जिन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं उनमें विरुधुनगर, नामक्कल, नीलगिरी, तिरुपुर, तिरुवल्लूर, नागपट्टिनम, डिंडीगुल, कल्लाकुरिची, अरियालुर, रामनाथपुरम और कृष्णागिरी हैं
पिछले सात सालों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 54 प्रतिशत बढ़कर 596 हो गई है
मेडिकल स्नातक और स्नातकोत्तर सीटें बढ़कर लगभग 1 लाख 48 हजार सीटों तक पहुंच गई हैं, जो 2014 की 82 हजार सीटों की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत अधिक है
एम्स अस्पतालों की संख्या बढ़कर आज 22 हो गई है, जबकि 2014 में इसकी संख्या केवल 7 थी
“भविष्य उन समाजों का होगा जो स्वास्थ्य सेवा में निवेश करेंगे। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में कई सुधार किए हैं”
“अगले पांच वर्षों में तमिलनाडु को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जाएगी। इससे राज्य भर में शहरी हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर, जिला जन स्वास्थ्य लैब तथा क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित करने में मदद मिलेगी”
"मैं हमेशा तमिल भाषा एवं संस्कृति की समृद्धि से प्रभावित रहा हूं"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से तमिलनाडु में 11 नए मेडिकल कॉलेजों और केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) के एक नए परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया, डॉ एल. मुरुगन और डॉ. भारती पवार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम. के. स्टालिन उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मेडिकल कॉलेजों के उद्घाटन और केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के नए भवन का उद्घाटन होने से हमारे समाज को स्वास्थ्य सुविधा मिलने के साथ-साथ हमारी संस्कृति के साथ हमारा संबंध मजबूत हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी बहुत लंबे समय से एक मुद्दा बनी हुई है और वर्तमान सरकार ने इस महत्वपूर्ण कमी को दूर करने को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 2014 में देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे। पिछले सात सालों में ही यह संख्या बढ़कर 596 मेडिकल कॉलेज हो गई है। यह 54 प्रतिशत की वृद्धि है। 2014 में, भारत में लगभग 82 हजार मेडिकल स्नातक और स्नातकोत्तर सीटें थीं। पिछले सात सालों में यह संख्या बढ़कर करीब 1 लाख 48 हजार सीटों तक पहुंच गई है। यह लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि 2014 में देश में सिर्फ सात एम्स थे। लेकिन 2014 के बाद स्वीकृत एम्स की संख्या 22 हो गई है। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु में एक बार में 11 मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन करके, उन्होंने एक तरह से अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया, जब उन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश में 9 मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दो महत्वाकांक्षी जिलों रामनाथपुरम और विरुधुनगर के साथ-साथ नीलगिरी के पहाड़ी जिले में कॉलेजों की स्थापना से क्षेत्रीय असंतुलन को दूर किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने जीवन में स्वास्थ्य क्षेत्र के महत्व की एक बार फिर से पुष्टि की है। भविष्य उन समाजों का होगा जो स्वास्थ्य सेवा में निवेश करेंगे। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में कई सुधार किए हैं। गरीब लोगों को उच्च गुणवत्ता और सस्ती स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच प्रदान करने का श्रेय आयुष्मान भारत को जाता है। घुटने के प्रत्यारोपण और स्टेंट की लागत पहले की तुलना में एक-तिहाई हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 1 रुपये की लागत से सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराकर महिलाओं के बीच स्वस्थ जीवन-शैली को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का उद्देश्य विशेष रूप से जिला स्तर पर स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं तथा स्वास्थ्य अनुसंधान में महत्वपूर्ण अंतर को दूर करना है। अगले पांच वर्षों में तमिलनाडु को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे राज्य भर में शहरी स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला तथा क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, आने वाले वर्षों में, "मैं भारत को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा के लिए जाने-माने गंतव्य के रूप में देखता हूं। भारत में मेडिकल टूरिज्म का हब बनने के लिए जरूरी हर चीज मौजूद है। हमारे डॉक्टरों के कौशल के आधार पर मैं यह कहता हूं।” उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के लोगों से टेलीमेडिसिन की ओर ध्यान देने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे हमेशा तमिल भाषा और संस्कृति की समृद्धि से प्रभावित रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरे जीवन के सबसे खुशी के पलों में से एक था जब मुझे संयुक्त राष्ट्र में दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल में कुछ शब्द बोलने का मौका मिला।" उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में तमिल अध्ययन पर 'सुब्रमण्यम भारती पीठ' स्थापित करने का भी सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में स्थित यह पीठ तमिल के प्रति और अधिक जिज्ञासा जागृत करेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं और भारतीय ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने पर जोर देने के बारे में, प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल को अब माध्यमिक स्तर या मध्य स्तर पर स्कूली शिक्षा में शास्त्रीय भाषा के रूप में अध्ययन किया जा सकता है। तमिल भाषा-संगम की भाषाओं में से एक है, जहां स्कूली छात्र ऑडियो वीडियो में विभिन्न भारतीय भाषाओं में 100 वाक्यों से परिचित होते हैं। भारतवाणी परियोजना के तहत तमिल की सबसे बड़ी ई-कंटेंट को डिजिटल किया गया है। उन्होंने कहा, “हम स्कूलों में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हमारी सरकार ने भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों को छात्रों के लिए उपलब्ध कराना भी शुरू कर दिया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' विविधता में एकता की भावना को बढ़ाने और हमारे लोगों को करीब लाने का प्रयास है। उन्होंने जोर देकर कहा, "जब हरिद्वार में एक छोटा बच्चा तिरुवल्लुवर की मूर्ति को देखता है और उनकी महानता के बारे में जानता है, तो युवा दिमाग में 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' का बीज डाला जाता है।" अंत में उन्होंने सभी को हरेक सावधानी बरतने और कोविड समुचित व्यवहार को बनाए रखने के लिए कहा।

नए मेडिकल कॉलेज लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्थापित किए जा रहे हैं, जिसमें से लगभग 2,145 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और बाकी तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रदान किए गए हैं। जिन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं उनमें विरुधुनगर, नमक्कल, नीलगिरी, तिरुपुर, तिरुवल्लूर, नागपट्टिनम, डिंडीगुल, कल्लाकुरिची, अरियालुर, रामनाथपुरम और कृष्णागिरी शामिल हैं। इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना देश के सभी हिस्सों में सस्ती चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं में सुधार को लेकर प्रधानमंत्री के निरंतर प्रयास के अनुरूप है। कुल मिलाकर 1450 सीटों की क्षमता वाले नए मेडिकल कॉलेज 'मौजूदा जिला/रेफरल अस्पताल से जुड़े नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना' नामक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत स्थापित किए जा रहे हैं। योजना के तहत उन जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाते हैं, जिनमें न तो सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज हैं।

चेन्नई में केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) के एक नए परिसर की स्थापना भारतीय विरासत की रक्षा तथा संरक्षण एवं शास्त्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है। नया परिसर पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और 24 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित है। अभी तक किराए के भवन से संचालित होने वाला सीआईसीटी अब नए 3 मंजिला परिसर से संचालित होगा। नया परिसर एक विशाल पुस्तकालय, एक ई-लाइब्रेरी, सेमिनार हॉल और एक मल्टीमीडिया हॉल से सुसज्जित है।

सीआईसीटी, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है, जो तमिल भाषा की प्राचीनता तथा विशिष्टता को स्थापित करने के लिए शोध गतिविधियां करके शास्त्रीय तमिल को बढ़ावा देने में योगदान दे रहा है। संस्थान के पुस्तकालय में 45,000 से अधिक प्राचीन तमिल पुस्तकों का समृद्ध संग्रह है। शास्त्रीय तमिल को बढ़ावा देने और अपने छात्रों का समर्थन करने के लिए, संस्थान सेमिनार तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन, फेलोशिप आवंटन आदि जैसे शैक्षिक क्रियाकलापों में शामिल है। इसका उद्देश्य विभिन्न भारतीय और साथ ही 100 विदेशी भाषाओं में 'तिरुक्कुरल' का अनुवाद और प्रकाशन करना है। नया परिसर दुनिया भर में शास्त्रीय तमिल को बढ़ावा देने के प्रयास में संस्थान के लिए एक प्रभावकारी क्रियाशील वातावरण प्रदान करेगा।

 

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प्रधानमंत्री 1 अगस्त को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के दौरे पर जाएंगे
July 31, 2026
प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला और उनका उद्घाटन कर राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री भोगपुरम में अत्याधुनिक अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उद्घाटन करेंगे
5,640 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का उद्देश्य हवाई संपर्क को मजबूत करना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है
हवाई अड्डे के टर्मिनल का डिज़ाइन आंध्र प्रदेश के चुट्टिलू कॉटेज, अरकु घाटी और फ्लाइंग फिश से प्रेरित है
प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश की पहली सेमीकंडक्टर विनिर्माण सुविधा की आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री मैसूरु के श्री रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र -विवेक स्मारक का भी उद्घाटन करेंगे
विवेक स्मारक का निर्माण स्वामी विवेकानंद की नवंबर 1892 में मैसूरु की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में किया गया है
विवेक स्मारक मूल्य-आधारित शिक्षा, नेतृत्व और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करेगा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 1 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की यात्रा पर जाएंगे। प्रधानमंत्री सुबह लगभग 11 बजे आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल भवन का निरीक्षण करेंगे। लगभग 11:30 बजे, प्रधानमंत्री मोदी हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे और भोगपुरम में 17,900 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वे सभा को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद, दोपहर लगभग 3:30 बजे, प्रधानमंत्री मैसूरु स्थित श्री रामकृष्ण आश्रम में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र-विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वे सभा को संबोधित भी करेंगे।

आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी आंध्र प्रदेश के भोगपुरम में अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत 5,640 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को प्रति वर्ष 60 लाख यात्रियों को संभालने के लिए तैयार किया गया है।

यात्री टर्मिनल भवन को भी आधुनिक, सुगम और कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। हवाई अड्डे में उन्नत बुनियादी ढांचा, अत्याधुनिक तकनीकें और दीर्घकालिक विशेषताएं शामिल हैं ताकि परिचालन दक्षता को बढ़ाया जा सके और भविष्य की विमानन आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

हवाई अड्डे को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम), एयरसाइड 4.0 तकनीक, एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशंस सेंटर (एपीओसी), बायोमेट्रिक यात्री प्रसंस्करण, स्वचालित बैगेज हैंडलिंग सिस्टम और इंटेलिजेंट ऑपरेशनल मॉनिटरिंग सॉल्यूशंस जैसी उन्नत तकनीकों से सुसज्जित किया गया है। इन प्रणालियों से परिचालन दक्षता में वृद्धि, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा में सुधार तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग की आशा है।

इस परियोजना में ऊर्जा-कुशल हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग (एचवीएसी) सिस्टम, ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था, 5 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, वर्षा जल संचयन, स्मार्ट बिल्डिंग प्रबंधन प्रणाली, अपशिष्ट प्रबंधन पहल, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण निगरानी उपायों सहित कई सतत विकास संबंधी विशेषताएं शामिल हैं। टर्मिनल को हरित भवन मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और यह यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (यूएसजीबीसी) में पंजीकृत है।

हवाई अड्डे का वास्तुशिल्प डिज़ाइन आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है। टर्मिनल की छत का आकार पारंपरिक चुट्टिलू झोपड़ियों और अरकु घाटी के परिदृश्यों को दर्शाता है, जबकि इसका प्रवाहमय रूप उड़ती हुई मछली की मनमोहक गति का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय वास्तुशिल्प विशेषताओं को समकालीन हवाई अड्डे के डिज़ाइन के साथ मिश्रित करता है। आशा है कि यह हवाई अड्डा आंध्र प्रदेश में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा और साथ ही क्षेत्र में हवाई संपर्क को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री विशाखापत्तनम में 460 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से विकसित की जा रही एएसआईपी सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस संयंत्र का विकास एएसआईपी टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दक्षिण कोरिया की एपीएसीटी के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। यह आंध्र प्रदेश का पहला सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र है जिसे भारत सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत स्वीकृति मिली है। यह संयंत्र प्रतिवर्ष लगभग 96 मिलियन सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेगा और उच्च-कुशल रोजगार के अवसर पैदा करेगा, साथ ही सेमीकंडक्टर विनिर्माण को समर्थन देने के लिए एक मजबूत सहायक इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा।

प्रधानमंत्री कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (आरईएच) के एकीकरण के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम- चरण-I (4.5 गीगावाट) की आधारशिला रखेंगे, जिसे पावरग्रिड द्वारा एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से लगभग 5,550 करोड़ रुपए के निवेश के साथ कार्यान्वित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री लगभग 3,550 करोड़ रुपये की लागत से कार्यान्वित कुरनूल पवन ऊर्जा क्षेत्र/सौर ऊर्जा क्षेत्र (आंध्र प्रदेश)-भाग ए और भाग बी के लिए पारेषण प्रणाली और पावरग्रिड द्वारा 820 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कार्यान्वित अनंतपुरम (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) में सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए पारेषण योजना का भी उद्घाटन करेंगे।

इन पारेषण परियोजनाओं से कुरनूल और अनंतपुरम के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों से उत्पन्न बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से देश भर के लाभार्थियों तक पहुंचाना संभव होगा। इनसे ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा को एकीकृत करने में सुविधा होगी, मांग केंद्रों के लिए स्वच्छ बिजली की उपलब्धता में सुधार होगा और जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम करके भारत के ऊर्जा परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों में योगदान मिलेगा।

प्रधानमंत्री 1,880 करोड़ रुपये से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की आधारशिला राष्ट्र को समर्पित करेंगे। समर्पित की जाने वाली परियोजनाओं में एनएच-365बीजी के रेचेरला से गुरुवायगुडेम खंड तक का चार लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग, गुरुवायगुडेम से देवरापल्ले खंड तक का चार लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग और एनएच-67 पर चार लेन वाला ताडीपत्री बाईपास शामिल हैं। प्रधानमंत्री एनएच-565 के पेंचलाकोना-येरपेडु खंड पर लिंगसमुद्रम में उच्च स्तरीय पुल की आधारशिला भी रखेंगे। इन परियोजनाओं से विजयवाड़ा और कई अन्य शहरों में यातायात जाम कम होगा, सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, विशाखापत्तनम और हैदराबाद के बीच यात्रा की दूरी और समय कम होगा और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा।

कर्नाटक में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी कर्नाटक के मैसूरु में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र-विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे।

विवेक स्मारक स्वामी विवेकानंद की भारत यात्रा के दौरान नवंबर 1892 में मैसूरु की ऐतिहासिक यात्रा स्मृति में बनाया गया है। अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने प्रवचन दिए, विद्वानों और भक्तों से बातचीत की और महाराजा श्री चामराजेंद्र वाडियार-एक्स का संरक्षण प्राप्त किया, जिनके समर्थन से वे 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में भाग ले सके।

ऐतिहासिक निरंजन मठ में स्थापित विवेक स्मारक 81,000 वर्ग फुट से अधिक के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें एक मुख्य भवन और एक संलग्न ब्लॉक शामिल है। इसमें एक 4-डी अनुभव केंद्र, एक प्रदर्शनी हॉल, लगभग 700 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एम्फीथिएटर, कक्षाएं, सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय, वाचनालय, ध्यान और योग कक्ष तथा पुस्तक स्टॉल स्थित हैं। केंद्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

स्वामी विवेकानंद के जीवन, संदेश और आदर्शों को समर्पित, यह सांस्कृतिक युवा केंद्र मूल्य-आधारित शिक्षा, नेतृत्व विकास और व्यक्तित्व निर्माण के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में कार्य करने का लक्ष्य रखता है। उम्मीद है कि स्वामी विवेकानंद के राष्ट्र निर्माण और चरित्र विकास के दर्शन से प्रेरित व्याख्यानों, कार्यशालाओं, अल्पकालिक पाठ्यक्रमों और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से यह केंद्र आसपास के शिक्षण संस्थानों के 10,000 से अधिक छात्रों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण युवाओं को लाभान्वित करेगा।