प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पेट्रोपोल एकीकृत चेक पोस्ट का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कोलकाता से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भाग लिया।
पेट्रोपोल-बेनापोल भारत-बांग्लादेश व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण सीमा है। भारत-बांग्लादेश का 50 प्रतिशत से भी ज्यादा व्यापार पेट्रोपाल के जरिए होता है। 15000 हजार करोड़ रूपये से ही ज्यादा का कारोबार पेट्रोपोल एकीकृत चेक पोस्ट के रास्ते होता है, सभी अन्य भारतीय बन्दरगाहों तथा सीमा शुल्क स्टेशनों से ज्यादा है। प्रत्येक वर्ष अनुमानित 15 लाख व्यक्ति एवं 15000 ट्रक इस पेट्रोपोल बेनापोल चेक पोस्ट से होकर गुजरते हैं।
पेट्रोपोल एकीकृत चेक पोस्ट से सुरक्षा, अप्रवास, सीमा शुल्क, संगरोध जैसे कार्यों के प्रभावी एवं दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए यहां पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी जबकि लोगों, माल एवं परिवहन के सीमा से सुचारू रूप से आना-जाना भी सुविधाजनक हो जाएगा।
पेट्रोपोल एकीकृत चेक पोस्ट अगरतला (भारत) – अखौरा (बांग्लादेश) सीमा पर अगरतला एकीकृत चेक पोस्ट के बाद भारत बांग्लादेश सीमा पर यह दूसरी एकीकृत चेक पोस्ट होगी। यह दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा बंदरगाह होगा।
पेट्रोपोल एकीकृत चेक पोस्ट स्थापित होने के साथ ही इसकी क्षमता दोगुनी होने की संभावना है और स्थानीय व्यावसायिक समुदाय को समय एवं लागत में कटौती के चलते भारी फायदा पहुंचेगा। पेट्रोपोल एकीकृत चेक पोस्ट के निर्माण से भारत और बांग्लादेश के बीच आर्थिक तालमेल एवं सम्बद्धता काफी मजबूत हो जाएगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 19 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सायं 5 बजे आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) के अंतर्गत लगभग 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे।
यह राशि वितरण पीएम-वीबीआरवाई के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पीएम-वीबीआरवाई भारत सरकार की प्रमुख रोजगार-संबंधी प्रोत्साहन योजना है, जिसका उद्देश्य रोजगार सृजन में तेजी लाना, रोजगार को औपचारिक बनाना, रोजगार क्षमता बढ़ाना और सभी सेक्टरों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है। इस योजना के माध्यम से देश भर में पहले ही 15 लाख रोजगार के अवसर सृजित किए जा चुके हैं।
पीएम-वीबीआरवाई योजना का उद्देश्य श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के तहत, पहली बार रोजगार पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे उन्हें कार्यबल में शामिल होने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है। अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को प्रति अतिरिक्त कर्मचारी प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलता है, जिससे सतत रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है। आर्थिक विकास को गति देने में विनिर्माण के कार्यनीतिक महत्व को देखते हुए, विनिर्माण क्षेत्र के नियोक्ता चार वर्षों की अवधि के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र हैं, जबकि अन्य सभी सेक्टरों के नियोक्ता दो वर्षों के लिए प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं।
यह योजना रोजगार-आधारित विकास के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि भारत की आर्थिक प्रगति के लाभ उसके युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण औपचारिक रोजगार के अवसरों में परिवर्तित हों।
प्रधानमंत्री- विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी हुई। 99,446 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने के लिए प्रोत्साहन देना है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार कार्यबल में प्रवेश करेंगे। कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की सहायता करने के जरिये, यह योजना औपचारिक रोजगार के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करने और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


