प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और ईरान इस्लामी गणराज्य के राष्ट्रपति एच.ई. श्री इब्राहिम रायसी ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में एससीओ के राष्ट्राध्यक्ष परिषद की 22वीं बैठक के आयोजन के दौरान मुलाकात की। 2021 में राष्ट्रपति रायसी के पदभार ग्रहण करने के बाद, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति रायसी के बीच यह पहली बैठक थी।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की तथा संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंध, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों द्वारा रेखांकित किये जाते हैं, जिनमें दोनों देशों के लोगों के मजबूत आपसी संपर्क शामिल हैं।

दोनों राजनेताओं ने शहीद बेहेस्ती टर्मिनल, चाबहार बंदरगाह के विकास में हुई प्रगति की समीक्षा की और क्षेत्रीय संपर्क के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

दोनों राजनेताओं ने अफगानिस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने की भारत की प्राथमिकताओं और एक शांतिपूर्ण, स्थिर एवं सुरक्षित अफगानिस्तान के समर्थन में एक प्रतिनिधि और समावेश आधारित राजनीतिक व्यवस्था की आवश्यकता को दोहराया।

राष्ट्रपति रायसी ने प्रधानमंत्री को जेसीपीओए वार्ताओं की वर्त्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति रायसी को अपनी सुविधानुसार जल्द से जल्द भारत आने का आमंत्रण दिया।

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प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प, आत्मसंयम और बुद्धिमत्ता के गुणों पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 02, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका तात्‍पर्य है दृढ़ संकल्प और आत्म-संयम ही वह शक्तियां हैं जो कठिनतम मार्गों को भी सुगम बना देती हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज हमारे युवा इसी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

"दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः।

अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥"

जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भांति सोच-समझकर दृढ़ निश्‍चय के साथ आरंभ करता है और बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, जो समय का सदुपयोग करता है तथा अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। ऐसा व्‍यक्ति ही वास्‍तव में बुद्धिमान होता है।