प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महान गायिका लता मंगेशकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने उनके परिवार से बात करते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां उन्हें भारतीय संस्कृति के एक दिग्गज के रूप में हमेशा याद रखेगी, उनकी सुरीली आवाज में लोगों को मंत्रमुग्ध करने की अद्वितीय क्षमता थी।

ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, प्रधानमंत्री ने कहा;

"मैं इस दुख को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। सरल और देखभाल करने वाली लता दीदी अब हमारे बीच नहीं हैं। उनके जाने से देश में एक रिक्त स्थान बन गया है जिसे कभी नहीं भरा नहीं जा सकता। आने वाली पीढ़ियां उन्हें भारतीय संस्कृति के एक दिग्गज के रूप में याद रखेंगी, उनकी सुरीली आवाज में लोगों को मंत्रमुग्ध कर देने की एक अद्वितीय क्षमता थी।"

"लता दीदी के गीतों में भावनाओं की विविधता थी। उन्होंने दशकों तक भारतीय फिल्म जगत के बदलावों को करीब से देखा। फिल्मों से परे, वह हमेशा भारत के विकास को लेकर सजग थीं। वह हमेशा एक मजबूत और विकसित भारत को देखना चाहती थीं।"

"मैं इसे अपना सम्मान मानता हूं कि मुझे लता दीदी से हमेशा अपार स्नेह मिला है। उनके साथ मेरी बातचीत अविस्मरणीय रहेगी। मैं लता दीदी के निधन पर अपने देशवासियों के साथ अत्यंत दुखी हूं। उनके परिवार से बात की और संवेदना व्यक्त की। ओम शांति।"

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पीएम मोदी ने स्वास्थ्य और व्यायाम के महत्व का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
March 16, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अच्‍छा स्वास्‍थ्‍य ही जीवन का सबसे बड़ा धन है और इसे बनाए रखने में व्यायाम की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम साझा किया।

“व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”

सुभाषितम् में कहा गया है कि व्यायाम से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, शक्ति और सुख प्राप्त होता है। उत्तम स्वास्थ्य सबसे बड़ा वरदान है। स्वास्थ्य ही सब कुछ का आधार है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर एक पोस्‍ट में लिखा;

“अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसमें व्यायाम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मैं सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करता हूं।

व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्।

आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”