प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उन सभी लोगों के प्रशंसनीय प्रयासों की सराहना की जिन्होंने स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान को भारत की नारी शक्ति के लिए प्रभावशाली और लाभकारी बनाने के लिए जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम किया है।

प्रधानमंत्री ने इस अभियान को जनभागीदारी-जन सहभागिता का एक शानदार उदाहरण बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के सामूहिक कार्य जीवन को बेहतर बनाने और एक स्वस्थ, सशक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण है।

श्री मोदी ने केंद्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा:

"सराहनीय प्रयास! उन सभी लोगों को बधाई जिन्होंने इस अभियान को इतना प्रभावशाली और हमारी नारी शक्ति के लिए लाभकारी बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है। यह जीवन को बेहतर बनाने के लिए जनभागीदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है।"

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प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को आत्मसात करने पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
January 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो ज्ञान की विशालता के बीच केवल उसके सार पर ध्यान केंद्रित करने की शाश्वत बुद्धिमत्ता पर जोर देता है।

संस्कृत श्लोक-

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

यह सुभाषित इस भाव को व्यक्त करता है कि यद्यपि ज्ञान प्राप्ति के लिए असंख्य शास्त्र और विविध विद्याएँ उपलब्ध हैं, किंतु मानव जीवन समय की सीमाओं और अनेक बाधाओं से बंधा हुआ है। अतः, मनुष्य को उस हंस के समान बनना चाहिए जो दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध को अलग करने की क्षमता रखता है अर्थात, हमें भी अनंत सूचनाओं के बीच से केवल उनके सार—उस परम सत्य को पहचानना और ग्रहण करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा:

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”