नीति आयोग जिले और क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए राज्यों के साथ काम करेगा 
नीति आयोग लर्निंग इको-सिस्टम को मजबूती प्रदान करने के लिए शीर्ष संस्थानों का सहयोग लेगा
नीति आयोग की बैठकमुख्यमंत्रियों ने राज्य जीएसटी अधिनियमों के अधिनियमन में तेजी लाने का आग्रह किया

नीति आयोग की गर्वनिंग काउंसिल की तीसरी बैठक में आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने उपस्थित सदस्यों को नीति आयोग द्वारा अर्थव्यवस्था को बदलने और शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे आदि क्षेत्रों में राज्यों के साथसहयोग के लिए किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने मुख्यमंत्रियों के उप-समूह द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं, स्वच्छ भारत मिशन और कौशल विकास के सुव्यवस्थीकरण के लिए किए जा रहे काम पर भी बात की।उन्होंने कृषि, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल भुगतान, विनिवेश, तटीय क्षेत्र एवं द्वीप विकास आदि क्षेत्रों में की गई पहलों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग जिलों और विशेष ध्यान दिए जानेवाले क्षेत्रों में राज्यों के साथ मिलकर, मूलभूत सेवाओं और आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए काम करेगा। उन्होंने सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के ढांचे के तहत भारत को बदलने के लिए राज्यों के साथ भागीदारी की सुविधा केलिए अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने राज्यों से अनुरोध किया कि वे दिल्ली में नीति आयोग को अपने आउटपोस्ट के रूप में देखें।

नीति आयोग एक ऐसा मंच तैयार कर रहा है, जो सीखने के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने वाला हो। नीति आयोग ने बड़ी संख्या में शीर्ष रैंकिंग वाले संस्थानों के साथ ज्ञान साझाकरने और वैचारिकता के लिए भागीदारी की है ताकि प्रमाणिक नीति तैयार की जा सके।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा. अरविंद पनगढ़िया ने एक नया दृष्टिकोण निर्धारित किया है, जिसमें 15 वर्ष की लंबी अवधि का एक विजन, सात साल की रणनीति और एक तीन साल का कार्य एजेंडा शामिल है। उन्होंने मसौदाकार्य एजेंडा की रूपरेखा भी पेश की, जिसे बैठक में वितरित किया गया। इसे राज्यों से मिले इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि 300 से अधिक विशिष्ट कार्य बिंदुओं की पहचान की गई है, जो पूरे क्षेत्र कोकवर करते हैं। कार्य एजेंडा की अवधि संयोग से 14वें वित्त आयोग की दी गई समयसीमा से मेल खाती है। इसने केंद्र और राज्य, दोनों के वित्तपोषण अनुमानों को स्थिरता प्रदान की है। उन्होंने इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने मेंराज्यों के इनपुट और सहयोग की मांग की।

राजस्व सचिव श्री हंसमुख अधिया ने जीएसटी पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने इस प्रणाली के लाभों और आगे के रास्तों की जानकारी दी। उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से राज्य जीएसटी अधिनियम को अधिनियमित करने कीप्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया। 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आय दोगुनी करने पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने सिंचाई, प्रौद्योगिकी उत्पादन एवं प्रसार, नीति एवं बाजार सुधार, ई-एनएएम, पशु उत्पादकता आदि क्षेत्रों कोछुआ।

नीति आयोग के सदस्य कृषि श्री रमेश चंद ने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए आवश्यक कदमों को विस्तार से बताया और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के विभिन्न तत्वों, जैसे त्वरित सिंचाई लांभ कार्यक्रम, 'हर खेतको पानी' और 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की चर्चा की।

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प्रधानमंत्री ने म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ वार्ता की
June 01, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ सार्थक वार्ता की।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस बात पर सम्मानित महसूस करता है कि राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले विदेश दौरे के लिए भारत को चुना। उन्होंने इस बात पर भी खुशी व्यक्त की कि राष्ट्रपति ने बोधगया में भगवान बुद्ध का आशीर्वाद लेकर भारत में अपने कार्यक्रम की शुरुआत की।

 

वार्ता के दौरान, दोनों राजनेताओं ने भारत-म्यांमार संबंधों की विस्तृत समीक्षा की और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

चर्चाओं में व्यापार, दुर्लभ पृथ्वी धातुओं, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन-संपर्क, धरोहर संरक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग को गहरा करने के अवसर शामिल थे। दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों में निकटता से काम करने पर भी सहमति व्यक्त की।

 

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और भारत-प्रशांत नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने म्यांमार के साथ भारत के संबंधों के महत्त्व की पुन: पुष्टि की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

 

“म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ सार्थक बैठक हुई। भारत में हम सम्मानित महसूस करते हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति पद के अपने पहले विदेशी दौरे के लिए भारत को चुना। उतनी ही खुशी की बात यह भी है कि उन्होंने यह यात्रा बोधगया में भगवान बुद्ध का आशीर्वाद लेकर शुरू की। हमने भारत-म्यांमार संबंधों की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की। म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और भारत-प्रशांत नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।”

 

“हमारी बातचीत में व्यापार, दुर्लभ पृथ्वी धातुओं, स्वास्थ्य देखभाल, परिवहन-संपर्क, धरोहर पुनर्स्थापना और क्षमता निर्माण में सहयोग को गहरा करने के तरीके शामिल थे। हमने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी निकटता से काम करने पर सहमति व्यक्त की।”