प्रधानमंत्री मोदी ने रियाद में टीसीइस ऑल वीमेन आईटी एंड आईटीईइस सेंटर का दौरा किया, ई-गवर्नेंस पर जोर दिया
रियाद में टीसीएस केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया
जब महिलाएं विकास यात्रा का एक हिस्सा होती हैं तो विकास यात्रा को नई गति मिल जाती है: प्रधानमंत्री
आज की प्रतियोगी दुनिया में सर्वोत्तम प्रगति के लिए हमें प्राकृतिक एवं मानव संसाधनों की हमारी ताकत को एकजुट करने की जरूरत: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज रियाद में टाटा परामर्श सेवा के महिलाओं के आईटी और आईटीईएस केंद्र का दौरा किया।

प्रधानमंत्री को सभी संचालनों की जानकारी दी गई और उन्‍होंने वहां सभी महिलाकर्मियों के साथ वार्तालाप किया। प्रधानमंत्री का इस अवसर पर उत्‍साहपूर्ण तरीके से स्‍वागत किया गया और उन्‍हें शुभकामनाएं भी दी गईं।

इस अवसर पर, अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि वह उन लोगों से मुलाकात कर रहे हैं जो सऊदी अरब के सम्‍मान की दिशा में काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज की प्रतिस्‍पर्धा की दुनिया में हमें अधिकतम प्रगति के लिए प्राकृतिक और मानवीय दोनों तरीकों से अपनी शक्ति को एकजुट करना होगा। उन्‍होंने कहा कि जब महिला शक्ति विकास यात्रा का एक अंग बन जाती है तो इससे नई गति का संचार होता है। उन्‍होंने कहा कि इस केंद्र में जिस वातावरण का आज वे अनुभव कर रहे हैं वह विश्‍व के लिए सकारात्‍मक शक्ति का अग्रदूत प्रतीत होता है। उन्‍होंने आईटी के क्षेत्र में विशिष्‍ट प्रतिभा रखने वाली सभी महिलाओं को भारत की यात्रा का निमंत्रण दिया और कहा उनकी यात्रा का भारत में भी बेहद सकारात्‍मक असर होगा।

प्रधानमंत्री ने शासन में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया और कहा कि उनके लिए ई-शासन का अर्थ आसान प्रशासन, प्रभावी शासन और आर्थिक शासन है। प्रधानमंत्री ने उन्‍हें ‘नरेन्‍द्र मोदी ऐप’ देखने के लिए आमंत्रित किया और भारत में महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार भी सांझा किए।

प्रधानमंत्री ने केंद्र के संदेश बोर्ड पर ‘वंदे मातरम, मातृ देवो भव:’ लिखा।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।