"गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ का स्वर्ण जयंती समारोह इसकी गौरवशाली यात्रा में ऐतिहासिक अवसर है"
‘’अमूल भारत के पशुपालकों की ताकत का प्रतीक बन गया है"
"अमूल इस बात का उदाहरण है कि दूरगामी फैसले कैसे भावी पीढ़ियों का भाग्य बदल देते हैं"
"भारत के डेयरी क्षेत्र की असली मजबूती नारी शक्ति है"
‘’आज हमारी सरकार महिलाओं की आर्थिक शक्ति बढ़ाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है"
"हम जानवरों में खुरपका-मुंहपका रोग को 2030 तक जड़ से मिटाने के लिए काम कर रहे हैं" "
"सरकार का फोकस किसानों को ऊर्जा उत्पादक और उर्वरक आपूर्तिकर्ता बनाने पर है"
"सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहयोग का दायरा महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा रही है"
‘’देशभर के 2 लाख से अधिक गांवों में दो लाख से अधिक सहकारी समितियों की स्थापना के साथ सहकारी आंदोलन गति पकड़ रहा है"
‘'सरकार हर तरह से आपके साथ खड़ी है और ये मोदी की गारंटी है''

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अहमदाबाद के मोटेरा स्थित नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर आयेाजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और गोल्डन जुबली कॉफी टेबल बुक का भी अनावरण किया। जीसीएमएमएफ सहकारी समितियों की आत्मनिर्भरता, उनकी उद्यमशीलता की भावना और किसानों के दृढ़ संकल्प का प्रमाण है, जिसने अमूल को दुनिया के सबसे मजबूत डेयरी ब्रांडों में से एक बना दिया है।

 

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) के स्वर्ण जयंती समारोह के लिए सभी को बधाई दी और कहा कि 50 साल पहले गुजरात के किसानों का लगाया गया एक पौधा आज एक विशाल वृक्ष बन गया है जिसकी शाखाएं पूरी दुनिया में फैली हैं। अपने भाषण में प्रधानमंत्री श्वेत क्रांति में पशुओं के योगदान को स्वीकार करना नहीं भूले।

प्रधानमंत्री ने कहा किया कि भले ही आजादी के बाद भारत में कई ब्रांड उभरे, लेकिन अमूल जैसा कोई नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अमूल भारत के पशुपालकों की ताकत का प्रतीक बन गया है। अमूल का मतलब है विश्वास, विकास, जन भागीदारी, किसानों का सशक्तिकरण और समय के साथ तकनीकी प्रगति। उन्होंने कहा कि अमूल आत्मनिर्भर भारत की प्रेरणा है। प्रधानमंत्री ने अमूल की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अमूल उत्पाद दुनिया भर के 50 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। उन्होंने 18,000 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों, 36,000 किसानों के नेटवर्क, प्रतिदिन 3.5 करोड़ लीटर से अधिक दूध के प्रसंस्करण और पशुपालकों को 200 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान का उल्लेख किया। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि छोटे पशुपालकों के इस संगठन द्वारा किया जा रहा महत्वपूर्ण कार्य अमूल और उसकी सहकारी समितियों को मजबूत बनाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अमूल उस बदलाव का उदाहरण है जो दूरदर्शिता से लिए गए फैसलों से आता है। उन्होंने याद दिलाया कि अमूल की उत्पत्ति सरदार पटेल के मार्गदर्शन में खेड़ा दुग्ध संघ से हुई थी। गुजरात में सहकारी समितियों के विस्तार के साथ ही जीसीएमएमएफ अस्तित्व में आया। उन्होंने बताया कि यह सहकारी समितियों और सरकार के बीच तालमेल का एक बड़ा उदाहरण है और ऐसे प्रयासों ने हमें 8 करोड़ लोगों को रोजगार देकर दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में दूध उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में भी लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि भारतीय डेयरी क्षेत्र वैश्विक औसत 2 प्रतिशत की तुलना में प्रति वर्ष 6 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने 10 लाख करोड़ रुपये के डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत तक महिलाओं से संचालित डेयरी क्षेत्र का कारोबार गेहूं, चावल और गन्ने के कुल कारोबार से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि यह नारी शक्ति डेयरी क्षेत्र की असली ताकत है। आज, जब भारत महिला नेतृत्व वाले विकास के साथ आगे बढ़ रहा है, तो उसके डेयरी क्षेत्र की सफलता एक बड़ी प्रेरणा है। विकसित भारत की यात्रा में महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने मुद्रा योजना का उल्लेख किया और बताया कि 30 लाख करोड़ रुपये की मदद राशि का 70 प्रतिशत लाभ महिला उद्यमियों ने उठाया है। साथ ही स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो गई है और उन्हें 6 लाख करोड़ से अधिक की वित्तीय मदद मिली है। 4 करोड़ पीएम आवास में से ज्यादातर घर महिलाओं के नाम पर हैं। प्रधानमंत्री ने नमो ड्रोन दीदी योजना का भी उल्लेख किया जिसमें 15,000 एसएचजी को ड्रोन दिए जा रहे हैं और इसके सदस्यों को ड्रोन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात की डेयरी सहकारी समितियों में महिलाओं की बढ़ती संख्या पर प्रसन्नता व्यक्त की और डेयरी से होने वाली आय को सीधे उनके बैंक खातों में वितरित करने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने अमूल के प्रयासों की भी सराहना की और क्षेत्र में पशुपालकों को नकदी निकालने में मदद करने के लिए गांवों में माइक्रो एटीएम स्थापित करने का उल्लेख किया। उन्होंने पशुपालकों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान करने की योजनाओं पर भी चर्चा की और पंचपिपला और बनासकांठा में चल रहे प्रायोगिक परियोजना के बारे में जानकारी दी।

गांधी जी के कथन को याद करते हुए कि भारत गांवों में बसता है, प्रधानमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार का ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रति खंडित दृष्टिकोण था, जबकि वर्तमान सरकार गांव के हर पहलू को प्राथमिकता देकर प्रगति कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छोटे किसानों के जीवन को सुगम बनाने के लिए पशुपालन की संभावना बढ़ाने, पशुओं के लिए स्वस्थ जीवन मुहैया कराने का माहौल बनाने और गांवों में मत्स्य पालन तथा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके लिए सरकार पशुपालकों और मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड भी मुहैया करा रही है। उन्होंने किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल आधुनिक बीज उपलब्ध कराने की भी बात कही। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन का भी उल्लेख किया जिसका उद्देश्य डेयरी मवेशियों की प्रजातियों में सुधार करना है। खुरपका-मुंहपका रोग के कारण मवेशियों को होने वाली कठिनाइयों और पशुपालकों को होने वाले हजारों करोड़ रुपये के भारी नुकसान पर अंकुश लगाने के सरकार के प्रयास पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने 15,000 करोड़ रुपये के मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत के बारे में जानकारी दी। इसके तहत अब तक 7 करोड़ से अधिक टीकाकरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग को जड़ से मिटाने के लिए काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कल रात कैबिनेट बैठक में पशुधन से जुड़े फैसले का भी जिक्र किया। कैबिनेट ने स्वदेशी प्रजातियों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन में संशोधन का फैसला लिया। गैर-कृषि योग्य भूमि को चारे के लिए उपयोग करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। पशुधन संरक्षण के लिए बीमा प्रीमियम काफी कम कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ में सूखे के दौरान देखी गई कठिनाइयों का जिक्र करते हुए, जहां पानी की कमी के कारण हजारों जानवर मर गए थे, गुजरात में जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इन क्षेत्रों तक पहुंचने वाले नर्मदा जल के सकारात्मक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नर्मदा जल के आने के बाद इन क्षेत्रों के हालात बदल गए हैं। इससे इन क्षेत्रों में लोगों के जीवन और कृषि पद्धतियों में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पानी की कमी को दूर करने और देश भर में ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ाने के लिए सरकार के सक्रिय उपायों पर जोर देते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि भविष्य में ऐसी चुनौतियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि 60 से अधिक अमृत सरोवर जलाशयों के निर्माण से देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने तकनीकी प्रगति के माध्यम से छोटे किसानों को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का प्रयास गांवों में छोटे किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। उन्होंने ड्रिप सिंचाई जैसी कुशल सिंचाई विधियों को बढ़ावा देने में सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुजरात में, हमने हाल के वर्षों में सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में कई गुना वृद्धि देखी है। श्री मोदी ने किसानों को उनके गांवों के पास ही वैज्ञानिक समाधान प्रदान करने के लिए लाखों किसान समृद्धि केंद्रों की स्थापना का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि किसानों को जैविक उर्वरक बनाने में मदद करने के प्रयास जारी हैं। जैविक उर्वरक के उत्पादन के संबंध में प्रावधान किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान में सरकार के बहुमुखी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमारी सरकार किसानों को ऊर्जा उत्पादक और उर्वरक आपूर्तिकर्ता बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कृषि में टिकाऊ ऊर्जा समाधानों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए बताया कि किसानों को सौर पंप प्रदान करने के अलावा, कृषि परिसर में छोटे पैमाने पर सौर संयंत्र स्थापित करने के लिए सहायता दी जा रही है।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने गोबर धन योजना के तहत पशुपालकों से गाय का गोबर खरीदने की योजना के कार्यान्वयन की घोषणा की, जिससे बिजली उत्पादन के लिए बायोगैस के उत्पादन की सुविधा मिलेगी। उन्होंने डेयरी क्षेत्र में सफल पहल का उदाहरण देते हुए कहा कि बनासकांठा में अमूल के बायोगैस संयंत्र की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आर्थिक विकास के वाहक के रूप में सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहयोग के दायरे को तेजी से बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहली बार केंद्रीय स्तर पर एक अलग सहकारिता मंत्रालय स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि देश भर के दो लाख से अधिक गांवों में दो लाख से अधिक सहकारी समितियों की स्थापना के साथ, सहकारी आंदोलन गति पकड़ रहा है। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में इन समितियों का गठन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कर प्रोत्साहन और फंडिंग के रूप में सरकार की मदद पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार 'मेड इन इंडिया' पहल के माध्यम से विनिर्माण में सहकारी समितियों को प्रोत्साहित कर रही है। इन सहकारी समितियों को कर प्रोत्साहन के माध्यम से मेड-इन-इंडिया विनिर्माण का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि 10 हजार एफपीओ छोटे किसानों के बड़े संगठन हैं जिनमें से 8 हजार पहले से ही कार्यरत हैं। इनका मिशन छोटे किसानों को उत्पादक से कृषि-उद्यमी बनाना है। उन्होंने बताया कि पीएसी, एफपीओ और अन्य सहकारी संस्थाओं को करोड़ों रुपये की सहायता मिल रही है। उन्होंने कृषि-बुनियादी ढांचे के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने पशुधन बुनियादी ढांचे के लिए 30 हजार करोड़ रुपये के फंड से रिकॉर्ड निवेश के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि डेयरी सहकारी समितियों को अब ब्याज पर अधिक छूट मिल रही है। सरकार दुग्ध संयंत्रों के आधुनिकीकरण पर भी हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसी योजना के तहत आज साबरकांठा दुग्ध संघ की दो बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है। इसमें प्रतिदिन 800 टन पशु चारा का उत्पादन करने वाला एक आधुनिक संयंत्र भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘’जब मैं विकसित भारत की बात करता हूं तो मैं सबका प्रयास में विश्वास करता हूं।" उन्होंने बताया कि जब भारत अपनी आजादी के 100वें वर्ष में पहुंचेगा तो अमूल 75 वर्ष पूरे कर लेगा। प्रधानमंत्री ने तेजी से बढ़ती आबादी की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अमूल की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि अमूल ने अगले 5 वर्षों में अपने संयंत्रों की प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज अमूल दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी डेयरी कंपनी है। आपको इसे जल्द से जल्द दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी बनाना होगा। सरकार हर तरह की मदद करने के लिए आपके साथ खड़ी है और यह मोदी की गारंटी है। प्रधानमंत्री ने अमूल के 50 साल पूरे होने पर अपनी शुभकामनाएं देते हुए अपने संबोधन का समापन किया।

इस अवसर पर अन्य लोगों के बीच गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल, केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला और गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ के अध्यक्ष श्री शामल बी पटेल उपस्थित थे। इस समारोह में 1.25 लाख से अधिक किसान शामिल हुए।

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कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

परियोजना का नाम

मार्ग की लंबाई (किमी में)

ट्रैक की लंबाई (किमी में)

पूर्ण होने की लागत (रुपये करोड़ में )

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन

403

859

14,926

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन

 

198

 

458

 

9,889

कुल

601

1,317

24,815

 

इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्‍टीट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करेंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नए भारत की परिकल्‍पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मुख्‍य योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों को कवर करने वाली ये 02 (दो) परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, अनाज, सीमेंट, पीओएल, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्‍साइड के उत्सर्जन (180.31 करोड़ किलोग्राम) में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)

  • गाजियाबाद-सीतापुर एक मौजूदा दोहरी लाइन खंड है जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन 4) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168% तक उपयोग हो रहा है और परियोजना शुरू न होने की स्थिति में इसके 207% तक होने का अनुमान है।
  • उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है।
  • परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।
  • सुगम परिवहन के लिए, परियोजना की रूपरेखा हापुड़, सिंभाओली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए बनाई गई है और तदनुसार, बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
  • परियोजना खंड के पास/पास प्रमुख पर्यटक/धार्मिक स्थान दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), और नैमिषारण्य (सीतापुर) हैं।
  • इस परियोजना से कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद, तैयार इस्पात आदि के 35.72 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
  • अनुमानित लागत: लगभग 14,926 करोड़ रुपये।
  • रोजगार सृजन: 274 लाख मानव दिन।
  • कार्बन डाइऑक्‍साइड उत्सर्जन में लगभग 128.77 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्‍साइड की कमी। यह 5.15 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

  • लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 2,877.46 करोड़ रुपये की बचत।

गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)

 

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन (198 किमी)

 

  • राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा - चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है।
  • प्रस्तावित परियोजना हावड़ा-चेन्नई उच्‍च घनत्‍व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।
  • यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।
  • विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है।
  • यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।
  • परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।
  • इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130% तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है। क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • परियोजना के इस खंड में गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल, 2.67 किमी लंबा वायडक्ट, 3 बाईपास शामिल हैं और नया मार्ग मौजूदा मार्ग से लगभग 8 किमी छोटा है, जिससे संपर्क और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
  • प्रस्तावित खंड अन्नवरम, अंतर्वेदी और द्रक्षरामम आदि जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच में सुधार करके पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
  • कोयला, सीमेंट, रासायनिक खाद, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, कंटेनर, बॉक्साइट, जिप्सम, चूना पत्थर आदि सहित 29.04 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
  • अनुमानित लागत: लगभग 9,889 करोड़ रुपये।
  • रोजगार सृजन: 135 लाख मानव दिन।
  • कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 51.49 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 2.06 करोड़ पेड़ों के बराबर है।

  • लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 1,150.56 करोड़ रुपये की बचत।

 

आर्थिक सशक्तिकरण:

आकांक्षी जिले - विशाखापत्तनम जिले को बेहतर संपर्क मिलेगा।

पर्यटन और उद्योगों के माध्यम से इस क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।

रेल संपर्क में सुधार के कारण नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त होगी।

राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) तीसरी और चौथी लाइन (198 किलोमीटर)

 

प्रधानमंत्री का ध्यान रेलवे पर:

  • वित्त वर्ष 26-27 के लिए रिकॉर्ड 2,65,000 करोड़ रुपये का बजट आबंटन।
  • 1600 से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण करके, इसने लोकोमोटिव उत्पादन में अमेरिका और यूरोप को पीछे छोड़ दिया।
  • वित्त वर्ष 2026 में, भारतीय रेल के वैश्विक स्तर पर शीर्ष तीन मालवाहकों में शामिल होने की उम्मीद है, जो 1.6 बिलियन टन माल का परिवहन करेगा।

  • भारत ने ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच और यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया को बोगियां निर्यात करना शुरू कर दिया है।