“इस वर्ष का बजट शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख बनाकर उसकी बुनियाद को मजबूत करता है”
“नई शिक्षा नीति के अंग के रूप में शिक्षा और निपुणता, दोनों पर समान जोर दिया जा रहा है”
“वर्चुअल प्रयोगशालायें और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय जैसे भविष्यगामी पहलें हमारी शिक्षा, कौशल और ज्ञान-विज्ञान के पूरे परिप्रेक्ष्य को बदल देंगी”
“केंद्र सरकार देश के युवाओं को ‘कक्षा से बाहर का अनुभव’ देने के लिये इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप प्रदान करने पर ध्यान दे रही है”
“नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोमोशन स्कीम” के तहत लगभग 50 लाख युवाओं के लिये वजीफे का प्रावधान किया गया है”
“सरकार, उद्योग 4.0 के एआई, रोबोटिक्स, आईओटी और ड्रोन जैसे सेक्टरों के लिये कुशल श्रमशक्ति बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘हार्नेसिंग यूथ पॉवर – स्किलिंग एंड एजुकेशन’ (युवाशक्ति का सदुपयोग–निपुणता और शिक्षा) पर बजट-उपरांत वेबिनार को सम्बोधित किया। केंद्रीय बजट 2023 में घोषित होने वाली पहलों के कारगर क्रियान्वयन के लिये सुझाव और विचार आमंत्रित करने के क्रम में सरकार द्वारा आयोजित 12 बजट-उपरांत वेबिनारों में से यह तीसरा वेबिनार है।

उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुये प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि कौशल और विकास, भारत के अमृत काल के दौरान दो प्रमुख उपकरण हैं तथा ये युवा ही हैं, जो विकसित भारत का सपना लेकर देश की अमृत यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं। अमृत काल के पहले बजट में युवा और उनके भविष्य पर दिये जाने वाले विशेष बल को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का बजट शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख बनाकर उसकी बुनियाद को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में शिक्षा प्रणाली में लचीलेपन के अभाव पर अफसोस प्रकट किया और इसमें बदलाव लाने के लिये सरकार द्वारा किये जाने वाले प्रयासों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “युवाओं की सहज योग्यता और भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर शिक्षा और निपुणता को नई दिशा दी जा रही है।” उन्होंने आगे कहा कि नई शिक्षा नीति के अंग के रूप में शिक्षा और निपुणता, दोनों पर समान जोर दिया जा रहा है तथा उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस पहल से शिक्षकों का समर्थन मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत के नियम-कानून के बोझ से छात्रों को मुक्त करने के साथ-साथ सरकार शिक्षा और कौशल विकास सेक्टरों में आगे और सुधार करेगी।

कोविड महामारी के दौरान के अनुभवों को मद्देनजर रखते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी नये स्वरूप की कक्षायें बनाने में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उन उपायों पर गौर कर रही है, जो ‘हर स्थान से ज्ञान तक सुगमता’ सुनिश्चित करें। उन्होंने ‘स्वयम्’ नामक ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया, जिसके 3 करोड़ सदस्य हैं। उन्होंने इस संभावना का संकेत दिया कि वर्चुअल प्रयोगशालायें और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय ज्ञान का विशाल माध्यम बन रहे हैं। उन्होंने डीटीएच चैनलों के जरिये स्थानीय भाषाओं में पढ़ने के अवसर का भी उल्लेख किया और कहा कि देश में ऐसी अनेक डिजिटल व प्रौद्योगिकी आधारित पहलें हो रही हैं, जिन्हें राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय से अधिक से अधिक ताकत मिलेगी। “भविष्यगामी पहलें हमारी शिक्षा, कौशल और ज्ञान-विज्ञान के पूरे परिप्रेक्ष्य को बदल देंगी,” प्रधानमंत्री ने कहा, “अब हमारे शिक्षकों की भूमिका कक्षाओं तक सिमट के नहीं रहेगी।” उन्होंने उल्लेख किया कि देशभर से शिक्षा संस्थानों के लिये विविध शिक्षण सामग्रियां उपलब्ध हो जायेंगी, जो गांव व शहरी स्कूलों के बीच के अंतराल को पाटते हुये शिक्षकों के लिये अवसरों के नये द्वार खोलेंगी।

‘ऑन-द-जॉब लर्निंग’ पर प्रकाश डालते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पर अनेक देश विशेष जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के युवाओं को ‘कक्षा से बाहर का अनुभव’ देने के लिये इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप प्रदान करने पर ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री ने बताया, “आज नेशनल इंटर्नशिप पोर्टल” पर लगभग 75 हजार नियोक्ता उपस्थित हैं, जहां अब तक 25 लाख इंटर्नशिप की आवश्यकताओं को पोस्ट किया गया है।” उन्होंने उद्योगों और शिक्षा संस्थानों से आग्रह किया कि वे इस पोर्टल का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें तथा देश में इंटर्नशिप संस्कृति को और विस्तार दें।

प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि अप्रेंटिसशिप हमारे युवाओं को भविष्य के लिये तैयार करेगी। उन्होंने भारत में अप्रेंटिसशिप को प्रोत्साहित करने में सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इससे उद्योगों को ऐसी श्रमशक्ति की पहचान करने में मदद मिलेगी, जो उसके लिये सही कौशल से लैस हो। इस वर्ष के बजट पर प्रकाश डालते हुये प्रधानमंत्री ने वजीफे के प्रावधान का उल्लेख किया, जो नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोमोशन स्कीम के तहत लगभग 50 लाख युवाओं को उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि इससे अप्रेंटिसशिप के लिये माहौल बन रहा है तथा भुगतान के मामले में उद्योग को भी मदद मिल रही है।

कुशल श्रमशक्ति की आवश्यकता को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भारत को निर्माण केंद्र की तरह देख रही है। उन्होंने देश में निवेश करने के लिये आज विश्व के उत्साह का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में निपुणता पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 का उल्लेख किया जो आने वाले वर्षों में लाखों युवाओं को ‘स्किल, री-स्किल और अप-स्किल’ करेगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के जरिये जनजातियों, दिव्यांगों और महिलाओं के लिये उनके अनुरूप सटीक कार्यक्रम तैयार किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार, उद्योग 4.0 के एआई, रोबोटिक्स, आईओटी और ड्रोन जैसे सेक्टरों के लिये कुशल श्रमशक्ति बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस तरह री-स्किलिंग पर ज्यादा ऊर्जा व संसाधन खर्च किये बिना अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिये प्रतिभाओं की तलाश करना आसान हो जायेगा। प्रधानमंत्री ने पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना का भी उदाहरण दिया और पारंपरिक शिल्पकारों, दस्तकारों तथा कलाकारों के कौशल विकास पर जोर दिया, ताकि उन्हें नये बाजार के लिये तैयार किया जा सके और उन्हें उनके उत्पादों की बेहतर कीमत प्राप्त करने में मदद की जा सके।

प्रधानमंत्री ने भारत में शिक्षा सेक्टर में तेजी से बदलाव लाने के लिये अकादमिक जगत और उद्योग के बीच साझेदारी की भूमिका के महत्‍व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान उद्योग से उचित वित्तपोषण के लिये संभावनायें बनाते हुये बाजार की जरूरतों के मुताबिक अनुसंधान किया जाना चाहिये। इस वर्ष के बजट को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बौद्धिकता के लिये 3 उत्कृष्टता केंद्रों का उल्लेख किया और कहा कि इनसे उद्योग जगत-अकादमिक जगत की साझेदारी मजबूत होगी। उन्होंने आईसीएमआर प्रयोगशालाओं के बारे में बताया कि ये प्रयोगशालायें अब मेडिकल कॉलेजों और निजी क्षेत्र की अनुसंधान व विकास टीमों के लिये भी उपलब्ध कराई जायेंगी। प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र से आग्रह किया कि वे देश में अनुसंधान व विकास इको-प्रणाली को मजबूत बनाने के लिये उठाये गये सभी कदमों का भरपूर लाभ उठायें।

प्रधानमंत्री ने ‘समस्त सरकारी तंत्र की संयुक्त गतिविधि’ पर जोर देने की सरकार की सोच का हवाला देते हुये कहा कि शिक्षा और निपुणता सिर्फ सम्बंधित मंत्रालय या विभाग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी संभावनायें हर सेक्टर में मौजूद हैं। प्रधानमंत्री ने सभी निपुणता और शिक्षा से जुड़े हितग्राहियों से आग्रह किया कि वे विभिन्न सेक्टरों में उत्पन्न होने वाले अवसरों का अध्ययन करें तथा जरूरती श्रमशक्ति तैयार करने में मदद करें। भारत के तेजी से विस्तृत होने वाले नागर विमानन सेक्टर का उदाहरण देते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे भारत के विकसित होते यात्रा व पर्यटन उद्योग का पता चलता है; साथ ही रोजगार के विशाल संसाधनों के दरवाजे भी खुलते हैं। प्रधानमंत्री ने उन युवाओं का अपडेटेड डाटाबेस तैयार किये जाने की इच्छा प्रकट की, जिन्हें ‘स्किल इंडिया मिशन’ के तहत प्रशिक्षित किया गया है। अपने सम्बोधन का समापन करते हुये प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बौद्धिकता के आने के बाद भारत की प्रशिक्षित श्रमशक्ति कहीं पीछे न छूट जाये। उन्होंने उद्योग विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में काम करें।

 

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Text of PM’s address during inauguration of the Swami Vivekananda Cultural Youth Centre-Viveka Smaraka in Mysuru
August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।