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प्रधानमंत्री मोदी आयरलैंड का ऐतिहासिक दौरा समाप्त कर न्यूयॉर्क शहर पहुंचे
प्रधानमंत्री मोदी ने वित्तीय क्षेत्र के शीर्ष अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ गोलमेज बैठक में भाग लिया
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया’ के अपने विज़न का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया, प्रौद्योगिकी और संचार पर आयोजित गोलमेज बैठक में भाग लिया
प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूयॉर्क में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की
श्री मोदी ने सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री श्री राल्फ गोंजाल्विस के साथ वार्ता की
प्रधानमंत्री मोदी ने गुयाना के राष्ट्रपति डेविड आर्थर ग्रेंजर से मुलाकात की
प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूयॉर्क में एक विशेष समारोह में फॉर्च्यून 500 के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से मुलाकात की, ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दिया

24 सितंबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे की शुरुआत हुई। आयरलैंड की अपनी ऐतिहासिक और यादगार यात्रा समाप्त कर श्री नरेन्द्र मोदी न्यूयार्क के जॉन एफ कैनेडी हवाई अड्डे पहुंचे। इसी के साथ उनकी दो देशों की यात्रा के दूसरे चरण की शुरुआत हुई।

न्यूयॉर्क में हुई पहली बैठक व्यापार एवं व्यवसाय पर केन्द्रित रही। प्रधानमंत्री मोदी ने वित्तीय क्षेत्र के शीर्ष अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ एक गोलमेज बैठक में भाग लिया। बैठक में हुई सफल बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने ‘स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया’ के अपने विज़न की रूपरेखा भी बताई। श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में व्यवसाय के माहौल को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों का उल्लेख किया जिनसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने और निवेशकों का भरोसा जीतने में मदद मिली है।

Roundtable with Financial Sector CEOs was a fruitful exchange of views on economic issues. Urged CEOs to invest in India...

Posted by Narendra Modi on Thursday, September 24, 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया, प्रौद्योगिकी और संचार पर आयोजित दूसरे गोलमेज बैठक में मनोरंजन और मीडिया उद्योग के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री ने वर्तमान युग में तकनीक की महत्ता पर विशेष बल दिया। सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारी डिजिटल इंडिया पहल के माध्यम से भारत में हो रहे डिजिटल बदलावों के बारे में जानकर काफ़ी उत्साहित थे। मीडिया क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सरकार रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बौद्धिक संपदा अधिकार की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के माध्यम से 600,000 गांवों को जोड़ने के सरकार के लक्ष्य के बारे में भी बात की।

प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूयॉर्क शहर में विभिन्न नेताओं के साथ व्यापक वार्ता की। उन्होंने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भूमि सीमा समझौते के कार्यान्वयन की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की। दोनों के बीच हुई वार्ता में कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, सतत विकास लक्ष्यों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वैश्विक शासन के अन्य संस्थानों में सुधार लाने पर जोर दिया गया।

श्री मोदी ने सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री श्री राल्फ गोंजाल्विस के साथ भी बैठक की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में सेंट विन्सेंट और ग्रेनेडाइंस द्वारा दिए गए समर्थन के लिए डॉ गोंजाल्विस का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने गुयाना के राष्ट्रपति डेविड आर्थर ग्रेंजर से भी मुलाकात की। राष्ट्रपति ग्रेंजर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्व-लिखित मोनोग्राफ की दो प्रतियां उपहारस्वरूप दी। राष्ट्रपति ने गुयाना में आईटी क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए भारत के सहयोग की सराहना की।

A great meeting with PM of Saint Vincent and the Grenadines, Mr. Ralph Gonsalves.

Posted by Narendra Modi on Thursday, September 24, 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों के प्रमुखों से भी मुलाकात की। इसके बाद श्री मोदी ने वर्किंग डिनर में भाग लिया जहाँ फॉर्च्यून-500 के प्रमुख सीईओ मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के 42 अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री ने आशानुरूप, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इस बैठक में भारत में निवेश के अवसरों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’, और ‘स्मार्ट सिटी’ आदि पहल पर विशेष बल दिया।

My interaction with Fortune 500 CEOs was on investment opportunities in India & why they must come & 'Make in India.'

Posted by Narendra Modi on Thursday, September 24, 2015
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प्रधानमंत्री संयुक्त राज्य अमेरिका से 157 कलाकृतियां एवं पुरावशेष वापस लायेंगे
September 25, 2021
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इन कलाकृतियों में हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म से संबंधित सांस्कृतिक पुरावशेष और मूर्तियां शामिल हैं
अधिकांश वस्तुएं 11वीं सदी से लेकर 14वीं सदी के काल के साथ-साथ ईसा पूर्व काल के ऐतिहासिक पुरावशेषों से संबंधित हैं
यह कदम दुनिया भर से हमारी प्राचीन वस्तुओं और कलाकृतियों को वापस लाने की दिशा में मोदी सरकार के निरंतर प्रयासों का प्रतीक है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा 157 कलाकृति एवं पुरावशेष सौंपे गए। प्रधानमंत्री ने संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका द्वारा इन पुरावशेषों को भारत को वापस किए जाने के कदम की पुरजोर सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडन ने सांस्कृतिक वस्तुओं की चोरी, अवैध व्यापार और तस्करी से निपटने के प्रयासों को और अधिक मजबूत करने के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई।

इन 157 कलाकृतियों की सूची में 10वीं सदी की बलुआ पत्थर से बनी रेवंत की डेढ़ मीटर लम्बी नक्काशीदार पट्टिका से लेकर 12वीं सदी की कांसे की 8.5 सेंटीमीटर उंची नटराज की उत्कृष्ट मूर्ति जैसी वस्तुओं का एक विविध सेट शामिल है। अधिकांश वस्तुएं 11वीं सदी से लेकर 14वीं सदी के काल की हैं। इसके साथ-साथ इनमें 2000 ईसा पूर्व की तांबा निर्मित मानववंशीय वस्तु या दूसरी सदी के टेराकोटा निर्मित फूलदान जैसे ऐतिहासिक पुरावशेष भी शामिल हैं। कोई 45 पुरावशेष ईसा पूर्व काल के हैं।

इनमें से आधी कलाकृतियां (71) जहां सांस्कृतिक हैं, वहीं बाकी आधी कलाकृतियों में हिंदू धर्म (60), बौद्ध धर्म (16) और जैन धर्म (9) से जुड़ी मूर्तियां शामिल हैं।

इन कलाकृतियों की निर्माण सामग्री में धातु, पत्थर और टेराकोटा शामिल हैं। कांस्य संग्रह में मुख्य रूप से लक्ष्मी नारायण, बुद्ध, विष्णु, शिव पार्वती और 24 जैन तीर्थंकरों की प्रसिद्ध मुद्राओं की अलंकृत मूर्तियाँ हैं तथा अन्य अनाम देवताओं और दिव्य आकृतियों के अलावा कंकलमूर्ति, ब्राह्मी और नंदीकेश हैं, जिनके बारे में कम लोग जानते हैं।

रूपांकनों में हिंदू धर्म से सम्बंधित धार्मिक मूर्तियां (तीन सिर वाले ब्रह्मा, रथ चलाते हुए सूर्य, विष्णु और उनकी पत्नी, दक्षिणामूर्ति के रूप में शिव, नृत्य करते हुए गणेश आदि), बौद्ध धर्म से सम्बन्धित (खड़ी मुद्रा में बुद्ध, बोधिसत्व मजूश्री, तारा) और जैन धर्म से सम्बन्धित (जैन तीर्थंकर, पद्मासन तीर्थंकर, जैन चौबीसी) के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष रूपांकनों (समभंग में आकृतिहीन युगल, चौरी वाहक, ढोल बजाती महिला आदि) शामिल हैं।

कुल 56 टेराकोटा टुकड़ों में (फूलदान दूसरी सदी, हिरण की जोड़ी 12वीं सदी, महिला की आवक्ष मूर्ति 14वीं सदी) और 18वीं सदी की तलवार है, जिसके फ़ारसी में लिखे आलेख में गुरु हरगोविंद सिंह का उल्लेख है।

यह मोदी सरकार द्वारा दुनिया भर से हमारे पुरावशेषों और कलाकृतियों को वापस लाने के प्रयासों का प्रतिफल है।