प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों के कल्याण के लिए प्रार्थना करते हुए एक सुभाषितम साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के शुभारंभ पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और उस शाश्वत सभ्यतागत भावना का स्‍मरण किया जिसने एक सहस्राब्दी से भी अधिक समय से लाखों लोगों के ह्दय में सोमनाथ को जीवित रखा है।

श्री मोदी ने उल्लेख किया कि जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला आक्रमण हुआ था। बाद की शताब्दियों में बार-बार हुए हमलों के बावजूद, भक्तों की अटूट आस्था और भारत के सभ्यतागत संकल्प ने यह सुनिश्चित किया कि सोमनाथ का बार-बार पुनर्निर्माण हो। उन्होंने कहा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत माता के उन अनगिनत बच्चों को याद करने का पर्व है जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न रही हों, उनका संकल्प अडिग रहा और भारत के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट रही।”

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की झलकियां साझा कीं और नागरिकों को #SomnathSwabhimanParv हैशटैग का उपयोग करके अपनी यादें साझा करके उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने 31 अक्टूबर 2001 को आयोजित कार्यक्रम को याद किया, जो तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और कई अन्य लोगों के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया गया। 2001 का कार्यक्रम सरदार पटेल की 125वीं जयंती के साथ ही आयोजित किया गया था और इसमें तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, गृह मंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भविष्य का उल्‍लेख करते हुए इस बात पर बल दिया कि 2026 में 1951 के उस भव्य समारोह की 75वीं वर्षगांठ होगी, जब सोमनाथ मंदिर राष्ट्र को समर्पित किया गया था। उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि केवल मंदिर के पुनर्निर्माण की नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की उस अदम्य भावना के बारे में भी है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।”

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग थ्रेड पोस्ट में लिखा:

“जय सोमनाथ !

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पूर्व, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके। बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और सशक्त हुई और सोमनाथ का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा।

मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। यदि आप भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ जरूर शेयर करें।”

“#SomnathSwabhimanParv का ये अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। अटूट आस्था के एक हजार वर्ष का ये अवसर, हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।”

“मैं 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी आपसे साझा कर रहा हूं। यह वो साल था, जब हमने 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाया था। 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की मौजूदगी में संपन्न हुआ था। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल और केएम मुंशी जी के साथ ही कई महान विभूतियों के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। साल 2001 के इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी और गृह मंत्री आडवाणी जी और कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे।

वर्ष 2026 में हम 1951 में हुए भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का भी स्मरण कर रहे हैं!”

“जय सोमनाथ !

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पूर्व, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके। बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और सशक्त हुई और सोमनाथ का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा।

मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। यदि आप भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ जरूर शेयर करें।”

“#SomnathSwabhimanParv का ये अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। अटूट आस्था के एक हजार वर्ष का ये अवसर, हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।”

“मैं 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी आपसे साझा कर रहा हूं। यह वो साल था, जब हमने 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाया था। 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी की मौजूदगी में संपन्न हुआ था। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल और केएम मुंशी जी के साथ ही कई महान विभूतियों के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। साल 2001 के इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी और गृह मंत्री आडवाणी जी और कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे।

वर्ष 2026 में हम 1951 में हुए भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का भी स्मरण कर रहे हैं!”

Sharing a Sanskrit verse on X, Shri Modi stated:

“श्री सोमनाथ महादेव की कृपा और आशीर्वाद से सबका कल्याण हो।

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।

भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥”

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Prime Minister underscores Somnath Dham’s timeless role in awakening the collective consciousness of the nation through a Subhashitam
January 09, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi today paid homage to the sacred Somnath Dham, underscoring its timeless role in awakening the collective consciousness of the nation.

The Prime Minister highlighted that the sacred Somnath Dham has, for centuries, inspired generations with its divine energy. He noted that this energy continues to illuminate the path of faith, courage, and self-respect, serving as a guiding light for the people of India across ages.

Quoting a Sanskrit verse on X, Shri Modi wrote:

“पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।

आदिनाथेन शर्वेण सर्वप्राणिहिताय वै।

आद्यतत्त्वान्यथानीयं क्षेत्रमेतन्महाप्रभम्।

प्रभासितं महादेवि यत्र सिद्ध्यन्ति मानवाः॥”