प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के साणंद में माइक्रोन एटीएमपी (असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग) केंद्र का उद्घाटन किया। वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत का प्रतीक यह ऐतिहासिक आयोजन, वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व की ओर भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े और सबसे सफल एआई शिखर सम्मेलन के बाद, आज हम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के साक्षी बन रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “जहां एआई शिखर सम्मेलन ने विश्व को भारत की एआई क्षमताओं से परिचित कराया, वहीं आज का दिन प्रौद्योगिकी नेतृत्व के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां भारत कभी मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं के लिए जाना जाता था, वहीं अब वह हार्डवेयर क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “आज, साणंद में, हम एक नए भविष्य की शुरुआत देख रहे हैं। माइक्रोन के एटीएमपी केंद्र में वाणिज्यिक उत्पादन की शुरुआत वैश्विक प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए तैयार है।”
प्रधानमंत्री ने "नए भारत" की मानसिकता उल्लेख किया, जहां नीति से उत्पादन की ओर परिवर्तन अभूतपूर्व गति से हो रहा है। प्रधानमंत्री ने परियोजना की तीव्र प्रगति पर बल देते हुए कहा कि समझौता ज्ञापन पर जून 2023 में हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके बाद सितंबर 2023 में साणंद में शिलान्यास किया गया। श्री मोदी ने कहा, "फरवरी 2024 तक, प्रायोगिक केंद्र में मशीनों की स्थापना शुरू हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप फरवरी 2026 में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया।"

श्री मोदी ने कहा कि भारत ने जटिल नियामक प्रक्रियाओं को काफी हद तक सरल बना दिया है और कुछ ही महीनों में अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों (एपीए) को सफलतापूर्वक मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में भी इस प्रक्रिया को पूरा होने में आमतौर पर तीन से पांच वर्ष लग जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "जब इरादा स्पष्ट होता है और राष्ट्र के तीव्र विकास के प्रति समर्पण होता है, तो नीतियां पारदर्शी हो जाती हैं और निर्णय गति पकड़ते हैं।"
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह केंद्र भारत और अमेरिका के बीच, विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और चिप प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, मजबूत साझेदारी का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत और अमेरिका, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। श्री मोदी ने एआई शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षर किए गए पैक्स सिलिका समझौते को महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक विश्वसनीय बनाने के एक प्रमुख प्रयास के रूप में उद्धृत किया।
इस सदी को एआई क्रांति की सदी बताते हुए प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को इस बदलाव का सेतु बताया। ऐतिहासिक बदलावों की तुलना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यदि 20वीं सदी में तेल नियामक था, तो 21वीं सदी में माइक्रोचिप नियामक है। एक छोटी सी चिप औद्योगिक क्रांति को एआई क्रांति से जोड़ने का माध्यम है। श्री मोदी ने कहा, “इसी सोच के साथ भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आक्रामक रूप से आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। याद कीजिए कि जब दुनिया कोविड महामारी के कहर से जूझ रही थी, तब भारत ने अपना सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया था। महामारी के दौरान, जब सब कुछ बिखरता हुआ प्रतीत हो रहा था, तब हमने दृढ़ विश्वास के साथ जो बीज बोए थे, वे अब फल-फूल रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत 10 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि तीन और परियोजनाएं उत्तर प्रदेश, असम, ओडिशा और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में शीघ्र ही उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार हैं। श्री मोदी ने कहा, “हम जो इकोसिस्टम बना रहे हैं, वह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है; यह अखिल भारतीय स्तर का है। 'विकसित भारत' के लिए देश के हर कोने में नए तकनीकी केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम सिर्फ एक फैक्ट्री से कहीं अधिक है; यह एक बहुस्तरीय प्रणाली है जिसमें मशीन निर्माता, डिजाइन इंजीनियर, अनुसंधान संस्थान, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और कुशल तकनीशियन शामिल हैं। इन सभी तत्वों के सुचारू समन्वय से ही चिप का उत्पादन होता है। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत संपूर्ण मूल्य श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसी उद्देश्य से हमने इस वर्ष के बजट में 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' की घोषणा की है।” विकास की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ भारत में सामग्रियों, घटकों और सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी। यही सबसे बड़ा अवसर है।”
श्री मोदी ने कहा, “भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा पहली बार गैजेट का इस्तेमाल कर रहा है। चाहे इलेक्ट्रॉनिक्स हो, ऑटोमोबाइल हो या अन्य तकनीकें, इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। 'मेक इन इंडिया' अभियान पूरी रफ्तार से चल रहा है।” पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के उत्पादन और निर्यात में हुई कई गुना वृद्धि का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा, “निवेशकों के लिए घरेलू और वैश्विक बाजार दोनों में ही अवसर मौजूद हैं।”

साणंद के ऑटोमोबाइल हब में बदलने का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि माइक्रोन संयंत्र एक नए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का आधार बनेगा। यह संयंत्र वैश्विक डेटा केंद्रों, एआई अनुप्रयोगों और मोबाइल उपकरणों को शक्ति प्रदान करने के लिए डी-रैम और नैंड समाधानों का उत्पादन करेगा। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े एटीएमपी क्लीनरूम में से एक की मौजूदगी और न्यूनतम जल खपत के माध्यम से पर्यावरणीय स्थिरता पर इसकी विशेषता की भी सराहना की।
गुजरात सरकार की नीतियों की प्रशंसा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए बनाई गई नीतियां अब जमीनी स्तर पर परिणाम दे रही हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गुजरात प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। श्री मोदी ने कहा, “अनुमोदन, भूमि आवंटन और उपयोगिताओं जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। धोलेरा और साणंद पश्चिमी भारत के सेमीकंडक्टर क्लस्टर के रूप में विकसित हो रहे हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए आवश्यक इनपुट, जैसे रसायन और पेट्रोकेमिकल्स से संबंधित उद्योगों के साथ-साथ कौशल केंद्र और प्रशिक्षण पहल भी साथ-साथ विकसित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक निवेशकों को सशक्त संदेश देते हुए अपने संबोधन का समापन किया। उन्होंने कहा, “भारत तैयार है। भारत भरोसेमंद है। भारत परिणाम देता है।” उन्होंने वैश्विक साझेदारों और निवेशकों को केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अटूट समर्थन का आश्वासन दिया और इस दशक को भारत के तकनीकी विकास के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया। उनके भाषण ने वैश्विक स्तर पर एक स्पष्ट और दृढ़ प्रतिबद्धता को उजागर किया: "भारत सक्षम है। भारत प्रतिस्पर्धी है। भारत प्रतिबद्ध है।”
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India, long known for its software strength, is now firmly establishing its identity in the hardware sector as well. pic.twitter.com/hvZxNFA3Da
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Today, India is rapidly becoming an integral part of the global semiconductor value chain. pic.twitter.com/DAZafT4c3A
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This century belongs to the AI revolution. pic.twitter.com/zt7Yksw7x4
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If oil was the regulator of the last century, microchips will be the regulator of this century. pic.twitter.com/wU0PZTPk1v
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India has just one message for investors around the world... pic.twitter.com/fkiHA5HjCd
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