प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार 'संपूर्ण सरकार' वाले दृष्टिकोण के साथ एक टीम के रूप में किस तरह से काम कर रही है
प्रधानमंत्री ने लीक से हटकर चिंतन, समग्र दृष्टिकोण और जनभागीदारी की भावना के महत्व पर प्रकाश डाला
अमृत काल में एक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने में अधिकारियों की अहम भूमिका है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से एक जिला एक उत्पाद और आकांक्षी जिला कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने को कहा
समय से पहले जन धन योजना की सफलता पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया कि गांवों के लोग डिजिटल अर्थव्यवस्था और यूपीआई के माध्यम से जुड़ें
'राजपथ' की मानसिकता अब 'कर्तव्य पथ' की भावना में बदल गई है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में सुषमा स्वराज भवन में सहायक सचिव पाठ्यक्रम, 2022 के समापन सत्र में 2020 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को संबोधित किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को अमृत काल के दौरान देश की सेवा करने और पंच प्रण को साकार करने में मदद करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि अमृत काल में एक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने में अधिकारियों की अहम भूमिका है। उन्होंने लीक से हटकर चिंतन करने और अपने प्रयासों में समग्र दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस तरह के समग्र दृष्टिकोण के महत्व को प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री गतिशक्ति मास्टर प्लान का उदाहरण दिया।

प्रधानमंत्री ने नवाचार के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि यह किस तरह सामूहिक प्रयास और देश में कार्य संस्कृति का हिस्सा बन गया है। उन्होंने स्टार्ट-अप इंडिया योजना के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि कैसे पिछले कुछ वर्षों में देश में स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह कई मंत्रालयों के एक साथ आने और 'संपूर्ण सरकार' वाले दृष्टिकोण के माध्यम से एक टीम के रूप में काम करने के कारण संभव हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किस तरह से शासन का ध्यान दिल्ली से बाहर, देश के सभी क्षेत्रों में स्थानांतरित हो गया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे महत्वपूर्ण योजनाएं अब दिल्ली के बाहर के स्थानों से शुरू की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि अधिकारी कार्य क्षेत्र की स्थानीय संस्कृति की समझ विकसित करें और जमीनी स्तर पर स्थानीय लोगों के साथ अपने संबंध को मजबूत करें। उन्होंने उन्हें एक जिला एक उत्पाद पर ध्यान केंद्रित करने और अपने जिले के उत्पादों के निर्यात के अवसरों का पता लगाने के लिए कहा। उन्होंने अधिकारियों से आकांक्षी जिला कार्यक्रम के लिए अपनी कार्य योजना तैयार करने को भी कहा। मनरेगा के बारे में बताते हुए, प्रधानमंत्री ने योजना को और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने की बात कही। उन्होंने जनभागीदारी की भावना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण कुपोषण से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

समय से पहले जन धन योजना की सफलता पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्व के बारे में बताया और अधिकारियों को गांवों में लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था और यूपीआई से जोड़ने का प्रयास करने का आह्वान किया। इसके अलावा, राष्ट्र की सेवा के महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने अपने कर्तव्यों को निभाने के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 'राजपथ' की मानसिकता अब 'कर्तव्य पथ' की भावना में बदल गई है।

इस कार्यक्रम के दौरान सहायक सचिवों द्वारा प्रधानमंत्री को आठ प्रस्तुतियां दी गईं। इन प्रस्तुतियों के विषयों में पोषण ट्रैकर: पोषण अभियान की बेहतर निगरानी के लिए उपकरण; भाषिणी के माध्यम से बहुभाषी ध्वनि आधारित डिजिटल पहुंच को सक्षम करना; कॉर्पोरेट डेटा प्रबंधन; मातृभूमि जियोपोर्टल-शासन के लिए भारत का एकीकृत राष्ट्रीय जियोपोर्टल; सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की पर्यटन क्षमता, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के माध्यम से डाकघरों का बदलाव करना, रीफ जैसी कृत्रिम संरचनाओं के माध्यम से समुद्रतटीय मत्स्यपालन का विकास; और कंप्रेस्ड बायोगैस- भविष्य के लिए ईंधन शामिल हैं। इस वर्ष 2020 बैच के कुल 175 आईएएस अधिकारियों को भारत सरकार के 63 मंत्रालयों/विभागों में 11 जुलाई 2022 से 07 अक्टूबर 2022 तक सहायक सचिव के रूप में तैनात किया गया है।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।