प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किए गए चार विशिष्ट व्यक्तियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्‍स पर कई पोस्टों में प्रत्येक मनोनीत व्यक्ति के योगदान का उल्‍लेख किया।

प्रधानमंत्री ने श्री उज्ज्वल निकम की कानूनी पेशे के प्रति उनके अनुकरणीय समर्पण और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री निकम एक सफल वकील रहे हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आम नागरिकों की गरिमा को बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य किया। श्री मोदी ने राज्यसभा में उनके मनोयन का स्वागत किया और संसदीय भूमिका में उनकी सफलता की कामना की।

प्रधानमंत्री ने कहा;

"श्री उज्ज्वल निकम का कानूनी क्षेत्र और हमारे संविधान के प्रति समर्पण अनुकरणीय है। वह न केवल एक सफल वकील रहे हैं बल्कि महत्वपूर्ण मामलों में न्याय पाने के लिए भी अग्रणी रहे हैं। अपने पूरे कानूनी जीवन के दौरान, उन्होंने हमेशा संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और आम नागरिकों के साथ हमेशा सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए काम किया है। यह खुशी की बात है कि भारत की राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। उनकी संसदीय पारी के लिए मेरी शुभकामनाएं।"

प्रधानमंत्री ने श्री सी. सदानंदन मास्टर के जीवन को साहस और अन्याय के प्रतिरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हिंसा और धमकी का सामना करने के बावजूद, श्री सदानंदन मास्टर राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध रहे। प्रधानमंत्री ने एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनके योगदान की भी प्रशंसा की और युवा सशक्तिकरण के प्रति उनके जुनून का उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रपति जी द्वारा उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर बधाई दी और उनकी नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने कहा;

“श्री सी. सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे झुकने से इंकार का प्रतीक है। हिंसा और धमकी राष्ट्रीय विकास के प्रति उनके जज्बे को कम नहीं कर सकी। एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं। युवा सशक्तिकरण के प्रति उनमें गहरी रुचि है। राष्ट्रपति जी द्वारा उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर बधाई। एक सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएं।”

प्रधानमंत्री ने श्री हर्षवर्धन श्रृंगला के नामांकन पर कहा कि उन्होंने एक राजनयिक, बुद्धिजीवी और रणनीतिक विचारक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने भारत की विदेश नीति में श्री श्रृंगला के योगदान और भारत की जी20 अध्यक्षता में उनकी भूमिका की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री हर्षवर्धन श्रृंगला को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर उन्हें खुशी है। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि उनकी अंतर्दृष्टि संसदीय बहसों को समृद्ध बनाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा;

"श्री हर्षवर्धन श्रृंगला जी ने एक राजनयिक, बुद्धिजीवी और रणनीतिक विचारक के रूप में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इन वर्षों में, उन्होंने भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और हमारी जी20 अध्यक्षता में भी योगदान दिया है। मुझे खुशी है कि उन्हें भारत की राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। उनके अद्वितीय दृष्टिकोण संसदीय कार्यवाही को समृद्ध करेंगे।

@harshvshringla"

प्रधानमंत्री ने डॉ. मीनाक्षी जैन के मनोयन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने एक विदुषी, शोधकर्ता और इतिहासकार के रूप में उनके विशिष्ट कार्य की सराहना की और शिक्षा, साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने राज्यसभा में उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं

प्रधानमंत्री ने कहा;

"यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि डॉ. मीनाक्षी जैन जी को राष्ट्रपति जी द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। उन्होंने एक विदुषी, शोधकर्ता और इतिहासकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। शिक्षा, साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्यों ने अकादमिक विमर्श को महत्वपूर्ण रूप से समृद्ध किया है। उनके संसदीय कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं।
@IndicMeenakshi"

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प्रधानमंत्री ने PRAGATI की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की
May 27, 2026
प्रधानमंत्री ने रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़ी सात अहम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा में शामिल कुल 30,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली परियोजनाएं 9 राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की भी समीक्षा की
प्रधानमंत्री ने कहा-केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करना चाहिए, ताकि वे राज्यों के बीच पानी से जुड़े मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझा सकें
प्रधानमंत्री ने राज्यों से ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और गोबरधन संयंत्र शामिल हैं
प्रधानमंत्री ने शहरी इलाकों में मिशन-मोड पर रूफटॉप सोलर कवरेज बढ़ाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री की सलाह पर अमल करते हुए, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा से हुई है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को सहज रूप से एकीकृत करके 'सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज सुबह 'सेवा तीर्थ' में प्रगति (PRAGATI) की 51वीं बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति एक आईसीटी-सक्षम, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने कुल लगभग ₹30,000 करोड़ की लागत वाली रेलवे, बिजली और सड़क क्षेत्रों से जुड़े सात महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समय-सीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और मुद्दों के समय पर समाधान पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए की गई। प्रधानमंत्री ने 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' और 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0' की भी समीक्षा की।

बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर को अपनाने की गति तेज करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें शहरों, आवासीय समूहों और सार्वजनिक संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली की लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने और घरों व समुदायों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर को मिशन मोड में चलाया जाना चाहिए।

सड़क और बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए, इस बात पर जोर दिया गया कि वधावन बंदरगाह को 'बंदरगाह-आधारित, बहु-माध्यम विकास' के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां एक भविष्य के लिए तैयार लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाने के उद्देश्य से परिवहन के हर प्रमुख माध्यम को इस तरह से जोड़ा जाए। इस परियोजना को केवल एक बंदरगाह के रूप में नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय प्रवेश द्वार' के रूप में देखा जाना चाहिए, जो तटीय नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्गों, समर्पित माल ढुलाई गलियारों, हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी, राजमार्गों और हवाई अड्डों से जुड़ा हो।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया और इस बात को रेखांकित किया कि इस मिशन को केवल बुनियादी ढांचा तैयार करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नियमित निगरानी, ​​नागरिकों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से इसके ठोस परिणाम भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। उन्होंने राज्यों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित बुनियादी ढांचे, जिसमें अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र और 'गोबर-धन' (GOBARdhan) संयंत्र शामिल हैं, के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा परियोजना को अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करना चाहिए, ताकि वे भी आपसी सहयोग, समय पर मंज़ूरी, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और 'मिशन-मोड' में काम करके राज्यों के बीच जल-संबंधी विवादों को सुलझा सकें। राज्यों को ऐसे ही अन्य अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जहां नदी जोड़ो, जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और कुशल सिंचाई जैसे कार्यों को एक एकीकृत तरीके से अपनाया जा सके, ताकि भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक परियोजनाओं को लागू करने में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों को जरूरी सुविधाओं और विकास के लाभों तक समय पर पहुंचने से भी वंचित होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हर देरी का लोगों के जीवन, क्षेत्रीय विकास और सार्वजनिक संसाधनों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को लंबित मुद्दों को सुलझाने, रुकावटों को दूर करने और काम को तेजी से पूरा करने के लिए ज्यादा सक्रिय और समय-सीमा के भीतर काम करने का तरीका अपनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि नहर नेटवर्क का नए तरीकों से इस्तेमाल करने के तरीकों पर विचार किया जाना चाहिए, जिसमें साफ बिजली बनाने के लिए नहरों के किनारे और उनके ऊपर सोलर पैनल लगाना भी शामिल है। इससे जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, वाष्पीकरण से होने वाले नुकसान को कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा बनाने और जल बुनियादी ढांचे से अतिरिक्त आर्थिक लाभ पैदा करने में मदद मिलेगी।

बैठक की शुरुआत में कैबिनेट सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार, राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं की मासिक समीक्षा की एक प्रणाली भी शुरू कर दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य और जिला स्तरों पर नियमित निगरानी, ​​कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों का त्वरित समाधान और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस पहल के एक हिस्से के रूप में, सबसे पहले राज्य स्तर पर समीक्षा के लिए 'स्वच्छ भारत मिशन' को चुना गया है।