प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लेखक, इतिहासकार और रंगमंच के व्यक्तित्व शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को छत्रपति शिवाजी महाराज से जोड़ने में शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के योगदान को याद किया। श्री मोदी ने उस समय का अपना भाषण भी पोस्ट किया, जब उन्होंने कुछ महीने पहले उनके शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम को संबोधित किया था।

ट्वीट की एक श्रृंखला में, प्रधानमंत्री ने कहा:

"मैं अपना दर्द शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता। शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के निधन से इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। उनके योगदान के लिए धन्यवाद्, जिसकी वजह से आने वाली पीढ़ियां छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ेंगी। उनके अन्य योगदानों को भी याद किया जाएगा।

शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे बुद्धिमान थे और भारतीय इतिहास का समृद्ध ज्ञान रखते थे। उनका स्वभाव विनोदपूर्ण था। वर्षों से मुझे उनके साथ बहुत निकटता से बातचीत करने का गौरव मिला है। कुछ महीने पहले मैंने उनके शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम को संबोधित किया था।

शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे अपने व्यापक कार्यों के कारण जीवित रहेंगे। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।"

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पीएम मोदी ने समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
July 13, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब सर्वांगीण विकास हरेक नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित करता है, तो इससे देश की प्रगति को एक नई गति मिलती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसी प्रेरक भावना के साथ देश भारत की क्षमताओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्।
राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥”

यह सुभाषितम् संदेश देता है कि महिलाओं का कल्याण सुनिश्चित करना, युवा पीढ़ी की रक्षा और उनका पोषण करना, तथा राष्ट्र की एकता, सुरक्षा, समृद्धि और सुशासन के लिए लगातार आवश्यक व्यवस्थाएं करना हरेक जनप्रतिनिधि का सतत कर्तव्य है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा;
“जब चौतरफा विकास के साथ हर देशवासी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित होता है, तब राष्ट्र की प्रगति को भी नई गति मिलती है। इसी प्रेरक भावना के साथ हम भारत के सामर्थ्य को निरंतर मजबूती देने में जुटे हुए हैं।
कन्यानां सम्प्रदानञ्च कुमाराणाञ्च रक्षणम्।
राष्ट्रस्य सङ्ग्रहे नित्यं विधानमिदमाचरेत्॥”