सरकार डिजिटल पहुंच के माध्यम से जन सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध: प्रधानमंत्री मोदी
मोबाइल पावर या एम-पावर से हम अपने नागरिकों को सशक्त बना रहे हैं: पीएम मोदी
सब्सिडी को इसके लक्षित लोगों तक पहुंचाते हुए जैम (जन-धन, आधार और मोबाइल) ट्रिनिटी से 10 बिलियन डॉलर बचाने में मदद मिली है: प्रधानमंत्री
भारत के नागरिक तेजी से नकद रहित लेन-देन की प्रक्रिया अपना रहे हैं; भीम ऐप नकदी के कम इस्तेमाल और भ्रष्टाचार मुक्त समाज की दिशा में आंदोलन के रूप में काम कर रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
लाल फीताशाही के कारण अरबों डॉलर की परियोजनाएं जो रूकी हुई थी वे उनमें दोबारा तेजी आई: पीएम मोदी
साइबर स्पेस नवाचार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र, हमारे स्टार्ट-अप रोजमर्रा की समस्याओं के जल्द समाधान और जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए काम कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
राष्ट्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका डिजिटल स्पेस आतंकवाद और कट्टरता के लिए इस्तेमाल ना हो: प्रधानमंत्री मोदी

रीलंका के प्रधानमंत्री, श्रीमान रानिल विक्रमसिंघे,

भारत और विदेशों के मंत्री,

आईटीयू के महासचिव,

अन्य विशिष्ठगण,

120 से भी अधिक देशों के प्रतिभागी,

विद्य़ार्थी,

भाईयों और बहनों,

मैं आपका ग्लोबल कांफ्रेंस ऑन साइबर स्पेस के लिए नई दिल्ली में स्वागत करता हूं। मैं, विश्व भर के दूरदराज क्षेत्रों से इस कार्यक्रम में इंटरनेट के माध्यम से शामिल होने वाले सभी लोगों का भी स्वागत करता हूं।

मित्रों,

हम सभी यह जानते हैं कि पिछले कुछ दशकों में साइबरस्पेस ने किस प्रकार विश्व का रूप परिवर्तित कर दिया है। यहां बैठे लोगों में से वरिष्ठ पीढ़ी के लोगों को 70 और 80 के दशकों में बड़े-बड़े कंप्यूटर सिस्टमों के मेनफ्रेम याद होंगे। तब से काफी कुछ बदल गया है। 90 के दशक में ईमेल और पर्सनल कंप्यूटर ने एक नई क्रांति को जन्म दे दिया है। यह सोशल मीडिया के आगमन के कारण हुआ था और मोबाइल फोन के आगमन डाटा स्टोरेज और संचार का एक महत्वपूर्ण साधन है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे शब्द आजकल आम बन गए हैं। यह उस निरंतर बदलाव के सूचक शब्द हैं जो शायद बहुत अधिक तेज गति से हो रहे हैं।

डिजिटल क्षेत्र में इन तीव्र विकासों ने भारत में भी बहुत बदलाव किया है और भारत की सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रतिभाओं को विश्व भर में पहचान मिली है। भारत की सूचना प्रौद्योगिकी की कंपनियों नेभी विश्व में अपना परचम लहराया है।

आज, डिजिटल प्रौद्योगिकी एक बहुत बड़े साधन के रूप में उभरी है। इसने कुशल सेवा सुपुर्दगी और गवर्नेंस के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया है। यह शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्रों में भी पहुंच को सुगम बनाने के साथ-साथ उसमें सुधार कर रही हैऔर यह व्यापार और अर्थव्यवस्था के भविष्य को भी बदलने में सहायता कर रही है। इन सभी माध्यमों से, यह समाज के वंचित समूहों को अधिक अवसर प्रदान कर रही है।व्यष्टि स्तर पर, इसने एक ऐसे विश्व के प्रादुर्भाव में योगदान दिया है जहां भारत जैसे विकासशील देशभी विकसित देशों के साथ डटकर प्रतिस्पर्धा करते हैं।

मित्रों,

प्रौद्योगिकी विभिन्न अवरोधों को तोड़ती है। हमारा यह मानना है कि यह वसुधैव कुटुंबकम अर्थात विश्व एक परिवार है, के भारतीय दर्शन को सही सिद्ध करती है। यह अभिव्यक्ति हमारी प्राचीन समावेशी परंपराओं को भी प्रदर्शित करती है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से, हमइस अभिव्यक्ति का लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुसार अर्थ देने में सक्षम हो गए हैं। भारत में हम लोग प्रौद्योगिकी के मानवीय पक्ष को प्राथमिकता देते हैं और हम ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ को सुधारने के लिए प्रयोग में ला रहे हैं।‘डिजिटल इंडिया’ विश्व का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी उन्मुख रूपपरिवर्तनकारी कार्यक्रम है,यह हमारे देश के नागरिकों को डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। हम मोबाइल पावर या एम-पावर का उपयोग हमारे देश के नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए कर रहे हैं।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप में से अधिकतर लोग आधार के बारे में जानते होंगे। आधार, किसी व्यक्ति की यूनिक बायोमेट्रिक पहचान है। हमने इस यूनिक पहचान को हमारे देश के लोगों को बड़ी-बड़ी लाइनों और भारी भरकम प्रक्रियाओं से मुक्त करने के लिए उपयोग किया है। तीन कारकों ने -  पहला, हमारे जन-धन बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय समावेशन, दूसरा, आधार प्लेटफार्म और तीसरा मोबाइल फोन इन तीनों ने भ्रष्टाचार को कम करने में बहुत अधिक मदद की है। हम इस सेवा को JAM  या J.A.M trinity कहते हैं। सब्सिडियों के बेहतर लक्ष्य के माध्यम से,JAM  या J.A.M trinityने अभी तक लगभग 10 मिलियन डॉलर की लीकेज को रोका है।

मैं, आपके समक्ष कुछ उदाहरण पेश करता हूं कि कैसे डिजिटल प्रौद्योगिकी ईज़ ऑफ़ लिविंग के लिए बहुत अधिक सुविधाजनक बन रही है। आज एक किसान भी मृदा जांच परिणामों, विशेषज्ञ परामर्श और अपने उत्पाद की अच्छी कीमत की जानकारी आदि जैसी विभिन्न सुविधाओं का लाभ एक सिंगल क्लिक करके प्राप्त कर सकता है। इसलिए डिजिटल प्रौद्योगिकीकृषि उत्पादों एवं किसानों की बढ़ती आय में योगदान दे रही है।

एक छोटा व्यापारी भी सरकार के ई- बाजार में पंजीकरण कर सकता है और सरकार को वस्तुओं की आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बोली में भाग ले सकता है और जैसे ही वह अपने व्यापार को बढ़ाता है, वैसे ही वह सरकार के लिए खरीद की लागत को भी घटाने में योगदान देता है। इससे कार्यकुशलता और सार्वजनिक धन का मूल्य बढ़ता है।

पेंशनभोगियों को भी अब अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए बैंक अधिकारी के समक्ष खुद को प्रस्तुत नहीं करना पड़ता। आज पेंशनभोगी भी न्यूनतम शारीरिक प्रयास से अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए आधार बायोमैट्रिक मंच का लाभ उठा सकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी कार्यबल में महिलाओं की पर्याप्त संख्या है। सूचना प्रौद्योगिकी ने महिलाओं के नेतृत्व में अनेक नए उद्यमों को सुविधा प्रदान की है। इस तरीके से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने लैंगिक सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है।

भारत के नागरिक बहुत तेजी से नकदरहित लेन-देन की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए भारत इंटरफ़ेस फॉर मनी या भीम ऐप बनाई है। यह भीम ऐप कम नकद और भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण करने की दिशा में बहुत मदद कर रही है।

उपर्युक्‍त उदाहरणों के माध्यम से पता चलता है कि प्रौद्योगिकी की ताकत से गवर्नेंस में सुधार हो रहा है।

मित्रों,

हम जनभागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए डिजिटल क्षेत्र का प्रयोग कर रहे हैं। जब हमने मई 2014 में सरकार का कार्यभार संभाला था तब, अधिकांश लोग विशेष रुप से युवा लोगों ने अपने विचार साझा करने के लिए और देश के लिए काम करने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की थी। यह हमारा पूर्ण विश्वास है कि ऐसे लाखों भारतीय हैं जिनके रूप परिवर्तनकारी एवं नवाचारी विचार भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सफल होंगे।

इसलिए, हमने नागरिक सहभागिता पोर्टलMy Govशुरु किया। यह प्लेटफार्म महत्वपूर्ण विषयों पर देश के नागरिकों को अपने विचार और मत साझा करनेका अवसर प्रदान करता है।हमने अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस प्लेटफार्म से मूल्यवान सुझावों को प्राप्त किए हैं। आज सरकार की विभिन्न परियोजनाओं और पहलों के लिए LOGO और Emblem के डिजाइन क्राउड सोर्सिंग और My Gov पर आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं का परिणाम हैं।वास्तव में, प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक ऐप भी My Gov पर शुरू की गई प्रतियोगिता का ही परिणाम है। इस पर युवाओं से बहुत महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाएं आती हैं।My Gov प्लेटफार्म इस बात का प्रमुख उदाहरण है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी लोकतंत्र को मजबूत कर रही है।

मैं, आपको एक और उदाहरण देता हूं।जब मैंने अपना कार्यालय संभाला था। तब मैंने यह महसूस किया कि सरकार की ऐसी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाएं और पहलें हैं जो अनावश्यक रूप से सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली और निर्णय लेने के अभाव में पीछे रह जाती हैं। इसलिए, हमनेसाइबर स्पेस आधारित प्लेटफार्म प्रगति अर्थात् समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए अति सक्रिय गवर्नेंस को लॉन्च किया।

प्रत्येक माह के अंतिम बुधवार को, मैं प्रगति सत्र के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करता हूं। प्रौद्योगिकी सुस्तीतोड़ती है। हम अपने कार्यालय में बैठे-बैठे साईबर संसार की सहायता से गवर्नेंस संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और समाधान करते हैं। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रगति सत्रों का परिणाम देश के व्यापक हित में, सहमति के माध्यम से तीव्र निर्णय हुए हैं। प्रगति ने लालफीताशाही में अटके हुए करोड़ों डॉलरों की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तीव्र गति प्रदान कर दी है।

मैंने भीअक्सर नरेंद्र मोदी मोबाइल एप्प के माध्यम से स्वयं कुछ करने का प्रयास किया है। यह ऐप देश के नागरिकों के साथ मेरे संपर्क को मजबूत करती है। इस ऐप के माध्यम से प्राप्त होने वाले सुझाव बहुत उपयोगी होते हैं।

आज हमने उमंग मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया है । यह ऐप अनेक नागरिक केंद्रित सुविधाएं प्रदान करेगी और अंत में यह सेवाएं केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों की जरूरतों को पूरा करेगी। यह एकीकृत दृष्टिकोण इन विभागों में कार्य प्रणाली पर ‘समकक्ष कार्यप्रदर्शन दबाव’ की स्वचालित लेयर भी बनाएगा।

मित्रों,

हमें वैश्विक समुदाय के साथ अपने अनुभवों और सफलता की कहानियों को साझा करते हुए प्रसन्नता होगी। एक ओर तो भारत डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्तरीय मॉडल और नवोन्मेषी समाधानों को खोजने के लिए उत्सुक है। हम साइबर स्पेस को विभिन्न योग्यजनों के लिए भी उपयोगी बनाना चाहते हैं। हाल ही में, 36 घंटे की हैक्थॉन के दौरान, कॉलेज के विद्यार्थियों ने ऐसी चिरकालिक समस्याओं के समाधान बताए, जिन्हें मंत्रालयों द्वारा पेश किया गया था। हम वैश्विक अनुभवों और सुव्यवस्थाओं से सीखने की इच्छा रखते हैं। हमारा यह मानना है कि विकास तभी हो पाएगा, जब हम सभी मिलकर एक साथ विकास करेंगे।

साइबर स्पेस नवाचार के लिए मुख्य क्षेत्र रहता है। आज हमारे स्टार्ट-अप रोजमर्रा की सामान्य समस्याओं के समाधान प्रदान करने और लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि वैश्विक निवेशक समुदाय भारत के स्टार्ट अप समूह की अपार क्षमताओं की पहचान करेगा। मैं आपको इसमें निवेश करने और भारतीय स्टार्ट-अपों की अभूतपूर्व सफलता की कहानी का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता हूं।

मित्रों,

इंटरनेट की प्रकृति समावेशी है, न कि एकांतिक। यह पहुंच की साम्यता और अवसरों की समानता प्रदान करता है। आज के युग में facebookयूजर, twitter यूजर और इंस्टाग्राम के यूजर विचार-विमर्श को नया रूप दे रहे हैं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म साईबर स्पेस में सभी को सहभागिता का अवसर प्रदान कर रहे हैं। स्टूडियो से विशेषज्ञ जो भी समाचार हमें बताते हैं, उनमें

अब सोशल मीडिया से प्राप्त अनुभव भी शामिल होते हैं।विशेषज्ञता और अनुभव के इस मिश्रण के साथ यह अंतरण साइबर जगत का योगदान है। इंटरनेट युवाओं के लिए उनकी सर्जनात्मकता, क्षमता और सामर्थ्य चाहे वह गंभीर ब्लॉग हो या सुंदर संगीतात्मक प्रस्तुति, चाहे कला हो या रंगमंच... वह सभी क्षेत्रों में उनको अपनी प्रतिभाओं को दिखाने का एक आदर्श मंच बन गया है। यह एक असीमित आकाश है।

मित्रों,

‘संतुलित विकास के लिए सुरक्षित और समावेशी साइबर स्पेस’ कॉन्फ्रेंस का यह विषय भी मानवता के लिए इस महत्वपूर्ण परिसंपत्ति को सुरक्षित करने की महत्‍ता को रेखांकित करता है। वैश्विक समुदाय को साइबर सुरक्षा के मुद्दे को पूर्ण संकल्प के साथ अच्‍छे दृष्टिकोण से देखने की जरुरत है। साइबरस्पेस प्रौद्योगिकी से जुड़े लोगों के लिए सक्षम बनी रहनी चाहिए।

मुक्त एवं सुगम्य इंटरनेट की खोज हमें अक्सर असुरक्षा की ओर भी ले जाती है। वेबसाइट की हैकिंग और विरूपण के समाचार मामूली बात बन गए हैं। ऐसे समाचार यह सुझाव देते हैं कि साइबर हमले महत्वपूर्ण खतरे हैं, विशेष रुप से लोकतांत्रिक विश्व के लिए। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हमारे समाज के सुभेद्य वर्ग साइबर अपराधियों के बुरे जाल का शिकार न बन पाएं। हमें साइबर सुरक्षा से संबंधित चिंताओं के प्रति सजग रहना चाहिए।

साइबर हमलों से निपटने के लिए हमें सुसज्जित एवं कुशल पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की जरुरत है। साइबर योद्धा साइबर हमलों के विरुद्ध सचेत रहेंगे। हैकिंग शब्द ने चाहे आकर्षक रुप ले लिया हो, लेकिन फिर भी इनमें जालीपन की झलक भी मिलती है। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि साइबर सुरक्षा का क्षेत्र युवाओं के लिए एक आकर्षक और व्यवहार्य रोजगार का विकल्प बन जाए।

इसी विषय पर, सभी देशों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि डिजिटल स्पेस आतंकवाद और कट्टरवाद का अड्डा न बन जाए। सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना और समन्वय इस निरंतर बदलते हुए साइबरखतरे से निपटने के लिए जरुरी है।

निश्चित रुप से, हम निजता और मुक्तता के बीच में स्पष्ट संतुलन बना सकते हैं, दूसरी ओर हम राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकते हैं। एक साथ मिलकर, हम एक ओर तो वैश्विक और मुक्त प्रणालियों के बीच अंतर को समाप्त कर सकते हैं और दूसरी ओर हम किसी देश विशिष्ट की कानूनी जरुरतों को भी पूरा कर सकते हैं। 

मित्रों,

उभरती हुई डिजिटल प्रौद्योगिकी हमारे भविष्य की जरूरतों को अभूतपूर्व और अकल्पनीय रूप से प्रभावित कर सकती है। पारदर्शिता, निजता, विश्वास और सुरक्षा के महत्वपूर्ण प्रश्नों को सुलझाया जाना जरूरी है। डिजिटल प्रौद्योगिकी मानवता को सशक्त बनाने में मदद करती है। हमें यह जरूर सुनिश्चित करना होगा कि यह इसी तरह मानवता को सशक्त बनाने का कार्य करती रहे।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनेक क्षेत्र के हितधारकों की प्रतिभागिता, इस मंच को प्राप्त हुई सहमति का प्रमाण है। सभी देशों, उद्योग जगत, शिक्षा जगत और सिविल सोसाइटी सभी कोसहयोगात्मक ढ़ाचे की दिशा में काम करने की जरूरत है। इससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने वाले सुरक्षित साइबर स्पेस का निर्माण हो सकेगा।

मित्रों,

संख्या के मामले में शायद यह सम्मेलन इस प्रकार के कार्यक्रमों में सबसे बड़ा है। मुझे बताया गया कि इस कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और लॉजिस्टिक्स को डिजिटल रुप से संचालित किया गया है। मुझे आशा है कि विश्वभर के प्रतिभागियों को इससे सुचारू और बाधारहित अनुभव प्राप्त हुआ होगा।

मैं आप सभी को उपयोगी एवं लाभकारी विचारों एवं परिणाम प्राप्त करने की बधाई देते हुए अपना वक्तव्य समाप्त करता हूँ। मैं एक बार फिर आप सभी का स्वागत करता हूँ और इस सम्मेलन की सफलता की कामना करता हूँ।

धन्यवाद

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नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!