सीबीआई ने अपनी कार्यप्रणाली, सक्षमता और कौशल के माध्यम से आम नागरिकों का विश्वास अर्जित किया है
विकसित भारत का निर्माण पेशेवर और प्रभावशाली संस्थानों के बिना संभव नहीं है
सीबीआई की प्रमुख जिम्मेदारी भ्रष्टाचार से देश को मुक्‍त कराने की है
भ्रष्टाचार करना कोई साधारण प्रकार का अपराध नहीं है; यह गरीबों के अधिकार छीनता है, यह कई अन्य अपराधों का मार्ग प्रशस्त करता है; वास्तव में भ्रष्टाचार नैतिक पतन करता है और यह न्याय तथा लोकतंत्र के मार्ग में आने वाली सबसे बड़ी अड़चन है
जनधन, आधार, मोबाइल की त्रिमूर्ति हर लाभार्थी के लिए पूर्ण लाभ सुनिश्चित कर रही है
वर्तमान सरकार में देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है
किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को क्षमा नहीं करना चाहिए; भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारे प्रयासों में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए; यही देश की अभिलाषा है और यही देशवासियों की चाह है; देश, कानून और संविधान आपके साथ है

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की स्थापना 1 अप्रैल 1963 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत एक प्रस्ताव के साथ की गई थी।

इस कार्यक्रम के दौरान एक अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने सीबीआई के लिए विशिष्ट सेवाएं देने वाले कर्मियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक और ब्यूरो के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारियों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले पुरस्कार विजेताओं को पदक प्रदान किए। प्रधानमंत्री ने शिलांग, पुणे और नागपुर शहर में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने सीबीआई के हीरक जयंती समारोह वर्ष के अवसर को यादगार बनाते हुए एक डाक टिकट तथा स्मारक सिक्का जारी किया और ब्यूरो के ट्विटर हैंडल की भी शुरुआत की। श्री मोदी ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो की अद्यतित प्रशासन नियमावली, बैंक धोखाधड़ी पर एक तिथि पत्र - मामले की जानकारी और उससे मिली सीख, न्याय के लिए किये गए प्रयास - सीबीआई मामलों में उच्चतम न्यायालय के निर्णय व विदेशों से प्राप्त खुफिया जानकारी तथा साक्ष्य के आदान-प्रदान के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुलिस सहयोग पर एक पुस्तक भी जारी की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के हीरक जयंती समारोह के अवसर पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ब्यूरो ने देश की एक प्रमुख जांच एजेंसी के रूप में 60 वर्ष की यात्रा पूरी कर ली है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीबीआई ने बीते छह दशकों में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि ब्यूरो से संबंधित कुछ मामलों के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का एक संग्रह भी आज लॉन्च किया गया है, जो हमें केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के इतिहास की एक झलक देता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ शहरों में शुरू होने वाले चाहे नए कार्यालय हों, ट्विटर हैंडल हो या अन्य जो भी सुविधाएं आज से शुरू की गई हैं, ये सभी सीबीआई को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। श्री मोदी ने कहा कि सीबीआई ने अपनी कार्यप्रणाली, सक्षमता और कौशल के माध्यम से आम नागरिकों का विश्वास अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि आज भी जब कोई अनसुलझा हुआ मामला सामने आता है, तो उसको सीबीआई को सौंपने के लिए आम सहमति बनती है। श्री मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी किसी मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए शहरों में विरोध-प्रदर्शन भी शुरू हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी-किसी समय पंचायत स्तर पर जब कोई मामला उठता है तो नागरिकों के बीच एक आपसी समझ बनती है, जो सीबीआई जांच की मांग करती है। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो का नाम हर किसी की जुबान पर रहता है और सीबीआई सच्चाई और इंसाफ के लिए एक ब्रांड की तरह है। प्रधानमंत्री ने 60 साल की ऐतिहासिक यात्रा में सीबीआई से जुड़े सभी कर्मियों की सराहना दी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और ब्यूरो से स्वयं को उन्नत बनाते रहने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित चिंतन शिविर को अतीत से सीख लेनी चाहिए और भविष्य की योजना का निर्माण अमृत काल के महत्वपूर्ण समय को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए। यह ऐसे समय में अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जिस दौरान करोड़ों भारतीयों ने विकसित भारत का निर्माण करने का संकल्प लिया हुआ है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत का निर्माण पेशेवर तथा प्रभावशाली संस्थानों के बिना संभव नहीं है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सीबीआई की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।

ब्यूरो की कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सीबीआई ने बहु-आयामी और बहु-अनुशासनात्मक अन्‍वेषण एजेंसी के रूप में प्रतिष्‍ठा प्राप्‍त की है। उन्‍होंने इसके विस्तारित क्षेत्र का उल्लेख किया और कहा कि सीबीआई की मुख्य जिम्मेदारी भारत को भ्रष्टाचार से मुक्‍त कराना है। श्री मोदी ने कहा कि भ्रष्टाचार करना कोई साधारण प्रकार का अपराध नहीं है, यह गरीबों के अधिकार छीनता है, यह कई अन्य अपराधों का मार्ग प्रशस्त करता है, वास्तव में भ्रष्टाचार नैतिक पतन करता है और यह न्याय तथा लोकतंत्र के मार्ग में आने वाला सबसे बड़ा रोड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र में होने वाला भ्रष्टाचार लोकतांत्रिक व्यवस्था में रुकावटें उत्पन्न करता है और इसके असर से सबसे पहले युवाओं के सपने चूर-चूर होते हैं, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में एक खास तरह का इकोसिस्टम फलता-फूलता होता है, जो प्रतिभाओं का दमन करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाई-भतीजावाद और एक वंशवादी व्यवस्था इस तरह के तंत्र को बढ़ावा देती है, जो राष्ट्र की शक्ति को कम करता है तथा देश के विकास में गंभीर रूप से बाधा पहुंचाता है।

प्रधानमंत्री ने स्मरण करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से, देश को अपनी स्वतंत्रता के समय भ्रष्टाचार की विरासत मिली थी। उन्होंने इस तथ्य पर खेद व्यक्त किया कि भ्रष्टाचार को दूर करने के स्थान पर कुछ लोग इस व्याधि को पोषित करते रहे। श्री मोदी ने सिर्फ एक दशक पहले होने वाले घोटालों के दृश्य और दण्ड से मुक्ति की प्रचलित भावना को याद किया। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था ने सरकारी तंत्र को बर्बाद कर दिया और नीतिगत पक्षाघात के माहौल ने विकास की गति को करीब-करीब ठप कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2014 के बाद उनकी सरकार का पहला दायित्‍व व्‍यवस्‍था में विश्‍वास बहाल करना था। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने मिशन मोड में काले धन व बेनामी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी तथा भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगाना प्रारंभ कर दिया और साथ ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले कारणों पर भी प्रहार किया गया। श्री मोदी ने सरकारी निविदा जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने को याद किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने व्‍यवस्‍थाओं में सर्वोच्‍च पारदर्शिता सुनिश्चित की है और टू जी तथा फाइव जी स्‍पैक्‍ट्रम के आवंटन की प्रक्रिया इसका उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार के हर विभाग में खरीदारी करने में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जीईएम (गवर्नमेंट ईमार्केटप्लेस) पोर्टल की शुरुआत की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई प्रणाली पहले की 'फोन बैंकिंग' की दुर्दशा से बहुत बेहतर है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में वर्तमान सरकार ने कठिन परिश्रम करके बैंकिंग क्षेत्र को संकट से बाहर निकाला है। श्री मोदी ने भगोड़े आर्थिक अपराधी के खिलाफ बनाए गए अधिनियम का उल्लेख किया, जिसकी सहायता से अब तक भगोड़े अपराधियों की 20 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।

प्रधानमंत्री ने सरकारी खजाने को लूटने के दशकों पुराने तरीकों में से एक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारी सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भेजी जाने वाली सहायता राशि को लूटने की हद तक चले जाते थे। श्री मोदी ने कहा कि चाहे वह राशन देना हो, घर उपलब्ध कराना हो, छात्रवृत्ति देनी हो, पेंशन की व्यवस्था हो या कोई अन्य सरकारी योजना हो, उनका मूल लाभार्थी हर बार ठगा हुआ महसूस करता था। उन्होंने इस तथ्य का उल्लेख किया कि किसी प्रधानमंत्री ने भी एक बार कहा था, गरीबों को भेजे गए प्रत्येक रुपये में से केवल 15 पैसे ही उसके पास पहुंचते हैं। श्री मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सरकार अब तक 27 लाख करोड़ रुपये गरीबों को हस्तांतरित कर चुकी है और यदि इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार दूर न किया जाता तो एक रुपये में 15 पैसे पहुंचने के सिद्धांत के आधार पर 16 लाख करोड़ रुपये पहले ही गायब हो जाते। प्रधानमंत्री ने इस बात का जिक्र किया कि जनधन, आधार, मोबाइल की त्रिमूर्ति हर लाभार्थी के लिए पूर्ण लाभ सुनिश्चित कर रही है। इसी क्रम में 8 करोड़ से अधिक फर्जी लाभार्थियों को प्रणाली से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के कारण ही देश का करीब 2.25 लाख करोड़ रुपया गलत हाथों में जाने से बचा है।

श्री मोदी ने साक्षात्कार के नाम पर भर्तियों में होने वाले भ्रष्टाचार को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र में ग्रुप सी और ग्रुप डी सेवाओं में इंटरव्यू प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। इसी तरह यूरिया की नीम-कोटिंग कर यूरिया के लिए होने वाले घोटालों पर नियंत्रण पाया गया है। प्रधानमंत्री ने रक्षा सौदे में बढ़ती पारदर्शिता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर बल देने की भी बात कही।

प्रधानमंत्री ने किसी भी जांच में देरी की वजह से उत्पन्न होने वाली समस्याओं जैसे दोषियों को सजा मिलने में विलम्ब और निर्दोषों को प्रताड़ित किये जाने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इसके लिए जांच प्रक्रिया को तेज करने, सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय कार्यप्रणालियों को अपनाने और भ्रष्ट व्यक्तियों को शीघ्रता से जवाबदेह ठहराने का रास्ता साफ करने के उद्देश्य से अधिकारियों के बीच क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के अंदर देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बिना किसी हिचकिचाहट के कार्रवाई करने का आह्वान किया, फिर चाहे वह व्यक्ति कितना भी रसूखदार क्यों न हो। श्री मोदी ने भ्रष्टाचारियों की ताकत के इतिहास और उनके द्वारा जांच एजेंसियों को कलंकित करने के लिए बनाए गए तंत्र से विचलित नहीं होने को भी बात कही। उन्होंने कहा कि ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे, लेकिन आपको अपने काम पर पूरा ध्यान देना होगा। किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को क्षमा नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में हमारे प्रयासों में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए। यही राष्ट्र की अभिलाषा है और यही देशवासियों की चाह है। देश, कानून और संविधान आपके साथ है।

प्रधानमंत्री ने इस दिशा में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच दूरियों को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दोहराया कि आपसी विश्वास के माहौल में ही संयुक्त और बहु-विषयक जांच संभव हो पाएगी। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और भौगोलिक सीमाओं के बाहर भी बड़े पैमाने पर लोगों, वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक शक्ति बढ़ रही है और इसके साथ ही बाधाएं उत्पन्न करने वालों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि भारत के सामाजिक ताने-बाने, राष्ट्रीय एकता व भाईचारे, भारत के आर्थिक हितों और भारतीय संस्थाओं पर हमले भी बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर भ्रष्टाचार का पैसा खर्च होगा। श्री मोदी ने अपराध एवं भ्रष्टाचार की बहुराष्ट्रीय प्रकृति को समझने और इसका अध्ययन करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने जांच में फोरेंसिक विज्ञान के इस्तेमाल को और अधिक विस्तारित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भले ही आधुनिक तकनीक के कारण अपराध वैश्विक हो रहे हैं, लेकिन इसके समाधान भी इसी में ही निहित हैं।

प्रधानमंत्री ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तकनीक-सक्षम उद्यमियों एवं युवाओं को जोड़ने तथा ब्यूरो में तकनीक-जानकार युवा अधिकारियों का बेहतर उपयोग करने का सुझाव दिया। श्री मोदी ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो में ऐसी 75 प्रक्रियाओं और प्रणालियों को संकलित करने के लिए सीबीआई की सराहना की, जिन्हें व्यवस्था से बाहर किया जा सकता है। उन्होंने इस पर समयबद्ध तरीके से कार्य करने के लिए कहा। श्री मोदी ने कहा कि संस्था के विकास की प्रक्रिया अथक रूप से जारी रहनी चाहिए।

केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री श्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल, कैबिनेट सचिव श्री राजीव गौबा और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक श्री सुबोध कुमार जायसवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।