हमारे गवर्नेंस मॉडल की दुनिया में चर्चा, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले: पीएम मोदी
तुष्टिकरण नहीं, संतुष्टिकरण है हमारा रास्ता: आगरा में पीएम मोदी
मोदी की गारंटी ‘सबका साथ-सबका विकास’ लेकिन सपा-कांग्रेस के लिए उसका वोट बैंक ही खास: पीएम मोदी
कांग्रेस का इरादा ओबीसी का आरक्षण छीन कर अपने खास पसंद वालों को देने का है: आंवला में पीएम मोदी
2024 का चुनाव, देश को एक हजार वर्ष की गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने का चुनाव है: पीएम मोदी
4 जून के बाद, हर भ्रष्टाचारी का और घोटालों की काली कमाई का हिसाब होगा: शाहजहांपुर में पीएम मोदी
बहनों के जीवन से मुश्किलें कम करने के लिए आपका भाई दिन-रात काम कर रहा है: शाहजहांपुर में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक तीन चुनावी सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सपा-कांग्रेस और इंडी-गठबंधन केवल अपने खास वोट बैंक को साधने के लिए सारी हदें पार कर रहे हैं। ये तुष्टिकरण की राजनीति से देश को टुकड़े-टुकड़े में बांटने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए मोदी ने संतुष्टिकरण का रास्ता अपनाया है। हमारा मंत्र सबका साथ, सबका विकास का है, लेकिन सपा-कांग्रेस के लिए देश से भी बढ़कर उनका अपना पसंदीदा वोट बैंक है। यहां तक कि सपा और कांग्रेस के नेता अपने इस वोट बैंक के लिए खुद को हमारे भगवान राम और श्याम से भी ऊपर मानते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल सपा के साथ दोस्ती की कसमें खा रही कांग्रेस के खतरनाक इरादों से पूरे देश में हंगामा मचा है। कांग्रेस का ये खतरनाक पंजा फिर देश के लोगों का हक छीनने वाला है। कांग्रेस का इरादा है कि OBC जातियों को मिलने वाला आरक्षण छीनकर, उनका हिस्सा अपने खासमखास वोटबैंक को दिया जाए। कांग्रेस पार्टी के इन इरादों पर सपा के शहजादे की चुप्पी बताती है कि इन सारी बातों को उनका भी पूरा समर्थन है।

ब्रज क्षेत्र के सभी देवी-देवताओं को प्रणाम करते हुए आगरा की अपनी पहली चुनावी सभा में पीएम मोदी ने कहा कि भारत की बढ़ती हुई शक्ति कुछ राजनीतिक दलों को बिल्कुल रास नहीं आ रही है। वो नहीं चाहते कि भारत और हमारी सेना आत्मनिर्भर बने। इसलिए वो मोदी के विरुद्ध एकजुट हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का लक्ष्य तो अपनी गरीब जनता के संतुष्टिकरण का है, लेकिन सपा-कांग्रेस का इंडी-गठबंधन तो घोर तुष्टिकरण में जुटा हुआ है। इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जो मेनिफेस्टो जारी किया है, उस पर 100 प्रतिशत मुस्लिम लीग की छाप स्पषट नजर आती है। पूरा मेनिफेस्टो सिर्फ अपने खास वोटबैंक को मजबूत करने को समर्पित है। दूसरी ओर हमारा 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड हो या फिर भाजपा का संकल्प पत्र, हमारा पूरा जोर सैचुरेशन पर है। यानी सबका साथ, सबका विकास ही मोदी की गारंटी है।

कांग्रेस की कार्यशैली पर प्रहार करते हुए पीएम ने कहा कि आजादी के बाद से ही ये स्पष्ट हो गया था कि भारत में धर्म के आधार पर कभी आरक्षण नहीं दिया जाएगा। यही बाबासाहेब अंबेडकर की इच्छा थी और यही संविधान की मूल भावना है। लेकिन कांग्रेस न सिर्फ बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान किया है, बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय की धज्जियां भी उड़ा रही है। अब तो कांग्रेस ने ये भी ठान लिया है कि वो धर्म के आधार पर रिजर्वेशन लाकर ही रहेगी। इसके लिए कांग्रेस ने तरीका निकाला है- ओबीसी कोटे के आरक्षण को छीनकर वो धर्म के आधार पर अपने खास वोट बैंक को आरक्षण देगी। यूपी के लोगों को और विशेषकर OBC समुदाय को कांग्रेस और सपा का ये खतरनाक खेल समझना होगा और इनसे सतर्क रहना होगा।  कांग्रेस का मंत्र है- कांग्रेस की लूट, जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी। लेकिन SC/ST/OBC के हक पर डाका और माताओं-बहनों के मंगलसूत्र पर नजर डालने से पहले, कांग्रेस और इंडी-गठबंधन को मोदी से निपटना होगा।

बदायूं के आंवला में आयोजित जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं जीवन का पल-पल और शरीर का कण-कण आपकी सेवा में खपाने के लिए निकला हूं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के अनेक राज्यों में जनसभाएं कर रहा हूं। हिंदुस्तान के हर कोने से यही आवाज आ रही है- फिर एक बार...मोदी सरकार! उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए गरीब, किसान, युवा और नारीशक्ति को सशक्त कर रही है। ये भाजपा है जिसने बहनों को बिजली, मुफ्त राशन, नल से जल, शौचालय, मुफ्त इलाज और सस्ते गैस कनेक्शन दिए। अब तो मोदी ने देश के हर परिवार के 70 साल से ज्यादा के बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज की भी गारंटी दे दी है। बरेली और बदायूं के किसानों को ही पीएम किसान सम्मान निधि से 2600 करोड़ रुपये सीधे मिले हैं।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर चोट करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सपा-कांग्रेस का इंडी-गठबंधन तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। ये लोग पहले तंज करते थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे। आपके आशीर्वाद से हमने अयोध्या में भव्य-दिव्य राम मंदिर बनाया, तारीख भी बताई, सपा-कांग्रेस को निमंत्रण भी दिया। लेकिन इनका खास वोट बैंक नाराज न हो जाए, इसलिए इन्होंने बुलावा ही ठुकरा दिया। इन्होंने भगवान श्री राम ही नहीं, हमारे आराध्य प्रभु श्याम को भी नहीं छोड़ा है। कुछ समय पहले मैं समंदर में द्वारका जी के दर्शन करने गया था। लेकिन कांग्रेस के शहजादे ने उसका भी मजाक उड़ाया। और खुद को यदुवंशी बताने वाले सपा के परिवारवादी, श्रीकृष्ण का मजाक उड़ाने वालों की यहां आरती उतार रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने शाहजहांपुर में अपनी तीसरी जनसभा में कहा कि आज ये पूरा क्षेत्र बीजेपी के विकास का गवाह बन रहा है। ये वही क्षेत्र है, जो योगी सरकार के आने से पहले, ‘समाजवादी सब कुछ ठप्प परियोजना’ का सबसे बड़ा शिकार था। यहां सड़क, इनफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पूरी तरह ठप्प थी। यहां डबल इंजन सरकार आने के बाद विकास की गाड़ी तेजी रफ्तार से दौड़ने लगी है। पहले जहां सड़कें तक सलामत नहीं थीं, अब वहां एक्सप्रेसवे गुजर रहा है। शाहजहांपुर बाईपास, शाहजहांपुर-पीलीभीत नेशनल हाईवे और सीतापुर-लखनऊ हाइवे का बड़ा लाभ भी यहां के लोगों को मिलेगा। यहां जरी-जरदोजी जैसे जिन कामों को हमारी सरकार ODOP योजना के तहत आगे बढ़ा रही है, उससे कारीगरों और किसानों की किस्मत भी बदलेगी।

 

 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के समापन पर कहा कि उत्तर प्रदेश में दो लड़कों की जोड़ी जो खुद पहले कई बार फ्लॉप हो चुकी है, उनसे अब विकास की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? मोदी अपने काम का और देश के विकास का लेखाजोखा देकर आपसे आशीर्वाद मांगता है। लेकिन, क्या कभी सपा और कांग्रेस को अपने कार्यकाल का  हिसाब देते हुए देखा है। जब ये सत्ता में थे तब अयोध्या, बनारस, लखनऊ, कानपुर आदि में आए दिन आतंकी हमले होते थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की एक पहचान रही है- इन्हें जब कोई बड़ा खेल करना होता है तो ये देश और संविधान के नाम पर शोर मचाने लगते हैं। मोदी को गालियां देने लगते हैं। लेकिन जैसे ही कांग्रेस का घोषणापत्र आया, इनके असली इरादों की भनक देश को लग गई। कांग्रेस, पूरे देश में आरक्षण का कर्नाटक मॉडल लागू करना चाहती है। कांग्रेस की मंशा संविधान बदलकर दलितों, पिछड़ों के आरक्षण को छीनकर अपने वोटबैंक को देने की है। लेकिन मोदी के रहते कांग्रेस अपने नापाक इरादों में कभी कामयाब नहीं हो पाएगी।

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February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।