कर्तव्य भवन विकसित भारत की नीतियों और दिशा का मार्गदर्शन करेगा: प्रधानमंत्री
कर्तव्य भवन राष्ट्र के सपनों को पूरा करने के संकल्प का प्रतीक है: प्रधानमंत्री
भारत को एक समग्र दृष्टिकोण से आकार दिया जा रहा है, जहां प्रगति हर क्षेत्र तक पहुंचती है: प्रधानमंत्री मोदी
पिछले 11 वर्षों में, भारत ने एक शासन मॉडल बनाया है जो पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित है: प्रधानमंत्री
आइए, हम सब मिलकर भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाएं और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत की सफलता की कहानी लिखें: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-3 के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि क्रांति का अगस्त महीना 15 अगस्त से पहले एक और ऐतिहासिक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत एक के बाद एक आधुनिक भारत के निर्माण से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों का गवाह बन रहा है। श्री मोदी ने नई दिल्ली का उल्लेख करते हुए, हाल के अवसंरचनात्मक स्थलों: कर्तव्य पथ, नया संसद भवन, नया रक्षा कार्यालय परिसर, भारत मंडपम, यशोभूमि, शहीदों को समर्पित राष्ट्रीय समर स्मारक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा और अब कर्तव्य भवन को सूचीबद्ध किया। इस बात पर बल देते हुए कि ये केवल नई इमारतें या नियमित बुनियादी ढांचा नहीं हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल में, विकसित भारत को आकार देने वाली नीतियां इन्हीं संरचनाओं में तैयार की जाएंगी और आने वाले दशकों में, राष्ट्र की दिशा इन संस्थानों से निर्धारित की जाएगी। उन्होंने कर्तव्य भवन के लोकार्पण पर सभी नागरिकों को बधाई दी और इसके निर्माण में लगे इंजीनियरों और श्रमजीवियों का भी आभार व्यक्त किया।

श्री मोदी ने कहा कि गहन चिंतन के बाद भवन का नाम 'कर्तव्य भवन' रखा गया था, यह इंगित करते हुए कि कर्तव्य पथ और कर्तव्य भवन दोनों भारत के लोकतंत्र और उसके संविधान की मूल भावना को प्रतिध्वनित करते हैं। प्रधानमंत्री ने भगवद्गीता का उद्धरण देते हुए भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाओं का स्मरण किया कि व्यक्ति को लाभ या हानि के विचारों से ऊपर उठना चाहिए और केवल कर्तव्य की भावना से कार्य करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय संस्कृति में, 'कर्तव्य' शब्द केवल दायित्व तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत के कार्रवाई पर आधारित दर्शन का सार है। प्रधानमंत्री ने इसे एक भव्य परिप्रेक्ष्य के रूप में वर्णित किया जो समूह को गले लगाने के लिए स्वयं से परे जाता है और जो कर्तव्य के सही अर्थ का प्रतिनिधित्व करता है। यह टिप्पणी करते हुए कि कर्तव्य केवल एक इमारत का नाम नहीं है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह करोड़ों भारतीय नागरिकों के सपनों को साकार करने के लिए पवित्र भूमि है। श्री मोदी ने कहा, "कर्तव्य आदि और भाग्य दोनों हैं, करुणा और परिश्रम से बंधे हैं, कर्तव्य कर्म का धागा है, यह सपनों का साथी है, संकल्प की आशा है और प्रयास का शिखर है।" उन्होंने कहा कि कर्तव्य वह इच्छा शक्ति है जो हर जीवन में एक दीपक जलाता है। उन्होंने यह रेखांकित किया कि कर्तव्य करोड़ों नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए नींव है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य मां भारती की जीवन ऊर्जा के वाहक हैं और 'नागरिक देवो भव' मंत्र का जाप है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण के साथ किया गया प्रत्येक कार्य कर्तव्य है।

श्री मोदी ने इस बात उल्लेख किया कि आजादी के बाद दशकों तक, भारत की प्रशासनिक मशीनरी ब्रिटिश औपनिवेशिक युग के दौरान निर्मित इमारतों से संचालित होती थी। प्रधानमंत्री ने इन पुराने प्रशासनिक भवनों में खराब काम करने की परिस्थितियों को स्वीकार किया, जिनमें पर्याप्त जगह, प्रकाश व्यवस्था और वायु संचार की कमी थी। उन्होंने कहा कि यह कल्पना करना मुश्किल है कि गृह मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के साथ एक इमारत से लगभग 100 वर्षों तक कैसे काम करता रहा है। यह बताते हुए कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय वर्तमान में पूरी दिल्ली में 50 विभिन्न स्थानों से काम कर रहे हैं, श्री मोदी ने कहा कि इनमें से कई मंत्रालय किराए के भवनों से काम कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अकेले किराये की लागत पर वार्षिक व्यय 1,500 करोड़ रुपये की राशि चौंका देने वाली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी राशि केवल बिखरे हुए सरकारी कार्यालयों के लिए किराए पर खर्च की जा रही है। एक और चुनौती पर ध्यान देते हुए उन्होंने इस विकेंद्रीकरण के कारण कर्मियों की लॉजिस्टिक आवाजाही के बारे में कहा कि अनुमानित 8,000 से 10,000 कर्मचारी मंत्रालयों के बीच प्रतिदिन यात्रा करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों वाहनों की आवाजाही होती है, अत्यधि धन व्यय होता है और यातायात की भीड़ बढ़ जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय की हानि का सीधा असर प्रशासनिक दक्षता पर पड़ता है।

इस बात पर बल देते हुए कि 21वीं सदी के भारत को 21वीं सदी की आधुनिक इमारतों की आवश्यकता है, श्री मोदी ने ऐसी संरचनाओं की आवश्यकता का उल्लेख किया जो प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और सुविधा के मामले में अनुकरणीय हों। उन्होंने कहा कि ऐसी इमारतों को कर्मचारियों के लिए एक आरामदायक वातावरण उपलब्ध किया जाना चाहिए, तेजी से निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए और सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। यह बताते हुए कि कर्तव्य पथ के आसपास समग्र दृष्टि के साथ कर्तव्य भवन जैसे बड़े पैमाने पर भवनों का निर्माण किया जा रहा है, प्रधानमंत्री ने कहा कि पहला कर्तव्य भवन पूरा हो चुका है, लेकिन कई अन्य कर्तव्य भवनों का निर्माण तेजी से प्रगति पर है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एक बार जब इन कार्यालयों को नए परिसरों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो कर्मचारियों को आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच के साथ-साथ बेहतर कार्य वातावरण से लाभ होगा, जो बदले में उनकी समग्र कार्य उत्पादकता को बढ़ाएगा। श्री मोदी ने कहा कि सरकार बिखरे हुए मंत्रालयों के कार्यालयों के किराए पर वर्तमान में खर्च किए जा रहे 1,500 करोड़ रुपये को भी बचाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भव्य कर्तव्य भवन और नए रक्षा परिसरों सहित अन्य प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, न केवल भारत की गति का प्रमाण हैं, बल्कि इसकी वैश्विक दृष्टि का प्रतिबिंब भी हैं।" उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को जो दृष्टिकोण पेश कर रहा है, उसे देश में भी अपनाया जा रहा है और यह इसके बुनियादी ढांचे के विकास से स्पष्ट है। मिशन लाइफ और 'एक पृथ्वी, एक सूर्य, एक ग्रिड' पहल जैसे भारत के वैश्विक योगदानों पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने पुष्टि की कि ये विचार मानवता के भविष्य की आशा रखते हैं। उन्होंने कहा कि कर्तव्य भवन जैसा आधुनिक बुनियादी ढांचा जन-समर्थक भावना और ग्रह-समर्थक संरचना का प्रतीक है। कर्तव्य भवन में छतों पर सौर पैनल लगाए जाने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को भी हरित भवनों के दृष्टिकोण के साथ भवन में एकीकृत किया गया है, जिसका अब पूरे भारत में विस्तार हो रहा है।

यह कहते हुए कि सरकार समग्र दृष्टिकोण के साथ राष्ट्र निर्माण में लगी हुई है, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश का कोई भी हिस्सा आज विकास की धारा से अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में नए संसद भवन का निर्माण हुआ है, देश भर में 30,000 से अधिक पंचायत भवन बनाए गए हैं। श्री मोदी ने कहा कि कर्तव्य भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ गरीबों के लिए चार करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय समर स्मारक और पुलिस स्मारक की स्थापना की गई है, जबकि देश भर में 300 से अधिक नए मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत मंडपम दिल्ली में स्थापित किया गया है, जबकि देश भर में 1,300 से अधिक अमृत भारत रेलवे स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यशोभूमि की भव्यता परिवर्तन के पैमाने को दर्शाती है, जैसा कि पिछले 11 वर्षों में लगभग 90 नए हवाई अड्डों के निर्माण में देखा गया है।

महात्मा गांधी के इस विश्वास का स्मरण करते हुए कि अधिकार और कर्तव्य आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं और कर्तव्यों की पूर्ति अधिकारों की नींव को मजबूत करती है, श्री मोदी ने कहा कि जब नागरिकों से कर्तव्यों की अपेक्षा की जाती है तो सरकार को भी अत्यंत गंभीरता के साथ अपने दायित्व भी निभाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब कोई सरकार ईमानदारी से अपने कर्तव्यों को पूरा करती है, तो यह उसके शासन में परिलक्षित होता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि पिछले दशक को देश में सुशासन के दशक के रूप में चिह्नित किया गया है। उन्होंने सुधारों को एक सुसंगत और समयबद्ध प्रक्रिया बताते हुए कहा कि सुशासन और विकास की धारा सुधारों के नदी तल से उपजी है। उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार प्रमुख सुधार किए हैं। श्री मोदी ने कहा, "भारत के सुधार न केवल सुसंगत हैं, बल्कि गतिशील और दूरदर्शी भी हैं।" उन्होंने सरकार-नागरिक संबंधों को मजबूत करने, जीवन की सुगमता बढ़ाने, वंचितों को प्राथमिकता देने, महिलाओं को सशक्त बनाने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश इन क्षेत्रों में लगातार नवाचार कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले 11 वर्षों में, भारत ने एक शासन मॉडल विकसित किया है जो पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित है।"

श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वह जिस भी देश का दौरा करते हैं, वहां जैम ट्रिनिटी- जन धन, आधार और मोबाइल पर विश्व स्तर पर व्यापक रूप से चर्चा और सराहना की जाती है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जेएएम ने भारत में सरकारी योजनाओं की डिलीवरी को पारदर्शी और लीकेज-मुक्त बना दिया है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह जानकर आश्चर्यचकित होते हैं कि राशन कार्ड, गैस सब्सिडी और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में, लगभग 10 करोड़ लाभार्थी ऐसे थे जिनके अस्तित्व का सत्यापन नहीं किया जा सकता था और जिनमें से कई का जन्म भी नहीं हुआ था। यह देखते हुए कि पिछली सरकारें इन फर्जी लाभार्थियों के नाम पर धन हस्तांतरित कर रही थीं, जिसके परिणामस्वरूप धन को अवैध खातों में स्थानांतरित किया जा रहा था, श्री मोदी ने पुष्टि की कि वर्तमान सरकार के अंतर्गत, सभी 10 करोड़ फर्जी नामों को लाभार्थी सूचियों से हटा दिया गया है। उन्होंने नवीनतम आंकड़े साझा किए जो दर्शाते हैं कि इस कार्रवाई ने राष्ट्र को 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक गलत हाथों में पड़ने से बचाया है और इस पर्याप्त राशि को अब विकास की पहल में लगाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों वास्तविक लाभार्थी संतुष्ट हैं और राष्ट्रीय संसाधनों की रक्षा की गई है।

इस बात पर जोर देते हुए कि भ्रष्टाचार और लीकेज से परे, पुराने नियम और विनियम लंबे समय से नागरिकों के लिए कठिनाई का स्रोत रहे हैं और सरकारी निर्णय लेने में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, श्री मोदी ने कहा कि इसका समाधान करने के लिए, 1,500 से अधिक अप्रचलित कानूनों- औपनिवेशिक युग के कई अवशेषों- को निरस्त कर दिया गया है, क्योंकि वे दशकों से शासन में बाधा डालते रहे। उन्होंने कहा कि अनुपालन बोझ ने भी महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश की थीं, यहां तक कि बुनियादी उपक्रमों के लिए, व्यक्तियों को पहले कई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता थी। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 40,000 से अधिक अनुपालनों को समाप्त किया गया है और यह युक्तिकरण स्थिर गति से जारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले विभागों और मंत्रालयों में अतिव्यापी जिम्मेदारियों के कारण देरी और अड़चनें आती थीं। कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए, कई विभागों को एकीकृत किया गया, दोहराव को समाप्त कर दिया गया और जहां आवश्यक हो, मंत्रालयों को या तो विलय कर दिया गया या नया बनाया गया। श्री मोदी ने जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय, सहकारी आंदोलन को सशक्त बनाने के लिए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है। उन्होंने पहली बार मत्स्य क्षेत्र को प्राथमिकता देने के लिए बनाए गए मत्स्य मंत्रालय और युवा सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय जैसे प्रमुख मंत्रालयों के गठन का हवाला दिया। उन्होंने पुष्टि की कि इन सुधारों ने शासन की दक्षता को बढ़ाया है और सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में तेजी आई है।

यह उल्लेख करते हुए कि सरकार की कार्य संस्कृति को उन्नत करने के प्रयास चल रहे हैं, प्रधानमंत्री ने मिशन कर्मयोगी और आई-जीओटी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी पहलों पर प्रकाश डाला, जो सरकारी कर्मचारियों को तकनीकी और पेशेवर प्रशिक्षण के साथ सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ई-ऑफिस, फाइल ट्रैकिंग और डिजिटल अनुमोदन जैसी प्रणालियां प्रशासनिक प्रक्रियाओं में क्रांति ला रही हैं, जिससे वे न केवल तेज हो रही हैं, बल्कि पूरी तरह से पता लगाने योग्य और जवाबदेह भी हैं।

यह कहते हुए कि एक नए भवन में जाने से उत्साह की एक नई भावना पैदा होती है और किसी की ऊर्जा में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, प्रधानमंत्री ने सभी उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे नए भवन में अपनी जिम्मेदारियों को उसी उत्साह और समर्पण के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को - चाहे वह किसी भी पद का हो - अपने कार्यकाल को वास्तव में यादगार बनाने का प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब कोई अंत में यहां से जाता है, तो उसे गर्व की भावना के साथ जाना चाहिए कि उसने राष्ट्र की सेवा में अपना सौ प्रतिशत दिया है।

फाइलों और दस्तावेज़ीकरण के प्रति दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि एक फाइल, एक शिकायत, या एक आवेदन नियमित लग सकता है, लेकिन किसी के लिए, कागज का वह टुकड़ा उनकी गहरी आशा का प्रतिनिधित्व कर सकता है। केवल एक फ़ाइल को अनगिनत व्यक्तियों के जीवन से महत्वपूर्ण रूप से जोड़ा जा सकता है। इस बिंदु को स्पष्ट करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि एक लाख नागरिकों से संबंधित एक फाइल में एक दिन की भी देरी होती है, तो इससे एक लाख मानव दिवस का नुकसान होता है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सुविधा या नियमित विचार से परे सेवा करने के अपार अवसर को पहचानते हुए इस मानसिकता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एक नया विचार पैदा करने से परिवर्तनकारी बदलाव की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने सभी लोक सेवकों का आह्वान किया कि वे कर्तव्य की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध रहें, उन्हें याद दिलाएं कि भारत के विकास के सपने जिम्मेदारी के गर्भ में पोषित होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि यह आलोचना का समय नहीं हो सकता है, लेकिन यह निश्चित रूप से आत्मनिरीक्षण का समय अवश्य है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ ही स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले कई राष्ट्र तेजी से आगे बढ़े हैं, जबकि विभिन्न ऐतिहासिक चुनौतियों के कारण भारत की प्रगति धीमी रही थी। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि अब यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि इन चुनौतियों को भविष्य की पीढ़ियों पर न थोपा जाए। प्रधानमंत्री ने पिछले प्रयासों को याद करते हुए कहा कि पुरानी इमारतों की दीवारों के भीतर, महत्वपूर्ण निर्णय और नीतियां बनाई गईं, जिसके कारण 25 करोड़ नागरिक गरीबी से बाहर आए। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए भवनों में बढ़ी हुई दक्षता के साथ, मिशन गरीबी को पूरी तरह से समाप्त करना और विकसित भारत के सपने को साकार करना है। श्री मोदी ने सभी हितधारकों से भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया, जिससे सभी को मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों की सफलता की कहानियों को लिखने में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उन्होंने राष्ट्रीय उत्पादकता को बढ़ाने की प्रतिबद्धता का आग्रह किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि जब पर्यटन पर चर्चा की जाती है, तो भारत एक वैश्विक गंतव्य बन जाता है, जब ब्रांडों का उल्लेख किया जाता है, तो दुनिया भारतीय उद्यमों की ओर अपनी निगाहें घुमाती है और जब शिक्षा की मांग की जाती है, तो दुनिया भर के विद्यार्थी भारत को चुनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की क्षमताओं को मजबूत करना एक साझा लक्ष्य और व्यक्तिगत मिशन बनना चाहिए।

यह बताते हुए कि जब सफल राष्ट्र आगे बढ़ते हैं, तो वे अपनी सकारात्मक विरासत को नहीं छोड़ते हैं बल्कि इसे संरक्षित करते हैं, श्री मोदी ने पुष्टि की कि भारत 'विकास और विरासत' के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। नए कर्तव्य भवनों के उद्घाटन के बाद, प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अब भारत की जीवित विरासत के हिस्से में बदल जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन प्रतिष्ठित इमारतों को 'युग युगीन भारत संग्रहालय' नाम के सार्वजनिक संग्रहालयों में परिवर्तित किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक भारत की समृद्ध सभ्यता की यात्रा को देख सके और अनुभव कर सके। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे ही लोग नए कर्तव्य भवन में प्रवेश करेंगे, वे अपने साथ इन स्थानों में सन्निहित प्रेरणा और विरासत लेकर जाएंगे। उन्होंने कर्तव्य भवन के उद्घाटन पर देशवासियों को हार्दिक बधाई दी।

इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री, सांसद और भारत सरकार के अधिकारी भी उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज दिल्ली में कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया।

यह प्रधानमंत्री के आधुनिक, कुशल और नागरिक केंद्रित शासन के दृष्टिकोण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता में एक प्रमुख उपलब्धि है। कर्तव्य भवन-03, जिसका उद्घाटन किया जा रहा है, सेंट्रल विस्टा के व्यापक रूपांतरण का हिस्सा है। यह कई आगामी आम केंद्रीय सचिवालय भवनों में से पहला है जिसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और चुस्त शासन को सक्षम करना है।

यह परियोजना सरकार के व्यापक प्रशासनिक सुधार एजेंडे का प्रतीक है। मंत्रालयों आस-पास स्थापित करने और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे को अपनाने से, सामान्य केंद्रीय सचिवालय अंतर-मंत्रालयी समन्वय में सुधार करेगा, नीति निष्पादन में तेजी लाएगा और एक उत्तरदायी प्रशासनिक इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा।

वर्तमान में, कई प्रमुख मंत्रालय शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी इमारतों में कार्य करते हैं, जो 1950 और 1970 के दशक के बीच निर्मित थे, जो अब संरचनात्मक रूप से पुराने और अक्षम हैं। नई सुविधाएं मरम्मत और रखरखाव लागत को कम करेंगी, उत्पादकता को बढ़ावा देंगी, कर्मचारी कल्याण में सुधार करेंगी और समग्र सेवा वितरण में वृद्धि करेंगी।

कर्तव्य भवन - 03 को वर्तमान में दिल्ली में फैले विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर दक्षता, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक अत्याधुनिक कार्यालय परिसर होगा जो दो भूतल और सात मंज़िला (ग्राउंड + 6 मंजिलों) में लगभग 1.5 लाख वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला होगा। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास, एमएसएमई, डीओपीटी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालयों / विभागों और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय होंगे।

नई इमारत आईटी से सुसज्जित और सुरक्षित कार्यक्षेत्रों, आईडी कार्ड-आधारित अभिगम नियंत्रण, एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और एक केंद्रीकृत कमांड प्रणाली की विशेषता वाले आधुनिक शासन बुनियादी ढांचे का उदाहरण देगी। यह स्थिरता में भी नेतृत्व करेगा, डबल-घुटा हुआ अग्रभाग, रूफटॉप सौर, सौर जल ताप, उन्नत एचवीएसी (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) सिस्टम और वर्षा जल संचयन के साथ जीआरआईएचए -4 रेटिंग को लक्षित करेगा। यह सुविधा शून्य-निर्वहन अपशिष्ट प्रबंधन, इन-हाउस ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशनों और पुनर्नवीनीकरण निर्माण सामग्री के व्यापक उपयोग के माध्यम से पर्यावरण-चेतना को बढ़ावा देगी।

जीरो-डिस्चार्ज कैंपस के रूप में, कर्तव्य भवन पानी की जरूरतों के एक बड़े हिस्से को पूरा करने के लिए अपशिष्ट जल का उपचार और पुन: उपयोग करता है। इमारत चिनाई और फ़र्श ब्लॉकों में पुनर्नवीनीकरण निर्माण और विध्वंस कचरे का उपयोग करती है, टॉपसॉइल उपयोग और संरचनात्मक भार को कम करने के लिए हल्के सूखे विभाजन और एक इन-हाउस ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली की सुविधा है।

इमारत को 30 प्रतिशत कम ऊर्जा का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इमारत को ठंडा रखने और बाहरी शोर को कम करने के लिए इसमें विशेष कांच की खिड़कियां हैं। ऊर्जा की बचत करने वाली एलईडी लाइट्स, सेंसर जो जरूरत नहीं होने पर रोशनी बंद कर देते हैं, स्मार्ट लिफ्ट जो बिजली बचाते हैं, और बिजली के उपयोग को प्रबंधित करने के लिए एक उन्नत प्रणाली सभी ऊर्जा बचाने में सहायता करेंगे। कर्तव्य भवन-03 की छत पर लगे सौर पैनल से हर साल 5.34 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली का उत्पादन होगा। सौर वॉटर हीटर दैनिक गर्म पानी की जरूरत के एक चौथाई से अधिक आवश्यकता को पूरा करते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी दिए गए हैं।

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This year's budget will give India's Reform Express new energy and new momentum: PM Modi
February 01, 2026
This budget is the foundation for our journey towards a Viksit Bharat by 2047: PM
This year's budget will give India's Reform Express new energy and new momentum: PM
India is not content with simply being the fastest-growing economy; India wants to become the world's third-largest economy: PM
This year's budget presents an ambitious roadmap to give new momentum to the Make in India and Aatmanirbhar Bharat initiatives: PM
The support that MSMEs have received in this year's budget will give them new strength to grow from local to global: PM
This year's budget is for Yuva Shakti, the provisions made in the budget will nurture leaders, innovators and creators across various sectors: PM
This year's budget prioritises a modern ecosystem of Self-Help Groups created and run by women, the aim is to ensure that prosperity reaches every household: PM
This budget is ambitious and addresses the country's aspirations: PM

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार।

आज का बजट ऐतिहासिक है, इसमें देश की नारीशक्ति का सशक्त प्रतिबिंब झलकता है। महिला वित्त मंत्री के रूप में निर्मला जी ने लगातार नवीं बार देश का बजट प्रस्तुत करके नया रिकॉर्ड बनाया है। ये बजट अपार अवसरों का राजमार्ग है। ये बजट वर्तमान के सपनों को साकार करता है, और भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव को सशक्त करता है। ये बजट 2047 के विकसित भारत की हमारी ऊंची उड़ान का मजबूत आधार है।

साथियों,

आज भारत जिस रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, इस बजट से उसे नई ऊर्जा, नई गति मिलेगी। जो Path-Breaking Reforms किए गए हैं, वो Aspiration से भरे हुए भारत के साहसिक-टैलेंटेड युवाओं को उड़ने के लिए खुला आसमान देते हैं। ये बजट ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेंस और ह्यूमन सेंट्रिक अर्थ-रचना के विज़न को साकार करता है। ये एक ऐसा यूनीक बजट है, जिसमें, फिस्कल डेफिसिट कम करने, इंफ्लेशन कंट्रोल करने पर फोकस है और इसके साथ ही, बजट में हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का भी समन्वय है।

साथियों,

ये बजट भारत की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से सशक्त करता है। भारत के 140 करोड़ नागरिक, Fastest Growing Economy बनकर ही संतुष्ठ नहीं है। हम जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं। ये करोड़ों देशवासियों का संकल्प है। दुनिया के एक ‘ट्रस्टेड डेमोक्रेटिक पार्टनर’ और ‘ट्रस्टेड क्वालिटी सप्लायर’ के रूप में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हाल में जो बड़ी-बडी ट्रेड डील्स भारत ने की हैं, मदर ऑल डील्स, उसका Maximum Benefit भारत के युवाओं को मिले, भारत के लघु और मध्यम उद्योग वालों को मिले, इस दिशा में बजट में बड़े-बड़े कदम उठाए गए हैं।

साथियों,

इस बजट में Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई रफ़्तार के लिए महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। इस बजट में नई उभरती इंडस्ट्रीज़, यानी sunrise sectors को जिस मजबूती के साथ समर्थन दिया गया है, वो अभूतपूर्व है। बायोफार्मा शक्ति मिशन, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, रेयर अर्थ कॉरिडोर का निर्माण, क्रिटिक्ल मिनरल्स पर बल, टेक्सटाइल सेक्टर में नई स्कीम, हाई टेक टूल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, चैंपियन MSMEs तैयार करना, ये फ्यूचरिस्टिक हैं, देश की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं का ध्यान रखती हैं। MSMEs को, हमारे लघु और कुटीर उद्योगों जो समर्थन इस बजट में मिला है, वह उन्हें लोकल से ग्लोबल बनने की नई ताकत देगा।

साथियों,

बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं:

· डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

· देशभर में वाटरवेज़ का विस्तार

· हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

· टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर विशेष ध्यान और शहरों को मज़बूत आर्थिक आधार देने के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड्स को बढ़ावा, ये सारे कदम, विकसित भारत की यात्रा की गति को और तेज करेंगे।

साथियों,

किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी उसके नागरिक होते हैं। बीते वर्षों में हमारी सरकार ने देश के नागरिकों के सामर्थ्य को बढ़ाने पर अभूतपूर्व निवेश किया है। हमारा प्रयास Skill, Scale और Sustainability को निरंतर बल देने का रहा है। जैसा कि आज पार्लियामेंट में निर्मला जी ने कहा है, यह युवा शक्ति बजट है। उसमें युवा की सोच भी है, युवा के सपने भी हैं, युवा का संकल्प भी है और साथ-साथ युवा की गति भी है। बजट में जो प्रावधान किए गए हैं, उससे अलग-अलग सेक्टर्स में लीडर्स, इनोवेटर्स और क्रिएटर्स तैयार होंगे। मेडिकल हब्स के निर्माण से, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के माध्यम से, ऑरेंज इकोनॉमी यानी ऑडियो विजुअल्स, गेमिंग को बढ़ावा देकर, पर्यटन को प्रोत्साहन देकर, और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से, युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे। भारत को दुनिया का, डेटा सेंटर हब बनाने के लिए टैक्स में बड़ी छूट की घोषणा भी की गई है। मैं भारत के युवाओं को विशेष तौर पर इस बजट की बहुत-बहुत बधाई देता हूं, क्योंकि इससे Employment Generation को बड़ा बूस्ट मिलेगा। मुझे बहुत खुशी है कि इस बजट में टूरिज्म और विशेषकर नॉर्थ ईस्ट में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं। भारत के अलग-अलग राज्यों को ताकतवर बनाकर संतुलित विकास की नींव भी इस बजट में मजबूत की गई है।

साथियों,

हमारे देश में 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से जुड़ी हैं, और बड़ा सफल अभियान रहा है। महिलाओं द्वारा निर्मित, महिलाओं द्वारा संचालित, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स का आधुनिक इकोसिस्टम बने, बजट में इसे प्राथमिकता दी गई है। कोशिश यही है कि हर घर लक्ष्मी जी पधारें। हर जिले में छात्राओं के लिए नए हॉस्टल बनाने का अभियान भी शिक्षा को सुलभ बनाएगा।

साथियों,

भारत की कृषि, डेयरी सेक्टर, फिशरीज, इन्हें हमारी सरकार ने हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस बजट में भी, नारियल, काजू, कोको और चंदन की पैदावार से जुड़े किसानों के लिए अनेक अहम कदम उठाए गए हैं। भारत विस्तार AI, इस टूल से किसानों को उनकी भाषा में जानकारी मिलने से उन्हें बहुत मदद मिलेगी। फिशरीज और पशुपालन में उद्यमिता, उसको बढ़ावा देने से गांव में ही रोजगार और स्वरोजगार के और ज्यादा अवसर बनेंगे।

साथियों,

ये बजट एंबीशियस भी है और ये बजट देश की एस्पिरेशन को भी एड्रेस करता है। मैं एक बार फिर निर्मला जी और उनकी टीम को इस फ्यूचरिस्टिक बजट के लिए, संवेदनशील बजट के लिए, गांव गरीब किसान का कल्याण करने वाले बजट के लिए, बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।