प्रधानमंत्री ने 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न अवसंरचना और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से भारत की चेतना का अभिन्न अंग रहा है; जब भी राष्ट्र का सम्मान, स्वाभिमान और स्वतंत्रता दांव पर लगी, हमारे जनजातीय समुदाय सबसे आगे खड़े रहे: प्रधानमंत्री
हम स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समुदाय के योगदान को नहीं भूल सकते: प्रधानमंत्री
आज जनजातीय भाषा संवर्धन केंद्र के लिए श्री गोविंद गुरु पीठ का उद्घाटन किया गया है। यह विभिन्न जनजातीय समुदायों की बोलियों का अध्ययन करेगा और उनकी कहानियों और गीतों को संरक्षित करेगा: पीएम मोदी
सिकल सेल रोग लंबे समय से आदिवासी समुदायों के लिए खतरा बना हुआ है, और इससे निपटने के लिए आदिवासी क्षेत्रों में औषधालयों, चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है: पीएम मोदी
सिकल सेल रोग के प्रभावी समाधान और प्रबंधन के लिए वर्तमान में एक राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है: पीएम मोदी
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के पावन पर्व पर, हमें सबका साथ, सबका विकास के मंत्र को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए: पीएम मोदी
प्रगति में कोई पीछे न रहे, कोई विकास से वंचित न रहे, यही भगवान बिरसा मुंडा के चरणों में सच्ची श्रद्धांजलि है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के डेडियापाड़ा में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न अवसंरचना और विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। यह कहते हुए कि मां नर्मदा की पावन धरा आज एक और ऐतिहासिक अवसर की साक्षी बन रही है, श्री मोदी ने स्मरण किया कि 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की 150वीं जयंती इसी स्थान पर मनाई गई थी और भारत की एकता तथा विविधता का उत्सव मनाने के लिए भारत पर्व की शुरुआत हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के भव्य समारोह के साथ हम भारत पर्व की परिणति के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने इस पावन अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूरे जनजातीय क्षेत्र में स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले गोविंद गुरु का आशीर्वाद भी इस आयोजन से जुड़ा है। मंच से उन्होंने गोविंद गुरु को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले उन्हें देवमोगरा माता के मंदिर में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और मैं एक बार फिर उनके चरणों में नमन करता हूं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डेडियापाड़ा और सागबारा क्षेत्र संत कबीर के उपदेशों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि वे संत कबीर की भूमि वाराणसी से सांसद हैं और इसलिए संत कबीर का उनके जीवन में विशेष स्थान है। मंच से उन्होंने संत कबीर को अपनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

श्री मोदी ने रेखांकित किया कि आज राष्ट्रीय विकास और जनजातीय कल्याण से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री जनमन और अन्य योजनाओं के तहत, इस क्षेत्र के एक लाख परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। बड़ी संख्या में एकलव्य मॉडल स्कूलों और आश्रम विद्यालयों का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय में श्री गोविंद गुरु पीठ की स्थापना की गई है। स्वास्थ्य, सड़क और परिवहन से जुड़ी कई अन्य परियोजनाएं भी आरंभ की गई हैं। उन्होंने इन विकास और सेवा कार्यों के लिए सभी को बधाई दी।

श्री मोदी ने कहा कि 2021 में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को आधिकारिक तौर पर जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया गया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से भारत की चेतना का अभिन्न अंग रहा है। जब भी राष्ट्र के सम्मान, स्वाभिमान और स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगा, जनजातीय समुदाय सबसे आगे खड़ा रहा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम इसी भावना का सबसे बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदाय के अनगिनत वीरों ने स्वतंत्रता की मशाल को आगे बढ़ाया। उन्होंने तिलका मांझी, रानी गाइदिन्ल्यू, सिद्धो-कान्हो, भैरव मुर्मू, बुद्धू भगत और अल्लूरी सीताराम राजू को जनजातीय समाज का प्रेरक व्यक्तित्व बताया। उन्होंने मध्य प्रदेश के टंट्या भील, छत्तीसगढ़ के वीर नारायण सिंह, झारखंड के तेलंगा खड़िया, असम के रूपचंद कोंवर और ओडिशा के लक्ष्मण नायक जैसे वीर व्यक्तियों का उल्लेख किया जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए असीम बलिदान दिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनजातीय समुदाय ने अनगिनत विद्रोहों का नेतृत्व किया और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना खून बहाया।

यह उल्लेख करते हुए कि गुजरात में जनजातीय समुदाय के कई वीर देशभक्तों ने जन्म लिया है, प्रधानमंत्री ने भगत आंदोलन का नेतृत्व करने वाले गोविंद गुरु, पंचमहल में ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध लंबी लड़ाई लड़ने वाले राजा रूपसिंह नायक, एकी आंदोलन के प्रणेता मोतीलाल तेजावत और गांधीजी के सिद्धांतों को जनजातीय समाज तक पहुंचाने वाली दशरीबेन चौधरी की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अनगिनत अध्याय जनजातीय गौरव और वीरता से सुशोभित हैं।

श्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदाय के योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि देश भर में कई जनजातीय संग्रहालय स्थापित किए जा रहे हैं। गुजरात के राजपीपला में 25 एकड़ में एक विशाल जनजातीय संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ का दौरा किया था और वहां शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय का उद्घाटन किया था। उन्होंने रांची स्थित उस जेल का भी उल्लेख किया, जहां बिरसा मुंडा को बन्दी बनाया गया था, उसे जनजातीय संग्रहालय के रूप में विकसित किया जा रहा है।

जनजातीय भाषा संवर्धन केंद्र के लिए श्री गोविंद गुरु पीठ की स्थापना की घोषणा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि यह केंद्र भील, गामित, वसावा, गरासिया, कोंकणी, संथाल, राठवा, नायक, डबला, चौधरी, कोकना, कुंभी, वारली और डोडिया जैसे जनजातीय समुदायों की बोलियों का अध्ययन करेगा। इन समुदायों से जुड़ी कहानियों और गीतों को संरक्षित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि जनजातीय समाज के पास हज़ारों वर्षों के अनुभव से अर्जित ज्ञान है। उन्होंने कहा कि उनकी जीवन शैली में विज्ञान समाहित है, उनकी कहानियों में दर्शन है और उनकी भाषाओं में पर्यावरण की समझ है। उन्होंने कहा कि श्री गोविंद गुरु पीठ नई पीढ़ी को इस समृद्ध परंपरा से जोड़ने का काम करेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस हमें करोड़ों जनजातीय भाइयों और बहनों के साथ हुए अन्याय की भी याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि छह दशकों तक देश पर शासन करने वाली विपक्षी पार्टी ने जनजातीय समुदायों को उनके हाल पर छोड़ दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जनजातीय क्षेत्र कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, अपर्याप्त शिक्षा और निम्न कनेक्टिविटी से जूझ रहे हैं। ये कमियां जनजातीय क्षेत्रों की पहचान बन गईं, जबकि पिछली सरकारें निष्क्रिय रहीं। इस पर बल देते हुए कि जनजातीय कल्याण हमेशा उनकी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है, श्री मोदी ने जनजातीय समुदायों के साथ हो रहे अन्याय को समाप्त करने और विकास का लाभ उन तक पहुंचाने के लिए सरकार के अटूट संकल्प की पुष्टि की।

श्री मोदी ने इस बात पर बल देते हुए कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के शासनकाल में उनकी पार्टी ने जनजातीय मामलों के लिए एक अलग मंत्रालय की स्थापना की थी, कहा कि अटल जी के कार्यकाल के बाद, आने वाली सरकारों ने दस वर्षों तक इस मंत्रालय की उपेक्षा की। उन्होंने कहा कि 2013 में, तत्कालीन सरकार ने जनजातीय कल्याण के लिए केवल कुछ हज़ार करोड़ रुपये आवंटित किए थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद, उन्होंने जनजातीय हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और मंत्रालय का बजट बढ़ाया। उन्होंने रेखांकित किया कि आज, जनजातीय लोगों के कल्याण के लिए जनजातीय मामलों के मंत्रालय का बजट कई गुना बढ़ गया है।

श्री मोदी ने यह बताते हुए कि एक समय गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, इस बात पर बल दिया कि अंबाजी से लेकर उमरगाम तक, जनजातीय क्षेत्र में एक भी विज्ञान विद्यालय नहीं था। डेडियापाड़ा और सागबारा जैसे क्षेत्रों में, छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलता था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए, उन्होंने बताया कि उन्होंने डेडियापाड़ा से ही कन्या केलवणी महोत्सव का शुभारंभ किया था। उन्होंने बताया कि उस दौरान कई बच्चे उनसे मिलते थे—कुछ डॉक्टर बनने की, तो कुछ इंजीनियर या वैज्ञानिक बनने की इच्छा रखते थे। उन्होंने कहा कि वह उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे और उन्हें विश्वास दिलाते थे कि उनके सपनों को पूरा करने की राह में आने वाली हर बाधा को दूर किया जाएगा।

विद्यमान परिस्थितियों में बदलाव लाने के लिए किए गए अथक प्रयासों को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, अब गुजरात के जनजातीय क्षेत्र में 10,000 से अधिक विद्यालय हैं। पिछले दो दशकों में, जनजातीय क्षेत्रों में दर्जनों विज्ञान, वाणिज्य और कला महाविद्यालय स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जनजातीय बच्चों के लिए सैकड़ों छात्रावास बनाए हैं और गुजरात में दो जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उन्होंने याद किया कि कैसे बीस साल पहले, बच्चे आंखों में सपने लिए उनसे मिलते थे—कुछ डॉक्टर बनने की तो कुछ इंजीनियर या वैज्ञानिक बनने की आकांक्षा रखते थे। आज, उनमें से कई बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और शोधकर्ता बन गए हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि सरकार जनजातीय बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात काम कर रही है। पिछले पांच-छह वर्षों में ही, केंद्र सरकार ने देश भर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के लिए 18,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए हैं। छात्राओं के लिए स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। परिणामस्वरूप, इन विद्यालयों में नामांकन कराने वाले जनजातीय बच्चों की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

श्री मोदी ने इस बात पर बल देते हुए कि जब जनजातीय युवाओं को अवसर दिए जाते हैं, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की शक्ति प्राप्त कर लेते हैं, कहा कि उनका साहस, कड़ी मेहनत और क्षमता उन्हें परंपरा से विरासत में मिली है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज खेल जगत एक स्पष्ट उदाहरण है, जहां जनजातीय युवा विश्व भर में तिरंगे का सम्मान बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां मैरी कॉम, थोनाकल गोपी, दुती चंद और बाईचुंग भूटिया जैसे नाम सुप्रसिद्ध थे, वहीं अब हर बड़ी प्रतियोगिता में जनजातीय क्षेत्रों से उभरते हुए एथलीट नज़र आते हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की महिला क्रिकेट टीम ने हाल ही में विश्व कप जीतकर इतिहास रचा है और उस जीत में जनजातीय समुदाय की एक बेटी की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों में नई प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

इस बात पर बल देते हुए कि उनकी सरकार वंचितों को प्राथमिकता देने के विजन के साथ काम करती है, प्रधानमंत्री ने नर्मदा ज़िले का उदाहरण दिया, जिसे कभी पिछड़ा माना जाता था। उन्होंने कहा कि ज़िले को प्राथमिकता दी गई, इसे आकांक्षी ज़िला घोषित किया गया और आज इसने विभिन्न विकास मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस परिवर्तन से क्षेत्र के जनजातीय समुदाय को बहुत लाभ हुआ है। श्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं सीधे जनजातीय बहुल राज्यों और वंचित वर्गों के लिए आरंभ की जाती हैं। 2018 में निशुल्क उपचार के लिए आयुष्मान भारत योजना के आरंभ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना की शुरुआत झारखंड के रांची से हुई थी। आज, देश भर के करोड़ों जनजातीय भाई-बहन इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहल भी जनजातीय बहुल छत्तीसगढ़ से आरंभ की गई थी और यह जनजातीय आबादी को उल्लेखनीय लाभ पहुंचा रही है।

इस बात पर बल देते हुए कि उनकी सरकार जनजातीय समुदायों में सबसे पिछड़े वर्गों को विशेष प्राथमिकता दे रही है, श्री मोदी ने रेखांकित किया कि आज़ादी के दशकों बाद भी, ऐसे क्षेत्र थे जहां बिजली, पानी, सड़क या अस्पताल जैसी सुविधाएं नहीं थीं। ऐसे क्षेत्रों के विकास के लिए, झारखंड के खूंटी से प्रधानमंत्री-जनमन योजना शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि इस पहल पर 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान भी पिछड़े जनजातीय गाँवों में विकास का एक नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने बताया कि देश भर के 60,000 से अधिक गांव इस अभियान से जुड़ चुके हैं। इनमें से हज़ारों गांवों को पहली बार पाइप से पेयजल मिला है और सैकड़ों गांवों को अब टेलीमेडिसिन सेवाएं भी मिल रही हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस अभियान के तहत ग्राम सभाओं को विकास की धुरी बनाया गया है। गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कृषि और आजीविका पर केंद्रित समुदाय-संचालित योजनाएं बनाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान सिद्ध करता है कि दृढ़ संकल्प से असंभव लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि सरकार जनजातीय जीवन के हर पहलू पर ध्यान देने के लिए एक व्यापक विजन के साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि लघु वनोपजों की संख्या 20 से बढ़ाकर लगभग 100 कर दी गई है और वनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ा दिया गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार मोटे अनाज - श्री अन्ना - को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है जिससे जनजातीय समुदाय को लाभ हो रहा है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि गुजरात में वनबंधु कल्याण योजना आरंभ की गई थी, जिसने जनजातीय आबादी को नई आर्थिक सुदृढ़ता प्रदान की। इसी से प्रेरित होकर अब जनजातीय कल्याण योजना शुरू की जा रही है।

यह उल्लेख करते हुए कि सिकल सेल रोग लंबे समय से जनजातीय समुदायों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है, प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे निपटने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में औषधालयों, चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों की संख्या बढ़ाई गई है। सिकल सेल रोग से निपटने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जा रहा है और इस पहल के तहत देश भर के छह करोड़ जनजातीय भाई-बहनों की जांच की जा चुकी है।

शिक्षा की चर्चा करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि जनजातीय बच्चे, जो पहले भाषाई बाधाओं के कारण पीछे रह जाते थे, अब स्थानीय भाषा में शिक्षा प्राप्त करके आगे बढ़ रहे हैं और राष्ट्र के विकास में अधिक सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

गुजरात के जनजातीय समुदायों की समृद्ध कलात्मक विरासत पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने उनकी चित्रकला और कलाकृतियों को अद्वितीय बताया। श्री मोदी ने कलाकार परेशभाई राठवा का उल्लेख किया, जिन्होंने इन कला रूपों को आगे बढ़ाया है, और कहा कि सरकार ने उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए लोकतंत्र में सार्थक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय समुदाय के सदस्यों को शीर्ष पदों पर पहुंचते और राष्ट्र का नेतृत्व करते देखना है। उन्होंने बताया कि आज भारत की राष्ट्रपति एक जनजातीय महिला हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और गठबंधन ने जनजातीय नेताओं को पार्टी और सरकार में शीर्ष पदों पर पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में श्री विष्णुदेव साय, ओडिशा में श्री मोहन चरण माझी, अरुणाचल प्रदेश में श्री पेमा खांडू और नागालैंड में श्री नेफ्यू रियो का उदाहरण देते हुए कहा कि कई राज्यों में जनजातीय नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने कई राज्य विधानसभाओं में जनजातीय अध्यक्षों की नियुक्ति की है। उन्होंने रेखांकित किया कि गुजरात के श्री मंगूभाई पटेल वर्तमान में मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि असम के पूर्व मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल अब उनके मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के विकास में इन नेताओं की सेवा और योगदान अद्वितीय और असाधारण है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज देश 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र की शक्ति से ओतप्रोत है। उन्होंने कहा कि इस मंत्र से पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव आया है, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया है और लंबे समय से उपेक्षित जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा में लाया है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के पावन अवसर पर, प्रधानमंत्री ने सभी से इस मंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकास में कोई भी पीछे नहीं छूटना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही धरती आबा को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हम सब मिलकर आगे बढ़ेंगे और एक विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे। इसी संकल्प के साथ, उन्होंने सभी को जनजातीय गौरव दिवस की शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस उन परंपराओं का सच्चा सार है जिन्हें जनजातीय समुदायों ने संजो रखा हैं और वे आने वाली पीढ़ियों की आकांक्षाओं को भी संजोए हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए पूरे भारत में 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। समापन करते हुए उन्होंने कहा कि हमें भारतीयता में रचे-बसे रहकर नई शक्ति और उत्साह के साथ आगे बढ़ना चाहिए और गौरव के नए शिखर प्राप्त करने चाहिए।

इस कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने डेडियापाड़ा में कार्यक्रम के दौरान जनजातीय समुदायों के उत्थान और क्षेत्र के ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अवसंरचना में सुधार के उद्देश्य से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेएजीयूए) के तहत निर्मित 100,000 घरों के गृह प्रवेश में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय छात्रों को समर्पित 42 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) का उद्घाटन किया; समुदाय-आधारित कार्यकलापों के हब के रूप में कार्य करने वाले 228 बहुउद्देश्यीय केंद्रों; असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ में सक्षमता केंद्र और मणिपुर के इम्फाल में जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण हेतु जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) भवन का उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी में सुधार के लिए गुजरात के 14 जनजातीय जिलों के लिए 250 बसों को झंडी दिखाई।

प्रधानमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने के लिए 748 किलोमीटर नई सड़कों और सामुदायिक केंद्रों के रूप में काम करने के लिए डीए-जगुआके अंतर्गत 14 जनजातीय बहु-विपणन केंद्रों (टीएमएमसी) की आधारशिला भी रखी। वे 2,320 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की आधारशिला भी रखेंगे, जिससे जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's electronics exports cross $47 billion in 2025 on iPhone push

Media Coverage

India's electronics exports cross $47 billion in 2025 on iPhone push
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
List of Outcomes: Visit of His Highness Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan, President of UAE to India
January 19, 2026
S.NoAgreements / MoUs / LoIsObjectives

1

Letter of Intent on Investment Cooperation between the Government of Gujarat, Republic of India and the Ministry of Investment of the United Arab Emirates for Development of Dholera Special Investment region

To pursue investment cooperation for UAE partnership in development of the Special Investment Region in Dholera, Gujarat. The envisioned partnership would include the development of key strategic infrastructure, including an international airport, a pilot training school, a maintenance, repair and overhaul (MRO) facility, a greenfield port, a smart urban township, railway connectivity, and energy infrastructure.

2

Letter of Intent between the Indian National Space Promotion and Authorisation Centre (IN-SPACe) of India and the Space Agency of the United Arab Emirates for a Joint Initiative to Enable Space Industry Development and Commercial Collaboration

To pursue India-UAE partnership in developing joint infrastructure for space and commercialization, including launch complexes, manufacturing and technology zones, incubation centre and accelerator for space start-ups, training institute and exchange programmes.

3

Letter of Intent between the Republic of India and the United Arab Emirates on the Strategic Defence Partnership

Work together to establish Strategic Defence Partnership Framework Agreement and expand defence cooperation across a number of areas, including defence industrial collaboration, defence innovation and advanced technology, training, education and doctrine, special operations and interoperability, cyber space, counter terrorism.

4

Sales & Purchase Agreement (SPA) between Hindustan Petroleum Corporation Limited, (HPCL) and the Abu Dhabi National Oil Company Gas (ADNOC Gas)

The long-term Agreement provides for purchase of 0.5 MMPTA LNG by HPCL from ADNOC Gas over a period of 10 years starting from 2028.

5

MoU on Food Safety and Technical requirements between Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA), Ministry of Commerce and Industry of India, and the Ministry of Climate Change and Environment of the United Arab Emirates.

The MoU provides for sanitary and quality parameters to facilitate the trade, exchange, promotion of cooperation in the food sector, and to encourage rice, food products and other agricultural products exports from India to UAE. It will benefit the farmers from India and contribute to food security of the UAE.

S.NoAnnouncementsObjective

6

Establishment of a supercomputing cluster in India.

It has been agreed in principle that C-DAC India and G-42 company of the UAE will collaborate to set up a supercomputing cluster in India. The initiative will be part of the AI India Mission and once established the facility be available to private and public sector for research, application development and commercial use.

7

Double bilateral Trade to US$ 200 billion by 2032

The two sides agreed to double bilateral trade to over US$ 200 billion by 2032. The focus will also be on linking MSME industries on both sides and promote new markets through initiatives like Bharat Mart, Virtual Trade Corridor and Bharat-Africa Setu.

8

Promote bilateral Civil Nuclear Cooperation

To capitalise on the new opportunities created by the Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act 2025, it was agreed to develop a partnership in advance nuclear technologies, including development and deployment of large nuclear reactors and Small Modular Reactors (SMRs) and cooperation in advance reactor systems, nuclear power plant operations and maintenance, and Nuclear Safety.

9

Setting up of offices and operations of UAE companies –First Abu Dhabi Bank (FAB) and DP World in the GIFT City in Gujarat

The First Abu Dhabi Bank will have a branch in GIFT that will promote trade and investment ties. DP World will have operations from the GIFT City, including for leasing of ships for its global operations.

10

Explore Establishment of ‘Digital/ Data Embassies’

It has been agreed that both sides would explore the possibility of setting up Digital Embassies under mutually recognised sovereignty arrangements.

11

Establishment of a ‘House of India’ in Abu Dhabi

It has been agreed in Principle that India and UAE will cooperate on a flagship project to establish a cultural space consisting of, among others, a museum of Indian art, heritage and archaeology in Abu Dhabi.

12

Promotion of Youth Exchanges

It has been agreed in principle to work towards arranging visits of a group of youth delegates from either country to foster deeper understanding, academic and research collaboration, and cultural bonds between the future generations.