ब्रिक्स ने सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया, अनिश्चितता की ओर अग्रसर विश्व में स्थिरता लाने और विकास में इसका योगदान: पीएम मोदी 
भारत गरीबी उन्मूलन, हेल्थ केयर, खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मिशन मोड में काम कर रहा है: पीएम मोदी 
सस्ती, विश्वसनीय और सभी के लिए ऊर्जा हमारे देशों के विकास के लिए महत्वपूर्ण: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स ने सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया है और इसने अनिश्चितता की ओर अग्रसर विश्व में स्थिरता लाने और विकास में योगदान दिया है। उन्होंने कृषि, ऊर्जा, खेल, पर्यावरण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत गरीबी उन्मूलन, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल (हेल्थ केयर), खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, उर्जा और सभी के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मिशन मोड में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की मदद से महिलाओं को देश के विकास की मुख्यधारा में लाने में मदद मिली है।

प्रधानमंत्री ने विकासशील देशों की स्वायत्त एवं कॉर्पोरेट संस्थाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी को जल्द शुरू करने की बात कही। उन्होंने कहा, “हमारे केंद्रीय बैंकों को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए और आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था और आईएमएफ के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।”

नवीकरणीय ऊर्जा के महत्त्व पर बल देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सस्ती, विश्वसनीय और सभी के लिए ऊर्जा हमारे देशों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।” उन्होंने ब्रिक्स देशों से अंतर्राष्ट्रीय सोलर गठबंधन पर मिलकर काम करने का आग्रह किया।

युवाओं की क्षमताओं के समुचित उपयोग पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमें अपने युवाओं को हमारी संयुक्त पहल की मुख्यधारा में लाने, कौशल विकास में सहयोग बढ़ाने और सर्वोत्तम कार्यों का आदान-प्रदान करने की जरूरत है।”

गोवा में 8वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने स्मार्ट शहरों, शहरीकरण और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया था।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर मजबूत ब्रिक्स भागीदारी से विकास को बढ़ावा मिलेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी और एसडीजी को समर्थन मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कौशल, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं, विनिर्माण और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में ब्रिक्स और अफ्रीकी देशों के बीच क्षमता निर्माण के लिए सहयोग का भी स्वागत किया। 

प्रधानमंत्री की टिप्पणी निम्नलिखित है:

महामहिम

राष्ट्रपति शी जिनपिंग

राष्ट्रपति जैकब जूमा

राष्ट्रपति माइकल टेमर

राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन 

मैं राष्ट्रपति शी का जोरदार मेजबानी और इस शिखर सम्मेलन के शानदार आयोजन के लिए शुक्रिया अदा कहना चाहता हूं। हमारी पिछले सत्रों में बातचीत सार्थक रही थी, जिसने हमारी परस्पर समझ और दृष्टिकोण को मजबूत किया है। अपने अस्तित्व में आने के एक दशक बाद ब्रिक्स ने सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा विकसित किया है। हम अनिश्चितता की दिशा में इस बहती दुनिया में स्थिरता और विकास को लेकर योगदान करते आए हैं। व्यापार और अर्थव्यवस्था हमारे सहयोग की नींव रही है, हालांकि आज हमारे प्रयासों के चलते प्रौद्योगिकी, परंपरा, संस्कृति, कृषि, पर्यावरण, ऊर्जा, खेल और आईसीटी जैसे विविध क्षेत्र भी अछूते नहीं रहे हैं। न्यू डेवेलपमेंट बैंक ने ब्रिक्स देशों में अवसंरचना और टिकाऊ विकास के लिए संसाधनों को जुटाने की खातिर ऋण मुहैया कराना शुरू कर दिया है। इसी दरम्यान हमारे केंद्रीय बैंकों ने पूरी तरह से परिचालन के लिए आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था को लेकर कुछ कदम उठाए हैं। ये प्रगति के लिए मील के पत्थर हैं। हमें आगे की तरफ देखना और बढ़ना होगा, इसके लिए यह महत्वपूर्ण है कि हमारे लोग हमारी यात्रा के केंद्र में बने रहें। मुझे बेहद खुशी हो रही है कि चीन ने आदान-प्रदान के जरिये लोगों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए पिछले साल से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस तरह का अंतर-दृष्टिकोण हमारे संबंधों को मजबूत करेगा तथा हमारी समझ को और बढ़ाएगा।

महामहिम, 

परिवर्तन की भारत की अपनी दूरगामी यात्रा हमारे लोगों को गौरव का अनुभव कराती है। हम गरीबी मिटाने, स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने, कौशल विकास, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता, ऊर्जा, शिक्षा और नवोन्मेष की दिशा में मिशन मोड में काम कर रहे हैं। हम स्वच्छ गंगा, अक्षय ऊर्जा, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सीटी, सभी के लिए आवास और कौशल भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम और स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों के जरिये समावेशी विकास को लेकर आधार तैयार कर रहे हैं। हम अपने 800 मिलियन युवाओं की ऊर्जा का भी सदुपयोग कर रहे हैं। हमारा महिला सशक्तिकरण का कार्यक्रम बहु-उत्पादकता है जिससे राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा में महिलाएं भी आ रही हैं। हमने कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ भी कदम उठाए हैं। हमारे इन अनुभवों का ब्रिक्स के सदस्य देश आगे बढ़ते हुए साझेदारी के साथ लाभ उठा सकते हैं जिसके परिणाम उत्साहजनक होंगे। परस्पर सहयोग के लिए दिमाग में कुछ विचार आए हैं, जिसे मैं यहां साझा कर रहा हूं। पहला, पिछले साल हमने एक ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी बनाने की अपनी कोशिशों पर चर्चा की थी। मेरा आग्रह है कि इसे तैयार करने के लिए इसकी रूपरेख को जल्दी से जल्दी अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। दूसरा, हमारे केंद्रीय बैंकों को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए और प्रत्यावर्तनीय रिजर्व व्यवस्था और आईएमएफ के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए। तीसरा, हमारे राष्ट्रों के विकास के लिए ऊर्जा की खातिर किफायती, विश्वसनीय और स्थायी पहुंच महत्वपूर्ण है। जलवायु का विकास हमें सभी उपलब्ध संसाधन धाराओं का उपयोग करने के लिए कहता है। नवीकरणीय ऊर्जा विशेष रूप से कई मामलों में अहम साबित होगी। इस बात को स्वीकार करते हुए भारत ने फ्रांस के साथ नवंबर 2015 में एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पहल - अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का शुभारंभ किया है। यह बढ़ते सौर ऊर्जा उपयोग के माध्यम से आपसी लाभ के लिए 121 देशों के गठबंधन को तैयार करेगा। हमारे पांच देशों में अक्षय और सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पूरक कौशल और शक्तियां हैं। इस सहयोग के समर्थन के लिए एनडीबी, आईएसए के साथ प्रभावी संबंध भी स्थापित कर सकता है। चौथा, हम बड़े युवा आबादी वाले देश हैं, जहां तक संभव हो हमें अपने युवा प्रयासों को मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। कौशल विकास में सहयोग को बढ़ावा और सर्वोत्तम अभ्यासों का आदान-प्रदान एक मूल्यवान साधन होगा। पांचवां, गोवा में शिखर सम्मेलन के दौरान पिछले साल हमने स्मार्ट सीटी, शहरीकरण और आपदा प्रबंधन पर विचार विमर्श किया था, जो हमारे शहरों के बीच सहयोग के संदर्भ में था। हमें इस रास्ते पर और तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है। छठवां, प्रौद्योगिकी और नवाचार, वैश्विक विकास और परिवर्तन की अगली पीढ़ी की नींव हैं। भारत ने यह भी पाया है कि गरीबी और भ्रष्टाचार से लड़ने में प्रौद्योगिकी और डिजिटल संसाधन शक्तिशाली उपकरण साबित हुए हैं। नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर एक मजबूत ब्रिक्स भागीदारी, विकास को बढ़ावा देने, पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सतत विकास लक्ष्यों का समर्थन करने में मददगार साबित हो सकती है। मैं ब्रिक्स फ्रेमवर्क के तहत एक सहयोगी पायलट परियोजना पर विचार करने का सुझाव दूंगा, जिसमें निजी उद्यमिता भी शामिल है। और अंत में, भारत को कौशल विकास, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं, विनिर्माण और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में ब्रिक्स और अफ्रीकी देशों के बीच अधिक केंद्रित क्षमता निर्माण की दिशा में काम करने में खुशी होगी। 

महामहिम, 

पिछले दशक में, हमारे देशों के दो पीढ़ियों के नेताओं ने ब्रिक्स को स्थापित करने में योगदान किया है। इस दौरान हमने विश्वसनीयता हासिल की और प्रभावशाली विकास को प्रेरित किया। अब हमारे लिए अगला दशक अहम होगा। ऐसे वातावरण में जहां हम स्थिरता, सतत विकास और समृद्धि की तलाश करते हैं। इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स नेतृत्व महत्वपूर्ण साबित होगा। अगर हम ब्रिक्स के रूप में इन क्षेत्रों में एजेंडा सेट कर सकते हैं, दुनिया इसको स्वर्णिम दशक कहेगी। इस तरह ऊर्जा का उभरता हुआ बाजार कल हमारा होगा। मैं इस संबंध में हम अपना कुछ विचार साझा करेंगे। मुझे विश्वास है कि यह ब्रिक्स को साझेदारी की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हमारी साझा यात्रा में मदद करेगा। शुक्रिया।

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गुजरात के मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, राज्य के उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष भाई संघवी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी अश्विनी वैष्णव जी, राज्य के मंत्री भाई अर्जुन मोढवाडिया जी, केन्स और अल्फा ओमेगा सेमीकंडक्टर्स के प्रतिनिधिगण अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

पिछले महीने के अंतिम दिन भी मैं साणंद में था, और इस महीने के अंतिम दिन भी मैं साणंद में हूं। 28 फरवरी को माइक्रोन के प्लांट में प्रोडक्शन की शुरुआत हुई, और आज 31 मार्च को, केन्स टेक्नॉलॉजी के सेमीकंडक्टर प्लांट में प्रोडक्शन शुरु हो रहा है। ये मात्र संयोग नहीं है, ये इस बात का प्रमाण है कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, किस पेस से, किस गति से, किस स्पीड के साथ डेवलप हो रहा है। मैं केन्स टेक्नॉलॉजी की पूरी लीडरशिप को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। रमेश रघु congratulations. गुजरात सरकार को, इस प्लांट में काम कर रहे और सभी साथियों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज सुबह मैं एक डिवाइन वाले कार्यक्रम में था और अभी मैं डिजिटल वाले कार्यक्रम में हूं।

साथियों,

मुझे इस बात की भी बेहद खुशी है कि भारत की कंपनी ने semiconductor चिप्स बनाने में रुचि दिखाई, और नतीजा हम सबके सामने है। हमारे भारत की अपनी कंपनी केन्स अब ग्लोबल semiconductor सप्लाई चेन का एक मजबूत हिस्सा बन गई है। ये एक बहुत शानदार शुरुआत है, एक गर्व का पल है, हर भारतवासी के लिए गर्व का पल है। आने वाले दिनों में भारत की बहुत सारी कंपनियां, ग्लोबल collaboration के माध्यम से, दुनिया को एक resilient semiconductor सप्लाइ चेन देने जा रही है।

साथियों,

आज का ये दिन, मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, इस मंत्र को सही मायने में चरितार्थ करता है। इस प्रोजेक्ट में प्रोडक्शन शुरु होने से, भारत ग्लोबल मार्केट में, एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लायर के रूप में अपना रोल और सशक्त कर रहा है। आज एक प्रकार से साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच नया ब्रिज सा बन गया है। कैलिफोर्निया की कंपनी के लिए, साणंद का ये प्लांट Intelligent Power Modules दे रहा है। मुझे बताया गया है कि यहां बनने वाले प्रोडक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा, पहले ही एक्सपोर्ट के लिए बुक हो चुका है। साणंद में बनने वाले modules अमेरिका की कंपनियों तक पहुंचेंगे, और वहां से पूरी दुनिया को पावर देंगे। मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड के मंत्र की सफलता की गूंज दुनिया के कोने-कोने में पहुंचेगी।

साथियों,

यहां बनने वाले इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स से, भारत और विश्व के इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम को, हैवी इंडस्ट्री को बहुत बल मिलेगा। यही ग्लोबल पार्टनरशिप ही दुनिया के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है।

साथियों,

21वीं सदी का ये दशक आरंभ से दुनिया के लिए अनेक चुनौतियां लेकर आया है। संकट पेंडमिक का रहा है, conflicts का रहा है। इसमें भी सबसे बड़ी भुक्तभोगी, ग्लोबल सप्लाई चेन रही है। चाहे चिप्स हो, रेयर अर्थ मिनरल्स हों, एनर्जी हो, ये conflicts की वजह से बहुत प्रभावित हुए हैं। ये मानवता के तेज विकास से जुड़ी चीज़ें हैं, इनकी सप्लाई चेन में, इनके फ्लो में ब्रेक लगने से, पूरी ह्यूमैनिटी का विकास प्रभावित होता है। इसलिए भारत जैसे डेमोक्रेटिक देश का इस दिशा में आगे बढ़ना, पूरे विश्व के विकास के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

हमने कोरोना की आपदा के समय ही तय कर लिया था, कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर का नया ग्लोबल हब बनेगा, इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा। और सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता, सिर्फ एक चिप तक सीमित नहीं है। इसका मतलब है, AI में, इलेक्ट्रिक व्हीकल में, क्लीन एनर्जी में, डिफेंस में, इलेक्ट्रॉनिक्स में, ऐसे अनेक सेक्टर में भी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। इसलिए, साल 2021 में भारत ने इंडिया-सेमीकंडक्टर मिशन शुरु किया। यह mission सिर्फ एक industrial policy नहीं है, यह भारत के आत्मविश्वास का ऐलान है। और इसका इंपैक्ट सबके सामने है। इस मिशन के तहत, देश के 6 राज्यों में एक लाख साठ हज़ार करोड़ रुपए के 10 प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है। केन्स और माइक्रोन के प्रोजेक्ट्स भी इसी का हिस्सा हैं। सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन और मैन्यूफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता के लिए भारत ने ध्रुव Sixty Four जैसा, आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया है। इससे 5G इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, industrial automation, ऐसे अनेक सेक्टर्स के लिए हमें एक अपना सुरक्षित platform मिला है।

साथियों,

सेमीकंडक्टर मिशन की अब तक की सफलता के बाद, अब भारत ने इसके अगले फेज की तरफ कदम बढ़ाया है। इसी सोच के साथ, इस वर्ष के बजट में इंडिया-सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई है। इस फेज का फोकस, भारत में सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट्स और मटीरियल्स के प्रोडक्शन पर है। अब हमारा प्रयास, एक फुल स्टैक भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने का है। ताकि हम डोमेस्टिक और ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी पार्टनरशिप कर सकें।

साथियों,

भारत आज industry led research and training centres को प्रोत्साहित कर रहा है। ताकि technology development भी हो और एक future ready skilled workforce भी तैयार हो। बहुत जल्द ही, देश में 85 हजार से अधिक डिजाइन प्रोफेशनल्स तैयार करने के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाएगा। साथ ही, पूरे इकोसिस्टम की जरूरतों को देखते हुए प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की जा रही है। सेमीकंडक्टर डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए चिप्स टू स्टार्टअप भी कार्यक्रम चल रहा है। आज देश की करीब 400 यूनिवर्सिटीज और स्टार्टअप्स को, आधुनिक डिजाइन टूल्स तक access दी गई है। इससे फिफ्टी फाइव से अधिक चिप्स का डिजाइन और निर्माण किया जा चुका है।

साथियों,

इंडस्ट्री एस्टीमेट्स के अनुसार, आज भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट करीब फिफ्टी बिलियन डॉलर, यानी करीब-करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपए का है। ये इस दशक के अंत तक सौ बिलियन डॉलर यानी नौ लाख करोड़ रुपए को पार कर सकता है। ये दिखाता है कि भारत में इस सेक्टर में कितनी ज्यादा संभावनाएं हैं। हमारा टारगेट अपनी ज़रूरतों की अधिक से अधिक चिप्स, भारत में ही बनाने का है। भारत के इस संकल्प को लेकर दुनियाभर के निवेशकों में जो उत्साह है, वो हमारे लिए बहुत बड़ी पूंजी है।

साथियों,

भारत एक सशक्त सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तो बना ही रहा है, साथ ही, रॉ मटीरियल की रिज़ीलियन्ट सप्लाई चेन के लिए भी बड़े प्रयास कर रहा है। पैक्स सिलिका में भारत का शामिल होना इसी प्रयास का ही एक हिस्सा है। दुनियाभर में जो हमारे पार्टनर्स हैं, उनके साथ मिलकर भारत में हम एक सुरक्षित सप्लाई चेन सुनिश्चित करना चाहते हैं।

साथियों,

क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता के लिए, भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन भी शुरु किया है। इसके तहत, क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग और प्रोडक्शन पर बल दिया जा रहा है। मिनरल्स की री-साइकलिंग के लिए भी 1500 करोड़ रुपए की स्कीम शुरु की गई है। इस वर्ष के बजट में, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरलम् जैसे कोस्टल स्टेट्स को मिलाकर रेयर अर्थ कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की गई है। ये कॉरिडोर,एक ऐसा Integrated नेटवर्क होगा, जो माइनिंग, रिफाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग की एक सशक्त चेन बनाएगा। हमारा प्रयास है कि देश में क्रिटिकल मिनरल्स का एक राष्ट्रीय भंडार हो। अच्छा होता कि, ये काम 30-40 वर्ष पहले शुरु होता। लेकिन अब भारत इसके लिए मिशन मोड पर काम कर रहा है।

साथियों,

भारत का मानना है, 21वीं सदी का ये कालखंड, सिर्फ economic competition का समय नहीं है। ये फ्यूचर के tech landscape को शेप करने का समय है। इसलिए, मैं इस दशक को, इस डैकेड को, भारत का टैकेड कहता हूं। इस दशक में भारत, टेक्नॉलॉजी से जुड़े जो initiatives ले रहा है, वो आने वाले दशकों में भारत की लीडरशिप को सशक्त करेंगे। आप सभी, हाल में हुई AI impact summit की सफलता से परिचित हैं। अगर AI adoption के मामले में देखें, तो भारत दुनिया में सबसे आगे है। हम भारतीय, टेक को एक्सप्लोर करते हैं। डिजिटल इंडिया की सफलता, फिनटेक में हो रहा शानदार काम, ये technology पर भारतीयों के भरोसे को ही हम देख पाते हैं, उसे दिखाता है। और भारत का जो AI इकोसिस्टम है, उसको हमारे सेमीकंडक्टर सेक्टर के उभार से बहुत मदद मिलेगी।

साथियों,

21वीं सदी का भारत केवल बदलाव का साक्षी नहीं, बल्कि बदलाव का नेतृत्व करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।हमारी नीतियां और हमारे निर्णय, आने वाले दशकों की टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टोरिटी की मजबूत नींव रख रहे हैं। इसलिए आज भारत हर क्रिटिकल टेक्नॉलॉजी पर अभूतपूर्व निवेश कर रहा है, रिफॉर्म्स कर रहा है। हमने space sector को private players के लिए खोला है, IN-SPACe जैसी संस्थाएं बनाई गईं हैं। इसका परिणाम आज दिख रहा है। स्पेस से जुड़े हमारे स्टार्ट अप्स बहुत ही शानदार काम कर रहे हैं। इसी तरह, हाल में ही हमने Nuclear sector में SHANTI Bill जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। ये रीन्युएबल एनर्जी मिक्स में, न्यूक्लियर एनर्जी के हिस्से को बहुत अधिक बढ़ाने जा रहा है। ये हमारे AI फ्यूचर के लिए भी बहुत ज़रूरी है।

साथियों,

भारत क्वांटम कंप्यूटिंग को भी एक स्ट्रटीजिक एसेट मानकर, मिशन मोड पर काम कर रहा है। ये भारत के डिजिटल फ्यूचर को सशक्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। यानी भारत, आज टेक्नॉलॉजी के विकास और टेक्नॉलॉजी के यूज, दोनों ही मामलों में बहुत तेज़ी से काम कर रहा है। ये पूरी दुनिया के इन्वेस्टर्स के लिए बहुत बड़ा अवसर है। हम Ease of Doing Business, Ease of Manufacturing, Ease in Logistics, इस पर भी निरंतर काम कर रहे हैं।

साथियों,

मुझे विश्वास है, केन्स के इस प्लांट से निकलने वाले प्रोडक्ट factory of the world के रूप में भारत के सफर को और मज़बूती देंगे। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत बहुत धन्यवाद।