किगाली समझौते से हमारे ग्रह पर एक स्थायी प्रभाव पड़ेगा: प्रधानमंत्री मोदी
किगाली समझौता सदी के अंत तक वैश्विक तापमान तो 0.5 डिग्री तक कम करने का नेतृत्व करेगा, यह पेरिस हमारे द्वारा सेट किए गए लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा: प्रधानमंत्री मोदी
किगाली समझौता ऐसी तकनीकी जो कम कार्बन फूटप्रिंट छोडे, के विकास और उस तक पहुंच बनाने के लिए भारत को एक तंत्र प्रदान करेगा: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किगली, रवांडा में भारत सहित 197 देशों द्वारा हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत किया है। इससे हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) जलवायु-परिवर्तन को रोकने का लक्ष्‍य प्राप्‍त हो सकेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा है- ‘मॉन्‍ट्रियल प्रोटोकॉल का किगली समझौता अपनी परिणति पर पहुंचना एक ऐतिहासिक अवसर है इससे वायुमंडल पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।’

इस समझौते के शताब्‍दी के अंत तक विश्‍व के तापमान में 0.5 डिग्री तक कमी आएगी और हम पैरिस में तय किए गए लक्ष्‍यों को प्राप्‍त कर सकेगें।

भारत के साथ-साथ अन्‍य देशों द्वारा दिखाए गए रूझान और सहयोग इस उचित, साम्‍य तथा महत्‍वकांक्षी एचएफसी समझौते को संपन्‍न करा पाया है। इससे भारत को न्‍यून कार्बन उर्त्‍सजन की प्रविधि एवं प्रौद्योगिकियां विकसित करने की मैकेनिज्‍म उपलब्‍ध होगी।

‘मैं सभी देशों को इस नाजुक मुद्दे पर एक साथ आने पर बधाई देता हूं, जो हरी-भरी पृथ्‍वी के सृजन में मददगार होगा।’

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।