्घाटन का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान दिया, जिसके लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त आशय घोषणा (जेडीओआई) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों पक्षों का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, अनुसंधान एवं विकास, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग के माध्यम से मूल्यवर्धन, साथ ही दोनों देशों और तीसरे देशों में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण और विकास के क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाना है।


भारत-जर्मन डिजिटल संवाद के संबंध में, दोनों नेताओं ने 2026-27 के लिए इसकी कार्य योजना को अंतिम रूप दिए जाने पर ध्यान दिया और इंटरनेट एवं डेटा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर और उद्योग 4.0 तथा उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग के महत्व पर जोर दिया। नेताओं ने दूरसंचार के क्षेत्र में सहयोग पर एक संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर किए जाने को स्वीकार किया।


दोनों नेताओं ने भारत-जर्मन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) के कार्यकाल के विस्तार पर ध्यान दिया और उन्नत विनिर्माण, चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, सतत उत्पादन, जैव अर्थव्यवस्था, अपशिष्ट से धन सृजन पहलों और स्थिरता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में द्विपक्षीय उद्योग-अकादमिक रणनीतिक अनुसंधान को बढ़ावा देने में आईजीएसटीसी की अग्रणी भूमिका पर संतोष व्यक्त किया। नेताओं ने आईजीएसटीसी के अंतर्गत आने वाले कार्यक्रमों जैसे (2+2) उद्योग-अकादमिक परियोजनाओं और विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी (डब्ल्यूआईएसईआर) के योगदान को स्वीकार किया।

दोनों नेताओं ने डिजिटल कन्वर्जेंस, बैटरी प्रौद्योगिकी, हरित परिवहन और किफायती स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित भारत-जर्मन उत्कृष्टता नवाचार केंद्रों (आईजी-सीओई) की स्थापना में हुई प्रगति का स्वागत किया। नेताओं ने जीनोमिक्स, 3D बायोप्रिंटिंग और बायोमैन्युफैक्चरिंग में परिवर्तनकारी परिणाम देने के लिए जैव अर्थव्यवस्था पर द्विपक्षीय सहयोग की शुरुआत की सराहना की। नेताओं ने एंटीप्रोटॉन और आयन अनुसंधान सुविधा (एफएआईआर) और ड्यूश इलेक्ट्रोनन सिंक्रोट्रॉन (डीईएसवाई) में प्रमुख विज्ञान सुविधाओं में भारत की उच्च स्तरीय भागीदारी की भी प्रशंसा की और पीईटीआरए-III और डीईएसवाई में मुक्त-इलेक्ट्रॉन लेजर सुविधाओं में निरंतर सहयोग पर विश्वास व्यक्त किया।


दोनों नेताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) और जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी (डीएलआर) के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़े हुए संवाद पर ध्यान दिया और दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग को और बढ़ाने की संभावना का स्वागत किया। दोनों पक्ष अंतरिक्ष उद्योग स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने किफायती स्वास्थ्य सेवा के लिए साक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और जर्मनी के चैरिटे विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।


हरित एवं सतत विकास साझेदारी/नवीकरणीय ऊर्जा


दोनों नेताओं ने उल्लेख किया कि 2026 हरित एवं सतत विकास साझेदारी (जीएसडीपी) की प्रतिबद्धता अवधि का आधा समय पूरा होने का प्रतीक है और भारत तथा जर्मनी के बीच इस प्रमुख पहल के कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया। इसने सतत विकास और जलवायु कार्रवाई पर द्विपक्षीय सहयोग को तीव्र किया है और सतत विकास लक्ष्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और पेरिस समझौते के कार्यान्वयन को मजबूत किया है। जर्मन सरकार की 2030 तक की कुल 10 बिलियन यूरो की प्रतिबद्धता में से, जो अधिकतर रियायती ऋणों के रूप में है, लगभग 5 बिलियन यूरो 2022 से जलवायु शमन और अनुकूलन, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत शहरी विकास, हरित शहरी गतिशीलता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, वानिकी, जैव विविधता, कृषि इकोसिस्टम, चक्रीय अर्थव्यवस्था और कौशल विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए पहले ही उपयोग किए जा चुके हैं या आवंटित किए जा चुके हैं। इस तरह, जीएसडीपी के तहत भारत-जर्मन सहयोग ने भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों और परियोजनाओं जैसे पीएम ई-बस सेवा, सोलर रूफटॉप कार्यक्रम, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, अहमदाबाद, सूरत और बैंगलोर मेट्रो रेल परियोजनाएं, जल विजन 2047 के साथ-साथ तमिलनाडु में जलवायु-लचीले शहरी बुनियादी ढांचे, पश्चिम बंगाल में बैटरी भंडारण परियोजना, कृषि-फोटोवोल्टिक के क्षेत्र में नए भारत-जर्मन सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के वित्तपोषण में योगदान दिया है।


दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा के लिए वित्त और निवेश जुटाने के महत्व को दोहराया और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए भारत-जर्मनी मंच के तहत किए जा रहे संयुक्त प्रयासों जैसे कि अक्टूबर 2025 में सौर ऊर्जा उत्पादन और पवन ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूहों का शुभारंभ, साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधानों पर नवगठित संयुक्त कार्य समूह का स्वागत किया। ये संयुक्त कार्य समूह नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रौद्योगिकी, मानकों, विनियमन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करेंगे और भारत और जर्मनी की कंपनियों के बीच आदान-प्रदान और निवेश को बढ़ावा देंगे।


दोनों नेताओं ने भारत-जर्मन ऊर्जा मंच के भीतर संयुक्त रोडमैप के तहत किए जा रहे कार्यों सहित हरित हाइड्रोजन पर चल रहे सहयोग पर संतोष व्यक्त किया और गहन तकनीकी, वाणिज्यिक और नियामक सहयोग के साथ-साथ मजबूत व्यापार-से-व्यापार संबंधों के माध्यम से भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और जर्मनी की राष्ट्रीय हाइड्रोजन रणनीति को संयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत में हाइड्रोजन नियमों और मानकों के विकास में सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए, दोनों नेताओं ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) और जर्मन तकनीकी और वैज्ञानिक गैस एवं जल उद्योग संघ (डीवीजीडब्ल्यू) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत सबसे बड़े ऑफटेक समझौतों में से एक, एएम ग्रीन से यूनिपर ग्लोबल कमोडिटीज को हरित अमोनिया की आपूर्ति के लिए हस्ताक्षर का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने निजी क्षेत्र के प्रतिबद्ध हितधारकों द्वारा अब तक की गई प्रगति, विशेष रूप से हाल ही में भारतीय उत्पादित हरित अमोनिया के लिए हस्ताक्षरित बाध्यकारी व्यापक स्तर पर ऑफटेक समझौते- का स्वागत किया।


दोनों नेताओं ने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में त्रिकोणीय विकास सहयोग (टीडीसी) परियोजनाओं के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया और तीसरे देशों में सतत और समावेशी विकास का समर्थन करने के लिए पूरक शक्तियों और क्षमताओं को जुटाने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने घाना, कैमरून और मलावी में टीडीसी परियोजनाओं को बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया।

भारत-प्रशांत, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दे


दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र और खुले भारत-प्रशांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, संयुक्त राष्ट्र समुद्री समझौता समिति (यूएनसीएलओएस) सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर बल दिया और एक नए द्विपक्षीय भारत-प्रशांत परामर्श तंत्र की घोषणा की। भारत ने इस क्षेत्र में जर्मनी की निरंतर और बढ़ती भागीदारी का स्वागत किया, जिसमें भारत और जर्मनी के संयुक्त नेतृत्व वाली इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) के क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण स्तंभ के अंतर्गत गतिविधियां शामिल हैं।


भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के प्रति अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि करते हुए, दोनों नेताओं ने वैश्विक वाणिज्य, कनेक्टिविटी और समृद्धि को नया रूप देने और बढ़ावा देने में इसकी परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया। इस संदर्भ में, वे इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने हेतु पहली आईएमईसी मंत्रिस्तरीय बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


भारत और जर्मनी ने समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए स्थायी और अस्थायी सदस्यता श्रेणियों के विस्तार के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। इस संबंध में, दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईजीएन) में लिखित वार्ता शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।


दोनों नेताओं ने यूक्रेन में जारी युद्ध पर अपनी चिंता दोहराई, जो भारी जन पीड़ा और वैश्विक स्तर पर नकारात्मक परिणामों का कारण बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों के लिए समर्थन व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने गाजा शांति योजना का स्वागत किया और गाजा संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में 17 नवंबर 2025 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2803 को अपनाने का उल्लेख किया। उन्होंने सभी पक्षों को इस संकल्प को पूर्णतः लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध और व्यापक वितरण के साथ-साथ मानवीय संगठनों की निर्बाध पहुंच की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने न्यायसंगत और स्थायी शांति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करने की अपनी तत्परता की पुष्टि की और मध्य पूर्व में संघर्ष के न्यायसंगत, स्थायी और व्यापक समाधान के लिए वार्ता के माध्यम से द्विराज्य समाधान की अपनी अपील को दोहराया।

दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक कार्रवाई में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र वित्तीय परिषद (यूएनएफसीसीसी) प्रक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने पेरिस समझौते के महत्व और बेलेम में सीओपी 30 की पुनः पुष्टि तथा हाल के वर्षों में इसके अंतर्गत लिए गए निर्णयों, विशेष रूप से न्यायसंगत संक्रमण तंत्र और प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन कार्यक्रम के निर्माण और वैश्विक स्टॉकटेक की प्रतीक्षा पर प्रकाश डाला। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के अनुकूलन और हरित एवं टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं की ओर न्यायसंगत परिवर्तन में विकासशील देशों का समर्थन करने के लिए जलवायु कार्रवाई को अत्‍यधिक बढ़ाने तथा जलवायु वित्त एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्रों में प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन के लिए सुनियोजित जलवायु कार्रवाई की क्षमता और राष्ट्रीय एवं सीमा पार मूल्य श्रृंखलाओं के साथ परिवर्तन को आकार देने और गति प्रदान करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा जलवायु वित्त को बढ़ाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं और भीषण मौसम की घटनाओं से उत्पन्न खतरों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण क्षरण और जैव विविधता के नुकसान से सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को भी पहचाना।


उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें महामारी को लेकर तैयारी और प्रतिक्रिया, रोगाणुरोधी प्रतिरोध से लड़ना और सस्ती स्वास्थ्य देखभाल और दवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।


शिक्षा, कौशल विकास, गतिशीलता और संस्कृति


दोनों नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत परस्‍पर संबंध रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और छात्रों, शोधकर्ताओं, कुशल पेशेवरों, कलाकारों और पर्यटकों के बढ़ते आदान-प्रदान का स्वागत किया। उन्होंने जर्मनी की अर्थव्यवस्था, नवाचार और सांस्कृतिक जीवन में भारतीय समुदाय के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा, अनुसंधान, व्यावसायिक प्रशिक्षण, संस्कृति और युवा आदान-प्रदान में विस्तारित सहयोग के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी से होकर गुजरने के लिए वीजा-मुक्त पारगमन सुविधा की घोषणा के लिए चांसलर श्री मर्ज़ को धन्यवाद दिया, जिससे न केवल भारतीय नागरिकों की यात्रा सुगम होगी, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच परस्‍पर संबंध और भी मजबूत होंगे। दोनों पक्षों ने प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते (एमएमपीए) के प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करके कानूनी गतिशीलता को और मजबूत करने तथा देश छोड़ने के लिए बाध्य व्यक्तियों की वापसी और अनियमित प्रवासन, मानव तस्करी और दस्तावेज़ एवं वीजा धोखाधड़ी के विरुद्ध लड़ाई में सहयोग को मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।


दोनों नेताओं ने जर्मनी में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ उच्च शिक्षा में संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रमों, सहयोगात्मक अनुसंधान और संस्थागत साझेदारियों के विस्तारित नेटवर्क पर भी ध्यान दिया। बढ़ते आदान-प्रदान जर्मनी में भारतीय छात्रों और स्नातकों के रोजगार बाजार में एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई परियोजनाओं में भी परिलक्षित होते हैं। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और जर्मनी के तकनीकी विश्वविद्यालयों के बीच संस्थागत संबंधों का स्वागत किया। उन्होंने संस्थागत संबंधों को और मजबूत करने के लिए उच्च शिक्षा पर भारत-जर्मन व्यापक रोडमैप के निर्माण का भी स्वागत किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नई शिक्षा नीति के तहत भारत में परिसर खोलने के लिए जर्मनी के प्रमुख विश्वविद्यालयों को आमंत्रित किया।

दोनों नेताओं ने प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी समझौते के तहत कुशल प्रवासन में जारी सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। इस प्रतिबद्धता और जर्मनी की कुशल श्रम रणनीति के अनुरूप, दोनों देशों का उद्देश्य कुशल श्रमिकों की गतिशीलता को इस तरह सुगम बनाना है जिससे सभी पक्षों को लाभ हो, साथ ही शोषण से बचाव हो और अंतर्राष्ट्रीय श्रम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित हो। नेताओं ने वैश्विक कौशल साझेदारी पर संयुक्त उद्यम समझौते (जेडीआई) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया, जो कुशल गतिशीलता,विशेष रूप से जर्मनी में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक नैतिक और टिकाऊ ढांचा तैयार करने पर केंद्रित है। साथ ही, श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा करना भी इसका उद्देश्य है। दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा में कौशल विकास के लिए भारत-जर्मन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु संयुक्त उद्यम समझौते (जेडीआई) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया, जो भारतीय और जर्मन रोजगार बाजार के लिए पाठ्यक्रम विकास, जर्मन और भारतीय उद्योग के साथ सहयोग और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण में सहयोग को मजबूत करेगा। इस संदर्भ में, दोनों पक्ष भारत में जर्मन भाषा के शिक्षण का विस्तार करने के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं, जिसमें माध्यमिक विद्यालय, विश्वविद्यालय और व्यावसायिक शिक्षा केंद्र शामिल हैं।


भारत और जर्मनी के बीच मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों नेताओं ने ब्रेमरहेवन स्थित जर्मन समुद्री संग्रहालय - लाइबनिज़ समुद्री इतिहास संस्थान (डीएसएम) और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। इससे समुद्री विरासत पर सहयोग और गहरा होगा और समुद्री इतिहास के साझा पहलुओं को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इस संदर्भ में, संग्रहालयों के बीच सहयोग में नए सिरे से रुचि देखी जा रही है। दोनों नेताओं ने खेल में सहयोग पर संयुक्त अंतर-सरकारी परामर्श समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का भी स्वागत किया, जिससे एथलीट प्रशिक्षण, खेल प्रशासन, निष्पक्षता और एथलीटों के अधिकारों के साथ-साथ खेल विज्ञान में अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा।


चांसलर श्री मर्ज़ ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को उनके और उनके प्रतिनिधिमंडल के प्रति दिखाए गए सौहार्दपूर्ण आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि अगली भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श बैठक 2026 के अंत में जर्मनी में आयोजित की जाएगी और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।