ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए देश के प्रति उनके दृष्टिकोण की प्रशंसा की
देश गर्व के साथ ईसाई समुदाय के योगदान को स्वीकार करता है: प्रधानमंत्री
द होली पोप का गरीबी उन्मूलन के बारे में संदेश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र से मेल खाता है: प्रधानमंत्री
हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ हर किसी तक पहुंचे और कोई भी अछूता न रहे: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

Friends,

सबसे पहले, मैं आप सभी को और दुनिया भर के लोगों को और विशेषकर Christian community को आज के इस महत्वपूर्ण पर्व पर अनेक-अनेक शुभकामनाएं दूंगा। Merry Christmas !

ये मेरे लिए बहुत सुखद है कि इस special और sacred अवसर पर आप सब मेरे निवास स्थान पर आए हैं। जब Indian Minority Foundation ने ये प्रस्ताव रखा था कि हम सब मिलकर क्रिसमस मनाएं, मैंने उन्हें कहा क्‍यों न मेरे यहां मनाएं, और उसी में से ये कार्यक्रम बन गया। तो मेरे लिए बहुत खुशी का अवसर है। अनिल जी ने मुझे बहुत मदद की, मैं उनका भी विशेष रूप से आभारी हूं। तो मैंने इसे खुशी से स्वीकार किया था। इस पहल के लिए मैं Minority Foundation का भी बहुत आभारी हूं।

Christian community के साथ तो मेरा संबंध कोई नया नहीं है, बहुत पुराना, बहुत आत्‍मीय नाता रहा है, और बड़े warm relations रहे हैं। गुजरात का सीएम रहने के दौरान मैं ईसाई समुदाय और उनके लीडर्स के साथ अक्सर मेरा मिलना-जुलना रहता था और मैं मणिनगर जहां से चुनाव लड़ता था वहां बहुत बड़ी मात्रा में आबादी भी है और इसके कारण मेरा स्वाभाविक नाता रहता था। कुछ ही वर्ष पहले, मुझे The Holy Pope से मिलने का भी सौभाग्य मिला था। वो वाकई मेरे लिए बहुत ही यादगार पल था। हमने इस धरती को बेहतर जगह बनाने के लिए social harmony, global brotherhood, climate change और inclusive development, ऐसे कई विषयों पर और लम्‍बे समय तक बैठ करके बातें की थी।

Friends,

क्रिसमस वो दिन है जब हम Jesus Christ के जन्म को सेलिब्रेट करते हैं। ये उनकी life, message और values को भी याद करने का अवसर है। Jesus ने करुणा और सेवा के मूल्यों को जीया है। उन्होंने एक ऐसा समाज बनाने के लिए काम किया जिसमें सबके लिए न्याय हो और जो समाज समावेशी हो, inclusive हो। हमारे देश की विकास यात्रा में यही मूल्य एक guiding light की तरह हमें रास्ता दिखा रहे हैं।

साथियों,

समाज जीवन की अलग-अलग धाराओं में हमें ऐसे कई समान मूल्य दिखते हैं, जो हम सबको एकजुट करते हैं। उदाहरण के लिए, पवित्र बाइबल में कहा गया है कि ईश्वर ने हमें जो भी उपहार दिया है, जो भी सामर्थ्य दिया है, उसका उपयोग हम दूसरों की सेवा के लिए करें। और यही तो सेवा परमो धर्म: है। The Holy Bible में सत्य को बहुत महत्व दिया गया है और कहा गया है कि सत्य ही हमें मुक्ति का मार्ग दिखाएगा। और संयोग देखिए, सभी पवित्र उपनिषदों ने भी ultimate truth को जानने पर फोकस किया है, ताकि हम स्वयं को मुक्त कर सकें। हम अपने साझा मूल्यों और हमारी विरासत पर फोकस करके एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। 21वीं सदी के आधुनिक भारत के लिए ये सहयोग, ये सामंजस्य, सबका प्रयास की ये भावना, भारत को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

साथियों,

The Holy Pope ने अपने एक Christmas address में ईसा मसीह से प्रार्थना की थी कि जो लोग गरीबी खत्म करने में जुटे हैं, उन्हें उनका आशीर्वाद मिले। वो मानते हैं कि गरीबी, व्यक्ति की गरिमा को चोट पहुंचाती है। The Holy Pope के इन शब्दों में उसी भावना की झलक है, जो विकास के लिए हमारे मंत्र में है। हमारा मंत्र है, सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास-सबका प्रयास।

सरकार के तौर पर हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का फायदा हर किसी तक पहुंचे और कोई इससे अछूता ना रहे। ईसाई समुदाय के कई लोगों तक, विशेषकर गरीबों और वंचितों तक भी आज देश में हो रहे विकास का लाभ पहुंच रहा है। मुझे याद है, जब हमने fisheries के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया, तो ईसाई समुदाय के बहुत सारे मछुआरे भाई-बहनों ने हमारे इस कदम की सार्वजनिक रूप से सराहना की, मेरा भी सम्‍मान किया, मेरा बहुत अभिनंदन किया।

साथियों,

क्रिसमस के इस अवसर पर मैं, देश के लिए Christian community के लिए एक बार जरूर योगदान करूंगा, कि आपके योगदान को भारत गर्व से स्‍वीकार करता है। ईसाई समुदाय ने freedom movement में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Freedom struggle में Christian community के कई thinkers और leaders शामिल थे। गांधी जी ने स्वयं बताया था कि Non Cooperation Movement की परिकल्पना St Stephen’s College के प्रिंसिपल सुशील कुमार रुद्र की छत्रछाया में की गई थी।

साथियों,

ईसाई समुदाय ने समाज को दिशा देने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समाज सेवा में Christian community बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है, और आपकी कम्यूनिटी, गरीबों और वंचितों की सेवा के लिए हमेशा आगे रहती है। Education और healthcare जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में, आज भी पूरे भारत में, ईसाई समुदाय के संस्थान बड़ा योगदान दे रहे हैं।

Friends,

2047 तक विकसित भारत बनाने का जो लक्ष्‍य है, इस लक्ष्य के साथ हम अपनी विकास यात्रा को तेज गति से आगे बढ़ा रहे हैं, लगातार कोशिश कर रहे हैं। इस विकास यात्रा में हमारे सबसे महत्वपूर्ण साथी अगर कोई हैं तो वो हमारे युवा हैं। निरंतर विकास के लिए, ये बहुत आवश्यक है कि हमारे युवा physically, mentally और emotionally फिट और हेल्दी रहें। इस उद्देश्य से चलाए जा रहे कई अभियान, जैसे फिट इंडिया, मिलेट्स का उपयोग, nutrition पर फोकस, मेंटल हेल्थ के प्रति जागरूकता, और ड्रग्स के खिलाफ अभियान जन आंदोलन बन चुके हैं। मैं Christian community के लीडर्स से, विशेषकर जो education और healthcare institutions से जुड़े हैं, उनसे आग्रह करूंगा कि वो इन विषयों के प्रति लोगों को और जागरूक बनाएं।

साथियों,

क्रिसमस पर Gifts-उपहार देने की परंपरा है। मुझे भी बहुत ही पवित्र तोहफा मिला है अभी-अभी, और इसलिए, इस अवसर पर हम ये विचार करें कि कैसे हम आने वाली पीढ़ियों को एक better planet का उपहार दे सकते हैं। Sustainability आज के समय की जरूरत है। Living a sustainable lifestyle, ये Mission LIFE का central message है। ये एक ऐसा international movement है, जिसका नेतृत्व भारत कर रहा है।

ये अभियान pro-planet people को pro-planet lifestyle अपनाने के लिए प्रेरित करता है। और जो संपत जी ने छोटी किताब में जो ग्रीन कलर लाने के लिए कहा है उसका ये भी एक रास्‍ता है। और उदाहरण के लिए, reusing और recycling, bio-degradable materials का इस्तेमाल, मिलेट्स-श्रीअन्न को अपनाना, minimal carbon footprint वाले उत्पादों को खरीदना, ऐसी कई चीजों को हम अपनी daily lives का हिस्सा बना सकते हैं, और बड़ा बदलाव ला सकते हैं। और मैं मानता हूं, Christian community, जो इतनी socially conscious होती है, वो इस मिशन में प्रमुख भूमिका निभा सकती है, नेतृत्‍व कर सकती है।

साथियों,

एक विषय Vocal For Local का भी है। जब हम स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देते हैं, जब हम भारत में बनी वस्तुओं के एंबेसेडर बनते हैं, तो ये भी एक तरह से देशसेवा ही है। Vocal For Local के मंत्र की सफलता से, देश के लाखों-लाख छोटे उद्यमियों का रोजगार जुड़ा है, स्वरोजगार जुड़ा है। और इसलिए मैं Christian community के लोकल के लिए और वोकल बनने के लिए का आप सबका मार्गदर्शन उनको मिलता रहे, ये मैं जरूर आग्रह करूंगा।

साथियों,

एक बार फिर, हम कामना करते हैं कि ये festive season हमें एक राष्ट्र के रूप में और मजबूत करे, सभी देशवासियों को और करीब लाएं। ये त्योहार, हमारी diversity में भी हमें एकजुट रखने वाली bonding को मजबूत करें ।

आप सबको मेरी तरफ से फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। और आप सब समय निकाल करके आए, और आप मुम्‍बई से specially इस आयु में भी दौड़ करके आए। वैसे मुझे आप में से कईयों के निरंतर आशीर्वाद मिलते रहते हैं, मुलाकात, मार्गदर्शन मिलता रहता है। लेकिन आज सबको एक साथ मिलने का मौका मिला।

मैं फिर एक बार आपका धन्यवाद करता हूं। मैं इन बच्चों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं कि इन्‍होंने आज के हमारे इस पर्व को अपने स्वर से, अपनी भावनाओं से और मजबूत बनाया है। इन बच्‍चों को मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद।

धन्‍यवाद।

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Text of PM’s address at the News18 Rising Bharat Summit
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।