देश के डाकघरों को अब पेमेंट बैंकों के रूप में जाना जाएगा, इससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को लागू करने में मदद मिलेगी
केवल शिक्षा का प्रसार काफी नहीं है, गुणवत्ता के ऊपर फोकस किया जाना चाहिएः पीएम
अंतरराज्यीय राज्य परिषद सभा में पीएम ने कहा कि राजनीति को एक तरफ करके राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाए

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अंतर-राज्‍य परिषद की आज की बैठक में विचार-विमर्श किए गए विभिन्‍न कार्यसूची विषयों पर व्‍यक्‍त विचारों एवं सुझावों के लिए सभी मुख्‍यमंत्रियों तथा उपराज्‍यपालों को धन्‍यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने पंछी आयोग की अनुशंसाओं पर बोलते हुए कहा कि आज के विचार-विमर्श एक अच्‍छी शुरुआत के प्रतीक हैं। उन्‍होंने कहा कि इन विषयों पर विचार-विमर्श अभी जारी रहेंगे और जैसे ही अनुशंसाओं पर सर्वसहमति बनेगी, क्रियान्‍वयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के एक माध्‍यम के रूप में आधार की लगभग पूर्ण स्‍वीकार्यता पर प्रसन्‍नता जताई। उन्‍होंने कहा कि आधार के परिणामस्‍वरूप देश के खजाने में उल्‍लेखनीय बचत हुई है। उन्‍होंने केंद्र सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों से अर्जित हुई बचतों की मात्रा को लेकर राज्‍यों से आंकड़े एकत्र करने को कहा। उन्‍होंने कहा कि अब सभी डाक घरों को पेमेंट बैंकों के रूप में मान्‍यता दे दी गई है और यह प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण को क्रियान्वित करने में काफी मददगार साबित होगा।

प्रधानमंत्री ने शिक्षा को लेकर कहा कि सिर्फ शिक्षा का विस्‍तार ही पर्याप्‍त नहीं है, बल्कि फोकस गुणवत्‍ता पर होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा में गुणवत्‍ता की कमी प्रौद्यागिकी के जरिये पूरी की जा सकती है।

कानून और व्‍यवस्‍था पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज दुनिया भर में जो कुछ हो रहा है, भारत की केंद्र और राज्‍य सरकारें उसकी अनदेखी नहीं कर सकतीं। इस मुद्दे पर उन्‍होंने सभी संबंधित लोगों से राजनीति को दरकिनार रखने और राष्‍ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का आग्रह किया। उन्‍होंने विगत में एक तीन दिवसीय सम्‍मेलन के दौरान राज्‍य पुलिस महानिदेशकों के साथ अपनी मुलाकात का स्‍मरण किया और सभी मुख्‍यमंत्रियों से उन विचार-विमर्शों को क्रियान्वित करने को कहा जिन पर सम्‍मेलन के दौरान चर्चा की गई थी। उन्‍होंने पुलिस बलों की एक प्रकट उपस्थिति बनाए रखने पर जोर दिया और अपराध को कम करने में एक अच्‍छे सीसीटीवी नेटवर्क के महत्‍व को रेखांकित किया। उन्‍होंने कहा कि निजी रूप से स्‍थापित सीसीटीवी भी इस मामले में बेहद उपयो‍गी हैं। उन्‍होंने गैर कानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में अंतर-राज्‍य समन्‍वय के महत्‍व को भी रेखांकित किया।

निष्‍कर्ष के रूप में, प्रधानमंत्री ने कहा कि मुख्‍यमंत्रियों और उपराज्‍यपालों द्वारा दिए गए सभी सुझावों की सावधानीपूर्वक जांच की जाएगी।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।