भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना भारत के लिए गर्व की बात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
भारत और अफ्रीका के बीच आपसी सम्मान, विश्वास और एकजुटता पर आधारित ऐतिहासिक संबंध है: प्रधानमंत्री
भारत द्वारा लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से अफ्रीका में रोजगार सृजन को काफ़ी बल मिला है: प्रधानमंत्री
भारत और अफ्रीका के बीच संबंधों को आगे और मजबूत करने में आईएएफएस-III एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है: प्रधानमंत्री
भारत-अफ्रीका सहयोग से संबंधित विषयों पर सीबीएसई द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में 16,000 से अधिक स्कूल भाग लेंगे

भारत 26-29 अक्तूबर के मध्य तृतीय भारत अफ्रीकी शिखर सम्मेलन 2015 का आयोजन कर गर्वित/ गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इस बार आयोजन का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और हमने सभी 54 अफ्रीकी देशों एंव अफ्रीकी संघों के नेताओं को आमंत्रित किया है।

यह सम्मेलन अफ्रीका से बाहर होने वाले अफ्रीकी देशों के सबसे बड़े समारोहों में से एक होने जा रहा है, जो सुनहरे भविष्य के अन्वेषण में गहनता से सम्बद्ध होने की भारत और अफ्रीका की अभिलाषा को दर्शाता है।

भारत और अफ्रीका के मध्य पारस्परिक सम्मान, भरोसे एवं एकजुटता पर आधारित ऐतिहासिक नाता है। हाल ही में हमारे संबंधों ने प्रगति की है एवं यह पारस्परिक हित की भागीदारी के तौर पर विकसित हुए हैं।

भारत अफ्रीका में बड़ा निवेशक है एवं, क़रीब 30 बिलियन डॉलर के भारतीय निवेश ने अफ्रीका में नौकरियों के लिए महती योगदान दिया है।

मानसिक मिलाप एवं साथ मिल कर काम करने से भारत और अफ्रीका के संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में तीसरा भारत-अफ्रीकी शिखर सम्मेलन एक युगांतरकारी घटना होगी।

भारत अफ्रीकी शिखर सम्मेलन के दौरान बहुत से अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। भारत और अफ्रीका के वाणिज्य मंत्री, व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ मिल कर, 23 अक्तूबर को मुलाकात करेंगे।

अग्रिम भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग संघों की ओर से 27 एवं 29 अक्तूबर को सम्मेलन स्थल पर एक व्यापार प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा। भारत एवं अफ्रीकी सहयोग की विषय-वस्तु पर सीबीएसई की ओर से आयोजित होने वाली अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में 16000 से अधिक विद्यालय भाग ले रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप में विविधता की भूमिका को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 15, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति के सोचने का तरीका अलग होता है तथा एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिस प्रकार जल के प्रत्येक स्रोत का स्वाद अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विविध विचारों और क्षमताओं के मिलन से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जो इस प्रकार है:

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।

जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”

यह सुभाषित यह संदेश देता है कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति की सोचने की शैली अलग होती है तथा उसकी एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। जिस प्रकार एक स्रोत से दूसरे स्रोत के जल का स्वाद भिन्न होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। इन भिन्न विचारों और क्षमताओं के मेल से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।

जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”