प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्रपतिजी की शुभकामनाओं और सहृदय उद्गारों के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में जो कुछ भी हासिल किया गया वह भारत की जनता के सामूहिक प्रयासों और आकांक्षाओं का परिणाम है।

श्री मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का स्नेह और आशीर्वाद उनकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राष्ट्रपतिजी के पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का जिक्र करने से विशेष रूप से प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि सरकार विकास का लाभ अंत्योदय की सच्ची भावना से समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखाः

‘‘राष्ट्रपतिजी,

मैं आपकी शुभकामनाओं और सहृदय उद्गारों के लिए आपके प्रति कृतज्ञ हूं। पिछले वर्षों में जो कुछ भी हासिल किया गया वह भारत की जनता के सामूहिक प्रयासों और आकांक्षाओं का परिणाम है। 140 करोड़ भारतीयों का स्नेह और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा हैं। मैं इस बात से विशेष रूप से प्रसन्न हूं कि आपने पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का उल्लेख किया। हमारी सरकार विकास का लाभ अंत्योदय की सच्ची भावना से समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना सुनिश्चित करने के लिए कटिबद्ध है।

@rashtrapatibhvn”

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प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए ज्ञान के महत्व और उसकी परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डाला
September 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए बताया कि ज्ञान समाज के साथ सद्भाव में रहने की कला सिखाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बुद्धि और समृद्धि प्रदान करता है, हृदय को आनंद से भर देता है और व्यक्ति की गरिमा को बढ़ाता है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्।
उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥”

यह सुभाषितम बताता है कि विद्या मनुष्य को लोक-व्यवहार की समझ देती है, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करती है, उसके मन को आह्लादित करती है तथा महत्व को बढ़ाती है। इसलिए विद्या सुशासन की सेवा से समान हृदय को प्रिय और जीवन को उन्नत बनाने वाली है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्।
उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥”