"मेरे सपनों का भारत" और "भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायक" पर चयनित निबंधों का अनावरण किया
प्रधानमंत्री ने एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र और ओपन-एयर थिएटर सभागार - पेरुन्थालाईवर कामराजर मणिमंडपम का उद्घाटन किया
“भारत का जन भी युवा है, और भारत का मन भी युवा है; भारत अपने सामर्थ्य से भी युवा है, भारत अपने सपनों से भी युवा है; भारत अपने चिंतन से भी युवा है, भारत अपनी चेतना से भी युवा है”
"भारत अपने युवाओं को डेमोग्राफिक डिविडेंड के साथ-साथ डेवलपमेंट ड्राइवर भी मानता है"
“आज भारत के युवा में अगर श्रम का सामर्थ्य है, तो भविष्य की स्पष्टता भी है; इसीलिए, भारत आज जो कहता है, दुनिया उसे आने वाले कल की आवाज़ मानती है”
“युवा में वो क्षमता होती है कि वो पुरानी रूढ़ियों का बोझ लेकर नहीं चलता है; यही युवा, खुद को, समाज को, नई चुनौतियों के हिसाब से तैयार कर सकता है”
"आज के युवा 'कर सकता हूँ' की भावना से ओतप्रोत हैं, जो हर पीढ़ी के लिये प्रेरणा का स्रोत है”
"भारत के युवा वैश्विक समृद्धि की गाथा लिख रहे हैं"
"नए भारत का मंत्र - प्रतिस्पर्धा करो और जीतो; जुट जाओ और जीतो; जुट जाओ और जंग जीतो”
प्रधानमंत्री ने युवाओं से उन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में शोध करने और लिखने का आह्वान किया, जिन्हें वह पहचान नहीं मिली जिनके वे हकदार थे


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज पुदुचेरी में 25वें राष्ट्रीय युवा महोत्सव का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया। आज स्वामी विवेकानंद की जन्मजयंती है, इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने "मेरे सपनों का भारत" और "भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायक" पर चयनित निबंधों का अनावरण किया। इन निबंधों को उक्त दो विषयों पर 1 लाख से अधिक युवाओं द्वारा प्रस्तुत लेखों से चुना गया है। प्रधानमंत्री ने पुदुचेरी में एमएसएमई मंत्रालय के एक प्रौद्योगिकी केंद्र का भी उद्घाटन किया, जिसे लगभग 122 करोड़ रुपये के निवेश से निर्मित किया गया है। प्रधानमंत्री ने लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से पुदुचेरी सरकार द्वारा निर्मित ओपन-एयर थिएटर सभागार - पेरुन्थालाइवर कामराजर मणिमंडपम का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर, श्री नारायण राणे, श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा और श्री निसिथ प्रामाणिक, डॉ तमिलिसाई सुंदरराजन, पुदुचेरी के मुख्यमंत्री श्री एन रंगास्वामी, राज्य के मंत्री तथा संसद सदस्य उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने देशवासियों को राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएं दीं। स्वामी विवेकानंद को नमन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के इस वर्ष में उनकी जन्मजयंती और अधिक प्रेरणादायी हो गई है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष के अतिरिक्त महत्व को रेखांकित किया क्योंकि श्री अरबिंदो की 150वीं जन्मजयंती का उत्सव और महाकवि सुब्रमण्य भारती की 100वीं पुण्यतिथि भी इसी वर्ष पड़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इन दोनों मनीषियों का पुदुचेरी से खास रिश्ता रहा है। ये दोनों एक-दूसरे की साहित्यिक और आध्यात्मिक यात्रा के साझेदार रहे हैं।”

इस प्राचीन देश की युवा पहचान के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया भारत को एक आशा और विश्वास की दृष्टि से देखती है। क्योंकि भारत का जन भी युवा है और भारत का मन भी युवा है। भारत अपने सामर्थ्य से भी युवा है और अपने सपनों से भी युवा है। भारत अपने चिंतन से भी युवा है और अपनी चेतना से भी युवा है। उन्होंने कहा कि भारत की सोच एवं दर्शन ने हमेशा बदलाव को स्वीकार किया है और इसकी प्राचीनता में आधुनिकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवा हमेशा जरूरत के समय आगे आए हैं। जब भी राष्ट्रीय चेतना में विभाजन होता है, शंकर जैसे युवा सामने आते हैं और आदि शंकराचार्य के रूप में देश को एकता के सूत्र में पिरोते हैं। अत्याचार के काल में गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे जैसे युवाओं के बलिदान आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। जब भारत को अपनी आजादी के लिए बलिदान की जरूरत थी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और नेताजी सुभाष जैसे युवा क्रांतिकारी देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने के लिए आगे आए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कभी देश को आध्यात्मिक उत्थान की जरूरत होती है, अरबिंदो और सुब्रमण्य भारती जैसे मनीषी सामने आते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं के पास डेमोग्राफिक डिविडेंड के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्य भी हैं, उनका डेमोक्रेटिक डिविडेंड भी अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि भारत अपने युवाओं को डेमोग्राफिक डिविडेंड के साथ-साथ डेवलपमेंट ड्राइवर भी मानता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज भारत के युवा में अगर टेक्नोलॉजी का चार्म है, तो लोकतंत्र की चेतना भी है। आज भारत के युवा में श्रम का सामर्थ्य है, तो भविष्य की स्पष्टता भी है। इसीलिये, भारत आज जो कहता है, दुनिया उसे आने वाले कल की आवाज मानती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के समय जो युवा पीढ़ी थी, उसने देश के लिये अपना सब कुछ कुर्बान करने में एक पल भी नहीं लगाया। लेकिन आज के युवा को देश के लिये हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करने के लिये जीना है। उन्होंने कहा कि युवा में वह क्षमता होती है, वह सामर्थ्य होता है कि वह पुरानी रूढ़ियों का बोझ लेकर नहीं चलता, वह उन्हें झटकना जानता है। यही युवा, खुद को, समाज को, नई चुनौतियों, नई डिमांड के हिसाब से इवॉल्व कर सकता है, नये सृजन कर सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के युवा 'कर सकता हूँ' की भावना से ओतप्रोत हैं, जो हर पीढ़ी के लिये प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री ने सराहना करते हुये कहा कि आज भारत के युवा वैश्विक समृद्धि की गाथा लिख ​​रहे हैं। पूरी दुनिया के यूनिकॉर्न इकोसिस्टम में भारतीय युवाओं का जलवा है। भारत के पास आज 50 हजार से अधिक स्टार्ट-अप्स का मजबूत इकोसिस्टम है। इनमें से 10 हजार से ज्यादा स्टार्ट-अप्स महामारी की चुनौती के बीच सामने आये। प्रधानमंत्री ने नये भारत का मंत्र दिया – प्रतिस्पर्धा करो और जीतो;, यानी जुट जाओ और जीतो; जुट जाओ और जंग जीतो। प्रधानमंत्री ने ओलंपिक्स और पैरालिम्पिक्स में तथा टीकाकरण अभियान में युवाओं के प्रदर्शन को युवाओं में जिम्मेदारी के एहसास और जीतने की इच्छा की मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार बेटे-बेटी को समान मानती है। इसी सोच के साथ सरकार ने बेटियों की बेहतरी के लिये शादी की उम्र को 21 साल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बेटियां भी अपना करियर बना पायें, उन्हें ज्यादा समय मिले, इस दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हमारे ऐसे अनिक सेनानी रहे हैं, जिनके योगदान को वह पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तियों के बारे में हमारे युवा जितना ज्यादा लिखेंगे, रिसर्च करेंगे, उतना ही देश की आने वाली पीढ़ियों में जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे स्वच्छता अभियान के पक्ष में आवाज उठायें और उसमें योगदान करें।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्देश्य है भारत के युवा मन को दिशा देना और उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिये शक्ति के रूप में एकजुट करना। यह सामाजिक जुड़ाव तथा बौद्धिक और सांस्कृतिक एकता के सबसे बड़े प्रयासों में शामिल है। इसका लक्ष्य है भारत की विविधतापूर्ण संस्कृतियों को साथ लाना और उन्हें ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के एकता के सूत्र में पिरोना।

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