15वां जी-20 शिखर सम्‍मेलन

Published By : Admin | November 21, 2020 | 22:51 IST
कोविड-19 महामारी दुनिया के सामने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती और मानवता के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ है : प्रधानमंत्री मोदी
समय आ गया है कि मल्टी-स्किलिंग और री-स्किलिंग पर ध्यान केंद्रित कर एक विशाल मानव प्रतिभा पूल बनाया जाए: जी-20 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी
जी-20 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने शासन प्रणालियों में अधिक पारदर्शिता का आह्वान किया जो नागरिकों को साझा चुनौतियों से निपटने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सऊदी अरब द्वारा संचालित 15वें जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया। शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम ने कहा कि कोविड-19 महामारी दुनिया के सामने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती और मानवता के इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ है। उन्होंने जी-20 द्वारा निर्णायक कार्रवाई का आह्वान किया जो अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने, रोजगार और व्यापार सुदृढ़ होने तक सीमित नहीं हो, बल्कि जिसमें धरती माता के संरक्षण पर भी ध्यान हो। पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी मानवता के भविष्य के संरक्षक हैं।

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प्रधानमंत्री ने ज्ञान के सार को आत्मसात करने पर केंद्रित संस्कृत सुभाषित साझा किया
January 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो ज्ञान की विशालता के बीच केवल उसके सार पर ध्यान केंद्रित करने की शाश्वत बुद्धिमत्ता पर जोर देता है।

संस्कृत श्लोक-

अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥

यह सुभाषित इस भाव को व्यक्त करता है कि यद्यपि ज्ञान प्राप्ति के लिए असंख्य शास्त्र और विविध विद्याएँ उपलब्ध हैं, किंतु मानव जीवन समय की सीमाओं और अनेक बाधाओं से बंधा हुआ है। अतः, मनुष्य को उस हंस के समान बनना चाहिए जो दूध और पानी के मिश्रण में से केवल दूध को अलग करने की क्षमता रखता है अर्थात, हमें भी अनंत सूचनाओं के बीच से केवल उनके सार—उस परम सत्य को पहचानना और ग्रहण करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा:

“अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्याः अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च।

यत्सारभूतं तदुपासनीयं हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥”