पश्चिम बंगाल की युवा पीढ़ी के लिए यह निर्णायक क्षण है। आपके पास बंगाल के भविष्य को बदलने की क्षमता है: अलीपुरद्वार में पीएम
सिंदूर खेला की धरती से, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से अपनी ताकत दिखाई: पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी
TMC जानबूझकर बंगाल के गरीबों, SC/ST/OBC समुदायों और आदिवासी आबादी को लाभों से वंचित कर रही है: पीएम मोदी का TMC गवर्नेंस पर प्रहार
TMC सरकार ने लोगों का भरोसा खो दिया है, इसलिए पूरा बंगाल कह रहा है...बंगाल में मची चीख-पुकार...नहीं चाहिए निर्मम सरकार: पीएम मोदी
BJP-NDA सरकार हर नागरिक को विकास, सुरक्षा और न्याय दिलाएगी: बंगाल में पीएम मोदी का आश्वासन
TMC के क्रूर शासन ने हिंसा, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को जन्म दिया है: अलीपुरद्वार में पीएम

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत नए सामर्थ्य के साथ समृद्धि की नई गाथा लिख रहा है, लेकिन भारत विकसित बने इसके लिए पश्चिम बंगाल का विकसित होना बहुत जरूरी है।

पीएम ने कहा कि भाजपा पूर्वोदय की नीति पर चल रही है। बीते दशक में बीजेपी सरकार ने यहां के विकास के लिए हजारों करोड़ का निवेश किया है। उन्होंने कहा, ‘भाजपा सरकार ईमानदारी से सबका साथ सबका विकास के मंत्र को लेकर बंगाल की प्रगति के लिए समर्पित है’।

पीएम मोदी ने कहा कि ये समय पश्चिम बंगाल के लिए बहुत अहम है। ऐसे में राज्य के लोगों विशेषकर नौजवानों को बंगाल का भविष्य तय करना है। उन्होंने कहा, ‘आज पश्चिम बंगाल एक साथ कई संकटों से घिरा है। एक संकट, समाज में फैली हिंसा और अराजकता का है। दूसरा संकट माताओं-बहनों की असुरक्षा का है, उन पर हो रहे जघन्य अपराधों का है। तीसरा संकट नौजवानों में फैल रही घोर निराशा का है, बेतहाशा बेरोजगारी का है। चौथा संकट, घनघोर करप्शन का है, यहां के सिस्टम पर लगातार कम होते जन विश्वास का है, तो पांचवां संकट, गरीबों का हक छीनने वाली सत्ताधारी पार्टी की स्वार्थी राजनीति का है’।

मुर्शीदाबाद और मालदा की हिंसा को पीएम ने टीएमसी सरकार की निर्ममता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा, ‘दंगों में गरीब माताओं-बहनों की जीवनभर की पूंजी राख कर दी गई। तुष्टीकरण के नाम पर गुंडागर्दी को खुली छूट दे दी गई है’।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की जनता को अब टीएमसी सरकार के सिस्टम पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार के टीचर भर्ती घोटाले ने पश्चिम बंगाल के हजारों युवा टीचर्स और लाखों बच्चों का भविष्य खतरे में डाल दिया है। भ्रष्टाचार का सबसे बुरा असर यहां के नौजवानों, गरीब और मिडिल क्लास परिवारों पर हुआ है’।

पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार यहां के गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और महिलाओं से दुश्मनी निकाल रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की कई योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब, SC/ST/OBC के लिए जो भी योजनाएं देश में चल रही हैं, उनमें से बहुत सारी योजनाएं राज्य में लागू ही नहीं होने दी जा रही।

पीएम ने कहा कि आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ पश्चिम बंगाल के मेरे भाई-बहनों को नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं केंद्र की बीजेपी सरकार, देशभर में गरीब परिवारों को पक्के घर बनाकर दे रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में लाखों परिवारों का घर नहीं बन पा रहा, इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में बहुत बड़ी संख्या में हमारे विश्वकर्मा भाई-बहन हैं। लेकिन उन्हें विश्वकर्मा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।

आदिवासी समाज का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी पश्चिम बंगाल के आदिवासी भाई-बहनों की दुश्मन है। यही वजह है कि यहां के गरीब आदिवासियों समुदाय को पीएम जनमन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि टीएमसी हमारे आदिवासी समाज को भी वंचित रखना चाहती है और उसे इसके सम्मान की परवाह नहीं है।

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक का जिक्र करते हुए भी पीएम ने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस बार की बैठक में वो मौजूद ही नहीं थी। ऐसा इसलिए है कि क्योंकि टीएमसी को 24 घंटे सिर्फ पॉलिटिक्स ही करनी है, पश्चिम बंगाल का विकास और देश की प्रगति, उनकी प्राथमिकता में है ही नहीं।

पीएम ग्राम सड़क योजना सहित पश्चिम बंगाल में 16 बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि टीएमसी सरकार की वजह से ये प्रोजेक्ट अटके हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘कहीं रेल लाइन आनी थी, कहीं मेट्रो बननी थी, कहीं हाईवे बनना था, कहीं अस्पताल बनना था, लेकिन इन प्रोजेक्ट्स को टीएमसी ने लटका कर रखा है। ये पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा है’।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों की बर्बरता से पश्चिम बंगाल के लोगों में भी बहुत गुस्सा था। आतंकवादियों के इस दुस्साहस का जवाब हमारी सेना ने उनको सिंदूर की शक्ति का अहसास करा कर दिया है। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमने आतंक के उन ठिकानों को तबाह किया, जिनकी पाकिस्तान ने कल्पना तक नहीं की थी’।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान कभी भी भारत से आमने-सामने का युद्ध नहीं जीत सकता, इसलिए उसकी सेना आतंकियों का सहारा लेती है। लेकिन पहलगाम हमले के बाद अब भारत ने दुनिया को बता दिया है कि भारत पर अब आतंकी हमला हुआ, तो दुश्मन को उसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सिंदूर खेला की इस धरती पर मैं एक बार फिर साफ कर देना चाहता हूं कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है!

पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल को उसका पुराना गौरव लौटाने की चर्चा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के सामने भाजपा का विकास मॉडल है। आज भाजपा, देश के कई राज्यों में सरकारें चला रही है। असम हो, त्रिपुरा हो या फिर ओडिशा, भाजपा की सरकारें तेजी से विकास कार्यों में जुटी हैं। मैं बंगाल के सभी भाजपा कार्यकर्ता साथियों से कहना चाहता हूं, ‘हमें कमर कसकर तैयार रहना है। हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है कि लोकतंत्र पर पश्चिम बंगाल की जनता के विश्वास को फिर से कैसे बहाल करें’।

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प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा पर नेशनल डिपार्टमेंटल समिट के समापन सत्र की अध्यक्षता की
September 02, 2026
यह टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप आयोजित शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन
प्रधानमंत्री ने ठोस और समयबद्ध नतीजों पर अमल करने के लिए लगातार समीक्षा और फॉलो-अप की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया
जन भागीदार पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जल उत्सव को बढ़ावा देने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने और दुनिया भर के बेहतरीन तौर-तरीकों से सीखने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए पानी से जुड़े डेटा का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की
प्रधानमंत्री ने पानी से जुड़े मुद्दों पर जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों की भागीदारी वाले राज्यों के बीच व्यवस्थित अध्ययन-दौरों का सुझाव दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पानी पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। यह शिखर सम्मेलन टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर सहयोग के ज़रिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री की सोच के अनुरुप विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में पहला सम्मेलन है। इसमें भारत की जल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित चर्चा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ एक मंच पर थे।

प्रधानमंत्री ने दो दिनों तक चली गहन चर्चा की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि शिखर सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समय-सीमा वाले कार्य बिंदुओं की समीक्षा और सीखने की निरंतर प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक बार की गतिविधि बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इसकी समीक्षा व फॉलो अप की निरंतर प्रक्रिया का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों, जैसे आबादी का बढ़ना और भविष्य में पानी की ज़रूरतों के बारे में शहरी स्थानीय निकायों को जागरूक करने पर ज़ोर दिया और उनके लिए भी ऐसे ही चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने पानी बचाने वाली तकनीकों को ज़्यादा अपनाने की बात कही। उन्होंने भारतीय निर्माताओं और संबंधित लोगों को असरदार समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करने के लिए खास प्रदर्शनियों और कार्यशालाएं, जिनमें दुनिया भर के बेहतरीन तरीकों की जानकारी भी शामिल हो, आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

जन भागीदारी पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने लोगों में ज़्यादा जागरूकता लाने के लिए "जल उत्सव" को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने गाद निकालने के काम को एक नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए साफ नियम और मानक संचालन प्रक्रिया बनाने को कहा। बांध की सुरक्षा के मामले में, उन्होंने हर मॉनसून से पहले पूरी तैयारी रखने, तय सावधानियों का पालन करने और स्कूली छात्रों में जागरूकता पैदा करने पर ज़ोर दिया, जिसमें शिक्षा के पाठ्यक्रम में इसे सही ढंग से शामिल करना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भी जल प्रबंधन और शासन के बारे में जानकारी और क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरे आयोजित किए जाएं, ताकि व्यावहारिक सीख मिल सके और सफल उपायों को दूसरी जगहों पर भी अपनाया जा सके।

प्रधानमंत्री ने मज़बूत जल डेटा गवर्नेंस की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें जल-क्षेत्र से जुड़े डेटा को एक साथ लाया जाए, उसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित किया जाए और उसका विश्लेषण तथा प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए। उन्होंने एक समान प्रारूप के माध्यम से डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए एआई के उपयोग की भी सिफारिश की। उन्होंने कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित पानी के उचित उपयोग के ज़रिए पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए पहले से तैयारी और एकीकृत योजना बनाने पर भी ज़ोर दिया।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सही योजना, पक्के इरादे, ज़रूरी संसाधन तथा काबिल अधिकारियों को लगाकर पानी की कमी की समस्या को एक अवसर में बदला जा सकता है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार मुख्य नतीजों पर ज़ोर दिया: पानी से जुड़ी ढ़ांचागत परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करना, जल संरक्षण को लोगों के एक लगातार चलने वाले आंदोलन के तौर पर मज़बूत करना, पीने योग्य पानी के स्रोतों की लंबे समय तक उपलब्धता सुनिश्चित करना और गांवों में पीने के पानी की योजनाओं के असरदार संचालन और रखरखाव को संस्थागत रूप देना।