प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें भारतीय कला और संस्कृति का जीवनपर्यंत उपासक बताया।

पंडित जी बनारस घराने के अग्रणी संगीतकारों में से एक थे, जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक ऐसी शाखा है जिसकी जड़ें काशी की परंपराओं में गहराई से निहित हैं। उनकी गायन प्रस्तुतियों में शहर की संगीत विरासत का सार समाहित रहा। उन्होंने काशी में अनगिनत छात्रों को अपना मार्गदर्शन प्रदान किया और यह सुनिश्चित किया कि शहर की संगीत परंपराओं को संरक्षित किया जाए और आगे बढ़ाया जाए, जिससे उनका घर वाराणसी शिक्षा, भक्ति और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र बन गया।

प्रधानमंत्री ने पंडित जी के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को याद किया और उनका आशीर्वाद और स्नेह प्राप्त करने के सौभाग्य का उल्लेख किया, विशेष कर 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान जब पंडित जी वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से उनके प्रस्तावक रहे थे। यह भाव शहर और इसकी विकसित होती विरासत के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

श्री मोदी ने कई बार पंडित जी के स्नेह और आशीर्वाद के बारे में बात करते हुए इसे अपना व्यक्तिगत सौभाग्य बताया है। उनका रिश्ता भारत की शास्त्रीय परंपराओं, आध्यात्मिक गहराई और संस्कृति की परिवर्तनकारी शक्ति के प्रति साझा सम्मान को दर्शाता है।

पंडित छन्नूलाल मिश्र जी को भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके विशिष्ट योगदान के लिए वर्तमान सरकार द्वारा 2020 में भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि पंडित जी की विरासत संगीतकारों, कलाकारों और संस्कृति के प्रति उत्साही लोगों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लिखा:

“सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!”

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प्रधानमंत्री ने योग के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम साझा किया
June 22, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की उल्लेखनीय सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनिया भर में लाखों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने में मदद कर रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा किया।

“चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”

यह सुभाषितम् बताता है कि योग मन को पूर्णतः शांत करने का साधन है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योग की दो प्रमुख विधियाँ बताई गई हैं: मन को शांत करना और श्वास के प्रवाह को नियमित करना।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म एक्‍स पर लिखा;

“अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बड़ी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योग न केवल दुनियाभर में करोड़ों लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।

चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”