इस अस्पताल में योग, आयुर्वेद और एलोपैथी के तीनों क्षेत्रों को मिला दिया गया है, जो एक सराहनीय पहल है: प्रधानमंत्री मोदी 
योग रोग मुक्ति और भोग मुक्ति का एक साधन है: पीएम मोदी 
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और क्षेत्र में नवीनता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है: प्रधानमंत्री 
हमारी राष्ट्रवाद की भावना से हम फादर टॉम और फादर प्रेम को वतन वापस लाने में सफल हुए: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने आज गुजरात के अहमदाबाद में श्री जोगी स्वामी एसजीवीपी अस्पताल का उद्घाटन किया। एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इस अस्पताल में योग, आयुर्वेद और एलोपैथी, तीनों क्षेत्रों को मिला दिया गया है, जो एक सराहनीय पहल है।"

 

उन्होंने कहा कि योग ‘रोग-मुक्ति’ और ‘भोग-मुक्ति’ का एक साधन है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी गरीबों को काफी प्रभावित करती है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में सुधार और क्षेत्र में नवीनीकरण को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है। हम स्वास्थ्य सुविधाओं को किफायती बना रहे हैं ताकि सभी को इसका लाभ मिल सके।

 

उन्होंने आगे कहा, “जब हम दरिद्र नारायण की सेवा की बात करते हैं, तो जोगी जी महाराज कहेंगे, हमें इसके साथ-साथ दर्दी नारायण की सेवा करनी चाहिए। अस्वस्थ लोगों की सेवा करना मानवता की बड़ी सेवा है... मैं तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गया था कि आध्यात्मिकता से जुड़े एक व्यक्ति ने राष्ट्रवादी शक्तियों को सत्ता से दूर करने का फरमान जारी कर दिया। यह राष्ट्र भक्ति है जो सभी बाधाओं से परे है और यह भारत और विश्व के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले हर भारतीय की सहायता करने के लिए हमें मार्गदर्शन देता है।”

 

प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वह मानवतावादी मूल्यों को ध्यान में रखते हुए ज़रूरतमंद लोगों की सेवा कर रही हैं।

 

 

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प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प, आत्मसंयम और बुद्धिमत्ता के गुणों पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 02, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका तात्‍पर्य है दृढ़ संकल्प और आत्म-संयम ही वह शक्तियां हैं जो कठिनतम मार्गों को भी सुगम बना देती हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज हमारे युवा इसी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

"दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः।

अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥"

जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भांति सोच-समझकर दृढ़ निश्‍चय के साथ आरंभ करता है और बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, जो समय का सदुपयोग करता है तथा अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। ऐसा व्‍यक्ति ही वास्‍तव में बुद्धिमान होता है।